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17 Jun 2010
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आंच पर हाइकु

हरीश प्रकाश गुप्त के हाइकु -- करण समस्तीपुरी हाइकु हिंदी साहित्य में अभिनव आयातित पद्य विधा है। यह जापान से बरास्ते अंग्रेजी भारत आयी है। हाइकु का उद्गम स्थल जापान है। जापान में सतरहवी शताब्दी में 5-7-5 नाद वाले तीन पंक्तियों की कविता लिखने का प्रचलन
 
मनोज कुमार
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देसिल बयना - 34 : पूत सपूत तो का धन संचय....

-- करण समस्तीपुरी राम-राम ! अरे ई दुनिया का है ? वृथा मोह-माया है। आदमी भौतिक सुख-सुविधा के पाछे रन-रन करते रहता है। कौनो-कौनो आदमी के लिए तो धने संपत्ति सबस बड़का चीज होता है। मगर लालटेन प्रसाद ऐसन में से नहीं थे। थोड़ा-बहुत मरौसी (पुर्वजी) जायदाद था,
 
करण समस्तीपुरी
Jun 16 2010 08:05 PM
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निःशब्द नीड़

निःशब्द नीड़ -- करण समस्तीपुरी दिन भर दूर नीड़ से श्रम कर,चना-चबेना दाना चुन कर,सांझ पड़े खग आया थक कर,किन्तु यहाँ क्या पाया ?नीड़ देख निःशब्द,विहग का उर आतुर घबराया !!क्षुधा तृषित क्या सो गए परिजन,या फिर से आया कोई रावण ?पड़ीं नीड़ पर बाज की छाया,या
 
करण समस्तीपुरी
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मंहगाई

मंहगाई -- सत्येन्द्र झा दो पुराने मित्र वर्षों बाद मिले थे। कुशलक्षेम के बाद एक मित्र के आग्रह पर दूसरे मित्र उनके घर आये। फिर शुरू हुआ पहले मित्र की सम्पन्नता का वर्णन। आगंतुक के पूछे बिना ही उन्होंने कहना शुरू किया, "यह एलसीडी टीवी है, पचास हज़ार का...
 
करण समस्तीपुरी
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काव्य शास्त्र-18

आचार्य परशुराम राय आचार्य हेमचन्द्र आचार्य हेमचन्द्र का जन्म गुजरात प्रान्त के अहमदाबाद जनपद के धुन्धुक गांव में 1088 ई. में हुआ था। ये जैनधर्म के विख्यात आचार्य हैं। इन्होंने अनेक ग्रंथों की रचना की। अनहिलपट्टन के चालुक्य राजा सिद्धराज के आग्रह पर
 
मनोज कुमार
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गंगावतरण भाग-३

गंगावतरण भाग-३                 – मनोज कुमार गंगावतरण भाग-१ गंगावतरण भाग-२ राजा सगर ने अपने साठ हजार पुत्रों को यज्ञ के घोड़े की खोज कर लाने का आदेश दिया। ये पुत्र यज्ञ के घोड़े की
 
मनोज कुमार
Jun 12 2010 06:31 PM
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मनोज

पिछली किश्तों में आप पढ़ चुके हैं, 'कैसे रामदुलारी तमाम विरोध और विषमताओंकेबावजूद पटना आकर स्नातकोत्तर तक पढाई करती है। बिहार के साहित्यिक गलियारे मेंउसका दखल शुरू ही होता है कि वह गाँव लौट जाती है। फिर सी.पी.डब्ल्यू.डी. केअभियंताबांके बिहारी से परिणय
 
करण समस्तीपुरी
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आंच - 21

आंच के बीसवें अंक से... -- आचार्य परशुराम राय आँच का यह अंक पिछले अंक के क्रमिक विकास में औपचारिकता के लिए है। इसमेंलिए गए तथ्य से लगभग सभी पाठक परिचित होंगे। काव्यार्थ में पुराने बिम्बपरिस्थिति विशेष से संयुक्त होकर किस प्रकार नविनता का झरोखा खोल
 
करण समस्तीपुरी
टैग: आंच
Jun 10 2010 08:22 PM
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देसिल बयना - 33 : हुआ ब्याह करेगा क्या...

