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सुनिये मेरी भी....

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ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
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18 Jun 2010
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क्यों इतना बदल गई हैं आज की माँयें. . . . . . कहीं ख्वामखाह ही तो नॉस्टेल्जिक नहीं हो रहा मैं।

...मेरे नॉस्टेल्जिक मित्रों,बहुत तेज गर्मी थी कल तक...शरीर, मन और आत्मा सब को मानो सुखा सा डाला था इस दहकती गर्मी ने...इतने में देखता क्या हूँ कि भरी दोपहर में न जाने कहाँ से अचानक अवतरित हुऐ काले-घने बादल... तकरीबन आधे घंटे तक चली बहुत तेज आँधी और
 
प्रवीण शाह
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शुक्रिया अदा करें नापसंदगी के चटकों को... और कितना गिरेंगे हमलोग ?

.मेरे 'नापसंदगी को नापसंद करने वाले' मित्रों,आज बहुत गर्मागर्म बहसें हो रही हैं ब्लॉगवाणी द्वारा दिये गये नापसंदगी के चटके के उपयोग के बारे में...तभी नजर पढ़ी आज इस समय ५.४५ सांय की कुछ सबसे ज्यादा पढ़ी गई पोस्टों पर...पहली पोस्ट तुम भी कभी जवान हुआ करती
 
प्रवीण शाह
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आप अपने दिल के अंदर की बात छुपाते हो !!!

...मेरे 'अनुभवी' मित्रों,वैसे अनुभव तो मेरा भी कम नहीं है... सात साल से ज्यादा हो गये हैं विवाह हुऐ... पांच साल की हो गई है बिटिया रानी... पर आज भी एक बात मुझे अकसर परेशान करती है... सोचा आपसे पूछ ही लूं...एक मध्यवर्गीय परिवार है हमारा... अच्छी नौकरी है
 
प्रवीण शाह
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क्या पिद्दी और क्या पिद्दी का शोरबा... अमेरिका का बगलबच्चा यह देश जानबूझकर यह दुस्साहस कर रहा है...पर स्वाभिमानी भारतीय क्यों चुप रहें ???

...मेरे स्वाभिमानी मित्रों,मेरा मानना है कि अगर आप खुद अपनी इज्जत नहीं करते हो तो दुनिया से यह उम्मीद करना बेमानी है कि वो आपको इज्जत बख्शेगी ।इसीलिये विरोध स्वरूप यह आलेख लिख रहा हूँ क्योंकि मुझे कहीं से भी कोई विरोध होता नजर नहीं आ रहा अमेरिका के इस
 
प्रवीण शाह
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श्रीमती व श्री राम . . . श्रीमती व श्री शंकर . . . मुझ को तो जमा नहीं, अपनी आप बताईये !

...मेरे सबको जायज 'हक' देने वाले मित्रों,वैसे तो बात छोटी सी है... आप में से कुछ यह भी कह सकते हैं कि इसका कोई महत्व ही नहीं है... पर फिर भी मुझे लगा कि आप से पूछ ही लूँ इस बारे में...परिवार में एक विवाह होना है... निमंत्रण हेतु कार्ड छपवाने का दायित्व
 
प्रवीण शाह
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और उस 'ईमान' रखने वाले ने मुझे चाय तक पिलाने से मना कर दिया... है कोई समाधान आपकी नजर में ?

...मेरे 'ईमान' रखने वाले मित्रों,अपना भी हाल कुछ अजीब है...जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जाती है...चाय की तलब भी उतनी ही बढ़ जाती है।जा रहा था मुख्यालय को...अचानक चाय पीने की इच्छा हुई...छोटा सा छप्पर डले एक ढाबा सा दिखा... गाड़ी रूकवाई और ड्राईवर को बोला चाय
 
प्रवीण शाह
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एक छोटा सा सवाल... ईमानदारी से जवाब दीजियेगा... प्लीज !!!

