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आज का मुद्दा

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06 Jun 2010
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मानव व्यवहार में हो रहा परिवर्तन : एक विश्लेषण

अमेरिका के स्कूल में एक विद्यार्थी ने अपने सहपाठियों और शिक्षकों पर गोलिया बरसाईं । दिल्ली में सडक पर एक कारों के आपस में बस छू भर जाने से क्रोधित दो युवकों ने आपसी मारपीट की , और एक ने दूसरे को गंभीर रूप से घायल कर दिया । फ़्रांस में वीडियो गेम्स देखने
 
अजय कुमार झा
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काश कि इस तरह मनाया जा सके पर्यावरण दिवस

हर साल पांच जून को पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जा रहा है । और पिछले एक दशक से जब से इस दिवस को सिर्फ़ मनाया और उससे ज्यादा मनाए जाने को जताया जा रहा है तभी से लगातार पर्यावरण की खुद की सेहत बिगडती जा रही है । इससे बडी विडंबना और क्या हो सकती है कि आज
 
अजय कुमार झा
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भारतीय रेल : सुरक्षा और स्वच्छता से दूर

अभी हाल ही में हुई रेल दुर्घटना , और इससे पहले दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड की दुर्घटना ,ने एक बार फ़िर से भारतीय रेलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार , रेल प्रशासन और संबंधित लोगों की सोच और प्रतिबद्धता को कटघरे में खडा कर दिया है । भारतीय रेलवे न
 
अजय कुमार झा
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खेल बनाम आम जनता : राष्ट्रमंडल खेलों के बहाने कुछ सवाल

राजधानी दिल्ली में आगामी महीनों में होने जा रहे राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन और व्यवस्था के लिए राज्य सरकार को जब अपेक्षित धनराशि नहीं मुहैय्या कराई जा सकी , ( यहां एक बात गौरतलब है कि ये कि ये राज्य सरकार के लिए एक सुखद संयोग है कि अभी केंद्र में भी उसी
 
अजय कुमार झा
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दिल्ली का प्लेटफ़ार्म ......मरते बिहारी ....और काहिल रेल मंत्री....

( ये चित्र तथा नीचे के दोनों चित्र मेरी पिछली बिहार यात्रा के हैं जो मैंने खुद अपने मोबाईल से खींचे थे और उस दिन भी कुछ वैसा ही हुआ था जैसा कि आज हुआ है ) दिल्ली से बिहार की रेल यात्रा करने का अनुभव , सिर्फ़ वो ही जान सकता है जिसने ये यात्रा की हो । लगभग
 
अजय कुमार झा
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फ़ांसी की सज़ा : कुछ उठते सवाल

पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब को हाल ही में दी गई फ़ांसी की सजा के बाद स्वाभाविक रूप से फ़ांसी की सज़ा को लेकर एक बार फ़िर से एक बहस उठ खडी हुई है । ये एक संयोग ही है कि अजमल को फ़ांसी की सजा सुनाए जाने के एक सप्ताह के अंदर ही निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र
 
अजय कुमार झा
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असंवेदनशील और गैर जिम्मेदार होते विद्यालय प्रशासन

मसूरी टूर पर गए बालाक शिवम की मौत ने एक बार फ़िर से विद्यालय प्रशासन और व्यवस्था द्वारा बच्चों के प्रति बरती जा रही अंसवेदनशीलता और दिन प्रतिदिन होते गैर जिम्मेदार रवैये को एक बार फ़िर से सामने लाकर खडा कर दिया है । ये कोई पहली घटना नहीं है जब विद्यालय
 
अजय कुमार झा
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रिएल्टी शोज़ का एक सकारात्मक पहलू

पिछले एक दशक या शायद उससे भी कम समय पहले शुरू हुए रिएल्टी शोज़ आज भारतीय टीवी के कुछ सबसे बेहतरीन और लोकप्रिय कार्यक्रमों में से एक है । गीत संगीत , नृत्य के नाम पर शुरू हुए इन शोज़ में आज बहुत सारी विविधताएं देखने सुनने को मिल रही हैं । बेशक इन रिएल्टी
 
अजय कुमार झा
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दुश्मनों आप सिर्फ़ हथियार दो , गद्दार तो मिल ही जाएंगे ...

