दृष्टिपात's Image

दृष्टिपात

http://drishtipatpatrika.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
31 Dec 2009
कुल प्रविष्टियां
27
पाठक भेजे
493
पसंद
3
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
18.26
पसंद करें
0
नापसंद करें

धोनी को मिलेगा प्रतिबंधित पिस्टल लाइसेंस

धोनी को मिलेगा प्रतिबंधित पिस्टल लाइसेंस. टीम इंडिया के कप्तान महेन्द्र सिंह धौनी का प्रतिबंधित पिस्टल लाइसेंस बन कर तैयार हो गया है, लेकिन उनके हस्ताक्षर का प्रशासन को इंतजार है। उपायुक्त राजीव अरुण एक्का के अनुसार धोनी के आवेदन को उसके परिजनों द्वा
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

हैवानियत की मुसकान

हैवानियत की मुसकान सवाल राष्ट्रीय संपत्ति की है. क्या राष्ट्रीय संपत्ति अपनी नहीं होती? एक आदमी अपनी बात को मनवाने के लिए राष्ट्रीय संपत्ति को जला कर राख कर देता है. तोड़-फोड़ कर बरबाद कर देता है. क्यों? भारत को आजादी मिले 60 वर्ष से भी ज्यादा हो गये.
 
Arun Kumar Jha
Dec 29 2009 11:50 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

साम्प्रदायिकता के खिलाफ जनादेश

वीं लोकसभा चुनाव ऐतिहासिक चुनाव साबित हुआ है. खबरों के ध्ंाधेबाजों एवं चुनाव पश्चात् और चुनाव परिणाम के पूर्व अटकलों में समय नष्ट करने वाले संस्थान और व्यक्तियों से लेकर ज्योतिषियों के सभी भविष्यवाणी कोे झूठलाते हुए, जो जनादेश आया है, वह कोई चांैकाने
 
Arun Kumar Jha
Dec 29 2009 11:50 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मनचलियों का मन बहलाने का फोन नम्बर है 101

यदि आप आशिक मिजाज , दिलफेक आशिक हैं या मजनूओं की लाइन में सहर्ष खड़े होना चाहते हैं , तो समझ लीजिए आपके इंतजार की घड़ियाँ खत्म हो गईं. जी हाँ नहाधोकर सुन्दर कपड़े पहन कर क्रीम-पाउडर लगाकर पहँुच जाइए राँची के आड्रे हाउस स्थित एवं नेपाल हाउस स्थित फायर
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

एक घर बिना ख्वावों. ख्वाहिशों और ख्यालों का

ये घर है विश्वाश का. ये घर है प्रेम और वलिदान का. ये घर है क्षमा और दया का. ये घर है भाईचारगी और सौहार्द्र का. ये घर है त्याग औरतपस्या का. ये घर है. यहाँ आपका वागत है. लेकिन एक अनुरोध यहाँ कुछ लेकर कृपया न आयें. यहाँ इस घर में नफरत की कोई गुजाईश नहीं
 
Arun Kumar Jha
टैग: विचार
पसंद करें
0
नापसंद करें

कल्याण विभाग कितना कल्याणकारी?

झारखंड सरकार के लिए राज्य की जनता की बजाए यहाँ के कुछ अधिकारियों , कर्मचारियों दलालों एवं आपूर्तिकर्ताओं इत्यादि के कल्याण हेतु सरकारी योजनाएँ चलाई जा रही हैं ? जी हाँ! राज्य में फैले हुए भ्रष्टाचारों को देखते हुए तो कुछ ऐसा ही लगता है. सरकार के लाख
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

वाचिंग डौग की ईमानदार भूमिका किस लिए?

दृष्टिपात का जून की तरह जुलाई अंक भी हम पत्रकारिता को समर्पित कर रहें हैं, और आगे भी दो अंक पत्रकारिता विशेषांक ही प्रकाशित करेंगे। यह अंक लघु पत्रकार, वेब पत्रकार एवं पत्रकारिता पर केंद्रित है. आज पूरे देश में लघु समाचार पत्रों एवं पत्राकारों की स्थ
 
Arun Kumar Jha
Dec 29 2009 11:50 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

दृष्टिपात

बोनसाई पिता पिता ने वषों नाईट शिफ्ट करके बनाये थे पैसे और ली थी एक कट्ठा जमीन, पिता जाते थे - दौरे पर बचाते थे पैसे खरीदते थे सीमेंट, छड़, ईंट...... पिता ने कर्ज लिए थे , ऑफिस से सवारी और घर अग्रिम के खाते में फिर कड़ी की थी दीवारें, पिता ने बेच दिए
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

