भारतीय वास्तु शास्त्र's Image

भारतीय वास्तु शास्त्र

http://bhartiyavastu.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
13 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
62
पाठक भेजे
835
पसंद
22
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
13.47
पसंद करें
0
नापसंद करें

त्याग दो ऐसा त्रिभूज

त्रिभुज जहाँ कहीं बने , समझ उसे त्रिशूल ।दिन-दिन भारी कष्ट दे , कभी न कर तू भूल ।।कभी न कर तू भूल, हो मुकदमा बिना बात।धन का होवे धूल, धूल उड़ेगी दिन-रात।।कह ‘वाणी’ कविराज, जेल जाय अग्रज-अनुज।बिताय चैदह साल, त्याग दे ऐसा त्रिभुज।।शब्दार्थ: त्रिशूल = तीन
Jun 14 2010 09:29 AM
पसंद करें
1
नापसंद करें

सर्वश्रेष्ठ प्लाट

भर्जा जेब जनाब की, जब प्लाट का विचार |सर्वश्रेष्ठ वह प्लाट है , जो हो वर्गाकार ।।जो हो वर्गाकार, नब्बे-नब्बे के कोण |विकर्ण रहे समान, ढ़ाल हो ईशान कोण ||कह `वाणी´ कविराज , चार पथ उतारे कर्जा ||नो पीढ़ी आराम ,स्वत: सब खुशियाँ भार्जा शब्दार्थ : विकर्ण =
पसंद करें
1
नापसंद करें

पति बजाएगा तबला

तबला जैसी भू जहाँ, है पूरी बेकार।तुम सौदा कैंसल करो, करके तुरंत तार।।करके तुरंत तार, जी भर बजाओ ताली।नहीं तो वही प्लाट, कर देय धन से खाली।।कह 'वाणी' कविराज , सुनले बात तू अबला।धंधा पानी छूट, पति बजाएगा तबला।। शब्दार्थ: बेकार = व्यर्थ, कैंसल = निरस्त ,
May 31 2010 03:38 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

धनुष सरीखा प्लाट

धनुष सरीखे प्लाट में, चले हृदय पर तीर।सब बांधव बैरी बने, आँसू बहाय वीर।।आँसू बहाय वीर, कोई ना पूछे हाल।होय जिगर का खून, रहे रोज आँखें लाल।।कह ‘वाणी’ कविराज, बनो तुम उसी सरीखे।या झट बेचो आप , प्लाट जो धनुष सरीखे।। शब्दार्थ: हृदय पर तीर = हार्दिक पीड़ा,
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

धनुष सरीखा प्लाट

धनुष सरीखे प्लाट में, चले हृदय पर तीर।सब बांधव बैरी बने, आँसू बहाय वीर।।आँसू बहाय वीर, कोई ना पूछे हाल।होय जिगर का खून, रहे रोज आँखें लाल।।कह ‘वाणी’ कविराज, बनो तुम उसी सरीखे।या झट बेचो आप , प्लाट जो धनुष सरीखे।। शब्दार्थ: हृदय पर तीर = हार्दिक पीड़ा,
May 27 2010 04:11 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मीठी-मीठी भू जहाँ

मीठी-मीठी भू जहाँ , गंध सुहानी देय।सब सुख सुलभ होय वहाँ, कृपा-सिंधु सब देय।।कृपा-सिंधु सब देय, तो बढ़े वंश धन-धान।सभी देय सम्मान, कोर्ट-कचहरी में मान।।कह `वाणी´ कविराज, दु:ख-दर्द सब के भागे।जाय खरीदो प्लाट, भू जहाँ मीठी लागे।। शब्दार्थ : मीठी लागे =
पसंद करें
0
नापसंद करें

त्यागो शूद्रा भूमि

शूद्रा भूमि उसे कहें , काला होवे रंग |कड़वा-कड़वा स्वाद दे , देवे मदिरा-गंध ।।देवे मदिरा-गंध, ठीक-ठाक रहते योग |लोन लेलो भैया, लगालो एक उद्योग ||कह `वाणी´ कविराज , फिर भी बात नहीं जमी ।बनाय वहाँ श्मशान, त्यागो तुम शूद्रा भूमि || शब्दार्थ : मदिरा गंध =
पसंद करें
0
नापसंद करें

