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शिल्पकार के मुख से

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10 Jun 2010
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आया यौवन का ज्वार--एक गीत

रामेश्वर शर्मा जी छत्तीसगढ एक जाने माने कवि एवं साहित्यकार हैं। इन्होने कई छत्तीसगढी फ़िल्मों के लिए गीत लिखे हैं। हिन्दी और छत्तीसगढी में निरंतर लेखन कार्य करते हैं। साथ ही साथ भोजपुरी में भी लिखते हैं। इनकी साहित्य यात्रा एवं जीवन वृत्त बाद में लिखुंगा।
 
ललित शर्मा
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मैं बादल की सहेली

हवा है मेरा नाम मैं बादल की सहेलीआकाश पे छा जाती हूँ मैं बनके पहेलीआँधियों ने आ के मेरा घर बसायाआकाश के तारों ने उसे खूब सजायाचली जब गंगा की ठंडी पुरवैयाधुप के आंगन में खिली बनके चमेलीचुपके आ के कान में बादल ने ये कहाभर के लाया हूँ पानी तू धरती पे
 
ललित शर्मा
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एक मुलाकात प्रसि्द्ध कवि ताऊ शेखावाटी जी के साथ...........!

आज ताऊ शेखावाटी जी का सवाई माधोपुर से फ़ोन आया कि वे 7 जुन को मेरे पास पहुंच रहे हैं, तो याद आया कि उन पर एक पोस्ट पेंडिंग है, ताऊ जी के साथ मैने 1998 में नासिक में कविता पढी थी, तब मेरा ताऊ जी से प्रथम परिचय हुआ था। ताऊ जी राजस्थानी के माणीता कवि हैं।
 
ललित शर्मा
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देगें ईंट का जवाब उनको गोलों से-------ललित शर्मा

काल के कपाल पर नित प्रहार करेंगे,हम  सिपाही है दुश्मन से नही डरेंगे ।देगें ईंट का जवाब उनको गोलों से, हम बर्फ़ के नहीं है जो आग से डरेंगे।जिनकी पीढियाँ करते आई युद्ध यहां,हमेशा कफ़न बांध कर वो ही लड़ेगें ।युद्ध का मैदान सजा छोड़ रहा अर्जुन,सोचता था मेरे
 
ललित शर्मा
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कितना वह मजबूर था--श्रमिक दिवस पर विशेष

आज एक मई श्रमिक दिवस है, श्रम शील हाथों को समर्पित एक पुरानी रचना पेश कर रहा हुँ। आशा है कि आपको पसंद आएगी।  दुनिया बनाई देखो उसने कितना वह मजबूर थाएक जून की रोटी को तरसा मेरे देश का मजदूर थाचंहु ओर हरियाली की  देखो एक चादर सी फैली
 
ललित शर्मा
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माँ, पत्नी और बेटी------एक कविता-------->>>>>ललित शर्मा 0:-

पुरुष का जीवन मातृशक्ति के ईर्द-गिर्द ही घुमता है, उसे सबकी सुननी पड़ती है, माँ का हक होता है पुत्र पर तो पत्नी भी उतना ही हक जताती है फ़िर पुत्री भी पिता पर अपना हक प्रदर्शित करती है, इन सब के बीच उसे एक कुशल नट की तरह संतुलन बनाना पड़ता है, जरा सी भी चुक
 
ललित शर्मा
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अवधपुरी मा चल जाबो रे----रामनवमी विशेष---------ललित शर्मा

अयोध्या नगरी मे भगवान रामचंद्र जी ने जन्म लिया-छत्तीसगढ प्रदेश (दक्षिन कोसल) उनका ननिहाल है। यहां पर भगवान का जन्मदिवस धुम धाम से मनाया जाता है, लोक गीतों में भगवान की स्तुति की जाती है। प्रस्तुत है परम्परागत लोक गीत-----चलो जाबो रे अवधपुरी मा चल जाबोजनम
 
ललित शर्मा
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सुनिए एक अद्भुत गीत --सिंदुर ला खोजे वो-----------------ललित शर्मा

आज नवरात्र पर फ़िर एक गीत लेकर आया हुँ भाई दुकालु राम यादव जी का। आप सुने अद्भुत गीत है आनंद अवश्य आएगा।सिंदुर ला खोजे वो.......गीत-भाई दुकालु राम यादव जी से साभारप्रस्तुतकर्ताशिल्पकार
 