-- करण समस्तीपुरी राम-राम ! उफ़... ! गाँव दिश तो बड़ी गर्मी है। हालांकि पले-बढे तो वही में मगर अब उ बात तो रहा नहीं न.... ! सुनते हैं, गिलोबल वारमिन (ग्लोबल वार्मिंग) गांवो तक पहुँच गया। पहुंचेगा नहीं.... ? ससुर गाछ-विरिछ सब काट दिहिस, माटी-भित्ति, चार-फूस
 
करण समस्तीपुरी
Jun 09 2010 06:38 PM
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मन हो गया उदास

मन हो गया उदास -- करण समस्तीपुरी बहुत दिनों के बाद नहीं हो जब तुम मेरे पास !बहुत दिनों के बाद आज फिर मन हो गया उदास !! जान रहा हूँ मैं भी है यह बस कुछ दिन की बात,पर दिन लम्बा लगता तुम बिन, लम्बी लगती रात !पल-पल काट रहा मुझको खालीपन का अहसास,बहुत दिनों के
 
करण समस्तीपुरी
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झूठ बोले कौआ काटे

झूठ बोले कौआ काटे -- मनोज कुमार उस दिन सुबह सुबह दफ्तर पहुंचा तो माहौल विचित्र था। सीपी काफी तमतमाया हुआ इधर से उधर घूम रहा था और कुछ बड़बड़ाए जा रहा था। पी ए से पूछा तो मालूम हुआ कि सीट पर बैठते ही सीपी के हाथों के अर्दली ने ट्रांसफर आर्डर थमा दिया।
 
करण समस्तीपुरी
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काव्यशास्त्र-17 :: आचार्य सागरनन्दी एवं आचार्य (राजानक) रुय्यक (रुचक)

काव्यशास्त्र-17 आचार्य  सागरनन्दी एवं आचार्य (राजानक) रुय्यक - आचार्य परशुराम राय   आचार्य  सागरनन्दी आचार्य  मम्मट के परवर्ती आचार्यों में आचार्य सागरनन्दी का नाम सर्वप्रथम आता है। इनका नाम केवल सागर था नन्दी वंश में उत्पन्न होने के
 
मनोज कुमार
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गंगावतरण :: भाग-२

गंगावतरण :: भाग-२ मनोज कुमार (गंगावतरण की कथा :: भाग-१) श्रीमद भगवत में गंगावतरण की कथा है। प्राचीन काल की बात है। अयोध्‍या में इक्ष्‍वाकु वंश के राजा सगर राज करते थे। वे बड़े ही प्रतापी, दयालु, धर्मात्‍मा और प्रजा हितैषी थे। सगर का शाब्दिक अर्थ है विष
 
मनोज कुमार
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विश्‍व पर्यावरण दिवस पर … वृक्ष हमारे जीवन संगी

वृक्ष हमारे जीवन संगी -आचार्य परशुराम राय     वृक्षों के बिन प्रकृति अधूरी, बिन वृक्षों के धरती नंगी। वृक्ष हमारी जीवन साँसें,  वृक्ष हमारे जीवन संगी।। वरद हस्त हैं शाखें इनकी, धारें मिट्टी पाँव तले। ज्ञान ने खोलीं अपनी पलकें, इनकी शीतल
 
मनोज कुमार
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त्यागपत्र : 30

पिछली किश्तों में आप पढ़ चुके हैं, 'कैसे रामदुलारी तमाम विरोध और विषमताओं केबावजूद पटना आकर स्नातकोत्तर तक पढाई करती है। बिहार के साहित्यिक गलियारे में उसका दखल शुरू ही होता है कि वह गाँव लौट जाती है। फिर सी.पी.डब्ल्यू.डी. के अभियंताबांके बिहारी से परिणय
 
मनोज कुमार
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आँच - २०

--आचार्य परशुराम राय श्री रावेन्द्रकुमार रवि के नवगीत "बौराए हैं बाज फिरंगी" पर आँच के पिछले अंक पर आयी प्रतिक्रिया ने इस अंक को लिखने के लिए प्रेरित किया। वैसे इस अंक के विचारों पर लम्बे समय से मंथन चल रहा था, लेकिन रावेन्द्र कुमार जी की प्रतिक्रिया को
 
करण समस्तीपुरी
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देसिल बयना - 32 : घर में आग लगे, भर घर इजोत

-- करण समस्तीपुरी बाप रे बाप ! ओह... !! उ साल भी ऐसने झरकल (जला हुआ) गर्मी पड़ रहा था। किरिन के साथे लू चलने लगता था। लोग गोसाईं उगने से पहिलही मुंग-उंग तुडवा के घर पकर लेते थे। मगर घरो में का चैन था... ! घैला का पानी भी लगता था घुर पर चढ़ा के लाया है। उहो
 
करण समस्तीपुरी
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पूछ मत आज मुझसे ये क्या हो गया... !