किसी ने बहुत पहले कहा था कि भारत के दुश्मन बहुत ही किस्मत वाले हैं इन्हें सिर्फ़ हथियार ही देना होता है , गद्दार नहीं ढूंढने पडते , जिनके हाथों  में हथियार देकर देश को तोडने की साजिश रची जाती है । अभी हाल ही में फ़िर से एक बार माधुरी गुप्ता की गद्दारी
 
अजय कुमार झा
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राजधानी में फ़िर गायब हो रहे हैं मासूम बच्चे

एक खबर के अनुसार राजधानी दिल्ली में प्रतिदिन औसतन १७ बच्चे गायब हो रहे हैं । मीडिया में आई एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि एक जून २००८ से लेकर १२ जनवरी तक राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों से २२१० बच्चे लापता हो गए हैं , जिनका अभी तक कोई
 
अजय कुमार झा
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खेल के बहाने खेला जा रहा है बहुत बडा खेल

आईपीएल खेलों में जिस तरह के घपले घोटाले की आशंका और अनुमान ज़ाहिर किए जा रहे हैं , उससे इतना तो तय है कि बहुत कम समय में ही इतनी बडी लोकप्रियता पाने और खेल को दीवानेपन की हद तक पहुंचाने के पीछे जो लक्ष्य था वो कम से कम खेल भावना तो कतई नहीं थी । अब जबकि
 
अजय कुमार झा
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फ़ैशन शोज़ का औचित्य समझ से परे

ये युग फ़ैशन का युग है । आज तो हर बात में , या कहा जाए कि बेबात में भी फ़ैशन का ही बोलबाला है । आज खाना , फ़ास्ट फ़ूड खाना फ़ैशन है , पीना , अब इसके लिए क्या कहा जाए , ये तो फ़ैशन से ज्यादा अब एक आदत है , मोबाईल रखना नहीं नहीं मोबाईल बदलते रहना एक फ़ैशन है ,
 
अजय कुमार झा
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अपराध के बढते जाने का कारण है कानून के भय का खत्म होना ..

आज ही समाचार पत्रों में खबर पढने को मिली कि दिल्ली में बम विस्फ़ोट के आरोपियों के मुकदमे में बहुत जल्द ही फ़ैसला आने वाला है । इस खबर के संदर्भ में सबसे चौंकाने वाली बात सिर्फ़ ये लगी कि आरोपी के नाते रिश्तेदार पूरी तरह आश्वस्त दिख रहे थे और उनका कहना था कि
 
अजय कुमार झा
टैग: अपराध
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नक्सलवादियों ....मारो ....जरूर मारो .....

अभी हाल ही में दंतेवाडा में जो कुछ भी नक्सलवादियों ने हैवानियत का नंगा नाच करते हुए उससे कोई आश्चर्य नहीं हुआ । न ही सैनिकों के शहीद हो जाने का गम , सैनिक जीवन का अंत शहादत के चुंबन से हो तो उसकी मौत भी सार्थक हो जाती है । किंतु जब उन शहीदों की आत्मा बन
 
अजय कुमार झा
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विश्व स्वास्थ्य दिवस और और एक बीमार देश

  आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है । पूरे विश्व में आज चिकित्सा जगत अपनी अब तक की उपलब्धियों और भविष्य में एड्स , हेपाटाईटिस , और इन जैसे रोगों के लिए किए जा रहे शोधों , इनके लिए औषधियों के निर्माण आदि पर विचार विमर्श कर रहा होगा । और इन सबसे दूर
 
अजय कुमार झा
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बदलाव आते नहीं है , लाए जाते हैं ........

आज जो भी परिस्थियां हैं , जैसा भी सडा गला माहौल बन चुका है , जो भी अनैतिक, अवैध, हो रहा है , जिस भी तरह के अपराध किए जा रहे हैं , और जिस तरह की घटनाएं घट रही हैं उससे सब कह रहे हैं कि , बस अब तो ये सूरत बदलनी ही चाहिए , बहुत हुआ अब सहा नहीं जाता ।इस बारे
 
अजय कुमार झा
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बताईये सबसे घटिया टीवी समाचार चैनल कौन सा है ?

