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SUBHASH GUPTA KI DIARY

http://subhashddn.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
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22 Jan 2010
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क्या शरद पंवार ही कसूरवार हैं....

केन्द्रीय मंत्री शरद पंवार के बयानों से तो लगता है कि उन्होंने देश को महंगाई की आग में छोंकने का ठेका ही ले रखा है। मंत्री होने के नाते उनसे पूरा देश ये उम्मीद करता है कि वे देश के लोगों को महंगाई से निजात दिलाएंगे। लेकिन हो रहा है इसका एकदम उल्टा। खुद
 
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वरिष्ठ पत्रकार ने मसूरी में भीख मांगी

भडास4मीडिया पोर्टल के संचालक वरिष्ठ पत्रकार यशवंत सिंह भण्डारी हाल ही में अपने परिवार के साथ मसूरी आए हुए थे। अपने परिवार को इधर उधर भेजकर कुछ देर श्री यशवंत ने गीत गाकर बाकायदा भीख मांगी। अपने इस अनूठे अनुभव को यशवंत जी ने अपने पोर्टल पर लिखा है। उन्हें
 
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इसमें साजिश की बू आती है...

कम्पनी लॉ बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष की रिश्वत मामले में गिरफ्तारी से कहीं ज्यादा चौंकाने वाली बात इस पूरे प्रकरण में प्रमुख मीडिया घराने को निशाना बनाने की कोशिश करना है। यह बहुत गंभीर स्थिति है। बढते बाजारवाद के बीच पत्रकारिता करना दोधारी तलवार पर
 
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वी ओ आई : एक बडे झटके से बचा मीडिया जगत

वी ओ आई के मालिक बदल गए हैं। मित्तल बंधुओं ने अमित सिन्हा को ये चैनल बेचने की फाइनल डील पर आखिर हस्ताक्षर कर ही दिए। कुछ महीने पहले तक वी आई ओ के आला पदाधिकारी और स्टाफ को बदला जा रहा था। अब मालिकों में बदलाव आ गया है। इससे करीब दो महीने से बंद इस चै
 
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सिब्बल साहब, आई आई टी से पहले इस लूट से तो बचाएं

बच्चों के कंधे पर बस्ते का बोझ कम करने के दावे सालों से हवा में उछल रहे हैं, लेकिन मासूमों के बस्ते का वजन उनके लिए एक बडा दर्द बना हुआ है। अब आई आई टी में दाखिले के लिए इंटर में 80 – 85 प्रतिशत अंकों की बाध्यता करके उनकी कमर तोडने की योजना समझ से पर
 
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ये भी कोई दिवाली है ... ?

जब सारे देश में ... हर गली मुहल्ले में अंधेरे का राज छाया हो। ऐसे में भला दिवाली मनाने की कोई तुक है क्या ? वो रामराज था। एक राम थे, रावण भी एक ही था। रावण ने सीता जी का अपहरण करके कानून को तोडा। घने जंगल में सीता जी का डेरा था। तब जंगल के सन्नाटे मे
 
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दिवाली पर अंधेरे की दस्तक

रोशनी के त्योहार से ऐन पहले अंधेरा दस्तक देने लगा है। महंगाई की मार तो हम हर साल झेल रहे हैं... लेकिन अब इससे कहीं ज्यादा बडी और ज्यादा गंभीर समस्या नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों के रूप में सामने आ रही है। देहरादून में नकली पनीर और दूध पकडे जाने के
 
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Oct 14 2009 07:56 PM
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ब्लॉगवाणी ...सूरज छिपा नहीं था

ब्लॉगवाणी की वापसी पर सारे हिंदी प्रेमियों और ब्लॉगर दोस्तों को बहुत बहुत बधाई... असत्य पर सत्य की जीत के पर्व पर मेरा वो कथन सही साबित हो गया, जो मैंने कल रात करीब दस बजे अपने ब्लॉग में किया था। कहते हैं कि भगवान से सच्चे मन से मांगी गई मुराद जरूर प
 
