स्पंदन     ( SPANDAN)'s Image

स्पंदन ( SPANDAN)

http://shikhakriti.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
17 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
73
पाठक भेजे
3441
पसंद
103
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
47.14
पसंद करें
12
नापसंद करें

करैक्टर लेस गिफ्ट

बात उन दिनों की है जब हम अमेरिका में रहते थे एक दिन हमें हमारे बच्चों के स्कूल से एक इनविटेशन कार्ड मिला | उसकी क्लास के एक बच्चे का बर्थडे था बच्चे छोटे थे ये पहला मौका था जब किसी गैर भारतीय की किसी पार्टी में उन्हें बुलाया गया था तो हम एक अच्छा सा
 
shikha varshney
टैग: व्यंग..
पसंद करें
10
नापसंद करें

एक बुत मैडम तुसाद में .

बैठ कुनकुनी धूप में  निहार गुलाब की पंखुड़ी  बुनती हूँ धागे ख्वाब के  अरमानो की  सलाई पर. एक फंदा चाँद की चांदनी  दूजा बूँद बरसात की  कुछ पलटे फंदे तरूणाई के कुछ अगले बुने जज़्बात के .... सलाई दर सलाई बढ
 
shikha varshney
पसंद करें
9
नापसंद करें

एक दिन एक गाँव में...

शहर की भीडभाड ,रोज़ के नियमित काम ,हजारों पचड़े ,शोरगुल.. अजीब सी कोफ़्त होने लगती है कभी  कभी उस पर कुछ काम अनचाहे और  आ जाएँ करने को तो बस जिन्दगी ही बेकार ..ऐसे में सुकून के कुछ पल जैसे जीवन अमृत का काम करते हैं ओर उन्हीं को खोजने के लिए इस
 
shikha varshney
पसंद करें
7
नापसंद करें

मैं एक कविता बस छोटी सी

मैं एक कविता बस छोटी सी  हर दिल की तह में रहती हूँ.   भावो से खिल जाऊं  मैं  शब्दों से निखर जाऊं मैं   मन  के अंतस  से जो उपजे मोती  सी यूँ रच उठती हूँ. मैं एक कविता बस छोटी सी  हर दिल की
 
shikha varshney
पसंद करें
5
नापसंद करें

ब्लॉगजगत में अनोखी चोरी

ove is lifeअपने बारे में कुछ कहना कुछ लोगों के लिए बहुत आसान होता है, तो कुछ के लिए बहुत ही मुश्किल और मेरे जैसों के लिए तो नामुमकिन फिर भी अब यहाँ कुछ न कुछ तो लिखना ही पड़ेगा न तो सुनिए. by qualification एक journalist हूँ हमने शुरू कर दी स्वतंत्र
 
shikha varshney
पसंद करें
8
नापसंद करें

उसका / मेरा चाँद

एक नौ निहाल माँ का एक खिड़की से झाँक रहा था साथ थाल में पड़ी थी रोटी  चाँद अस्मां का मांग रहा था माँ ले कर एक कौर रोटी का उसकी मिन्नत करती थी लाके देंगे पापा शाम को उससे वादा करती थी पास खड़ा एक मासूम सा बच्चा  उसको जाने कब से निहार रहा
 
shikha varshney
पसंद करें
7
नापसंद करें

वो कौन थी ?

Voronezh Railway Station.वो  कौन थी?..जी ये मनोज कुमार की एक फिल्म का नाम ही नहीं बल्कि मेरे जीवन से भी जुडी एक घटना है. बात उन दिनों की  है जब मैं  १२ वीं  के बाद उच्च शिक्षा के लिए रशिया रवाना हुई
 
shikha varshney
पसंद करें
7
नापसंद करें

हिंगलिश रिश्ते

रिश्तों का बाजार गरम है  पर उनका अहसास नरम हैहर रिश्ते का दाम  अलग है हर तरह का माल  उपलब्ध हैकभी हाईट तो कभी रूप कम है  जहाँ  पिता की  इनकम कम है साथ फेरे, रस्में सब, आडम्बर हैं अब तो नया लिव इन का फैशन
 
shikha varshney
पसंद करें
7
नापसंद करें

जन्म दिन हमारा मिलेंगे लड्डू सबको....इस पार्टी में आप सब सादर आमंत्रित हैं

स्पंदन = मेरे मन में उठती भावनाओं की  तरंगे.जिन्हें साकार रूप दिया मेरे इस प्यारे ब्लॉग ने ..जी हाँ इस माह  मेरे स्पंदन का फर्स्ट बर्थडे है .वैसे तो इसकी नींव  २७ अप्रैल को रखी गई थी .परन्तु इसे सुचारू रूप से बढ़ाना मैने 18 मई से शुरू
 
shikha varshney
पसंद करें
6
नापसंद करें

'एक शून्य तृप्ति..!!