पंच अंगुल

Normal 0 false false false EN-US X-NONE X-NONE MicrosoftInternetExplorer4 /* Style Definitions */ table.MsoNormalTable {mso-style-name:"Table Normal"; mso-tstyle-rowband-size:0; mso-tstyle-colband-size:0; mso-style-noshow:yes; mso-style-priority:99;
May 10 2010 10:20 AM
पसंद करें
1
नापसंद करें

त्यागो शूद्रा भूमि

शूद्रा भूमि उसे कहें , काला होवे रंग | कड़वा-कड़वा स्वाद दे , देवे मदिरा-गंध ।। देवे मदिरा-गंध, ठीक-ठाक रहते योग | लोन लेलो भैया, लगालो एक उद्योग || कह `वाणी´ कविराज , फिर भी बात नहीं जमी । बनाय वहाँ श्मशान, त्यागो तुम शूद्रा भूमि || शब्दार्थ : मदिरा गंध =
May 08 2010 03:51 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

अग्नि कोण के रोड़

अग्नि कोण के रोड़अग्नि कोण के रोड़ में, घटे बैंक बेलेन्स ।घट-घट प्राणेश्वर घटे, वाईफ नाॅनसेन्स ।।वाईफ नाॅनसेन्स, फाइनल डिसिजन देवे ।पति की हो प्रजेन्स, कन्सल्ट कभी न लेवे ।।कह ’वाणी’ कविराज, रहे श्रीमानजी मौन ।लेय पत्नी क्रेडिट, रोड़ हो अग्नि कोण ।।
टैग: रोड
Apr 25 2010 08:17 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

पूरब-पश्चिम रोड़

पूरब-पश्चिम रोड़ पूरब-पश्चिम रोड़ हो , हो मर्दों की बात । प्राणेश्वरियाँ प्राण दे, रखे आपकी बात ।। रखे आपकी बात, बढ़े बुजुर्गों का मान । खा मालपुआ खीर , वे दिन-भर चबाय पान ।। कह ’वाणी’ कविराज, जरा करले जोड़-तोड़ । नाज करता समाज , रख पूरब-पश्चिम रोड़ ।।
टैग: रोड
पसंद करें
0
नापसंद करें

उत्तर-दक्षिण रोड़

उत्तर-दक्षिण रोड़ उत्तर-दक्षिण रोड़ का, फिफ्टी-फिफ्टी जान ।वहाँ सभी है मतलबी, बचाय अपनी जान ।।बचाय अपनी जान, पड़ते जान के लाले ।वर किचन देखे ना, वधू दुकान के ताले ।।कह ’वाणी’ कविराज, यूँ करो दुर्गा-शंकर ।अपने-अपने हाल, वे दक्षिण आप उत्तर ।। शब्दार्थ:
टैग: रोड
पसंद करें
0
नापसंद करें

रखलो रोड़ पूरब

रखलो रोड़ पूरब पूरब राखे रोड़ जो, रोड़ा मेटे रोड़।निरोग राखे आपको, धन देवेगा जोड़।।धन देवेगा जोड़, रख बिजली का सामान ।सोना-पीतल बेच, लाल कलर के सामान ।।कह ’वाणी’ कविराज, खुश राखे हमेशा रब ।निकले पूत सपूत, तुम रखलो रोड़ पूरब ।। शब्दार्थ: राखे = रखना, रोड़ा =
टैग: रोड
Apr 11 2010 08:29 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बना न बेचारा बीन्द

बना न बेचारा बीन्द डम-डम-डम डमरू बजे , भू डमरू आकार ।जिसका प्यारा नाम है,करे न कोई प्यार ।।करे न कोई प्यार, आँख में मोतियाबिन्द । नेत्र विकार ऐसा , बना न बेचारा बीन्द ।। कह ’वाणी’ कविराज , कह आज मरूँ कल मरूँ ।नव जीवन तू पाय, बेच वह डम-डम डमरू ।।
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

बना न बेचारा बीन्द

बना न बेचारा बीन्दडम-डम-डम डमरू बजे , भू डमरू आकार ।जिसका प्यारा नाम है,करे न कोई प्यार ।।करे न कोई प्यार, आँख में मोतियाबिन्द । नेत्र विकार ऐसा , बना न बेचारा बीन्द ।। कह ’वाणी’ कविराज , कह आज मरूँ कल मरूँ ।नव जीवन तू पाय, बेच वह डम-डम डमरू ।। शब्दार्थ:
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

