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ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
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17 Jun 2010
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थोड़ी पचक गई थी तोंद, उसे बढ़ाया

आज हो गया हूँ "विचार शून्य"                                    कार्यालय से आते ही अपनी तोंद पे नजर दौड़ायाआवाज सुनाई दिया, भूख लगी है,भोजन बना नहीं था,
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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धर्म, साहित्य और सत्संग

                                धर्म ग्रंथों को यदि सम्प्रदाय से ऊपर रखकर देखें और उनमे उद्धृत बातों की व्याख्या सकारात्मक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए करें साथ ही साथ
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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अंग्रेजी के शब्द और उच्चारण मैं आज बैठे बैठे सोच रहा था विदेशी भाषा अंग्रेजी, जो आज हमारी मातृभाषा से भी ज्यादा लोकप्रिय और प्रतिष्ठा कि वस्तु बन गई है, उसका उच्चारण हम किस तरह से करते हैं. जिव्हा सही ढंग से उच्चारित नहीं कर पाती उन शब्दों को; मसलन
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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जोश में होश नहीं रहता

जोश में होश नहीं रहता होश में जोश नहीं रहतामानुस तन है, बुद्धि है, विवेक है,गूंगा भी खामोश नहीं रहताकहा गया है,"जल्दी में लद्दी (कीचड)औ धीर में खीरअपने ही लोग, और अपनों केकारण, पहुँचती है/पहुंचाते हैं,मन को पीरमित्रों, मेरा कतई यह उद्देश्य नहीं
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे

अब आया ऊँट पहाड़ के नीचेहमें क्या मालूम था, लोगों केआशीर्वाद मिल रहते थे वे थेसब "छद्म" और थे हम आँख मीचेअब न रहेगा बांस ना रहेगी बांसुरी"घुरुवा" हट जाएगा हम तो लेते हैंविदा इस ब्लॉग की  दुनिया से,मित्रों को देते हुए शुभकामनाएंपल्लवित, पुष्पित इस
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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करतारा, तैनू अब किसी को न लगे प्यारा

लटके झटके वाली पोस्ट इक झलक मे भा जाती हैअब जरूरत क्या है, हो गए हैं हम आज़ाद,बलिदानी शहीदों की जरा भी  याद नहीं आती है गवाह है कल की चली हुई हमारी लेखनी जिसने याद किया था उस शहीद को, नाम है करतारा (करतार सिंह)देखा, श्रद्धा सुमन अर्पण हो न
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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मानसून आने की इंतेजारी है

मानसून आने की  इंतेजारी हैभीषण गरमी का प्रकोप जारी है. जून महीने की तारीख हो गई बारह बारिश के अभी तक प्रवेश न कर पाने की क्या हो सकती है वजह शाम चार बजे का वक्त निहारने  लगा आसमा को  क्षण भर के लिए घने काले
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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गुलाम भारत के सपूतो मे आजादी पाने का जुनून

गुलाम भारत के सपूतो मे आजादी पाने का जुनूनस्वतन्त्र भारत के सपूतों को एशो आराम की जिन्दगी बिताने में ही मिलता है सुकून डॉक्टर आलोक कुमार रस्तोगी जी द्वारा लिखी पुस्तक क्रान्ति नायक पढ़ रहा था. इस पुस्तक में शहीद क्रांतिकारी नायकों के जीवन पर
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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खोटे सिक्के क्यों चलाता है

स्वतन्त्र देश में लागू होता है हम परअभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार चलती है लेखनी हमारी जिसमे होती नही धारआता नहीं है हमें किसी से लेना उधार प्रतिबिम्ब हमारा कहता है हमसे मालूम है तुझे सिर्फ "नकद" में विश्वास करना आता
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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तवा गरम है सेंक लो रोटी

कहावत है तवा गरम है सेंक लो रोटी.  मतलब समय अनुकूल है, परिस्थितियाँ ऐसी निर्मित हो गई हैं कि आप अपना काम बनवा सकते हैं, अपना उल्लू सीधा कर सकते हैं. रोटी कैसी बनती है, कैसी सिकती है, कैसा स्वाद रहता है यह अन्य बातों यथा आटे के प्रकार, रोटी के आकार
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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पोस्ट और मित्रों के आशीर्वाद (टिपण्णी)