ललित शर्मा
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सुनिए--जस गीत "महामाया के दर्शन कर लो"--ललित शर्मा

नवरात्र पर्व पर आज सुनिए दुकालु राम यादव जी के द्वारा गाया गया जस गीत "महामाया के दर्शन कर लो"महामाया के दर्शन कर लोदुकालु राम यादव जी से साभारप्रस्तुतकर्ताशिल्पकार
 
ललित शर्मा
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आपने कल पढा था---आज सुनिए--"कोयलिया कुहु कुहु बोले ना"

कल आपसे वादा किया था कि माता का जसगीत आपको सुनाने का प्रयास करुंगा। मेरा प्रयास पुरा हुआ और मै उसे आपके लिए लाने में सफ़ल हुआ। छत्तीसगढ के भजन सम्राट दुकालु राम यादव के "राम लखन तोर जंवारा" से यह गाना लिया गया हैं। हम उन्हे धन्यवाद देते हैं कि छत्तीसगढ की
 
ललित शर्मा
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नवरात्री मे माता का एक जसगीत-------ललित शर्मा

अभी नवरात्री मे माई के सेवा गीत गुंज रहे हैं तथा मेरी इच्छा है कि आपको सुनाए भी जाएं। इसके लिए मेरी कोशिश जारी है। सफ़लता मिलते ही सुनाने के व्यवस्था करुंगा। प्रस्तुत है माता का एक जसगीत (यश गीत)आबे आबे ओ मोर दाई आबे आबे ओ मोर दाई, हिरदे के गाँव मा तोर
 
ललित शर्मा
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रन बन रन बन हो SSS-----ललित शर्मा

नवरात्रों की धुम जोरों पर है। छत्तीसगढ़ मे जसगीत गाने वाली सेवा टोलियां जंवारा स्थल पर जाकर देवी माता की सेवा कर रही हैं, जगह-जगह जंवारा गीत गाए जा रहे है- जवाँरा से तात्पर्य ठंड मे बोए जाने वाला धान्य जौ से है। जंवारा छत्तीसगढ़ मे शक्ति की देवी दुर्गा
 
ललित शर्मा
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सज्जनाष्टक नामक सुदीर्घ काव्य------ललित शर्मा

गतांक से आगे--  शिवरीनारायण में भारतेंदु मंडल के तर्ज पर ठा. जगमोहन सिंग मंडल का अभ्युदय हुआ. जिसमे इस मंडल के आठ कवि  प्रमुख थे इन कवियों को लेकर ठा.जगमोहन सिंग ने सज्जनाष्टक नामक सुदीर्घ काव्य की रचना की. प्रस्तुत है
 
ललित शर्मा
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ठाकुर जगमोहन सिंह-एक अद्भुत रचनाकार------ललित शर्मा

ठाकुर जगमोहन सिंह एक जाना पहचाना नाम है खड़ी बोली के  गद्य को संवारने और गढ़ने वाले साहित्य करों में. बनारस के क्वींस कालेज में अध्ययन के दौरान वे भारतेंदु हरिश्चंद्र के सम्पर्क में आए तथा यह सम्पर्क प्रगाढ़ मैत्री में बदल गया जो की जीवन पर्यंत बनी
 
ललित शर्मा
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उल्लासोपरांत पतझड़ का मौसम आपके लिए---------स्वागत कीजिए इसका भी........ललित शर्मा

होली बीत गई अब पतझड़ आ गया है........वातवरण में गर्माहट है.........पेड़ों के पत्ते पीले पड़ रहे हैं........ वृक्ष अपना क्या कल्प कर रहे हैं इस मौसम में पूरण पत्ते छोड़ कर नए धारण कर रहे हैं जैसे कोई अपनी क्या चमकाने कपडे बदल रहा हों....... पलाश के पेड़ों पर
 
ललित शर्मा
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लाल -गुलाल -अबीर के छाये हए हैं रंग-----चित्र होली के----------ललित शर्मा

कल होली का हुआ धमाल-हम तो सुबह से ही तैयार हो कर अपने दालान में बैठ चुके थे.........हमारे यहाँ परंपरा है कि लोग अपने से बड़े (पद, प्रतिष्ठा, उम्र और अजीज मित्र ) को पताशों के बने हुए मीठे हार पहनाते हैं........ बहुत ही अच्छी परंपरा है कि होली में कडुवाहट
 