यूं तो इन दिनों टीवी समाचार चैनलों पर कुछ भी कहना सुनना व्यर्थ ही है ।आज चौबीस घंटे तक गला फ़ाड फ़ाड कर समाचार दिखाते ये चैनल , समाचार को दिखाने से पहले उसे बनाते कैसे हैं , उसे पैदा  कैसे करते हैं , उसे एक्सक्लुसिव का तडका कैसे लगाते हैं ? और इसके
 
अजय कुमार झा
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न्यायपालिका के फ़ैसले और उनके निहितार्थ : लिव इन रिलेशनशिप, बलात्कार आदि के परिप्रेक्ष्य में

कल इस पोस्ट को कोर्ट कचहरी पर लिखा था मगर आज फ़िर कुछ प्रश्नों को देखा तो लगा कि इसे दोबारा यहां पोस्ट करना अभी उचित होगा ..... मैंने बहुत बार अनुभव किया है कि जब समाचार पत्रों में किसी अदालती फ़ैसले का समाचार छपता है तो आम जन में उसको लेकर बहुत तरह के
 
अजय कुमार झा
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औचित्यहीन हो रहे हैं रोजगार पंजीयन कार्यालय

 एक समय हुआ करता था जब लोग अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद जो पहला काम करते थे वो होता था जिले में स्थित रोजगार पंजीयन कार्यालय में अपना पंजीयन करवाना । और हो भी क्यों न उस समय रिक्त स्थानों के लिए निकलने वाली भर्ती के लिए बुलावा पत्र आदि यथायोग्य
 
अजय कुमार झा
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मालावती की माला से भी गंदा है ये ...इन पर भी थू थू थू

जी हां दलित मसीहा का चोला चंचा तो खूब उछला और आप सबने उसे देखा भी न सिर्फ़ देखा बल्कि भर भर के थूकम फ़जीहत भी की ..करनी भी चाहिए थी ..बेशक उससे मालावती की माला में लगे नोटों का वजन रत्ती भर भी कमी न आए और न ही शर्म उन्हें छू सके । मगर आज कुछ उससे भी भयानक
 
अजय कुमार झा
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असमय परिपक्व होता बचपन

अभी हाल ही में एक समाचार देखा सुना कि , किसी विद्यालय में एक सातवीं कक्षा में पढ रहे  बालक ने , अपने ही विद्यालय की तीसरी कक्षा में पढ रही एक बच्ची से बलात्कार करने की कोशिश की , ऐसा ही एक समाचार था कि कुछ बच्चों ने अपने एक सहपाठी को खेल के मैदान
 
अजय कुमार झा
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गुटखा पान मसाला : एक धीमा ज़हर

गुटखा : एक धीमा जहर आज से एक दशक पहले तक आम लोगों ने यदि किसी पान मसाले के बारे में देखा सुना था या कि उपयोग किया करते थे तो वो शायद पान पराग और रजनीगंधा हुआ करता था । उसकी कीमत उन दिनों भी आम पान मसाले या सुपाडी से कुछ ज्यादा हुआ करती थी । और लोग
 
अजय कुमार झा
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नक्कालों से सावधान ....मगर कौन हो सावधान ?

आज देश में नक्कालों की समस्या बहुत चुपके चुपके मगर बहुत तेज़ी से बढती ही जा रही है । कोई भी उत्पाद, कोई भी सामग्री , खान पान की वस्तुएं , दवाईयां आदि सभी में नक्काली का कारोबार खूब फ़लफ़ूल रहा है । कोई भी पर्व त्यौहार ऐसा नहीं है जब मीडिया द्वारा ये न
 
अजय कुमार झा
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विकास या विध्वंस : तय खुद करना है

आज विश्व समाज जिस दो राहे पर खड़ा है उसमें दो ही खेमे स्पष्ट दिख रहे हैं। पहला वो जो किसी भी कारण से किसी ना किसी विध्वंसकारी घटना, प्रतिघटना, संघर्ष, आदि में लिप्त है । दूसरा वो जो विश्व के सभी अच्छे बुरे घटनाक्रमों , उतार चढाव , राजनितिक, सामाजिक और
 
अजय कुमार झा
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नशा है अपराध दर में वृद्धि का बडा कारण

पिछले कुछ वर्षों में देश में होने वाले अपराध दर में बहुत ही तेजी से वृद्धि हुई है । सबसे दुखद बात तो ये रही है कि बहुत समय तक अपराध और खून खराबे से दूर रहने वाले ग्रामीण प्रदेश भी धीरे धीरे इनकी चपेट में आते गए हैं । अपराधशास्त्र पर अध्य्यन और अन्वेषण
 
अजय कुमार झा
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अक्षम होती विशिष्ट सुरक्षा एजेंसियां ..........