"ॐ हं हनुमते नमः " = बात पते की +  ताकीद करने का ढंग एकदम से हथौड़े की मार जैसा न हो + रविवार अवकाश, काश बीता होता छुट्टी जैसे हमारे ये तीनो पोस्ट तीन (३) का पहाड़ा कह रहा है.  पूछेंगे कैसे?  देखिये तीन पोस्ट
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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फैसले ने कुरेदा है लोगों का गम

अदालती कार्रवाई में लग गए पचीस सालइतनी लम्बी अवधि में बिसर गया था लोगों का ख्याल न्यालाय होता है सम्माननीय, कुछ न कहेंगे हमअफ़सोस है इस बात का, फैसले ने कुरेदा है लोगों का गमप्रकरण चाहे "अफजल" का हो चाहे हो इसमें "कसाब"पारित करना होगा कानून ऐसा
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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ए का जिनिस ए = यह क्या चीज है

आनी बानी के बियन्जन अउ ओखर नाव। काला बचांव अउ काला खांव. एखरे ऊपर एक किस्सा के सुरता आगे. एक झन गवैंहा हा हलवाई  के दुकान माँ जाथे अउ कई परकार के चीज माढ़े रथे ओमा ले एक मा इशारा करके पूछथे जी. ए का जिनिस ए कहिके. हलवाई कथे "खाजा" . ओला कहानी
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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ताकीद करने का ढंग एकदम से हथौड़े की मार जैसा न हो

च च च........। स्सारे लोगों को लालसा रहती है,  हमारी पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों की दुआएं मिले, प्रतिक्रिया मिले. चाहे वह वरिष्ठ हो या कनिष्ठ. इस बात को लिखने के लिए हमें भी उत्साहित किया इस पोस्ट ने "तिकड़म से ही मिलती हैं टिप्पणि." बात सौ टके
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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बात पते की

आप कितने धनी हैं  इसे सम्पत्ति के बल  पर ना तौलेअसली धनी तो  वह  है जिसकी आँख से एक बूँद भी आंसू टपकने लगेतो हजारों हाथ उसे पोंछने के लिए तत्पर दिखेंजय जोहार.........
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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रविवार अवकाश, काश बीता होता छुट्टी जैसे

रविवार अवकाश, काश बीता होता छुट्टी जैसे लिख ना पाए पोस्ट एक भी, यह  हो सकता था कैसेफुर्सत पाए, पर फ़ुरसतिया न कहाएबैठ गए अब बन निशाचर,झांके हैं चंद पोस्ट,  ब्लॉगर मित्रों केले दे के ये चार लाईना हमहू लिख पाएलिख़ा गया
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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"ॐ हं हनुमते नमः "

"ॐ हं हनुमते नमः "विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर श्री रामचरित मानस के पंचम सोपान "सुन्दरकाण्ड" के छंद क्रमांक २ की पहली पंक्ति "बन बाग़ उपबन बाटिका, सर कूप बापीं सोहही  "दशानन" की लंका का दृश्य है.  वीर हनुमान ने लंका प्रवेश करते समय पर्वत
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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वीरान धरती एवं पेड़ों की लाशें

(1) सुबह सुबह उठकर दौडाता हूँ नजर, अपने घर की  चार दीवारी के भीतर  सजाये हुए हरे भरे बगीचे की ओरअरे! यहाँ तो मुरझा गये हैं  पेड़, हरी हरी दूब सूखी घास हो गई
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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"आचार्य जी" का प्राकट्य

गीता के महात्म्य से कौन अनभिज्ञ होगा. हमने देखा आज कल ब्लॉग जगत में "आचार्य जी" का प्राकट्य  यत्र तत्र सर्वत्र हो रहा है . स्वलिखित ग्रन्थ में सद्विचार की धारा प्रवाहित कर रहे हैं. आचार्य शब्द का प्रयोग प्रथम अध्याय में ही समरभूमि कुरुक्षेत्र
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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अमृत वाणी

आप सभी को सुप्रभात! आज शीघ्रतातिशीघ्र कार्यालय पहुन्चना  है अतएव  इन शब्दों के  साथ;"संसार के कटु वृक्ष का एक ही फल अमृत के समान है - सज्जन पुरुषों कि संगति"आप सभी के खुशमय दिन कि कामना करते हुए जय जोहार......... 
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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धडाधड महराज चिट्ठा जगत

