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08 Mar 2010
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धरती माँ को बचाएँ

  मुझे आप लोग माफ कर दीजिए क्योंकि मैनें कुछ महीनों से कोई पोस्ट अपने ब्लाग पर नहीं डाली, लेकिन उसकी वजह है मेरी परीक्षाएं। एक महीना भी नहीं बीतता है की परीक्षाएं दुबारा शुरू हो जातीं है। वैसे मैं ये बात करना चाह रही थी की जो माँ हमें पालती-पोसती
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काले-काले बादल आए... (कविता)

  काले-काले बादल आए। आसमान पर सारे छाए॥ फिर उनने बरसाया पानी। सुखी हो गऐ सारे प्राणी॥   खेतों में हरियाली आई। सबके मन में खुशियाँ लाई॥ बच्चे बाहर खेलने निकले। फिसल गई लो बुढ़िया ताई॥   बच्चों ने फिर उन्हें उठाया। उनको उनके घर पहुचाया॥ ताई
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