ललित शर्मा
Mar 02 2010 12:04 PM
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तभी समझना यार आ गयी है मस्तानी होली ---होली पर विशेष धमाका------ललित शर्मा

आज होली का त्यौहार है..........होलिका की दहन की तैयारी हो रही है..........बस आज रात नगाड़े कुछ जोर पर रहेंगे फाग अपनी चरम सीमा पर .................और कल होली के रंग गुलाल की बौछार होने वाली है आज ट्रैफिक भी जाम रहेगा.....लोग जल्द से जल्द अपने घर पहुँचने
 
ललित शर्मा
Feb 28 2010 07:14 AM
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रंग रंगीले रसिया के छल से भीगी नव-चोली -------------हो्ली है------ललित शर्मा

होली के अवसर प्रकाशन के लिए एक गीत लिखा था, जब ब्लाग जगत पे फगुनाहट की आहट हुयी तो उसे भेज दिया सम्मानित कराने के लिए, ...........चलो लगे हाथ बहती गंगा में स्नान कर लिया जाए....सम्मान भी हुआ और फगुनाहट पर हमारा गीत दुसरे नंबर पर था.......उपविजेता घोषित
 
ललित शर्मा
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चंदू घर के अन्दर ही नगाड़े पीटने लग गया है.! होली है-भाई होली है "ललित शर्मा "

परसों होली है, नंगाड़ों की मधुर ताल वातावरण कों होली मय कर रही है. कल शाम कों हमारे घर में नगाड़ों की आवाज सुनाई दी. तबियत नासाज होने के कारण मैं सोया हुआ था. देखा तो चंदू घर के अन्दर ही नगाड़े पीटने लग गया है. भाई होली है......बच्चों बूढों सभी के मन में
 
ललित शर्मा
Feb 26 2010 11:50 AM
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मोहन खेलै होरी------होली का रंग-चढ़ गई भंग..........ललित शर्मा ........

फागुन का मौसम है और होली अब कदम बढाते हुए दरवाजे तक पहुँच गई है. हमारे ग्रामांचल में कृष्ण और राधा के होली के फाग गए जाते हैं. गोपियों संग खेली कृष्ण की होली मशहूर है. होली के इर्द-गिर्द बैठ कर जब नगाड़ों की धुन के साथ ये फाग गाये जाते हैं वातावरण होलीमय
 
ललित शर्मा
Feb 25 2010 04:24 AM
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फागुन में जरा सा तुम महक जाओ !! (ललित शर्मा)

फागुनी मौसम हो गया है....प्रकृति ने अपनी मनोरम छटा बिखेर दी है....... कल शाम को खेतों की तरफ गया था तो देखा कि वातावरण में भीनी-भीनी खुशबु है जो मद मस्त कर दे रही है....... डूबते हुए सूरज की छटा निराली है. ऐसे उनका याद आ जाना गजब ढा गया........कभी इन
 
ललित शर्मा
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काहे को सताय,बाली उमर लरकैया--होली की तरंग (ललित शर्मा)

बस अब फ़ाग-राग और होली का धमाल-व्यंग्य के तीर और स्नेह का गुलाल, ब्लाग जगत मे भी उड़ना शुरु हो गया है। होली का रंग दिखने लगा हैं भंग के साथ---यही होली की रीत है--यही मानुस की प्रीत है----होली के फ़ाग गीतों मे अपुर्व श्रृंगार भरा है। प्रेम उमड़ने लगता
 
ललित शर्मा
Feb 23 2010 10:14 AM
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हो्ली आई रे! होली आई रे! आईए होली का स्वागत करें!!!

हमारे ३६ गढ़ में होली का माहौल परम्परागत रूप से बसंत पंचमी से ही प्रारंभ हो जाता है. होलीका दहन स्थल पर पूजा करके अंडा(एरंड) का पेड गड़ाया जाता है प्रति दिन उसके बाद शाम होते ही नवजवानों की टोली नंगाड़ों के साथ फाग गीत गाते है जिसकी लय और तन इतनी उत्तेजक
 
ललित शर्मा
Feb 21 2010 04:48 PM
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गज़ब कहर बरपा है महुए के मद का भाई........ जोगीरा सर र र र र र र हो..... जोगी जी (ललित शर्मा)

फ़ागुन का मौसम है बस अब मन के रंग-अबीर-गुलाल उड़ रहे हैं, दिलों पर भी मस्ती छाई और हम भी मस्ती मे हैं,  होली आने को जो है, अब उड़े रे रंग गुलाल। अभी से माहौल बन रहा हैं। प्रकृति ने भी अपने समस्त रंगो को धरा पर बिखेर दिया है। सभी झूमे जा रहे हैं, हम
 
ललित शर्मा
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भंग का रंग........जोगी जी.... जरा....बच के.....!!!