धन-धन थानेदार

धन-धन थानेदार चन्द्र सरीखा सदन हो, धन मुश्किल से आय ।रहे न चार दिन वह तो, चोर-चोर ले जाय ।।चोर-चोर ले जाय , ना आवे थानेदार ।बहुत देर से आय , धन मांगे थानेदार ।।कह ’वाणी’ कविराज, ना देखा उस सरीखा ।धन-धन थानेदार ,जो सिंह चन्द्र सरीखा ।। शब्दार्थ: सदन =
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

धन-धन थानेदार

धन-धन थानेदार चन्द्र सरीखा सदन हो, धन मुश्किल से आय ।रहे न चार दिन वह तो, चोर-चोर ले जाय ।।चोर-चोर ले जाय , ना आवे थानेदार ।बहुत देर से आय , धन मांगे थानेदार ।।कह ’वाणी’ कविराज, ना देखा उस सरीखा ।धन-धन थानेदार ,जो सिंह चन्द्र सरीखा ।। शब्दार्थ: सदन =
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

अण्डा जैसा प्लाट

अण्डा जैसा प्लाट अण्डा जैसा प्लाट जो, ले लेवें श्रीमान ।सभी तरफ दुश्मन बढें, रक्षा कर भगवान ।।रक्षा कर भगवान, दो त्यागने की सलाह ।जीवन भर पुकारे, हे ईश्वर हे अल्लाह ।।कह ’वाणी’ कविराज , अपराध बिन खा डंडा ।जीवन बिगड़ा जाय , खाय ब्राह्मण भी अण्डा ।।
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

चमचा देय बनाय

चमचा देय बनाय चमचा जैसी भू जहाँ, चमचा देय बनाय।पंखाकार जिसे कहे, पंखे से धन जाय।।पंखे से धन जाय, जाय दूधिया जानवर।ना रहते पास पशु, कैसे पास रहते नर।।कह ‘वाणी’ कविराज, सब गया कुछ नहीं बचा ।देख जाने वाले, थाली कटोरी चमचा।। शब्दार्थ : चमचा = चम्मच/चापलूस
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

शकटाकार जंमीं

शकटाकार जंमीं शकटाकार जमीं जहाँ, जान जंग-मैदान। बीमारी जाय न कभी , जाय धन और धान ।। जाय धन और धान, क्रोध करते अग्नि-देव । करेगा देव-देव, सुने न कभी महादेव ।। कह ‘वाणी’कविराज , जीवन भर रह बीमार । छोडूँ-छोडँू न कर , छोड़ जमीं शकटाकार ।। शब्दार्थ: शकटाकार =
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

है ! चारभुजा

है ! चारभुजा चार भुजा असमान हो, शून्य होयगा मान। धन भी छोड़े आपको, अंत होय अपमान।। अंत होय अपमान, मन सदैव अशांत रहे। दौड़-दौड़ के जाय, जंगल के एकांत में।। कह ‘वाणी’ कविराज, ढूंढ़े सब अनुज अनुजा । जोड़े लंबे हाथ, मदद कर हे ! चारभुजा।। शब्दार्थ: चार भुजा=प्लाट
टैग: प्लाट
Mar 01 2010 07:56 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मृदंगनुमा भवन

मृदंगनुमा भवन मृदंगनुमा भवन जो, ढोलक जैसा होय।बरतन बाजे ढोल से, ढोली ऐसा रोय ।।ढोली ऐसा रोय, ढोलण परेशां होवे ।डॅाक्टर आवे रोज, श्मशान अचानक जोवे ।।कह ‘वाणी’ कविराज, बदलो यह जीवन ढ़ंग।नई पत्नी आवे, तुम त्यागो यह मृदंग।। शब्दार्थ: ढोली = भवन का मालिक, ढोलण
टैग: भूमि
Feb 25 2010 07:55 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

खरीद ले प्लाट आयत

खरीद ले प्लाट आयत आयत भारी आय दे, दे सुन्दर सन्तान। आय सिद्धियाँ दौड़ के,खूब बढ़ाए मान।। खूब बढ़ाए मान, और बनाय पहलवान। सब शीष यँू झुकाय , जैसे उनके भगवान।। कह ‘वाणी’ कविराज , समझ कुरान की आयत। लेय पैसे उधार , खरीदलो प्लाट आयत।। शब्दार्थ: आयत = आमने सामने
टैग: भूमि
Feb 20 2010 07:47 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