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ब्लॉगवाणी ने नहीं कहा कि बंद कर दिया

ब्लॉगवाणी के दुबारा काम शुरु करने की संभावनाएं खत्म नहीं हुई हैं। ब्लॉगवाणी टीम के जिस संदेश को अलविदा संदेश का नाम दिया गया है, उसमें कहीं यह नहीं कहा गया है कि ब्लॉगवाणी को बंद कर दिया गया है। हालांकि ब्लॉगवाणी बंद है । ब्लॉगवाणी टीम के इस संदेश मे
 
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Sep 28 2009 10:06 PM
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आप ही समझाओ दो रावण को...

दशहरा से पहले दिन हाईवे पर लंकेश मिल गए... पुराने रथ की जगह रॉल्स रॉयस में सवार होकर जनाब इवनिंग वॉक पर निकले थे। एक मुंह में महंगा सिगार ... दूसरे में पान मसाला... तीसरे से बबलगम का गुब्बारा फुलाते दशासन की 20 आंखों पर हमर के गॉगल्स दूर से पहचाने जा
 
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नकली दूध पनीर से हैल्थ बनाओ...

हैडिंग पढकर चौंक गए ? क्या जनाब कभी उत्तराखंड नहीं पधारे ? इस देवभूमि के दर्शन कर जाते, तो असली नकली का सारा भेद मिट जाता। गंगा और यमुना का मायका है - उत्तराखंड। बद्रीनाथ – केदारनाथ, हेमकुण्ड साहिब और पिरान कलियर की ये पवित्र भूमि यहां आने वालों को अनूठी
 
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क्या मगरमच्छ ने झूठ बोला ?

हरिद्वार में गंगा में दो मगरमच्छ मिले ...किसी को गंगा में मौत तैरती नजर आने लगी है, कोई महाकुम्भ पर बुरा असर पडने की चिन्ता में दुबला होने लगा है। अपने आसपास फैले मगरमच्छों को हम भूल ही गए । लेकिन एक मगर ने मेरी आंखें खोल दी.... रात एक ख्वाब देखा....
 
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स्वर्ग में पितरों की इमरजेंसी बैठक

श्राद्ध खत्म होते ही पितरों ने इमरजेंसी बैठक बुला ली। स्वर्ग के कोने कोने से पितर इस बैठक में शामिल होने के लिए स्वर्ग की राजधानी पहुंचे। मामला गंभीर नहीं... बहुत गंभीर था। साल दर साल पितरों तक पहुंचने वाले खीर पूरी की मात्रा कम होती जा रही थी। श्राद्ध
 
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हरिद्वार : महाकुम्भ पर मगरमच्छ नहाएंगे या श्रद्धालु ?

हरिद्वार में पहली बार ऐसा हुआ है कि गंगा में मगरमच्छ मिलने लगे हैं । 20 सितम्बर को गंगा में एक और मगर मिल गया । दो दिन के भीतर गंगा में दूसरा मगरमच्छ मिलने से श्रद्धालुओं के होश फाख्ता हो गए हैं । हरिद्वार में महाकुम्भ की तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही
 
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Sep 21 2009 02:00 PM
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क्या आपके पास है जवाब ?

एक नौ सीटर जीप में ज्यादा से ज्यादा कितने लोग बैठ सकते हैं ? ... क्या आप इस सवाल का जवाब दे सकते हैं ? जी हां, आपको पूरी छूट है.... अपने हिसाब से लोगों को एडजस्ट कीजिए... थोडा सा और सरकाइये... घुटने मुडवा दीजिए... किसी को एतराज न हो ... आपको सवारियों की
 
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फिर चमकेगा वी ओ आई

वी ओ आई के स्टाफ के चेहरे पर बहुत दिनों बाद खुशी लौटी है। अपनी दिन रात की मेहनत की पगार मांगने पर जब झूठे वायदे और मुकदमें मिलते हों, तब अचानक कई महीनों से अटका हुआ वेतन पाकर कितनी खुशी होती है....इसे समझना शायद हर किसी के लिए आसान नहीं होगा। चार से छह
 
