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संगेमरमर की नायाब इमारत की धड़कनें सुनों...
ताज के शहर से हूं। उस शहर से जहां तमाम छतों से ताज नज़र आ जाता है। छोटा सा शहर...छोटी ख़्वाहिशों वाला। अपने में सिमटा। उस दिन ..जिसकी ये तस्वीरें हैं...घर में बैठा हुआ था। अचानक...हल्की बूंदाबांदी हुई...मौसम का मिज़ाज बदला...बदली छाई। लगा ताज जाना
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Jun 05 2010 12:01 PM


Shuffle








