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जालिम हिमाचली

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13 Jan 2010
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जब कुंदन बन जायेंगे दिबांग!

जब कुंदन बन जायेंगे दिबांग! पत्रकार दिबांग पर यह लेख पढने के लिए लिंक पर क्लिक करें. असुविधा के लिए खेद है.
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
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श्रीराम का पुतला कब जलेगा!

श्रीराम का पुतला कब जलेगा! यह ज्वलंत लेख पढने के लिए कृपया ऊपर दिए गये लिंक पर क्लिक करें। अपनी राय से अवगत अवश्य कराएँ।
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
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मैं तो बस कलम चलाता हूँ

गीत और ग़ज़लें नहीं जानतागद्य पद्य को नहीं मानता भावों को कहता जाता हूँ मैं तो बस कलम चलाता हूँनिर्मल सूर्योदय को जिस दिन देखूं पवन किरणों से लफ्ज बनाकर प्रियतमा का चित्र बनाता हूँ मैं तो बस कलम चलाता हूँ सावन के मेघों से रंग ले कर गरजती बिजली संग ले कर
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
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महात्मा गाधीं की आरती

जय श्री बापू प्यारे, जय हम राष्ट्रपिता हमारे। सत्य के थे पुजारी, जय हो अहिसां के रखवारे॥ तुम हो श्रेष्ठ महात्मा तुम हो मार्गदर्शक। तुम सबके रखवारे, तुम सच्चे पथ प्रदर्शक॥ सत्याग्रह भारतछोडो, तुम आन्दोलनकर्ता। गिरमिट कृषक दलित, तुम सबके दुःखहर्ता॥ जय श्री
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
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इन्कारे-इजहार

वे तॊ रूख्सत हॊ गए मेरी मॊहब्बत कॊ इन्कार कहके।बेरूखी यह जान के मेरी आखॊ अश्क भी ना बह सके॥पर यह ना समझ लीजिएगा कि हम उनसे खफा हैं।इश्क तॊ हमने किया है उनकी कहां कॊई खता है॥लेकिन इस कम्बख्त दिल कॊ समझाउँ अब मैं कैसै।उनकी नजरॊं ने फिर मुड के देखा सुकूं
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
Jul 13 2007 08:55 PM
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उडती चिडिया

सरहद सीमा क्या हॊती है,उडती चिडिया क्या जाने,घॊंसला जॊ इधर बना के,दाना चुगने उस पार चली जाती है,वॊ सन् संतालिस का बंटबारा,धरा कॊ बांट दिया जिसने,उडती चिडिया क्या जाने,दर्द क्या हॊता है माँ का,जॊ बच्चॊं से जुदा हॊ जाती है,धर्म के नाम पर लडते हैं जब,नीलाम
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
Jun 27 2007 02:30 PM
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कलयुग में कन्हैया

इस कलयुग में,कन्हैया ने फिर से जन्म लिया है,कारागार में, यमुना के तट पर,शायद तिहाड़ में,कन्हैया ने फिर से जन्म लिया है,पहरेदार फिर से सॊ गए, शायद अफीम के नशे में,हथकडि़याँ खुल गई,रिश्वत दी हॊगी,एक बार फिर से.नन्हे कान्हा कॊ,पिता ने उठाया सिर पे,और यमुना
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
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जनादेश

अब हाथ नहीं फैलाउगां,ना करूगां कॊई याचिका,उन बहरॊं की सभा में,अपनी बात नहीं दॊहराउगां,सब भाइयॊं से मिलकर,अब जनादेश सुनाउगां,बापू के आन्दॊलन कॊ,मुख्यधारा में लाउगां,नहीं सुने गर फिर वॊ तॊ,राजघाट पे मर मिट जाउँगा,पर अब तॊ बस केवल,अपना जनादेश सुनाऊँगा,उन
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
Jun 06 2007 02:50 PM
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पर अब तो मैं बड़ा हो गया हूँ

वो बचपन, वो यादें,मम्‍मी से छोटी-छोटी फरि‍यादें,पर अब तो...........पर अब तो मैं बड़ा हो गया हूं,वो फ्रॉक पहन के उछलना,लुगड़ी के लि‍ए झगड़ना,छोटी-छोटी चैतें करके,छम्‍बों पे जा छि‍पना,पर अब तो..........पर अब तो मैं बड़ा हो गया हूं,मम्‍मी जब दो चोटि‍यां
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
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तकदीर ए ज़ालिम

कि‍सी के नाजुक हाथों से 'जालि‍म' दि‍ल टूट गया वो चले गए और हमसे जमाना रूठ गया इस गम को भुलाने को जाम जो पकड़ा मैनें हाय रे फूटी कि‍स्‍मत मुझसे प्‍याला छूट गया ना जाम मि‍ला ना मि‍ली मोहब्‍बत जो भी मैनें चाहा उसी को कि‍स्‍मत ने लूट लि‍यारूस्‍वाइयों के इस
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
May 24 2007 10:39 PM
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क्‍या बापू सचमुच मर चुके हैं ?