आजकल भाव सब सूख से गए हैं आँखों से पानी भी गिरता नहीं परछाई भी जैसे जुदा जुदा सी है मन भी अब पाखी बन उड़ता नहीं पंख भी जैसे क़तर गए हैं. पर फिर भी ये दिल धडकता है ज्यादा इत्मीनान से. ख़ुशी भी झलकती है अपने पूरे गुमान से हाँ पर ख़्वाबों को मेरे जंग लग गई
 
shikha varshney
पसंद करें
6
नापसंद करें

कैमरा ......लाइट ......एक्शन ....और बचपन खल्लास .....

कल एक comedy tv शो के दौरान देखा एक ७-८ साल की बच्ची परफोर्म कर रही थी ..." ओये बहाने बहाने से हाथ मत लगा." .और बहुत ही घटिया और व्यस्क कहे जाने वाले चुटकुले बहुत ही प्रवीणता और मनोयोग  से सुना रही थी . वहां मौजूद लोग खूब तालियाँ बजा
 
shikha varshney
पसंद करें
8
नापसंद करें

महिला ब्लॉगर्स का सन्देश जलजला जी के नाम

कोई मिस्टर जलजला एकाध दिन से स्वयम्भू चुनावाधिकारी बनकर.श्रेष्ठ महिला ब्लोगर के लिए, कुछ महिलाओं के नाम प्रस्तावित कर रहें हैं. (उनके द्वारा दिया गया शब्द, उच्चारित करना भी हमें स्वीकार्य नहीं है) पर ये मिस्टर जलजला एक बरसाती बुलबुला से ज्यादा कुछ नहीं
 
shikha varshney
पसंद करें
6
नापसंद करें

जितने जमीन के ऊपर उतने ही जमीन के नीचे.

                                         A Puppy Face
 
shikha varshney
पसंद करें
9
नापसंद करें

शायद झुलसती गर्मी में ही गर्माते हैं रिश्ते .....मेरा भारत प्रवास------ शिखा

यूँ तो भारत जाना हमेशा ही सुखद होता है ..परन्तु इस बार कुछ ज्यादा ही उत्सुकता थी ..काफी सारी योजनायें बना लीं थीं , बहुत सारे मनसूबे बाँध लिए थे....इस आभासी दुनिया के कुछ मित्रों से वास्तविक रूप में मिलने कि उम्मीद थी.....जी हाँ उम्मीद ही कह सकते हैं ,
 
shikha varshney
पसंद करें
8
नापसंद करें

हम तो जाते अपने गाम सबको राम राम राम

..यहाँ यूरोप में होलिडेज पर जाने का बहुत रिवाज़ है....जब देखो जिसे देखो होलिडेज पर निकल जाता है ...काम का क्या है ? होता रहेगा...रोज़ ही होता है और जहाँ जरा ज्यादा काम का बोझ हुआ कह दिया ..कि हम तो होलिडेज पर जा रहे हैं आकर देखेंगे .यहाँ हर कोई तीन महीने
 
shikha varshney
पसंद करें
7
नापसंद करें

लन्दन के स्कूलों में मनाया जाता है इंडिया डे

जी हाँ ...हम बेकार ही विदेशी इवेंट्स मनाने में हंगामा करते हैं ..कि वेलेंटाइन डे. क्रिसमस ..विदेशी त्यौहार है हम नहीं मनाएंगे इनसे हमारी संस्कृति को खतरा है..परन्तु और कुछ हो न हो थोड़ी व्यावहारिकता, और डिप्लोमेसी हमें इन अंग्रेजों से सीख ही लेनी
 