...मेरे 'सहनशील' मित्रों,एक छोटा सा सवाल... बस यूं ही...आपने एक पोस्ट डाली, ढेर सारी टिप्पणियां पाने और हॉट लिस्ट पर विराजमान होने के सपने देखते हुए... पर हुआ क्या कि पोस्ट छपने के तुरंत बाद आलोचनात्मक और तथ्यात्मक भूलों की ओर इंगित करती अथवा रचना के
 
प्रवीण शाह
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आजकल गृह अच्छी स्थिति में बुरा फल देते हैं. . . घोर कलयुग. . . आइये कल्कि अवतार का स्वागत करें।

...मेरे "ज्योतिष-विश्वासी' मित्रों,बहुत दुखी हूँ मंगलौर हादसे से... पर Tricky Runway था...और ५५ साल का १०००० घंटे से भी ज्यादा विमान उड़ाने का अनुभवी सर्बियन पाइलट कैप्टन ज्लाको ग्लुसिका पहली और अंतिम बार धोखा खा गया... नतीजा १६० मौतें...रिस्की काम है
 
प्रवीण शाह
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एक अकवितामय जीवन . . . . . .

...मेरे 'अकवि' मित्रों,झेलिये आज यह... 'अकविता' जैसा ही कुछ...साला जीवन इतना अकवितामय क्यों है ?निकला हूँ घर से ठान केमिलूँगा कविता सेजी भर देखूंगाछुऊंगा दोनों हाथ सेमहसूस करूंगाखाऊंगा भी आज पी जाऊंगा उसकोभोगूंगाओढ़ूंगा-बिछाउंगारखूंगा हरदम साथआखिर इन्सान
 
प्रवीण शाह
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मादरे हिन्द की बेटी है यह भी... पैने दांतों वाली...

...मेरे 'कविहॄदय' मित्रों,यूं ही निरूद्देश्य विचर रहा था नेट पर,तभी दिखाई दी यह तस्वीर (Google image)...और अनायास याद आये जनकवि बाबा नागार्जुन और उनकी लिखी यह कालजयी कविता भी... वह कविता जो सिर्फ और सिर्फ 'बाबा' ही लिख सकते थे... लीजिये आप भी
 
प्रवीण शाह
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वफादार ईमानदार नहीं हो सकता !

..मेरे 'ईमानदार' मित्रों,जैसा माहौल है राज-काज में आजकल, आप जानते ही हैं... अक्सर टकराव होता है जीवन मूल्यों को सर्वोपरि रखने वालों व प्रैक्टिकल एप्रोच में विश्वास रखने वालों के बीच में...ऐसे माहौल में मेरे एक वरिष्ठ अधिकारी अक्सर यह कहते हैं
 
प्रवीण शाह
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ब्लॉगवुड में आस्था का उफान, 'आस्तिकों' व धर्मयुद्धरत 'योद्धाओं' से एक सवाल .... और मछली का धर्म!

...मेरे 'धर्मयुद्धरत' मित्रों,एक उफान सा आ गया है ब्लॉगवुड के कुछ ब्लॉगरों के बीच चल रहे धर्मयुद्ध में... मुद्दा वही पुराना है... मेरा धर्म ही एकमात्र धारण करने योग्य... हमारे धर्मग्रंथ में वर्णित ईश्वर ही एकमात्र उपास्य ईश्वर... उपासना का हमारा तरीका ही
 
प्रवीण शाह
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उठाया मैंने कदम 'संशयवाद' से 'आस्था' की ओर . . . . . . मेरे इस नये-नवेले धर्म में आपका भी स्वागत है !!!

...मेरे संशयवादी व नास्तिक मित्रों,हैरानी जरूर हो रही होगी आपको...क्या करता मैं बेचारा ?चारों तरफ तो धर्म का ही बोलबाला है।धर्म का महातम्य इतना है...यह जिन्दा रहने के लिये आवश्यक है!अब मैंने भी खूब सोच-समझ करसभी धर्मों का अध्ययन करअच्छे बुरे का पूरा-पूरा
 
प्रवीण शाह
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अभी होंगे कितने फैसले... और कितनी बार कयामत होगी ?