होली का माहौल बन रहा है. रंग-अबीर-गुलाल और गारी-ठिठोली भी चलेगी जम कर भंग भी घुटेगी और ठंडाई के साथ छनेगी-चढ़ेगी. ऐसे हालत में कभी कभी लोग अपने घर का ही रास्ता भूल जाते हैं या बुरा ना मानो होली है कह के थोड़ी "मौज लेने" के चक्कर में रहते हैं. अगर कहीं फँस
 
ललित शर्मा
Feb 11 2010 05:00 AM
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ब्लाग जगत है तैयार-बह रही फ़ागुनी बयार (बिरहा फ़ाग)

बसंत ऋतू आ गई है, वातावरण में रौनक छा गई है-आभासी ब्लाग जगत भी इससे अछूता नहीं है. कहीं ढोल-नंगाड़े बज रहे हैं. कही आचारज जी काला मोबिल आईल लेकर तैयार हैं पोतने को. गिरिजेश भाई ब्लागर की अम्मा से गोइठा-गोइठी सकेल रहे हैं. बस यूँ मानिये की फागुन का स्वागत
 
ललित शर्मा
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एक प्रार्थना है !!!!!(ललित शर्मा)

हम मानते हैं कि ईश्वर नाम की कोई अदृश्य शक्ति है जो इस संसार,चराचर जगत को चला रही है नियंत्रित कर रही है. पूरा ब्रह्माण्ड उसी के अधीन है. हम मानते हैं कि संसार की सत्ता के चलाने वाले वही हैं. हम सुखों और दुखों दोनों में उनको ही याद करते हैं. यह प्रार्थना
 
ललित शर्मा
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हमने लगाना चाहा मुहब्बत का शजर!!

हमने लगाना चाहा मुहब्बत का शजरमौसम मे किसने घोला है  बहुत जहरमामला संगीन हुआ वो लाए हैं खंजरपता नही कब दिखाए लहुलुहान मंजरबहुत ख़ामोशी होती है तूफान के पहलेलावा पिघलता ही है फौलाद के पहले छल करने वालों ने क्या सोचा है कभी अंगारे सुलगते हैं
 
ललित शर्मा
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एक कविता -अपनी-अपनी गति की ओर "ललित शर्मा"

एक सूखी टहनी परकुछ बुँदे स्वाति मेह की अनायास ही टपक गईउसने उठ कर अंगडाई ली बंधन चरमरा उठे जोड़ के टांके चटक गएजनम रहा था नया वृक्ष मै आनंदित था किअपनी ही शाख को धरती के सीने में जड़ें रोपकर पुष्पित पल्लवित होते देखूंगाएक सिरहन सी रगों में
 
ललित शर्मा
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कविता का स्वंयवर!!

नव वधु सी लजाती सकुचाती आईवह कविताबिना टिप्पणीबैरंग लिफ़ाफ़े सीलौट आईवह कविताकुछ दिन बादकविता का स्वंयवररचा गयाकर माल लिएरावण को वर आईवह कविताक्योंकिभरी सभा मेरावण ने धनुषखंडित किया अप्रीतम कोवर आई वह कविताआपकाशिल्पकार
 
ललित शर्मा
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इसे अवश्य पढिए-अच्छे लोग किनारे हो गए!!!

कल रात की बात है, हम कुछ लिख रहे थे तभी चैट पर हमारे बड़े भाई गिरीश पंकज जी का आगमन हुआ और उन्होंने पूछ "फौजी भाई क्या हाल चाल है"  हमने कहा नमस्ते भैया सब ठीक है. आनंद है. आज आप हिंदी में लिख रहे हैं. तो गिरीश भाई बोले" कट पेस्ट का जमाना है इस लिए
 
ललित शर्मा
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लाँघ पाऊँ बाधाओं को!!

