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मेरा डूंगरपुर

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22 Mar 2010
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बिन पानी सब सून - - - -

आज विश्‍व जल दिवस है, पानी सीमित है ऐसे में सभी लोगों को भी इसे सुरक्षित रखने के लिए प्रयास करने होंगे। डूंगरपुर शहर के बीच ऐतिहासिक गेपसागर झील है। हमारा सौभाग्‍य है कि हमें प्रकृति ने इतना मनोरम वरदान दिया है। शहर की शान गेपसागर झील के पार्श्‍व भाग में
 
कमलेश शर्मा
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होली की मस्‍ती में अंगारों पर दौड़ते ग्रामीण

फागुनी मस्‍ती का पर्व होली डूंगरपुर जिले में अनोखे ढंग से मनाया जाता है। यह वही जिला है जहां पर पत्‍‍थरमार होली का आयोजन भी होता है। इसी जिले के एक गांव कोकापुर में होली की मस्‍ती में ग्रामीण जलती हुई होलिका के दहकते अंगारों पर चलकर श्रद्धाभिव्‍यक्ति
 
कमलेश शर्मा
Mar 03 2010 05:31 PM
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डूंगरपुर की खूनी होली

आज तक आपने कभी सुना या देखा नहीं होगा कि किसी जगह खून बहाकर होली खेली जाती है। आईये मैं आपको दिखाता हूँ मेरे डूंगरपुर जिले के एक गांव भीलूड़ा में सदियों से एक दूसरे पर पत्‍थर बरसा कर खून बहाया जाता है और होली का आनंद उठाया जाता है। जी हां, यदि आप इस
 
कमलेश शर्मा
Feb 26 2010 09:45 AM
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रंग रूप वेश भाषा सारे ही एक हैं

मेरा डूंगरपुर वाकई अद्भुत, अनूठा और गौरवशाली है। यहां की अनूठी परम्‍पराएं, भोले भाले लोग और वैभवशाली संस्‍कृति वास्‍तव में सबसे अलग ही है। कुछ दिनों पहले देश का सबसे बड़ा आदिवासी मेला जिले के बेणेश्‍वर धाम पर आयोजित हुआ, इसमें लाखों जनजातिजन भी सम्मिलित
 
कमलेश शर्मा
Feb 24 2010 05:26 PM
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खुशी मिली इतनी कि

इन दिनों पूरा राजस्‍थान गांवों की सरकार चुन रहा है। ऐसा ही कुछ डूंगरपुर जिले में भी हो रहा है। कल देर राञि ग्राम पंचायतों के सरपंचों के लिए मतदान उपरान्‍त मतगणना हुई और अल सुबह ही अधिकांश ग्राम पंचायतों के लिए चयनित सरपंचों की घोषणा भी हुई। इस घोषणा के
 
कमलेश शर्मा
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सिर्फ एक फोटो

कुछ व्‍यस्‍तताओं के कारण कई दिनों के बाद यह पोस्‍ट कर रहा हूँ, शायद इस वर्ष की यह पहली पोस्‍ट होगी। इस फोटो के साथ इस वर्ष के क्रियेशन का शुभारंभ करता हूँ, शायद पोस्‍ट पसंद आएगी।
 
कमलेश शर्मा
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पानी या चांदी

मानसून मेहरबान हुआ तो नदी-नाले सब लबालब हुए। लबालब होकर छलके तो एक ऐसा नज़ारा साक्षात हुआ जिसमें पानी के स्‍थान पर चांदी बहती दिखाई दी। प्रस्‍तुत है एक ऐसा ही नज़ारा।
 
कमलेश शर्मा
Dec 29 2009 11:58 AM
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मंदिर जहां फूल नहीं पत्‍थर चढाए जाते हैं

अजब अनूठी सांस्‍कृतिक परंपराओ का धनी वागड अंचल अपने चमत्‍कारिक और विशिष्‍ट जनश्रुतियों वाले देवालयों के लिए भी जाना जाता है। अपने गौरवमयी इतिहास के धनी अन्‍य देवालयों के साथ ही वागड अंचल के डूंगरपुर जिले में एक ऐसा भी मंदिर है जहां पर देवता को प्रसन्
 