...मेरे 'उस' के निर्णय की प्रतीक्षारत मित्रों,अपनी चर्चा अभी जारी है... हाँ तो दोस्तों एक बहुत बड़ा प्रलोभन धर्म देता है 'अपने मानने वालों' को... और वह 'लालच' है Heaven या स्वर्ग या जन्नत का... इस लालच का आधार व वादा सभी धर्मों में कमोबेश एक सा ही
 
प्रवीण शाह
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गृहों नक्षत्रों ने तो अपनी वही चाल दिखाई, मगर वह आँधी-बारिश अभी तक तो नहीं है आई !. . . दोस्तों, अब क्या कहेगा ज्योतिष ?

...मेरे गृहचाल चिंतित मित्रों,कुछ माह हुए मुझे अपनी डायरी में कुछ तारीखें नोट करने को कहा गया था, ज्योतिष की एक नई शाखा के सिद्धान्तों की सत्यता परखने के लिये...विद्वान ब्लॉग लेखिका ने यहाँ पर लिखा कि:-आनेवाले दिनों में बडे रूप में मौसम में अचानक बदलाव
 
प्रवीण शाह
टैग: sangeeta puri
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पाठक तू निर्णय कर इसका, न्याय पक्ष लेता है किसका ?

...मेरे संवेदनशील पाठक,आज लिखने की तो कुछ और ही सोची थी, परंतु कल रात राजतन्त्र: हमने खाया था एक हरिजन के घर में खाना (पोस्ट) पढ़ी, 'बखान' व असंवेदनशीलता अच्छी नहीं लगी अत: विरोधस्वरूप तुरंत अपनी टिप्पणी इस प्रकार दर्ज
 
प्रवीण शाह
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मेरा दावा है कि मेरा धर्म ही सबसे श्रेष्ठ, महानतम ,एकमात्र ईश्वर प्रदत्त व अनुकरणीय धर्म है !!!. . . . . . है कोई जवाब ?

...मेरे धर्मपरायण मित्रों,धर्म और ईश्वर के बारे में पढ़ते-खोजते हुऐ एक नायाब उद्धरण हाथ लगा...सोचा क्यों न इसे आपके साथ साझा किया जाये...यह इस प्रकार है... "We must respect the other fellow's religion, but only in the sense and to the extent that we
 
प्रवीण शाह
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चलो मान लिया कि आज एक अप्रैल है . . . लेकिन क्या इसका मतलब यह मानूँ कि इस बार भी कोई 'समझदार' इस पोस्ट को नहीं पढ़ेगा !!!

...मेरे क्षमाशील पाठक,मेरा मानना है कि इस मुद्दे पर अभी काफी चर्चा की जरूरत है अपने हिन्दी ब्लॉगजगत में...इसलिये दोबारा से एक बार लगा रहा हूँ अपनी यह पोस्ट :-(अग्रिम क्षमायाचना के साथ!)...मेरे नारी सशक्तिकरण चिंतक मित्रों,कभी-कभी मेरी तरह आपको भी नहीं
 
प्रवीण शाह
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सूरज, चांद, तारे, जमीन, आकाश, पेड़- पौधे, जीव जंतु... यानी सारे जगत का, कौन यह रचनाकार है ? . . . . . . आईये उस से मुलाकात करें !

...मेरे रचनाकार मित्रों,२६ फरवरी से प्रारंभ यह लेखमाला अभी और आगे चलेगी... अब तक के आलेख हैं:-ईश्वर है या नहीं, आओ दाँव लगायें...क्या वह वाकई पूजा का हकदार है...एक कुटिल(evil) ईश्वर को क्यों माना जाये... अब सवाल यह भी उठना लाजिमी है कि मैं यह सब क्यों
 
प्रवीण शाह
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१४११ बाघ बचे हैं आज और इतनी हायतौबा मचा रहे हो !... १५ साल बाद शायद १४ बेचारे_ _ _ भी न बचें हमारे सर्वोच्च सदन में...!!!