कोई चिराग नहीं है, मगर उजाला है ! ग़ज़ल की शाख पे इक फूल खिलने वाला है !! मित्रों ! काव्य-प्रसून में आज आपके पेश-ए-खिदमत है एक ग़ज़ल ! -- करण समस्तीपुरी पूछ मत आज मुझसे ये क्या हो गया !जिस्म से जान बिल्कुल जुदा हो गया !!आँख की रोशनी छिन गयी आंख से,जो न
 
करण समस्तीपुरी
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पशु

-- सत्येन्द्र झा किसी साहित्यिक दिवस पर लेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। लेख का विषय था 'पशु की उपयोगिता'। पुरस्कृत लेखक ने लिखा था, "पशु की उपयोगिता मनुष्य से अधिक होती है, क्यूंकि प्रत्येक मनुष्य के अन्दर एक पशु रहता है। जब यह पशु बाहर आ कर मनुष्य
 
करण समस्तीपुरी
May 31 2010 06:42 PM
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काव्य शास्त्र-१६ :: आचार्य मम्मट

आचार्य मम्मट- आचार्य परशुराम राय भारतीय काव्यशास्त्र में आचार्य मम्मट का योगदान अद्वितीय है। इन्हें विद्वत्समाज 'वाग्देवतावतार' मानता है। इनका काल महाराजा भोजदेव के बाद आता है। इनके जीवन के विषय में प्रामाणिक तथ्य बहुत कम मिलते हैं। इसमें संशय नहीं कि ये
 
मनोज कुमार
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गंगावतरण (भाग-१)

--- मनोज कुमार सर्वत्र पावनी गंगा त्रिषु स्थानेषु दुर्लभा। गंगा द्वारे, प्रयागे च गंगासागर संगमे॥ गंगासागर की यात्रा की चर्चा के क्रम में हमने आपका सागर द्वीप से परिचय कराया था। हमारे लिये गंगा मात्र एक नदी ही नहीं, हमारे देश की आत्मा है। हमारे देश की
 
मनोज कुमार
May 30 2010 10:46 AM
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त्यागपत्र : भाग 29

पिछली किश्तों में आप पढ़ चुके हैं, 'कैसे रामदुलारी तमाम विरोध और विषमताओं के बावजूद पटना आकर स्नातकोत्तर तक पढाई करती है। बिहार के साहित्यिक गलियारे में उसका दखल शुरू ही होता है कि वह गाँव लौट जाती है। फिर सी.पी.डब्ल्यू.डी. के अभियंता बांके बिहारी से
 
मनोज कुमार
May 28 2010 08:25 PM
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आँच 18 : 'बौराए हैं बाज फिरंगी'

आँच - आचार्य परशुराम राय आँच के इस अंक में श्री रावेन्द्र कुमार रवि द्वारा विरचित 'बौराए हैं बाज फिरंगी' नामक कविता (गीत) को समीक्षा के लिए चुना गया है। कविता में आज की आतंकवाद और नक्सलवाद की समस्याजनित भावभूमि पर अच्छे और आकर्षक बिम्बों से कविता को
 
करण समस्तीपुरी
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देसिल बयना - 31 : बूरे वंश कबीर के उपजे पूत कमाल

-- करण समस्तीपुरी गाँव-घर में एगो फकरा बड़ा प्रचलित है, 'कबीर दास के उलटे वाणी ! आँगन सूखा, भर घर पानी !!' लेकिन जो कहिये कबीर दास का सब बाते अजगुत (अद्भुत ) होता था। जो बोल दिए उका अर्थ अद्भुत ही होगा। एक बात था, कबीर दास फाकमस्ती में जीए मगर कौनो
 