त्याग दो ऐसा त्रिभूज

त्याग दो ऐसा त्रिभूज त्रिभुज जहाँ कहीं बने , समझ उसे त्रिशूल । दिन-दिन भारी कष्ट दे , कभी न कर तू भूल ।। कभी न कर तू भूल, हो मुकदमा बिना बात। धन का होवे धूल, धूल उड़ेगी दिन-रात।। कह ‘वाणी’ कविराज, जेल जाय अग्रज-अनुज। बिताय चैदह साल, त्याग दे ऐसा त्रिभुज।।
टैग: प्लाट
Feb 15 2010 07:41 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

पति बजाएगा तबला

पति बजाएगा तबलातबला जैसी भू जहाँ, है पूरी बेकार।तुम सौदा कैंसल करो, करके तुरंत तार।।करके तुरंत तार, जी भर बजाओ ताली।नहीं तो वही प्लाट, कर देय धन से खाली।।कह 'वाणी' कविराज , सुनले बात तू अबला।धंधा पानी छूट, पति बजाएगा तबला।। शब्दार्थ: बेकार = व्यर्थ,
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

पति बजाएगा तबला

पति बजाएगा तबला तबला जैसी भू जहाँ, है पूरी बेकार।तुम सौदा कैंसल करो, करके तुरंत तार।।करके तुरंत तार, जी भर बजाओ ताली।नहीं तो वही प्लाट, कर देय धन से खाली।।कह 'वाणी' कविराज , सुनले बात तू अबला।धंधा पानी छूट, पति बजाएगा तबला।। शब्दार्थ: बेकार = व्यर्थ,
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

धनुष सरीखा प्लाट

धनुष सरीखा प्लाट धनुष सरीखे प्लाट में, चले हृदय पर तीर। सब बांधव बैरी बने, आँसू बहाय वीर।। आँसू बहाय वीर, कोई ना पूछे हाल। होय जिगर का खून, रहे रोज आँखें लाल।। कह ‘वाणी’ कविराज, हो तुम भी उस सरीखे। या करलो यह काम, दो प्लाट धनुष सरीखे।। शब्दार्थ: हृदय पर
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

धनुष सरीखा प्लाट

  धनुष सरीखे प्लाट में, चले हृदय पर तीर। सब बांधव बैरी बने, आँसू बहाय वीर।। आँसू बहाय वीर, कोई ना पूछे हाल। होय जिगर का खून, रहे रोज आँखें लाल।। कह ‘वाणी’ कविराज, हो तुम भी उस सरीखे। या करलो यह काम, दो प्लाट धनुष सरीखे।।   शब्दार्थ: हृदय पर तीर
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

विश्वकर्मा जयंती पर आप सभी को बहुत बहुत बधाई

विश्वकर्मादेव विश्वकर्मा सुनो, हें प्रथम आर्किटेक्ट ।निर्माण-कार्य की रची , सुन्दर-सुन्दर टेक्ट ।।सुन्दर - सुन्दर टेक्ट , रचि आप अमरावती ।आत्मज प्रभासवसु , मामा गुरु बृहस्पति ।।कह `वाणी´ कविराज, आपने रची द्वारिका ।सब गांवन में जाय , देव फिर रचो द्वारिका
टैग: बधाई
पसंद करें
0
नापसंद करें

शिल्प कला पर सो कुंडलिया "लेखकीय"

ॐ शब्द द्वारा विश्व के सभी देवी-देवताओं को नमन एवं धरतीमाता को साष्टांग दण्डवत् करते हुए वास्तुशास्त्र विषय की इस पुस्तक के बारे में कुछ इस प्रकार निवेदन करना चाहँूगा कि वास्तुशास्त्र सैकड़ों नहीं हजारों वषो पुराना होकर हमारे वैदिक ज्ञान-भण्डार का
पसंद करें
0
नापसंद करें

चक्राकार प्लाट

चक्राकार प्लाट चक्राकार प्लाट जहाँ, किया नया निर्माण। सब पैसा पूरा हुआ , कौन करेगा त्राण।। कौन करेगा त्राण , माता-पिता है पैसा। पैसा रहा न पास, है भाई शत्रु जैसा।। कह `वाणी´ कविराज, करो उसे वगाZकार। कुछ-कुछ भुजा छोड़ो, रख न प्लाट चक्राकार।। शब्दार्थ :
टैग: प्लाट
पसंद करें
0
नापसंद करें