...मेरे नारी सशक्तिकरण चिंतक मित्रों,कभी-कभी मेरी तरह आपको भी नहीं लगता कि प्रबुद्ध वर्ग में मुद्दों पर बोलने, सोचने या चिंता जताने का भी एक फैशन सा होता है... जैसे कि कुछ साल पहले तक फैशन था ओजोन परत की चिंता करने का, अब यह बात दीगर है कि वायुमंडल की
 
प्रवीण शाह
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या तो वो है ही नहीं और अगर है तो दुष्ट है... क्या अब भी विश्वास करोगे आप ?

...मेरे सज्जन मित्रों,सबसे पहले तो डिस्क्लेमर:-जो कुछ भी यहाँ लिख रहा हूँ उसमें मेरा मौलिक कुछ नहीं है, पहले भी बड़े-बड़े कह चुके हैं यही सब, मैं तो एक बार फिर से दोहरा रहा हूँ, बस!हाँ तो यह तर्क कुछ इस तरह से है...मान लीजिये आप वास्तविक तौर से...भीतर और
 
प्रवीण शाह
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जो खुद ही भूखा है वह किसी को क्या दे सकता है ?

...मेरे AGNOSTIC मित्रों,पिछली पोस्ट से अब बात आगे बढ़ाता हूँ...धर्म चाहे कोई भी हो... एक समानता है सभी में...वह यह है कि प्रार्थना करो ईश्वर की...पूजा करो...इबादत करो...नियम से और रोजाना... इस प्रार्थना के दौरान माफी मांगो उन गुनाहों की जो तुम करते हो
 
प्रवीण शाह
टैग: prayer
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ईश्वर का अस्तित्व है या नहीं ? आईये इस सवाल पर जुआ खेलें . . . किस ओर दांव लगायेंगे आप ?. . . Blaise Pascal की मानें तो आपके दोनों हाथों में लड्डू

...मेरे ईशभीरू मित्रों,आखिर आज मित्र महाशक्ति ने ईश्‍वर के अस्तित्‍व पर प्रश्‍न चिन्‍ह लगा ही दिया... और मुझे बहुत जोरों से याद आई महान फ्रांसीसी गणितज्ञ व दार्शनिक Blaise Pascal(ब्लेज पास्कल) की, जिनका Pascal's Wager या Pascal's Gambit ईश्वर पर विश्वास
 
प्रवीण शाह
टैग: blaise pascal
Feb 26 2010 07:33 AM
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बेडु पाको बारो मासा, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला . . . . . . प्रवीण शाह।

...मेरे मातृभाषा प्रेमी मित्रों,आज अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है, संयुक्त राष्ट्र संघ ने नवम्बर १९९९ को हर वर्ष २१ फरवरी को यह दिन मनाने का फैसला किया to promote linguistic and cultural diversity and multilingualism. यानी भाषाई व सांस्कृतिक विविधता तथा
 
प्रवीण शाह
Feb 22 2010 08:43 AM
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तलवारें खिंच गई हैं होमोसेक्सुअलिटी के मुद्दे पर फिर से एक बार . . . . . . किस ओर खड़े हैं आप?

...मेरे भारतीय नागरिक मित्रों,जुलाई २००९ में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसला दिया जिसमें माननीय न्यायालय ने धारा ३७७ को संविधान के खिलाफ बताया और इस प्रकार SODOMY को अपराध बताने वाले कानून को खारिज कर दिया।अब यह मामला मुल्क के सर्वोच्च न्यायालय में है,
 
प्रवीण शाह
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६३ सालों का जवाब दो ! . . . . . . . . . प्रवीण शाह।

