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जिंदगी से दूर कर दिया...!
आदाब,एक ताज़ा ग़ज़ल आप सबकी नज़र कर रहा हूँ... उम्मीद है आप अपनी आरा से ज़रूर नवाजेंगे...==============================बहर:- मुज़ारी मुसम्मन अखरब मख्फूफ़ महज़ूफ़ (2 2 1 2 1 2 1 1 2 2 1 2 1 2
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Jun 14 2010 09:29 AM


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