मरीचिकामृगतृष्णाअतृप्त चक्षुअतृप्त आत्मामन चातकव्याकुल अनवरतजीवन दुर्भरकांक्रीट की दीवारेंटूटती नहींबाधाएं लाँघ नहीं पायाअग्नि ज्वालायें धधकती सीने मेंपुन: उर्जानिर्मित करनेपुन: कोशिश करूँलाँघ पाऊँ बाधाओं कोतृप्ति तभी संभव है.आपकाशिल्पकार
 
ललित शर्मा
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जागो मेरे प्यारे धरती पुत्रों -अपना लक्ष्य संधान करो-गणतंत्र दिवस

जागो मेरे प्यारे धरती पुत्रों तुमराष्ट्र हित में कुछ काम करोगणतंत्र दिवस की पावन बेला मेंदेश हित में कुछ संकल्प करोभीष्म प्रतिज्ञा बिना नही देखोहोता है महान काम कोई जब तक आगे ना आये तोहोता नहीं बलिदान कोईसुसुप्त जाति की मृत रगों मेंतुम प्राणों
 
ललित शर्मा
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एक कवि लड़ रहा दो मोर्चों पर-लोकतंत्र शर्मिंदा है!! (गिरीश पंकज)

डी. आई. जी. का डंडा महिला पर चलने से एवं कलेक्टर द्वारा मातहत कर्मचारी को थप्पड़ मारने से एक कवि का मन आहत हुआ और आक्रोश से भर उठा. कलम करने लगी  व्यवस्था पर चोट. गिरीश भाई ने आज इस विषय पर एक कविता कही है. तन बुखार से जूझ रहा है और मन दुष्ट
 
ललित शर्मा
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इंसानो जैसे दुसरों पर नहीं हंसते बंदर!!

अखबारी कविता-रद्दी पेप्योर से उठाए गए शीर्षक-आशीर्वाद चाहुंगाआक्रामक तेवरनही चलाने देगें टैक्सीसरकार का कोईलेना देना नहीसबसे बड़ी गिरावटइस साल कीएक औरटैक्सी चालक पर हमलाधुमिल होती छविएक्सरसाईज सेपाएं चेहरे मे रौनकये काले दागहटेंगे कैसे?इंसानो जैसे दुसरों
 
ललित शर्मा
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अब बोझा उतार दो एटलस!!

बसंतागमनजुझ रही हैं कोहरे से सुर्यकुमारियाँ किसी मजदुर की तरह एक जुन की रोटी के लिए बोझा ढोता एटलसपृथ्वी का भारकांधे  पर लादेचलता है अनवरतभुख मिटाने के लिएपर्चे बांटे जा रहे हैंबाजार मेभुख मिटाने वालासल्युशन बनकर हैतैयारअब बोझा
 
ललित शर्मा
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कब तक युवा रहेगा बसंत?

सुरसा मुख सीबढती मंहगाईकोल्हु के बैल कंधों परगृहस्थी का जुड़ा डालेप्राण वायु मे घुलता जहररसायन से मौत उगलते खेतबोझ से झुकी कमरदीमक लगी उमरजो नित चाट रहीजीवन रेखाघुटने साथ नही देतेलेकिनवो कहते हैंबसंत बुढा नही होताकोई उनसे पूछेमोतियाबिंद सेअंधी हुई आंखे
 
ललित शर्मा
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आएगा ॠतुराज बसंत मेरे द्वार!!

आज बसंत पंचमी है और प्रकृति का सबसे सुहाना मौसम प्रारंभ हो रहा है। कवियों इस मौसम का गुणगान करते हुए ना जाने कितने ग्रथ रच दिए। इस मौसम का आनंद ही कुछ और है। बस कुछ दिन बाद पलास के फ़ुल खिलेंगे एक हरितिमा मिश्रित लालिमा से धरती का श्रृंगार होगा। महुआ के
 
ललित शर्मा
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जीत लिया युद्ध!

कोहरे का कहरटिक ना सकाधरती परछोटी-छोटीकिरणो नेएक होकरजीत लिया युद्धअंधेरे सेसुर्योदय हुआआपका शिल्पकार
 
ललित शर्मा
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पनघट मैं जाऊं कैसे?

पनघट मैं जाऊं कैसे, छेड़े मोहे कान्हा पानी      नहीं    है,    जरुरी   है   लानाबहुत   हुआ  मुस्किल, घरों  से  निकलना पानी  भरी  गगरी को,सर पे रख के
 
ललित शर्मा