बापू और राजनीति

डॉ 0 गिरिधारी राम गौंझू ‘‘ गिरिराज ’’ महामना विश्व वन्दय महात्मा गांधी का जीवन ही विश्व मानव के लिए एक महान संदेश है। बापू ने जीवन भर सत्य का अन्वेषण किया तथा तत्कालीन समय में जो सत्य प्रतीत हुआ उसी का पालन अपने जीवन में प्रयोग किया। उसमें उन्हें अपा
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

गांधीजी पर विशेष लेख 7

अंधे रों को चीरती शब्दों की रौशनी - संजय द्विवेदी महात्मा गांधी की मूलतः गुजराती में लिखी पुस्तक हिन्द स्वराज्य एक बार फिर अपने सौ साल पूरे होने पर चर्चा में है। महात्मा गांधी की यह बहुत छोटी सी पुस्तिका कई सवाल उठाती है और अपने समय के सवालों के वाजि
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

गांधीजी पर विशेष लेख 6

हमेशा प्रसांगिक रहेंगे महात्मा गांधी के विचार - कृष्ण कुमार यादव विश्व पटल पर महात्मा गाँधी सिर्फ एक नाम नहीं अपितु शान्ति और अहिंसा के प्रतीक हैं। महात्मा गाँधी के पूर्व भी शान्ति और अहिंसा की अवधारणा फलित थी , परन्तु उन्होंने जिस प्रकार सत्याग्रह ए
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

गांधीजी पर विशेष लेख 8

गांधी , नक्सलवाद और सलवा जुड़ूम - पंकज कुमार झा आदिवासी अंचलों में कैंसर का रूप लिए हुए नक्सलवाद के सम्बन्ध में गांधी की प्रासंगिकता को खंगालते हुए सहसा तीसरी दुनिया के प्रखर चिंतक ‘‘ पॉलो फ्रेरे ’’ स्मरण हो आते हैं। फ्रेरे के अनुसार , ‘‘ शोषक और शोष
 
Arun Kumar Jha
Oct 26 2009 10:46 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

दृष्टिपात

अहिंसा और सत्य   के मार्गदर्शक - कामेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव  ‘‘ निरंकुश ’’ 2  अक्तूबर , 1869  को भारत की पावन भूमि पर गुजरात राज्य के पोरबंदर में श्री करमचंद गांधी की पत्नी श्रीमती पुतलीबाई की कोख से एक बच्चे ने जन्म लिया , 
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

व्‍यंग्‍य कहानी

आदिवासी-पंडित - गिरिश पंकज विक्रमार्क फिर भागा वेताल के पीछे और उसे कंधे पर लाद कर आगे चलने लगा। बेताल ठहाके लगा रहा था और विक्रमार्क हमेशा की तरह भाव-शून्य चेहरे के साथ बढ़ा जा रहा था।   विक्रमार्क की ओर से कोई प्रतिक्रिया न देख कर वेताल बोला-
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

गांधी जी पर विशेष लेख 3

माहात्मा गांधी   के आर्थिक विचार नागेन्द्र  प्रसाद     दो अक्तूबर  1869  को उस महापुरुष का जन्म पोरबन्दर में हुआ ,  जिन्होंने भारत माता को गुलामी की जंजीर से मुक्त कर आजाद कराया। इनकी प्रारंभिक शिक्षा भारत तथा उच्च
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

गांधीजी पर विशेष लेख

माहात्मा गांधी के आर्थिक विचार नागेन्द्र  प्रसाद   दो अक्तूबर 1869 को उस महापुरुष का जन्म पोरबन्दर में हुआ , जिन्होंने भारत माता को गुलामी की जंजीर से मुक्त कर आजाद कराया। इनकी प्रारंभिक शिक्षा भारत तथा उच्च शिक्षा इग्लैंड में हुई। बैरिस्ट्
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

गांधीजी पर विशेष लेख

आज के युग में गांधी की प्रसांगिकता सुशांत झा महात्मा गांधी मानवता के इतिहास में शायद पहली ऐसी शख्सियस हैं जिन पर सबसे ज्यादा लिखा गया है। उनके व्यक्तित्व के कई पहलुओं पर अभी भी लिखा ही जा रहा है। आज जब दुनिया की राजनीति कई विरोधाभासों से होकर गुजर रह
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

