जब काव्यम् आरम्भ की गई थी तो हमने उसमें लगातार विदेशी कविता का प्रकाशन किए जाने का निर्णय लिया था । एक तरीका तो यह था कि हम किसी भी महत्वपूर्ण विदेशी भाषा के चर्चित कवि को चुन लेते औए उससे अनुमति लेकर कविता का अनुवाद करते और प्रकाशित कर देते । इसमें
प्रिय काव्य प्रेमियो,कोलकाता : शायद अगस्त, 2002 का महीना था । हम कुछ कविता प्रेमी प्रभात पाण्डेय जी के साथ बैठे चाय की चुस्कियाँ ले रहे थे । कई दिनों से मन में एक चाह थी कि कोई एक ऐसी पत्रिका हो जो केवल कविता पर केन्द्रित हो । चाहते तो और बहुत से मित्र
आसमान पर बादल छाए थे, दिल्ली भी उमस के कारण कोलकाता हुए जा रही थी। अशोक वाजपेयी जी के घर मुझे दस बजे पहुँचना था। समय को लेकर आदतन सजग हूँ इसलिए 9.30 बजे ही सोसाइटी के आसपास पहुँच गया। पूरे क्षेत्र की परिक्रमा करना अच्छा लगा। यह हरा भरा आवासीय इलाक़ा