...मेरे बे'खबर' मित्रों,एक खबर है कि जैसलमेर जिले का देवड़ा गाँव आजकल बहुत गर्वित है इस बात से कि वहाँ १२० साल बाद दूसरी बारात आई श्री पन्ना सिंह की बेटी शगुन कंवर के लिये, पिछली बारात आई थी १९९८ में श्री इन्दर सिंह भाटी की सुपुत्री जयंत कंवर की, ध्यान
 
प्रवीण शाह
टैग: devda village
Feb 20 2010 07:07 AM
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धन्यवाद आदरणीय अरविन्द मिश्र जी . . . . . . . . . . . . . . . प्रवीण शाह।

...मेरे मौसम के सताये मित्रों,जब बहुत ज्यादा सर्दी पड़ रही थी, ठीक उसी समय यहाँ... तथा यहाँ पर भी... कहा गया कि चार फरवरी तक उत्तर भारत को कोई राहत नहीं मिल रही, यहाँ पर भी विद्वान लेखक ने यह कहकर कि प्रबल शीतलहर से भी अभी पूर्णत: मुक्ति मिलने का कोई योग
 
प्रवीण शाह
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अगली बार जब मिठाई खरीदें तो . . . . . . . . .प्रवीण शाह।

...मेरे जागरूक उपभोक्ता मित्रों,आप मिठाई के शौकीन हों या न हों पर कभी न कभी हलवाई की दुकान पर मिठाई खरीदने जाना तो पड़ता ही है सभी को...क्या आप जानते हैं कि लगभग सभी दुकानों पर आपसे छल किया जा रहा है। यकीन नहीं आता तो अगली बार जब मिठाई खरीदें तो विक्रेता
 
प्रवीण शाह
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आज मिला मैं "मुन्शी" से, देखा उसका घरबार, आप भी मिलिये और इसी बहाने देखिये महंगाई को एक नये नजरिये से . . . . . . . . .प्रवीण शाह।

...मेरे महंगाई से चिंतित मित्रों,सबसे पहले तो एक चेतावनी, यदि आप सौन्दर्य आग्रही हैं तो न ही देखें इस पोस्ट को, आपका सौन्दर्य बोध आहत हो सकता है... और खाते समय तो कतई नहीं...हो सकता है कि आप की भूख ही खत्म हो जाये...या खाने का स्वाद जाता रहे...बता ही
 
प्रवीण शाह
टैग: inflation
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यह ARTISTIC FREEDOM है, दिमागी दिवालियापन या निचले दरजे का दोगलापन ? निर्णय आपका, सर माथे पर . . . . . . .(एक माइक्रो पोस्ट) . . . . . . प्रवीण शाह।

...मेरे निरपेक्ष मित्रों,ज्यादा कुछ कहूँगा नहीं, मन दुखी है, आप कृपया करके इस पोस्ट... को एक बार देखिये जरूर और फिर निर्णय सुनाइये...आप का हर निर्णय इस नाचीज को शिरोधार्य होगा।...भड़ास को धन्यवाद सहित!
 
प्रवीण शाह
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टिप्पणी मॉडरेशन कभी कभी आपकी पोस्ट को असमय मार भी सकता है. . . . . . . . . . . . प्रवीण शाह।

...मेरे टिप्पणी कर्ता मित्रों,कभी कभी ऐसा होता है कि एक बेहद विचारोत्तेजक विषय पर आप एक पोस्ट बनाते हैं... पाठक तुरंत ही उसे पढ़ना शुरु करते हैं और इसी के साथ-साथ शुरू होता है टिप्पणियों का आना... अब होता क्या है कि चर्चा दो स्तरों पर चलती है... पहली तो
 
प्रवीण शाह
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यह है "आज की नारी", आप कौन से जमाने में रहते हैं जनाब ?. . . . . . . . . . . . . . . .प्रवीण शाह।

...मेरे नारी चिंतक मित्रों,हमारे हिन्दी ब्लॉगजगत में कुछ भाई लोग अत्यन्त परेशान हैं आजकल नारी के भविष्य को लेकर, क्योंकि...आज की नारी...* भूल गई है आंचल और पायल को...* पहनने लगी है अपनी पसंद के कपड़े...* अपने ढंग से जीना चाहती है...* भूल गई है प्राचीन
 
प्रवीण शाह
टैग: feminism
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आया जैसे ही नया साल, हम जा पहुंचे नैनीताल... आइये आप भी घूमिए मेरे साथ साथ . . . . . .

