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यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े
मुद्दत के बाद उसने जो की लुत्फ़ की निगाह जी ख़ुश तो हो गया मगर आँसू निकल पड़ेजिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के अश्के-ग़मयूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े रचयिता - कैफ़ी आज़मी प्रस्तुति - अलबेला खत्री
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May 18 2010 09:30 PM


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