कमलेश शर्मा
Dec 29 2009 11:58 AM
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बरखा बहार आई

मेह बाबा कुछ मेहरबान हुआ और बरखा बहार आई। वागड में यो तों पर्याप्‍त बारिश नहीं हुई पर डूंगपुर जिले के कुछ बांध लबालब हो गए। कई छोटे छोटे एनीकट बह निकले। जिले के डिमीया व मारगिया बांध लबालब होकर छलक गए और इन पर मनोहारी नजारा बन पडा। आपके लिए खेतों, एन
 
कमलेश शर्मा
Dec 29 2009 11:58 AM
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बरखा बहार कब आएगी

एक समय था जब आषाढ के लगते लगते तो बारिश का वो मनोरम नजारा देखने को मिल जाता था कि मन प्रफुल्लित हो उठता था। पिछले कुछ वर्षों से ऐसा नजारा नहीं दिखाई दिया। इस वर्ष भी मानसून आराम कर रहा है तो आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है। इन दिनों आषाढ लग गया परंत
 
कमलेश शर्मा
Dec 29 2009 11:58 AM
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परिंदों के लिए स्‍वर्ग जैसा है डूंगरपुर

राजस्‍थान के दक्षिणांचल में अवस्थित डूंगरपुर जिला परिंदों के लिए स्‍वर्ग जैसा है। यहां के विभिन्‍न तालाब इन न केवल स्‍थानीय अपितु देसी व प्रवासी पक्षियों को भी बेहद रास आ रहे हैं। शहर की गेपसागर झ्‍ील इन दिनों इसी प्रकार के कुछ पक्षियों से गुलजार है।
 
कमलेश शर्मा
Dec 29 2009 11:58 AM
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ऐसे भी होता है मछली का शिकार

राजस्‍थान के दक्षिणांचल वागड़ में मछली के शिकार का अनूठा पारंपरिक तरीका विद्यमान है। इसमें एक थाली के उपर कपड़ा बांधा जाता है और इस कपड़े के बीचों बीच मछली के आकार का छेद किया जाता है। थाली के कपड़े को भिगाकर इस छेद के चारो ओर आटा लगा दिया जाता है। इसक
 
कमलेश शर्मा
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सर्द सुबह और कोहरा

फयान तूफान के बाद कुछ दिनों से अचानक ही आए मौसम में बदलाव ने अचानक ही सर्दी का अहसास करा दिया। गत दो दिनों से जिले में जहां अचानक ही लोगों को हाड़कपाने वाली सर्दी का अहसास कराया वहीं आज सुबह कोहरे ने भी अपना असर दिखाया। आज अलसुबह तो कोहरे के कारण जनजी
 
कमलेश शर्मा
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कभी देखी है आपने ईशारों की भाषा

कर्णप्रिय संगीत, मीठे और प्‍यारे संवादों से दूर इंसानों की एक ऐसी दुनिया होती है जहां पर आवाज या संगीत नाम की कोई चीज नहीं होती। ऐसी ही एक दुनिया होती है मूक-बधिरों की दुनिया । जहां ईशारे ही भाषा का कार्य करते हैं और ईशारों से ही विचारों, भावनाओं की
 
कमलेश शर्मा
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Ya Devi.......