करण समस्तीपुरी
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ग्रीष्म और पर्वताँचल की नदियाँ

ग्रीष्म और पर्वताँचल की नदियाँ-- मनोज कुमारगर्मी की ऋतु आते हीपर्वताँचल कीअधिकांश नदियाँछोड़ देती हैं,कल-कल, छल-छलचंचल निश्छल धाराओं कोगुफाओं में,ताप इतनाकि जल भी जल जाए।चारों ओर रेत ही रेतऔर काई पुते-पर्वतों की देहआकर्षण के नाम परसघन आबादी के थल
 
मनोज कुमार
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विभेद

  विभेद -- सत्येन्द्र झा     दो लाश एक साथ जलाए जा रहे थे। उन में से एक खूब ताम-झाम के साथ.... लोगों की भारी भीड़ लगी थी उसके इर्द-गिर्द। दूसरी उदास कर्म की उदास प्रक्रिया के साथ। अमीर की लाश के पास खड़ी भीड़ मृतक का प्रशस्ति गान कर रही
 
मनोज कुमार
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काव्य शास्त्र - 16

काव्यशास्त्र –१६ - आचार्य परशुराम राय आचार्य  क्षेमेन्द्र   आचार्य क्षेमेन्द्र कश्मीर वासी थे। इनका काल ग्यारहवीं शताब्दी है। कश्मीर नरेश अनन्तराज के शासन काल में  इनका समय आता है। इसके अतिरिक्त अनन्त राज के बाद उनके पुत्र कलश के शासन काल
 
मनोज कुमार
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सारे तीर्थ बार-बार गंगासागर एक बार .......भाग -चार - कर्दम ऋषि

गंगा सागर यात्रा की चर्चा के दौरान हमने पिछली बार चर्चा की थी सांख्य दर्शन के बारे में। कर्दम ऋषि को ब्रह्माजी का मानसपुत्र माना जाता है। ब्रह्मा जी के अंश से कर्दम मुनि हुए। वे प्रजापतियों में गिने जाते हैं। उन्‍हें ब्रह्माजी ने आदेश दिया था कि तुम
 
मनोज कुमार
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त्याग पत्र भाग ---28--- मनोज कुमार

त्याग पत्र भाग ---28--- --- बचन सिंह के मित्र का प्रसंग --- माधोपुर में दो-तीन सप्ताह बिताने के बाद ठाकुर बचन सिंह का पूरा परिवार पटना आ गया। अनीसाबाद में उनका फ्लैट था। रामदुलारी भी साथ में ही थी। यह शहर उसके लिए अब तक अपना शहर बन चुका था। इसके हर
 
मनोज कुमार
May 21 2010 06:38 PM
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आँच-१७ :: ‘कैसे मन मुस्काए?’

आँच :: ‘कैसे मन मुस्काए?’ - आचार्य परशुराम राय रचनाकार के अन्दर धधकती संवेदना को पाठक के पास और पाठक की अनुभूति की गरमी को रचनाकार के पास पहुँचाना आँच का उद्धेश्य है। देखिये राय जी की आंच पर ‘कैसे मन मुस्काए?’ कैसे उतरता है। संगीता  स्वरूप जी की
 
मनोज कुमार
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देसिल बयना - 30 : गोनू झा की गाय नहीं बलाय

-- करण समस्तीपुरी चलिए बहुत दिन हो गया, आज आपको मिथिला धाम घुमा देते हैं। यही मिथिलांचल में एगो गाँव है भरवारा। हे... ई देख रहे हैं न पोखर के भीर.... हे... ऊ.... उंचा डीह... वही है न गोनू झा का घर। गोनू झा तो अब रहे नहीं मगर उनका किस्सा सब एक पर एक है।
 
करण समस्तीपुरी
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चिठियाना टिपिआना वाद-विवाद .... आंखों देखा हाल .... लाईव फ़्रॉम ब्लॉगियाना मंच -- कमेंटेटर -- छदामी लाल और निर्धन दास

  चिठियाना टिपिआना वाद-विवाद .... आंखों देखा हाल .... लाईव फ़्रॉम ब्लॉगियाना मंच -- कमेंटेटर -- छदामी लाल और निर्धन दास नमस्कार दोस्तों! मैं छदामी लाल आपका वेलकम करता हूँ। ब्लॉगियाना मंच पर आपका स्वागत है। अद्भुत, अनोखा और अभूतपूर्व खेल यहां खेला
 