सर्वश्रेष्ठ प्लाट

सर्वश्रेष्ठ प्लाटभर्जा जेब जनाब की, जब प्लाट का विचार। सर्वश्रेष्ठ वह प्लाट है , जो हो वर्गाकार ।। जो हो वर्गाकार, नब्बे-नब्बे के कोण। विकर्ण रहे समान, ढ़ाल हो ईशान कोण।। कह `वाणी´ कविराज , चार पथ उतारे कर्जा। नो पीढ़ी आराम ,स्वत: सब खुशियाँ भर्जा।।
पसंद करें
1
नापसंद करें

मीठी-मीठी भू जहाँ

मीठी-मीठी भू मीठी-मीठी भू जहाँ , गंध सुहानी देय। सब सुख सुलभ होय वहाँ, कृपा-सिंधु सब देय।। कृपा-सिंधु सब देय, तो बढ़े वंश धन-धान। सभी देय सम्मान, कोर्ट-कचहरी में मान।। कह `वाणी´ कविराज, दु:ख-दर्द सब के भागे। जाय खरीदो प्लाट, भू जहाँ मीठी लागे।। शब्दार्थ :
पसंद करें
0
नापसंद करें

त्यागो शूद्रा भूमि

शूद्रा भूमि शूद्रा भूमि उसे कहें , काला होवे रंग | कड़वा-कड़वा स्वाद दे , देवे मदिरा-गंध ।। देवे मदिरा-गंध, ठीक-ठाक रहते योग | लोन लेलो भैया, लगालो एक उद्योग || कह `वाणी´ कविराज , फिर भी बात नहीं जमी । बनाय वहाँ श्मशान, त्यागो तुम शूद्रा भूमि || शब्दार्थ :
पसंद करें
0
नापसंद करें

त्यागो शूद्रा भूमि

शूद्रा भूमि शूद्रा भूमि उसे कहें , काला होवे रंग। कड़वा-कड़वा स्वाद दे , देवे मदिरा-गंध ।। देवे मदिरा-गंध, ठीक-ठाक रहते योग। लोन लेलो भैया, लगालो एक उद्योग।। कह `वाणी´ कविराज , फिर भी बात नहीं जमी । बनाय वहाँ श्मशान, त्यागो तुम शूद्रा भूमि।। शब्दार्थ :
पसंद करें
0
नापसंद करें

पीली हरी जमीं

पीली हरी जमीं पीली हरी जमीं जहाँ , जम-जम बरसे नोट। खट्टा इसका स्वाद है , करो सेठजी नोट।। करो सेठजी नोट, यह देय शहद सी गंध। वैश्या भूमि कहाय , चलाय धन्धे जो बंद।। कह `वाणी´ कविराज, धन देवे धरा पीली। स्वर्णाभूषण पहन, पित्नयाँ पीली-पीली।। शब्दार्थ : जम-जम
पसंद करें
1
नापसंद करें

लेखक परिचय

लेखक शिक्षा अमृत 'वाणी' अमृत लाल चंगेरिया (कुमावत) एम . ए. , एम. एड. व्यवसाय प्राध्यापक (हिंदी) रा उ मा वि सेंथी चित्तौड्गढ़ (राज) पता 134 B प्रताप नगर चित्तौड्गढ़ (राज) फ़ोन +91 1472 244802 (R) +91 9413180558 (M) वेब साईट www.amritwani.com E-mail Id
पसंद करें
0
नापसंद करें

लाल भूमि

लाल भूमि लाल भूमि यह रावरी, राजा देय बनाय। स्वाद कषेला सा लगे, गंध रक्त की आय।। गंध रक्त की आय , यह स्पर्श से लगे ठोस। बनादो राज-भवन , राज बढ़े सौ-सौ कोस।। कह `वाणी´ कविराज, शस्त्र, भण्डार, छावनी। लनाय कारखाना , ऐसी भू यह रावरी ।। शब्दार्थ : कषैला = आँवला
पसंद करें
0
नापसंद करें

श्रीगणेश

श्रीगणेश श्रीगणेश निर्माण का, अच्छा मुहरत देख ।धन मांगे पण्डित सभी, मूषक देखे रेख ।। देखे मूषक रेख , न मांगे एकहुं पैसा ।भवन रेख तत्काल ,भवन हो महलों जैसा ।।कह `वाणी´ कविराज, होय नही बांका केश ।जो जग बांका होय, मनाय प्रभु श्रीगणेश ।। शब्दार्थ : श्रीगणेश
पसंद करें
0
नापसंद करें