अभी कुछ सूझ नहीं रहा है, सोचा एक बार फिर ब्लॉग में प्रयुक्त होने वाले शब्दों की ओर चलूँ. ध्यान गया ब्लॉगवाणी  के नीचे लिख़ा "धडाधड महराज चिट्ठा जगत" चलिए देखते हैं इस पर क्या लिखते बनता है;धडाधड महराज चिट्ठा जगतदोस्तों ये ब्लॉग की दुनिया है खोल
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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"धरती पर रहें ज्यादा उछल कूद ठीक नहीं"

बुद्धू बक्सा जिसे कहा जाता है, हम भी कभी कभी चाव से समाचार चेनल, हास्य धारावाहिक दिखाया जाने वाला सब चेनल, गीत संगीत का कार्यक्रम देखते हैं. कल इंडियन आइडल में यह कार्यक्रम चल रहा था. प्रत्येक प्रतिभागी  अपनी प्रतिभा से कार्यक्रम की शोभा बढ़ा
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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क्रोध पर नियंत्रण

क्रोध पर नियंत्रण का बोध हुआ कि नही (जानते सभी हैं, पर ......)आचार्य जी के दर्शन कैसे होंगे, कौन हैं,इस पर शोध हुआ कि नहीं,इन्हें कहा जाय, शान्ति के उपायशीघ्र बताएं. वैसे क्रोध हमें है नहीं सतायहरि ॐ तत्सत!और चूंकि छत्तीसगढ़ी हमारी मात्री बोली हैइसलिएजय
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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आज तारीख है एक जून

आज  तारीख है एक जून दैनिक अखबार "दैनिक भास्कर"का मुखपृष्ठ सजा है बड़े बड़े अक्षरोंमें लिखे शीर्षक से "गर्मी के दिन चार"याने कुछ ही दिनों में प्रवेश करेगा मान सून, आएगी बरखा बहार हे ईश्वर मत पड़ने देना  काली छाया  "सूखे"
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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क्योंकि यहाँ तो सब अपना हाथ है , जगन्नाथ

पहले हम विचलित हुए, निकाले अपने मन के  गुबार, मित्रों ने भी दिया साथ पर अब धीरे धीरे समझ रहे हैं, माया नगरी की माया को रक्त बीज सब बन रहे यहाँ (बेनामी छ्द्म्नामी ब्लोगरों की उत्पत्ति)क्योंकि यहाँ तो सब अपना हाथ है
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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ब्लॉग जगत की लीला है अनुपम अपरम्पार

ब्लॉग जगत की लीला है अनुपम अपरम्पारक्यों हम दांव पेंच में पड़ रहे,बस, अब नहीं पड़ेंगे,लिखते रहेंगे,  उमड़ते घुमड़ते विचारक्योंकि.......शब्द सँवारे बोलिए शब्द के हाथ न पाँवएक शब्द औषधि करे एक शब्द करे घावसुप्रभात व जय जोहार.........
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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साप्ताहिक अवकाश रविवार ब्लॉग जगत के पापा जी अवतरित

साप्ताहिक अवकाश रविवार  ब्लॉग जगत में "  पापा जी " अवतरित हुए हैं  दो चार ब्लॉग में जा बच्चों को डांट पिलाया है वैसे डांट पिलाने के पहले सहलाया है अभी तो सहलाया है, बाद में देखेंगे कहते हुए देखो कैसे मैंने सबको
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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पूछ रहा है मन अपने आप से कुछ सवाल:

१.     क्या मैं (याने जनता) भारत का नागरिक हूँ.२.     मुझे क्या सचमुच अपने वतन से अपने माँ बाप जितना प्यार है?३.    क्या मुझे राष्ट्र को समर्पित या गाँव शहर में जनता के पैसे से (कर के माध्यम से वसूले गए) बने चाहे
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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का साग खाए ले शुरू, मात जाथे बाद मा रमझाझर

जाड़ के दिन माँ येती बिहनिया के काम बूता करे के बाद घर गोसईनीन मन काय करै. एक दू घंटा सुतिन फेर चार साढ़े चार बजे संझा जुवार एक जघा जुरियाये लगिन. तहां ले शुरू गोठियाना. वइसे ये जुरियाना हा गाँव माँ का का होवत हे एखर खबर मिले के अस्थान घलो आय. भले ये खबर
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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आतंकवाद, नक्सलवाद ..... खून खराबा

लाहौर में आतंकियों द्वारा लगभग 2000 लोगों को मस्जिद में बंधक बनाकर रखा जाना, इधर अपने देश में नक्सलियों द्वारा रेल की बोगियां उड़ा देना..... रोज रोज इस तरह की घटनाएं आम बात हो गयी हैं. क्या है इसका समाधान ? सब मिलकर सोंचें और रखें अपने अपने विचार. जय
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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छत्तीसगढ़ी के गुरतुर गोठ, (छत्तीसगढ़ की मीठी बोली)