अब तो ये आए दिन की खबर सी बन गई है कि सीबीआई को अदालत से फ़टकार पडी और अब तो इस खबर पर कोई खास तवज्जो भी नहीं जाती । ऐसा लगता है मानो स्थानीय पुलिस को रोजाना की तरह किसी अनियमितता, भ्रष्टाचार, लापरवाही आदि के लिए झाड पड रही हो । ये बेहद दुखद बात है कि
 
अजय कुमार झा
टैग: security agencies
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आखिर किस धारा के वाहक .....ये धारावाहिक

भारत में जब टेलीविजन की शुरूआत हुई थी तो दूरदर्शन पर ये जिम्मेदारी थी कि दर्शकों तक उस टेलीविजन के माध्यम से क्या पहुंचाया जाना है और किस तरह से पहुंचाया जाना है ? यदि शुरूआती दिनों को याद करें तो उस समय दूरदर्शन नामके एकमात्र सरकारी चैनल ने पूरे सप्ताह
 
अजय कुमार झा
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आधुनिक बाबा या सफ़ेदपोश अपराधी

समाज में जितनी तेजी से पाप बढता गया ,उससे दोगुनी तेजी से ही लोगों ने शायद इसी भ्रम में धार्मिक क्रियाकलापों में लिप्त रहने की अपनी इच्छा दिखाई कि शायद इसी बहाने से उनके पाप कट सकें । इस तथाकथित घोषित किए जा चुके कलियुग में भी लगाता बढते देवी देवताओं की
 
अजय कुमार झा
Mar 05 2010 05:44 PM
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बेहद घटिया है भारत का आपदा प्रबंधन

आज बंगलौर की एक बहुमंजिला इमारत में शार्टसर्किट से आग लगने के बाद जान बचाने के लिए मची अफ़रातफ़री में अब तक की जानकारी के अनुसार लगभग नौ लोगों की मृत्यु हो गई । इस घटना ने कुछ सालों पहले दिल्ली के उपहार सिनेमा अग्निकांड की याद दिला दी । हालांकि इश्वर का
 
अजय कुमार झा
Feb 23 2010 09:35 PM
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क्या नकारात्मकता ज्यादा आकर्षित करती है ?

क्या आपको बहुत पहले दिखाया जाने वाला एक विज्ञापन याद है। उस विज्ञापन में एक नन्ही से बच्ची , स्कूल की पास से आने जाने वालों को एक पैम्फ़लेट पकडाती है, जैसे कि अक्सर ही लाल बत्ती पर आपको हमें भी कोई न कोई पम्फ्लेट पकडा देता है, और जैसा कि अक्सर ही होता है
 
अजय कुमार झा
Feb 22 2010 07:31 PM
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तो आ ही गया परीक्षाओं ....अरे नहीं आत्महत्याओं का दौर ....

अब तो नए साल की शुरूआत से ही समय जिनके लिए कर्फ़्यूनुमा हो जाता है , जिनके आने जाने घूमने फ़िरने, खेलने कूदने तक पर मनाही हो जाती है .....वे होते हैं दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थी । और फ़िर परीक्षाओं का समय जैसे जैसे नजदीक
 
अजय कुमार झा
Feb 19 2010 08:36 PM
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आखिर हमेशा विवाद को ही सम्मान क्यों ?(दौपदी .....विवाद के बहाने एक चर्चा )

हाल में साहित्य कला अकादमी द्वारा ,श्री वाई लक्ष्मीप्रसाद की पुस्तक द्रौपदी को पुरस्कृत किया गया । जब इस पुस्तक के विरोध किए जाने की खबरें समाचारों में सुनी तो उत्सुकता बढ गई कि आखिर ऐसा क्या लिखा गया है इस पुस्तक में ,। जानने पर पता चला कि इस पुस्तक में
 
अजय कुमार झा
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Feb 17 2010 11:00 PM
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मीडिया के दो रूप और दो दिशाएं

