प्रखर दैनन्दिनी's Image

प्रखर दैनन्दिनी

http://prakhardainandini.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
31 Dec 2009
कुल प्रविष्टियां
13
पाठक भेजे
314
पसंद
56
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
24.15
पसंद करें
7
नापसंद करें

यूँ ही बस इधर-उधर विचरना मन का

डायरी के पन्नों में क्या कुछ आ जाता है..कई बार उसकी कोई खास वज़ह नहीं होती, यूँ ही बस इधर-उधर विचरना मन का...कोई सन्दर्भ- प्रसंग नहीं..बिलकुल ही उन्मुक्त....उनमे से कुछ आपके समक्ष... किस्मत से मै भिखारी हूँ  और किस्मत से ही मुझे  भीख मिलती
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
टैग: ख़ता
पसंद करें
13
नापसंद करें

यदि हर राज्य की शिक्षा प्रणाली में एक स्तर पर मौलिक समानता होती..कई जरूरी विभिन्नताओं के साथ तो...

आज सोचा कुछ कैम्पस-चर्चा हो जाए. JNU की प्रवेश परीक्षा प्रणाली बड़ी अलहदा है. लगभग हर स्कूल के हर सेंटर की थोड़ी अलग-अलग. देश भर में और कुछ देश से बाहर भी इसके सेंटर बनाये गए हैं जहाँ प्रवेश परीक्षाएं एक साथ एक ही समय में लीं जाती हैं. एक खास आकर्षक
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
टैग: jnu
Nov 13 2009 04:53 PM
पसंद करें
13
नापसंद करें

शब्द मेरी माँ जैसे हैं..

आजकल खासा व्यस्त हूँ, और शायद आगे भी रहने वाला हूँ. चाहकर भी मित्रों की ब्लॉग-प्रविष्टियाँ पढ़ नहीं पा रहा हूँ. एहसास है कि क्या खो रहा हूँ...कुछ लिख भी नहीं पा रहा हूँ. पर जल्दी ही सबकुछ व्यवस्थित करने की कोशिश करूँगा. Ph.D. की synopsis का ड्राफ्ट त
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
Nov 09 2009 09:42 AM
पसंद करें
6
नापसंद करें

नयी पौध की नीम के पेड़ पर अर्द्धनारीश्वर चर्चा

अंतरतम से और सर्वत्र से संवाद अल्केमिस्ट में वृद्ध पाउलो कोएलो भी चाहते हैं और जवान चेतन भगत भी. one night @call centre में चेतन भगत inner call की बात करते हैं. सरल इंग्लिश में लिखी गयी किताब, प्रवाहमयी. पर ९०% किताब, व्यक्ति के भौतिक विलासों पर है त
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
पसंद करें
13
नापसंद करें

"सर्वत्र" से संवाद

में राजनीतिक जागरूकता जबरदस्त है, ऐसा शायद ही भारत में किसी और कैम्पस में हो...तो इसमे खास बात क्या है..? खास ये है कि यहाँ आपको अपने व्यक्तिगत राजनीतिक अधिकारों के लिए जरूरी नहीं कि आप किसी खास ग्रुप से हों, परंपरा से यह विकसित हो गया है और मै इसे क
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
टैग: jnu
Oct 16 2009 11:13 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ek naya template

थोड़ी मेहनत की, एक नया टेम्पलेट
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
पसंद करें
1
नापसंद करें

ये ब्लोगिंग में लाठी-बल्लम...?

ये इतना घमासान क्यूँ....? किसको साबित करना चाहते हैं..? किसके  बरक्श....? ये कौनसी मिसाल आप सब बना रहे हैं..? सब, सब पर फिकरे कस रहे हैं. आये थे, कुछ बांटने, ब्लॉग लिखने, कुछ सीखने, कुछ बताने,...., ये क्या करने लगे...? ये बार-बार ब्लोगिंग को गोध
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
पसंद करें
3
नापसंद करें

चीनी खाने और गन्ना बोकर, चूसने में अंतर है, नायपाल जी.

जे.एन. यू में मेरी पहली anchoring जबरदस्त सराही गयी, माँ शारदा को प्रणाम. प्रो. घोष की रसिकता पर मैंने यूं चुटकी ली : "..बदन होता है, बूढा, दिल की फितरत कब बदलती है, पुराना कूकर क्या सीटी बजाना छोड़ देता है....." (संपत सरल) खूब compliments मिले. मुझस
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
पसंद करें
0
नापसंद करें

बापू के जन्मदिवस पर..

गाँधी जी जैसा रीयल परसन अपने जन्मदिन पर आपको निष्क्रिय कैसे रहने दे सकता है.. ?  जितना पढ़्ता जाता हूँ गाँधी जी को उतना ही प्रभावित होता जाता हूँ. गाँधी और मै. मेरे लिये गाँधी जी सम्भवत: सबसे पहले सामने आये दो माध्यमों से ,  पहला -रूपये की
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
पसंद करें
0
नापसंद करें

कल दिन भर एक कहानी में

कल रात लिख नहीं पाया. दर असल कल दिन भर एक कहानी में लगा रहा. कहानी तो एक घंटे में ही पूरी हो गयी थी पर दिन भर उसकी खुमारी में रहा. स्वयं क्या मूल्यांकन कर सकूंगा उस कहानी का पर फिर भी पहली बार मै कहानी पूरी कर पाया. कई बार मैंने कई कहानी शुरू किये लिखना,
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
Sep 12 2009 07:42 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ये मेरी 'प्रखर दैनन्दिनी

जब पहली बार ब्लॉग का कांसेप्ट सुना था तो मन में बात यही बनी थी की यह एक ऑनलाइन डायरी है, पर ब्लॉग बनाया तो सारी लेखनी उड़ेलने का मन हुआ और लिखा हुआ सब कुछ ब्लॉग पर आ गया....आज मन में आया क्यों ना एक डायरी बना ही ली जाये .....रोज का रोज तो लिखना संभव नहीं
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
पसंद करें
0
नापसंद करें

आधी रात हो चली है.

आधी रात हो चली है. दिल्ली में झमा-झम बारिश हो रही है. काश के ये बारीश जुलाई-अगस्त में हुई होती तो मेरे पापाजी को कड़ी धूप में खेतों में पानी ना चलवाना पड़ा होता.उनकी तबियत ख़राब हुई सो अलग.JNU के इस ब्रह्मपुत्र हॉस्टल में बैठा-बैठा मै कई बार ये सोच रहा
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
टैग: jnu
पसंद करें
0
नापसंद करें

Diary

“The life of every man is a diary in which he means to write one story, and writes another; and his humblest hour is when he compares the volume as it is with what he vowed to make it”James Matthew Barrie
 
श्रीश पाठक 'प्रखर'
टैग: diary
Sep 10 2009 10:04 AM