छत्तीसगढ़ी बोली को आप अंग्रेजी की तरह बोली जाने वाली कह सकते हैं. मिसाल के तौर पर एक वाक्य लेते हैं "पिताजी भोजन कर रहे हैं"  कर रहे हैं शब्द का प्रयोग  अंग्रेजी में बहु वचन के लिए होगा (means plural number) नहीं तो साधारण तौर पर लिखेंगे
 
सूर्यकान्त गुप्ता
May 28 2010 08:55 PM
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विश्व में हिंदी भाषा का स्थान क्या है

हमारे देश की विशेषता क्या है यह प्रायः सभी जानते हैं.  अनेकता में एकता इसी राष्ट्र में देखने को मिलती है. अलग अलग भाषा, अलग बोली, रहन सहन में भी भिन्नता पर बस एक अवधारणा "हम सब एक हैं" यही मुख्य विशेषता है. प्रत्येक राष्ट्र के लिए वहां बोली जाने
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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देश के रक्षक या हैं ये नाग "तक्षक"

कारगिल की लड़ाईबीत गए ग्यारह साल  गीदड़ ले गया तमगा ओढ़ के शेर की खाल  सच कभी मर सकता नहीं धर धीरज कर इन्तेजार सब्र का फल होए मीठा क्या पता नहीं है यार ये पंक्तियाँ अभी अभी फौज में हुए खुलासे के लिए है. बस,  सब जगह अपनी
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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छत्तीसगढ़ी पुडिया

जैसा कि कल हमने ललित भाई के आने का समाचार का पोस्ट लगाया, उसमे क्षेत्रीय बोली का प्रयोग भी किया। टिप्पणी भी आई है जैसे को तैसा का विचार के साथ याने छत्तीसगढी मे। आज सोचा क्यों न अपनी बोली मे एक छोटी सी पुडिया यहां छोड़ दी जाय।  लीजिये मै ब्लोग लिखने
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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"मैं गोंडवाना मा हंव गा"

तारीख २६ दिन बुधवार.  जिन्दगी के रोज के ढर्रे के मुताबिक भिलाई से कर्तव्यस्थली राजनांदगांव आगमन. दोपहर के डेढ़  बज रहे थे, बड़ी बड़ी मूंछों वाले जनाब, "शेर सिंह" के नाम से संबोधित किये  जाने वाले, दुलारू ललित भाई का फ़ोन आया. "मैं गोंडवाना
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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शेर सिंह की दिल्ली यात्रा सम्पन्न

                                                           शेर सिंह की दिल्ली यात्रा
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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गिरना

गिरना गिर कर सम्हलना, सम्हल के उठना नामुमकिन नहीं है मगर गिर गए कहीं दुनिया की नजरों से ऐसे गिरे हुए को उठाना मुमकिन नहीं है यदि सोचते हैं, दुनिया से उठ जाना बेहतर होगा तो उठ तो जाओगे, मिलेगी जन्नत या
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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भाई ललित न फ़ोन है न कोई  ब्लॉग में प्रविष्टी कहाँ हो गए हैं अंतरध्यानबोले थे अठ्वाही के बाद मिलेंगेइहाँ तो पंद्रही होथे सियान (पंद्रह दिन हो रहे हैं)आईसक्रीम ख़तम नई होवत हे का जी? जय जोहार........
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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वाह रे छः घन्टे की नीन्द

"ॐ हं हनुमते नमः" सुप्रभात व आज का दिन आप सभी का खुशमय हो.  हम कल कुछ ज्यादा ही काम के बोझ के मारे थे. आजकल हमारे विभाग में कुछ ज्यादा ही सांखिकीय विश्लेषण का दौर चल पड़ा है.  गत तीन वर्षों के आंकड़े एकत्र कर तुलनात्मक अध्ययन करने के आदेश
 
सूर्यकान्त गुप्ता
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गरमी का मौसम, तप रही है धरती

(१) बुझाने अपने पेट की आग कमाने के चक्कर में करती जनता भागम भाग        (२)गरमी का मौसम, तप रही है धरती दिमाग ठिकाने रहता नहीं, क्या अच्छा है क्या बुरा हैजनता जरा भी परवाह नहीं करती (३)आदत
 
सूर्यकान्त गुप्ता