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फिर कभी

http://firkabhi.blogspot.com/
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16 Jun 2010
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एक ब्लॉगर की प्रार्थना

हे शिव! तुम तो सब जानते हो तो फिर क्या कहने आया हूं, ये भी जान ही रहे होगे।हे रूद्र ! ऐसी ताकत दो कि मैं दूसरे ब्लॉगर को पछाड़ सकूं,टिप्पणी दिलवाओ, पसंद पर क्लीक करवाओ, अखबारों में चर्चे हो, इसका भी जुगाड़ कर, सात सोमवार का व्रत करूंगा ।हे महेश!...मेरा
 
deo prakash choudhary
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कहां गई हंसी?

पहले हंसी दिखाई देती थी, फिर हंसी सुनाई पड़ने लगी...तब हंसी बाजार में खिलखिलाकर भाग रही थी और लोग उसके पीछे भाग रहे थे...लेकिन ये भागमभाग भी अब थम चुकी है...रिकार्ड घिस गए हैं...खजाना खाली है...और अब टीवी की हंसी हंसी बाजार के उसी नुक्कड़ पर खड़ी है,
 
deo prakash choudhary
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ब्लॉगर प्रसाद का वजन बढ़ रहा है भाई!

बुजुर्गों ने कहा था बात में वजन पैदा करो। ऐसी पोस्ट लिखो कि बात निकले तो दूर तक जाए। ब्लॉगर प्रसाद ने कोशिश तो बहुत की, लेकिन बात में वजन बढ़ने की बजाय शरीर का वजन बढ़ने लगा। चार साल पहले जब ब्लॉग शुरु किया था तो 53 पर था। चार साल बाद 87 किलो का शरीर
 
deo prakash choudhary
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छोटा भाई जानता है,असली संजीबनी बुटी किस पहाड़ पर है?

राजनीति में एक होता है बड़ा भाई।बड़ा भाई अक्सर चुप रहता है।वो कभी-कभी बोलता है। हमेशा आंख बंद कर बैठा रहता है।बड़ा भाई सोच-समझकर बोलता है।मीठी बातें बोलता है, कभी-कभी कड़ुवी भी, मगर कम बोलता है।राजनीति में दूसरा होता है छोटा भाई। छोटा भाई हमेशा बोलता
 
deo prakash choudhary
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ब्लागर्स की दुनिया में मक्खन लगाने की कला किसे आती है?

मक्खन खाने की चीज थोड़े ही है। लगाने की है, जिसको लगाओ, फिसल पड़ता है। जो फिसलेगा उसकी टांग टूटेगी,आप किसे लगाना चाहेंगे?जमाना मक्खन का है। जो लगाना जानते हैं मक्खन, वही जानते हैं इसका मर्म। मक्खन कहां नहीं है? घर में, दफ्तर में,खेल के मैदान में, राजनीति
 
deo prakash choudhary
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टेंशन कुमार से मिलिए.......

अभी तक आप टेंशन कुमार से मिले कि नहीं...अगर नहीं...तो समझिए आपने अब तक अपनी जिंदगी में जो टेंशन देखा, सुना, भोगा और महसूस किया है...वो बेहद कम है। हिंदी आलोचक की भाषा में कहें तो सतही है। कवि की जुबान में बेहद कम देखा है और किसी पत्रकार के लहजे में कहें
 
deo prakash choudhary
Mar 07 2010 09:41 PM