shikha varshney
पसंद करें
6
नापसंद करें

वक़्त वक़्त कि बात है

कल हमारी बेटी के स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग थी ..,जब हम वहाँ पहुंचे तो देखा कि अजब ही दृश्य था ...एक हॉल में कचहरी की तरह लगीं कुर्सी- मेज़ और खचाखच भरे लोग ..आप उसे सभ्य मच्छी बाजार कह सकते हैं .हर पेरेंट को एक -एक विषय के लिए सिर्फ पांच मिनट पहले से ही
 
shikha varshney
टैग: vyang
पसंद करें
4
नापसंद करें

अहसास

गीली सीली सी रेत में छापते पांवों के छापों में अक्सर यूँ गुमां होता है तू मेरे साथ साथ चलता है..सुबह की पीली धूप जबमेरे गालों पर पड़ती है शांत समंदर की लहरेंजब पाँव मेरे धोती हैंउन उठती गिरती लहरों में अब भीमुझे अक्स तेरा दिखाई देता है.उस गोधुली की बेला
 
shikha varshney
पसंद करें
5
नापसंद करें

हम ऐसे क्यों हैं?

मानवीय प्रकृति पर बहुत कुछ कहा और लिखा गया है ,लोग बहुत कुछ कहना चाहते हैं...कहते भी हैं..परन्तु मुझे लगता है कि ,इस पर जितना भी लिखा या कहा जाये कभी पूरा नहीं हो सकता . तो चलिए थोडा कुछ मैं भी कह देती हूँ अपनी तरफ से.ये एक मानवीय प्रकृति है कि हमें जिस
 
shikha varshney
पसंद करें
5
नापसंद करें

ओमकार से ओम तक कि यात्रा

१८ वीं और १९ वीं सदी के बहुत से पश्चिमी विद्वानों ने ये भ्रम फ़ैलाने की कोशिश की है कि भारत में ३०० - ४०० ईसा पूर्व जिस ब्राह्मी लिपि का विकास हुआ उसकी जड़े भारत से बाहर की हैं ,और इससे पहले भारत किसी भी तरह की लिखित लिपि से अनजान था.इसी सम्बन्ध में डॉ.
 
shikha varshney
पसंद करें
5
नापसंद करें

वहीं जहाँ से आई थी

नारीबंद खिड़की के पीछे खड़ी वो,सोच रही थी कि खोले पाट खिड़की के,आने दे ताज़े हवा के झोंके को,छूने दे अपना तन सुनहरी धूप को.उसे भी हक़ है इसआसमान की ऊँचाइयों को नापने का,खुली राहों में अपने ,अस्तित्व की राह तलाशने का,वो भी कर सकती हैअपने, माँ -बाप के
 
shikha varshney
पसंद करें
0
नापसंद करें

किसी और के वास्ते

एक दिन मुझसे किसी ने कहा था, कि अपने लिए मांगी दुआ कबूल हो न हो पर किसी और के लिए मांगी दुआ जरुर क़ुबूल होती है.ये अहसास बहुत खूबसूरत लगा मुझे ...और सच भी..बस उसी से कुछ ख्याल मन में आये अब ये ग़ज़ल है या नज़्म या कुछ भी नहीं ..ये तो नहीं पता पर एक एहसास
 
shikha varshney
टैग: gazal
पसंद करें
0
नापसंद करें

भंग की तरंग में होली का हुडदंग

होली के त्यौहार पर ,चलो कुछ हुडदंग मचाएं,टिप्पणियाँ तो देते ही हैंइस बार कुछ title बनाये.ब्लॉगजगत के परिवार में.भांति भांति के गुणी जनआज इस छत के नीचेमिल जाएँ सब मित्रगणप्रेम सौहार्द के रंग के साथहै बस थोडा निर्मल हास्यजैसे मीठी ठंडाई मेंमिला दी भंग की
 
shikha varshney
Feb 25 2010 09:04 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

चक्कर घनचक्कर

. इस चक्कर की शुरुआत होती है इंजीनियरिंग डिग्री के बाद किसी maltinational में जॉब ऑफर से ....नया नया जोश और सजने लगते हैं सपने...Onsite के बहाने विदेश यात्रा के ..तभी एक स्पीड ब्रेकर आता है.." कि बेटा शादी कर के जाओ जहाँ जाना है , .एक बार गए तो क्या
 
shikha varshney
पसंद करें
0
नापसंद करें

प्यार बांटते चलो.