...मेरे आभासी मित्रों,सोचा तो था, प्लान भी किया था और कमरा भी बुक था कि ३१ दिसम्बर की रात नैनीताल में बितायेंगे, पर उस दिन कुछ ऐसा फंसा कि जाना नहीं हो पाया। बहरहाल मैं हार मानने वालों में से नहीं, होम मिनिस्ट्री को मनाया, पहली तारीख की छुट्टी का जुगाड़
 
प्रवीण शाह
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चुल-बुल, बुल-बुल... बुल-बुल, चुल-बुल . . . . . . . . . . प्रवीण शाह.

गुजर रहा था शहर के एक पुराने मौहल्ले से, देखा एक जगह गली सजी है... बहुत से फूल बिखरे हैं...रात बारात आई थी यहां... सुबह शायद किसी बिटिया की विदाई हुई है... अचानक नजर पड़ी एक किनारे पड़े मुड़े-तुड़े कागज पर...कोई खत सा लगता था...उत्सुकता बढ़ी... चुपके
 
प्रवीण शाह
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चार और लाइनें...

मजबूती से थमा गिलास, फिसल कर बिखर गया, ऐसा तो सिर्फ उन्हीं, निगाहों का कमाल हो सकता है। तूने गौर से देखा था? मेरे मेहबूब के माथे को.. सिंदूर तो नहीं ही होगा , गुलाल हो सकता है।
 
प्रवीण शाह
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मेरी चार लाइनें( पूरी रचना आनी अभी बाकी है।)

आज तेरे सामने, जो मिट्टी में लोट रहा। वही कृष्ण कल,पूतना का काल हो सकता है। न तेरा हरा है, न मेरा केसरिया होगा। लहू का रंग तो, केवल लाल हो सकता है।
 
प्रवीण शाह
Dec 29 2009 11:55 AM
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चुनाव का मौसम...

चुनाव का मौसम मेरे कस्बे के इकलौते खेल मैदान पर एक जनसभा... हजारों की भीड़ उसी भीड़ से उछला नारा है या सवाल... हमारा नेता कैसा हो ? सोचता हूँ क्या फालतू सवाल है दिमाग चेताता है सवाल सही है 'नेता' जैसे नेता शायद अब आते नहीं राजनीति में...
 
प्रवीण शाह
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कविता-२

क्या लिखूं? क्या कहूँ? कुछ है ही नहीं, लिखने या कहने को, चुप ही रहता हूँ, चुप्पी में भी, शायद.... एक कविता होती है....
 
प्रवीण शाह
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कौव्वों की बलि और उनके खून सनी 'सोने' की तलवार, दलितों के साथ भेदभाव और कंदास्वामी . . . (Past life regression) . . . . . . . . .प्रवीण शाह.

मेरे जन्म जन्मांतर के मित्रों, बहुत दिनों से सोच रहा था कि देखूंगा "राज पिछले जन्म का" पर समय नहीं मिल पा रहा था, कल देखा और जो देखा वह यह था:- यह जनाब डॉ० संजय गायकवाड़ नाम से जाने जाते हैं इन्हें कौव्वों से बहुत डर लगता है, लगता है कि कौव्वे इनको प
 
प्रवीण शाह
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वेश्यावृति का कानूनीकरण ( Legalization of Prostitution ) और इस से उठते कुछ अहम् सवाल . . . . . . . . . .प्रवीण शाह

मेरे कानून पालक मित्रों, अभी हाल में माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई के दौरान सरकार को सलाह दी:- " When you say it is the world's oldest profession and when you are not able to curb it by laws, why don't you legalize it?" इसके आगे माननीय
 
प्रवीण शाह