आज जब एक मायने में मीडिया युग ही आ गया है , समाज का कोई क्षेत्र शायद अब ऐसा नहीं बचा है जहां पर मीडिया का दखल न हो । और किसी भी समाज के लिए ये जरूरी और अच्छी बात है कि सूचना संसार के माध्यम से वे कम से कम एक दूसरे से जुडे रहें । मगर यहां ये बताना और
 
अजय कुमार झा
Feb 16 2010 04:57 PM
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आतंकी हमलों से कोई सबक नहीं लेता

अभी तो भारत पाक रिश्तों को फ़िर से बुने जाने की कवायद शुरू भी नहीं हुई थी कि पुणे में एक आतंकी हमला हो गया । देश के अलग अलग भागों में नियमित अनियमित रूप से होने वाले ये हमले अब तो एक नियति से होकर रह गए हैं । इस बार मुंबई की जगह पुणे हो गया । और इस बार भी
 
अजय कुमार झा
Feb 15 2010 03:19 PM
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आज का मुद्दा की पिछली पोस्ट अमर उजाला तथा हरिभूमि में प्रकाशित

मुझे आप सबको बताते हुए बहुत ही खुशी हो रही है कि" आज का मुद्दा" की पिछली पोस्ट को दो प्रमुख समाचार पत्रों ने स्थान दिया है । चित्र को बडा करके देखने के लिए उस पर चटका लगा दें । इस संबंध में मेरे ब्लोग कुछ भी कभी भी पर प्रकाशित होने वाली कल की पोस्ट ,
 
अजय कुमार झा
Feb 13 2010 10:06 PM
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भारत पाक के बदलते रिश्ते

एक बार फ़िर से भारत पाक रिश्तों को पटरी पर लाए जाने की कवायद शुरू हो चुकी है । दोनों देशों के सचिव स्तर की वार्ता के लिए संभावनाएं तलाशी जा रही हैं ,और वे मुद्दे तय किए जा रहे हैं जिनपर बातचीत होनी है । विकास के इस दौर मेम य़ॆ आवश्यक सा लगता भी है कि
 
अजय कुमार झा
Feb 13 2010 02:47 PM
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कटघरे में न्यायपालिका

आज समाचार पत्र में छपी दो खबरों ने अपनी तरफ़ ध्यान आकर्षित किया । पहली खबर थी कि उत्तराखंड उच्चन्यायालय में हाल ही में नियुक्त न्यायमूर्ति निर्मल यादव के खिलाफ़ सीबीआई ने ये दावा किया है कि उन्होंने फ़र्जीतरीके से जमीन खरीदी है । दूसरी ये कि एक साक्षात्कार
 
अजय कुमार झा
Feb 12 2010 02:28 PM
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निशाना बनती फ़िल्में

एक बार फ़िर एक और पिक्चर राजनीतिक प्रपंचियों के निशाने पर है । शाहरूख खान की नई पिक्चर माय नेमइस खान का विरोध बाकायदा उस पिक्चर के पोस्टर फ़ाड के उस पिक्चर का संभावित प्रदर्शन करने वाले सिनेमाघरों में तोड फ़ोड करके किया जा रहा है । पिछले कुछ समय में किसी न
 
अजय कुमार झा
Feb 11 2010 03:44 PM
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चिंताजनक स्थिति में हैं देश के बाल सुधार गृह और कल्याण केंद्र

आजकल राजधानी दिल्ली में स्थित एक बाल सुधार गृह और कल्याण केंद्र चर्चा में बना हुआ है । नहीं ये कोई विशेष उपलब्धि या किसी नई योजना की शुरूआत होने के कारण नहीं है , बल्कि असलियत ये है कि पिछले एक डेढ माह में ही इस बाल आश्रय केंद्र में दुखद आश्चर्यजनक रूप
 
अजय कुमार झा
Feb 10 2010 02:29 PM
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फ़िर से दिल दो हाकी को ........और पैसे दो क्रिकेट को

जी हां आजकल टीवी पर ये विज्ञापन खूब दिखाया जा रहा है , कभी कोई क्रिकेट खिलाडी तो कभी , कभी ओलंपियन पदक विजेता कोई खिलाडी बहुत सी अच्छी सी बातें कहता हुआ आखिर में कहता है कि इस बार हाकी का विश्व कप अपने देश में होने जा रहा है और वो तो तो भारत के सारे मैच
 
अजय कुमार झा