प्रेम दिवस ....कहो या valentine day ..कितना खुबसूरत एहसास है ...आज के दौर की इस आपा धापी जिन्दगी में ये एक दिन जैसे ठहराव सा ला देता है ....एक दिन के लिए जैसे फिजा ही बदली हुई सी लगती है ..फूलो की बहार सी आ जाती है...हर चेहरा फूल सा खिला दीखता है..कोई
 
shikha varshney
Feb 18 2010 09:34 PM
पसंद करें
6
नापसंद करें

मेरा हीरो

६ फरवरी .... . मेरे दिल के बहुत करीब है ये तारीख ,मेरे हीरो का जन्म दिवस...जी हाँ एक ऐसा इंसान जो जिन्दगी से भरपूर था ..जीवन के हर पल को पूरी तरह जीता था. एक मेहनतकश इंसान.... जिसके शब्दकोष में असंभव शब्द ही नहीं था,..व्यक्तित्व ऐसा रौबीला कि सामने वाला
 
shikha varshney
पसंद करें
6
नापसंद करें

एक और अंग्रेजी सच

"In my next life I would like to be born an indian" जी नहीं... ये कथन मेरा नहीं ,मुझे तो ये रुतबा हासिल है....यह कथन है एक अंग्रेज़ का ..जी हाँ ठीक सुना आपने वो अंग्रेज़ जिन्हें भारत में कमियां और अपने देश में खूबियाँ ही नजर आती हैं.यह कहना है Sebastian
 
shikha varshney
पसंद करें
5
नापसंद करें

मेरा गिरना तेरा उठाना

तुम्हारे उठने औरमेरे गिरने के बीचबहुत कम फासला था.बहुत छोटी सी थी ये जमींया तो तुम उठ सकते थेया मै ही,मैंने उठने दिया दिया था तुम्हेअपने कंधो का सहारा देकरउसमे झुक गए मेरे कंधेआहत हुआ अंतर्मनपर ह्रदय प्रफुल्लित थाआत्मा की आवाज़ सुनकर.पर आज सबकुछ नागवार
 
shikha varshney
पसंद करें
6
नापसंद करें

स्पंदन ( SPANDAN)

अक्सर हमने बुजुर्गों को कहते सुना है कि ये बाल हमने धूप में सफ़ेद नहीं किये.....वाकई कितनी सत्यता है इस कहावत में ...जिन्दगी यूँ ही चलते चलते हमें बहुत कुछ सिखा देती है और कभी कभी जीवन का मूल मन्त्र भी हमें यूँ ही अचानक किसी मोड़ पर मिल जाता है.अब आप सोच
 
shikha varshney
पसंद करें
4
नापसंद करें

चीत्कार उठी भारत माता

सर उठा रहा भुजंग हैक्रोध, रोष, दंभ हैबेबस है लाल भूमि केशत्रु हो रहा दबंग हैफलफूल रहा आतंक हैऔर सो रहा मनुष्य हैअपनी ही माँ की छाती परवो उडेल रहा रक्त हैजिन चक्षु में था नेह भरावो पीडा से आज बंद हैंमाँ कहे मुझे नहीं देखनामेरी कोख पर लगा कलंक हैनादान
 
shikha varshney
पसंद करें
4
नापसंद करें

किसकी शामत आई है

नजरें. कुछ और कह रहीलब की अलग कहानी हैदेते आगे से मिश्री औरपीछे हाथ में आरी हैकोई बड़ा हुआ है कैसेऔर कोई कैसे चढ़ा हुआ हैखींचो पैर गिराओ भू परये किस की शामत आई है..रख कर पैर किसी के सरबस अपनी मंजिल पानी है.है हाथ दोस्ती का बढा हुआ.दिल से दुश्मनी निभानी
 
shikha varshney
पसंद करें
10
नापसंद करें

वेनिस की एक शाम

Venice cityबहुत साल पहले एक फिल्म आई थी " द ग्रेट गेम्बलर " उसमें अमिताभ बच्चन और जीनत अमान पर एक गाना फिल्माया गया था ...." दो लफ़्ज़ों की है दिल की कहानी " वेनिस में गंडोले (एक तरह की लम्बी नोंक वाली नाव जिसे नाविक उसके पिछले छोर पर खड़ा होकर चलाता है
 