क्‍या हुआ? तुम क्‍यों घबरा रहे होतुम बेरोजगार हो?या कोई चल बसा है?कुछ तो बताओ,तुम्‍हारी चिंता का कारण क्‍या है?तुम कहते हो 'जालि‍म'तो तुम्‍हे बताता हूंपल पल की खबर रखने वालेगूढ़ ज्ञानी खबरी ने कहा हैकि‍ बापू मर गए हैंसबको छोड़ के तर गए हैंलेकि‍न यह कैसे
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
May 22 2007 11:06 AM
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काश! मैं परि‍पूर्ण होता

अकेला सा महसूस करता हूं सौ करोड़ से ज्‍यादा की भीड़ में इसलि‍ए सोचता हूं काश! मैं परि‍पूर्ण होता हर काम अपने दम पे करता कदम बढ़ाता समाज कल्‍याण की राह पर पर कभी कि‍सी से मदद ना मांगता सोचता हूं मैं दीपक होता अ‍ंधि‍यारा मि‍टाता इस जग का फि‍र ख्‍याल आता है
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
May 18 2007 07:43 PM
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हि‍मालय क्‍यों डगमगा रहा है

उधर देखो, हि‍मालय क्‍यों डगमगा रहा हैना कोई भूकंप आया हैना कि‍सी तूफान में ताकत हैफि‍र क्‍या हैजो इस पहाड़ को हि‍ला रहा हैशायद यह नाराज हैहमने जो खून बहाया हैइसकी गोद मेंआतंक का दामन छुपाया हैभारत को चीराऔर पाकि‍स्‍तान को बनाया हैखैर थी इतनी भीपर हमने
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
May 15 2007 05:00 PM
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मेरे प्रश्‍न को हल कर दो

जरा सुनो मेरे प्रश्‍न को हल कर दोतुमने तो पी.एच.डी. कि‍या है डि‍ग्रि‍यों से तुम्‍हारा घर भरा हैमौलवी साहब रूकि‍एअच्‍छा ज्‍योति‍षी जी आप ही सुनि‍एअरे कोई तो मुझे बताओयह जो खून बि‍खरा पड़ा हैमज़हबी दगों की भेटं चढ़ा है यह खून कि‍सका हैहि‍न्‍दू का है या
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
Apr 24 2007 09:12 PM
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रूस्‍वाइयां.................

हिफ़ाजत से संभाल कर रखा था दिल कमबख्त पल भर में तोड़ कर चले गएमेरे जिगर की वि·रासत के टुकड़े महबूब की गलियों में बिखर गएवो शायद चौदहवीं की रात थी और मौसमे बरसात थीसनम चले जा रहे थे अकेले ही नामालुम क्या बात थीपछियों की ना जाने कैसी चहचाहट हुई जमीं पर से
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
Apr 22 2007 03:27 PM
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जमीं वाले चादं की कहानी

इक चादं एसा भी है जि·समें दाग़ ही नहीं हैइत्तेफाक यह भी अजब है बेदाग चादं आसमां में नहीं हैजान लो अब वो राज भी तुम जो कभी दफन हो गएइक भूल हो गई खुदा से और दोनों चादं ही बदल गएहुआ यूं कि दाग़ जिस चादं में था वो तो सितारों में रस गयाऔर कुदरत का करिश्मा
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
Apr 22 2007 03:26 PM
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मयखाने की दास्‍तां......................

मयखानों में पीने वाले भी क्‍या पीते हैंचन्‍द पलों के नशे के बाद फि‍र दुनि‍या में जीते हैं मदहोश तो वो होते हैं 'जालि‍म' जो सदा नशे में रहते हैं जाम नहीं छलकाते वो महबूबा की आखों से जो पीते हैं मयखानों में जाने वाले पैमानों को आजमाने वालेजाम खत्‍म हो जाने
 
SUNIL DOGRA जालि‍म
Apr 21 2007 10:30 PM