व्‍यंग्‍य

पिफरंगिया कहता है! मुम्बईया: - हेल्लो सरजी , लन्दन का क्या हालचाल है ? फिरंगिया:- एकदम ठीक है .बम्बई ...अर्र मेरा मतलब मुंबई का क्या हाल चाल है ? मुम्बईया: - एकदम मजे में है. अभी राज ठाकरे ने करन जोहर से माफी भी मंगवा ली है...।ं फिरंगिया: - हां सुना
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

करेजवा में तीर

करेजवा में तीर   ‘‘ का ठाकुरजी! झारखंड के का हाल-चाल है ? ठीके चल रहा है न ?’’ हरिशंकर बाबू व्यंग्य मारते हुए बोले। ठाकुरजी मुँह टेढ़ा करते हुए बोले , ‘‘ ठीके और खराब से का मतलब है , आपका। सड़ल तालाब मंे इ काना में नहाइए चाहे उ कोना में। देहवा त
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
1
नापसंद करें

मंचों का ठाट

हिन्दस्‍वराज के शताब्‍दी वर्ष पर  सजग ,  जागरूक भारतीय के मन में एक विचार कौंधता  है ,  गांधीजी आज यदि जिंदा होते ,  तो उनकी स्थिति क्या  होती ?  गांधीजी यदि आज होते ,  तो भारतीय राजनीति  और करोड़ों जनता क
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

मंचों का ठाठ

संदर्भ हिन्दस्वराज का शताब्दी वर्ष मंचों का ठाठ सजग, जागरूक भारतीय के मन में एक विचार कौंधता है, गांधीजी आज यदि जिंदा होते, तो उनकी स्थिति क्या होती? गांधीजी यदि आज होते, तो भारतीय राजनीति और करोड़ों जनता की स्थिति क्या होती? अच्छा हुआ गांधीजी हमारे
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

कहानी

झारखंड का प्रकाश स्तम्भ साहित्यकार राधकृष्ण जी की एक अनुपम कृति- एक लाख संतानवे हजार आठ सौ अट्ठासीसमय व्यतीत होता जा रहा है ओर यह कहानी अभी तक चल रही है। मगर इस कहानी के शीर्षक को लेकर भ्रम हो जाता है, क्योंकि शीर्षक के साथ कहानी की संगति नहीं बैठती।
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

झारखंड समाचार

ए0पी0 सिंह जैसे कर्तव्यनिष्ठआईएएस हैं झारखंड में झारखण्ड के कृषि, मत्स्य एवं पषुपालन विभाग के सचिव के रूप में अमरेन्द्र प्रताप सिंह के योगदान देने के पश्‍चात से इस विभाग में एक नये कार्यसंस्कृति का सृजन हुआ है। गौरतलब हो कि श्री सिंह राज्य में
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

झारखंड समाचार

फाइलें दौड़ रही हैं, विचारों की अभिव्यक्ति पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं होती। लोग अपनी तरह से विचार व्यक्त करते रहते हैं। अब झारखंड के पूर्व राज्यपाल के क्रियाकलापों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए लोग कहते थे कि राज्यपाल महोदय पूर्व के मंत्रियों की तरह
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

दृष्टिपात

‘‘ए ठाकुर जी! एगो कहानी सुने हैं कि नहीं, अकबर-बीरवल वाला?एक बार बीरवल ने महाराज अकबर को बताया कि राजा और लड़का के रूपमें राजा से बड़ा लड़का के बाप होता है। लड़का के बाप के सामने राजा का कुछो नहीं चलता है। एक बार राजा को बीरवल ने एगो लड़का वाला के यहाँ
 
Arun Kumar Jha
Sep 24 2009 06:52 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

संपादकीय

हिन्दी का ब्रह्मभोजराष्ट्र की भाषा, राज-काज की भाषा, जन-जन की भाषा, वह भाषा, जो सैंकड़ों देशों में बोली जाती है। वह भाषा, जो सहृदय है और देशज, आंचलिक सभी बोलियों को अपने हृदय में समोये हुए है। वही भाषा हिन्दी आज अपने ही देश में वधिवा -विलाप कर रही है।
 
Arun Kumar Jha
पसंद करें
0
नापसंद करें

कैसे मनाएँ आजादी का जश्न?

आजादी की 62वीं वर्षगाँठ पर शुभकामनाएँ देने और लेने के बाद, जो समय बचा उसमें एक प्रश्न बार-बार उठा कि स्वतंत्राता का यह राष्ट्रीय पर्व हमें छूअन के एहसास क्यों नहीं दिलाता? मानसिक रूप से क्यों नहीं झकझोरता? हमें उत्प्रेरित क्यों नहीं करता? आजादी के बजते
 
Arun Kumar Jha