shikha varshney
Jan 19 2010 05:52 PM
पसंद करें
5
नापसंद करें

सीले सपने

उगता सूर्य कल यूँ बोला,चल मैं थोडा ताप दे दूंले आ अपने चुनिन्दा सपने कुछ धूप मैं उन्हें दिखा दूँउल्लासित हो जो ढूंढाकोने में कहीं पड़े थे,कुछ सीले से वो सपने निशा की ओस से भरे थे.गत वो हो चुकी थी उनकीलगा श्रम बहुत उठाने मेंजब तक टाँगे बाहर आकरसूरज जा
 
shikha varshney
पसंद करें
9
नापसंद करें

खुशदीप जी के १० पॉइंट्स का दूसरा रुख

इस पोस्ट की प्रेरणा मुझे खुशदीप जी की पोस्ट से मिली है. अभी १- २ दिन पहले उन्होंने पत्नियों को समझने के १० commandments बताये थे. जो बहुत मजेदार थे सबने बहुत आनंद उठाया ,परन्तु वो सिक्के का एक पहलू था , और दूसरा पहलू न दिखाया जाये तो ये बात तो ठीक नहीं
 
shikha varshney
पसंद करें
5
नापसंद करें

क्या बेबकूफ सिर्फ हम हैं?

आज भी, जब भी विदेशी मीडिया में हिन्दुस्तान का जिक्र होता है तो उसमें सांप भालू का नाच दिखाते लोग ,मूर्तियों को दूध पिलाते लोग दिखाए जाते हैं ,भारत को किस्से कहानियों का ,तमाशबीनों का देश समझा जाता है जिसके नागरिक किवदंतियों और चमत्कारिक कहानियों को अपना
 
shikha varshney
पसंद करें
6
नापसंद करें

मुठ्ठी भर रेत

नया साल फिर से दस्तक दे रहा है ...और हम फिर, कुछ न कुछ प्रण कर रहे हैं अपने भविष्य के लिए ....कुछ नाप तोल रहे हैं ..क्या पाया ? क्या खोया ? ये नया साल जहाँ हम सबके लिए उम्मीदों की नई किरण लेकर आता है ,वहीँ हम सबको आत्मविश्लेषण का एक मौका भी देता है..
 
shikha varshney
पसंद करें
6
नापसंद करें

बर्फ के फाहे

यहाँ आजकल बर्फ पढ़ रही है तो उसे देखकर कुछ ख्याल आये ज़हन में view from my house window . छोटे छोटे रुई के से टुकड़े गिरते हैं नीले आकाश से और बिछ जाते हैं धरा पर सफ़ेद कोमल चादर की तरह तेरा प्यार भी तो ऐसा ही है, बरसता है बर्फ के फाहों सा और फिर ......
 
shikha varshney
पसंद करें
15
नापसंद करें

हे नारी तू हड़प्पा है.

हे नारी तू हड़प्पा है....... अब आप सोच रहे होंगे कि भाई, नारी का हड़प्पा से क्या सम्बन्ध ? तो जी ! जैसे हड़प्पा की खुदाई चल रही है सदियों से, रोज़ नए नतीजे निकाले जाते ,हैं फिर उन्हें अपने शब्दों में ढाल इतिहास बना दिया जाता है ... ऐसे ही बेचारी नारी
 
shikha varshney
पसंद करें
8
नापसंद करें

आँखों का सागर.

सागर भरा है तुम्हारी आँखों में जो उफन आता है रह रह कर और बह जाता है भिगो कर कोरों को रह जाती है एक सूखी सी लकीर आँखों और लबों के बीच जो कर जाती है सब अनकहा बयाँ तुम रोक लिया करो उन उफनती , नमकीन लहरों को, न दिया करो बहने उन्हें कपोलों पे क्योंकि देख
 
shikha varshney
पसंद करें
12
नापसंद करें

अन्तर-जाली रिश्ते.

में प्रकाशित.} एक जमाना था जब पत्रमित्रता जोरों पर थी.देश विदेश में मित्र बनाये जाते थे, उसे ज्ञान बाँटने का और पाने का एक जरिया तो समझा ही जाता था, बहुत से तथाकथित रिश्ते भी बन जाया करते थे।और कभी कभी ब्लेक मैलिंग का सामान भी . आज यही काम इंटर नेट क
 
shikha varshney
Dec 09 2009 04:53 PM