मनोज कुमार
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दूसरा रूप

-- सत्येन्द्र कुमार झानयी दुल्हन ससुराल में आते ही पहले टीवी, फिर फ्रीज़, वीसीडी और कूलर की फरमाईस करने लगी। ससुराल की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। सास, ससुर और पति ने यह 'ऐश्वर्य' जुटाने में असमर्थता व्यक्त किया। ये लो... दुल्हन ने तो अनशन ही शुरू कर
 
करण समस्तीपुरी
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काव्यशास्त्र - १५

काव्यशास्त्र – १५     आचार्य परशुराम राय   आचार्य कुन्‍तक आचार्य कुन्‍तक आचार्य राजशेखर के परवर्ती और आर्चा महिमभट्ट के पूर्ववर्ती है । इनका काल दसवीं शताब्‍दी का अन्तिम भाग माना जाता है । क्‍योंकि कुंतक ने अपने ग्रंथ वक्रोवित जीवित
 
मनोज कुमार
May 16 2010 06:39 PM
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मीडिया की डुगडुगी

आज बाजारवाद शवाब पर है। हर तरफ़। किस तरह से अपने उत्पाद को सर्वश्रेष्‍ठ घोषित कर उसकी मार्केटिंग की जाए, यह भी एक कला है। जो इस कला में निपुण है उनकी तो बल्‍ले-बल्‍ले! वरना कई ऐसे उत्पाद हैं जो गुणवत्ता में किसी से कम न होते हुए भी प्रचार/मार्केटिंग के
 
मनोज कुमार
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त्यागपत्र - 27

पिछली किश्तों में आप पढ़ चुके हैं, "राघोपुर की रामदुलारी का परिवार के विरोध के बावजूद बाबा की आज्ञा से पटना विश्वविद्यालय आना ! रुचिरा-समीर और प्रकाश की दोस्ती! फिर पटना की उभरती हुई साहित्यिक सख्सियत ! गाँव में रामदुलारी के खुले विचारों की कटु-चर्चा !
 
करण समस्तीपुरी
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आंच-१६

आंच १६ . आचार्य  परशुराम राय   आंच का यह अंक ऑंच के पिछले अंक (आंच पर है लक्षणा शक्ति) से अभिप्रेरित है। करण समस्‍तीपुरी ने शब्‍द शक्तियों का परिचय देते हुए हिंदी के मुहावरों में लक्षणाशक्ति के एकाधिकार की चर्चा की है। जो निस्‍सन्‍देह सत्‍य है।
 
मनोज कुमार
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क्या अँधा के जागे और क्या अंधा के सोये... !!

-- करण समस्तीपुरी रे भैय्या, आल इज वेल........ ! उधर है न आल इज वेल.... ? इधर तो कुच्छो वेल नहीं है। समझो कि दरोगा जी, चोरी हो गयी। घोर-कलियुग आ गया है। सतयुग में तो सब ठीके-ठाक चल रहा था। त्रेता में रावण रामजी की लुगाई चुरा ले गया.... । द्वापर में तो
 
मनोज कुमार
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मन का पंछी उड़ना चाहे

आज फिर एक सूफी गीत -- करण समस्तीपुरीमन का पंछी उड़ना चाहे,लेकिन उड़ ना पाये !हाय !किसको दर्द सुनाये !!कतरे गए पंख कोमल औरआँखें हैं धुंधलाई !धुंधली आंखो में सतरंगी,सपने बहुत छुपाये !!हाय !किसको दर्द सुनाये !!कहाँ बसेरा, कहाँ ठिकाना,किस पथ से किस नभ को जाना
 
करण समस्तीपुरी
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आधुनिक

- सत्येन्द्र झा कक्षा में शिक्षक छात्रों को आधुनिक बनने की शिक्षा दे रहे थे। उन्होंने कहा, "बिना आधुनिक बने विश्व के साथ कदम मिलाना असंभव है।” एक छात्र इसका अर्थ नहीं समझ पाया। उसने प्रश्न किया, "सर! थोड़ा स्पष्ट कर के कहें!"   शिक्षक
 
मनोज कुमार