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Sep 20 2009 09:38 AM
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वी ओ आई यानि एक बडा सबक

वॉयस ऑफ इण्डिया चैनल में जो कुछ हुआ, वह इस चैनल से सीधे तौर पर जुडे देश के सैकडों पत्रकारों के लिए एक दर्द भरी दास्तान और हजारों पत्रकारों के लिए एक सबक बन गया है। वॉयस ऑफ इंडिया की दास्तान छल फरेब की बुनियाद पर टिकी एक ऐसी दुखद कहानी जिसने झूठे सपनों की
 
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Sep 16 2009 08:06 PM
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बेचारी गंगा.....

पतितपावनी गंगा के किनारे बसे उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में महा कुम्भ मेले की तैयारियां चल रही हैं। अगले साल हरिद्वार में गंगा के किनारे ये भव्य मेला शुरु हो जाएगा। महाकुम्भ के मौके पर करोडों श्रद्धालुजन गंगा में नहाने के लिए हरिद्वार आते हैं। हिंदुस्तान
 
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Sep 07 2009 02:04 PM
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चलना जरा संभल कर....

पत्रकारिता की राह इतनी आसान नहीं है, जितनी दूर से नजर आती है। तमाम लोगों को दूर से लुभाने वाले ग्लैमर के पीछे छुपे वे कांटे और तपस्या सहज ही नजर नहीं आती, जिससे तपकर सही मायनों में कोई पत्रकार बनता है। हर पत्रकार को अक्सर खबरों के सूत्र ऐसे लोगों से
 
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पत्रकार या जासूस...

क्राइम की घटनाओं को कवर करने वाले पत्रकार को कई बार किसी जासूस की तरह भी काम करना पडता है। मेरठ की ये घटना इसी की मिसाल है। दिमाग हर वक्त चौकन्ना रहे और हर संभावना को सावधानी से टटोला जाए. तो सच तक पहुंचना जरा भी मुश्किल नहीं होता। भले ही सच को सात तालों
 
SUBHASH GUPTA
Sep 04 2009 05:54 PM
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बच्चे को चूहों ने कुतरा - 2

मैने सबसे पहले अस्पताल से विदा ली। वहां मौजूद अधिकारियों की बात मानने के अंदाज में मैं बाहर निकला और अपना स्कूटर स्टार्ट करके चल दिया। कुछ दूर जाकर मैं लौट आया। ये मेरा काम करने का अंदाज था। मैं वहां से जाने का वहां से लौटने का भ्रम पैदा करके अस्पताल
 
SUBHASH GUPTA
Sep 03 2009 10:25 PM
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बच्चे को चूहों ने कुतरा

पत्रकारिता के दौरान कई बार ऐसी हम घटनाओं की तह तक पहुंच जाते हैं, जिन्हें लोग किसी भी कीमत पर सामने नहीं आने देना चाहते। दरअसल, पत्रकारिता का सबसे आसान तरीका है ... प्रेस कांफ्रेस, बैठक , सम्मेलन और नेताओं के बयान कवर करना। इस तरह की पत्रकारिता आसान भी
 
SUBHASH GUPTA
Sep 03 2009 09:07 PM
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अपनी बात

अचानक एक पुराने दोस्त से मुलाकात होना कम सुखद नहीं होता। यही सुखद अहसास मुझे पुराने दोस्त अशोक मधुप से मिलकर हुआ... हम बीच में भी कई बार मिले थे, लेकिन ढाई दशक बाद ऐसा मौका मिला कि कई घंटे साथ रहे। पुरानी यादें अचानक इस तरह सामने आ गईं , जैसे कल की ही
 
SUBHASH GUPTA
Sep 01 2009 04:03 PM