Temple Devi Andhari Mata (Dungarpur)Devi Andhari Mata (Dungarpur)-------------------------------------------------------------------------------------------Devi Tripura Sundri (Banswara)Devi Tripura Sundri (Banswara)
 
कमलेश शर्मा
Sep 26 2009 11:17 PM
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बीटी कॉटन की कहानी

दक्षिण राजस्थान और गुजरात के सरहदी इलाकों में बीटी कॉटन की खेती में बाल श्रम के उपयोग को लेकर इन दिनों बीटी कॉटन चर्चा में है। बीटी कॉटन को पैदा करने की कहानी भी बडी अजीब है। इसे देखकर आश्‍चर्य हो उठता है कि इस जनजाति अंचल में रहने वाले आदिवासी कृञिम
 
कमलेश शर्मा
Sep 23 2009 03:15 PM
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आपने कभी देखा है ..... लोगों का पहाड़

आपने छोटे-बड़े कई प्रकार के पहाड़ देखे होंगे परंतु आज तक कभी आपने लोगों का पहाड़ नहीं देखा होगा। जी हां हमने देखा है ..लोगों का ऐसा ही पहाड़ और अक्‍सर देखा करते है। हमारे यहां छोटे-छोटे कई पहाड़ (डूंगर) है और जब कभी कोई वीआईपी आता है तो हमारे यहां के लोग
 
कमलेश शर्मा
Sep 22 2009 10:09 AM
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तस्‍वीरें जो दिल को छू गई

राजसिंह डूंगरपुर की अंतिम याञा दौरान कई सारी तस्‍वीरें ली गई परंतु कुछ तस्‍वीरें ऐसी थी जो दिल को छू गई। ऐसी ही कुछ तस्‍वीरों को यहां प्रस्‍तुत किया जा रहा है।-------कुछ ऐसे शख्‍स जिनका क्रिकेट से कोई लेना देना नहीं परंतु वे तो राजसिंहजी के मुरीद थे।
 
कमलेश शर्मा
Sep 14 2009 03:13 PM
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राजसिंह डूंगरपुर पंचतत्‍वों में विलीन हुए

राजसिंह डूंगरपुर का पार्थिव शरीर आज डूंगरपुर शहर के समीप सुरपुर गांव स्थित भूलमणि श्‍मशान घाट पर पंचतत्‍वों में विलीन हुआ। इस मौके पर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्‍तान मोहम्‍मद अजरूद्दीन सहित कई नामी गिरामी हस्तियां, राजनेता, जनप्रतिनिधि, क्रिकेटर,
 
कमलेश शर्मा
Sep 13 2009 08:11 PM
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राजसिंह डूंगरपुर का जीवन परिचय

विश्वप्रसिद्ध क्रिकेट समीक्षक, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष राजसिंह डूँगरपुर का जन्म डूँगरपुर के पूर्व महारावल लक्ष्मणसिंह के तीसरे पुत्र के रूप में 19 दिसम्बर 1935 को हुआ था। एक क्रिकेट खिलाडी, कमेन्टेटर, समीक्षक एवं प्रशासक के रूप में
 
कमलेश शर्मा
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स्‍मृति शेष राजसिंह डूंगरपुर

राजसिंह डूंगरपुर नहीं रहे ------हर कोई स्‍तब्‍ध है, राजसिंह डूंगरपुर के निधन का समाचार सुनकर। वे अब केवल तस्‍वीरों में ही हैं । स्‍मृति शेष डूंगरपुर से जुड़ी चिञमय स्‍मृतियां यहां प्रस्‍तुत की जा रही हैं।
 
कमलेश शर्मा
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कुदरत की तस्‍वीर

कुदरत अपने आप में वाकई बेहद खुबसूरत है। पेड़-पौधे, नदी-नाले, धरती-आकाश और हर चीज इसकी बेनज़ीर है। गत दिनों एक नज़ारा ऐसा भी दिखा जिसमें कुदरत की फ्रेम जड़ी तस्‍वीर साक्षात हो उठी।---
 
कमलेश शर्मा
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पानी पर चिञकारी

प्रकृति की माया भी अजीब है। इसके हर स्‍वरूप में अपना अलग ही रंग छिपा हुआ है। जरूरत है तो बस उसे महसूस करने की, उसे ढूंढ निकालने और उसका वास्‍तविक आनंद प्राप्‍त करने की। वागड़ अंचल का डूंगरपुर जिला प्रकृति के ऐसे ही अनुपम नज़ारों से लकदक जरूर है परंतु अभी
 
कमलेश शर्मा