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13 Mar 2010
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मंत्रों की विवेचना

-डॉ. अशोक प्रियरंजनमंत्र शक्ति की महत्ता को संपूर्ण आध्यात्मिक जगत ने स्वीकार किया है। मंत्रों केमाध्यम से न केवल ईश कृपा प्राप्त की जा सकती है वरन जीवन में आध्यात्मिक शक्ति अर्जित की जा सकती है। कनाडा मेंं बसी भारतीय मूल की स्नेह ठाकुर ने उपनिषद दर्शन
 
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जटिल रोगों की सहज जानकारी

-डॉ. अशोक प्रियरंजनकनाडा में बसी भारतीय मूल की साहित्यकार स्नेह ठाकुर ने संजीवनी केमाध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का सार्थक प्रयास किया है। इस पुस्तक में उन्होंने विविध रोगों के इलाज और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों की जानकारी दी है।
 
dr ashok kumar mishra
Feb 19 2010 11:56 PM
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जिंदगी कीसच्चाई को उजागर करती गजलें

-डॉ. अशोक प्रियरंजनडॉ. कृष्ण कुमार बेदिल का यह दूसरा गजल संग्रह हथेली पर सूरज मौजूदा दौर के आम आदमी के अंतर्मन की व्यथा, सामाजिक विसंगतियों, जिंदगी की तल्ख हकीकत, राजनीतिक विद्रूपताओं और नित बदल रहे जीवनमूल्यों से रू-ब-रू कराता है। हुस्न और मुहब्बत जैसे
 
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नई पीढ़ी को आईना दिखा कर संबंधों की पड़ताल

-डॉ. अशोक प्रियरंजनआधुनिक समाज में युवक-युवतियों की मानसिकता में व्यापक परिवर्तन आ रहा है। नई और पुरानी मान्यताओं, परंपराओं, विचारधाराओं के बीच टकराव चल रहा है। पाश्चात्य संस्कृति और सभ्यता भारतीय समाज को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। इसी के चलते समाज में
 
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हिंदी काव्य साहित्य में शकुन-अपशकुन का अनुशीलन

-डॉ. अशोक प्रियरंजनभारतीय समाज में प्रारंभिक काल से शकुन अपशकुन की बड़ी मान्यता रही है। व्यापक समाज शकुनापशकुन का विचार करके ही अपने कार्यों का निष्पादन करता है। डॉ. परमात्मा शरण वत्स ने अपनी पुुस्तक शकुन-अपशकुन में हिंदी साहित्य की विविध कृतियों में इस
 
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आधी दुनिया पर वैचारिक चिंतन

-डॉ. अशोक प्रियरंजनस्त्री विमर्श पर विविध आयामों और दृष्टिकोणों से चिंतन की कड़ी में सुधा सिंह ने भी आधी दुनिया के दुख, सुख, समस्याओं और त्रासद स्थितियों को सार्थक और प्रभावशाली रूप से अभिव्यक्त किया है। नारी चिंतन को उन्होंने व्यक्तिगत, राष्ट्रीय और
 
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जीवन की त्रासदी से रू-ब-रू कराती गजलें

-डॉ. अशोक प्रियरंजनमौजूदा दौर की सामाजिक, राजनीतिक विसंगतियों, आम आदमी की संवेदना, दलित जीवन की त्रासदी, मानवीयता के क्षरण से उपजी स्थितियों को डॉ. राम गोपाल भारतीय ने अपने गजल संग्रह 'हाशिए के लोगÓ में बड़े प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। समाज के
 
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रामचरितमानस के शैली पक्ष का अनुशीलन

अशोक प्रियरंजन महाकवि गोस्वामी तुलसी दास द्वारा रचित महाकाव्य रामचरितमानस समस्त हिंदुओं की आस्था का केंद्र रहा है। इसकी चौपाइयों के व्यापक अर्थ हैं और इनमें अद्भुत जीवन दर्शन समाहित है। इसीलिए भारतीय जनमानस को रामचरित मानस ने बहुत गहराई से प्रभावित क
 
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अनुभूति और संवेदना को जागृत करती कविताएं

अशोक प्रियरंजन गोविंद रस्तौगी की कविताएं मौजूदा समाज में पनप रही अपसंस्कृति, सामाजिक मूल्यों के क्षरण, भ्रष्टाचार, पतनशील राजनीति, जीवन में पनप रही निराशा, अकेलेपन, ऊब और भटकाव से साक्षात्कार कराती हैं । उनकी कविताओं में प्रखर आध्यात्मिक चेतना और गंभ
 
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जिंदगी की हकीकत से रूबरू कराती गजलें

अशोक प्रियरंजन उर्दू के साथ ही हिंदी में भी खास पहचान बनाने वाले शायर राम अवतार गुप्ता 'मुज्तरÓ की गजलें जिंदगी की हकीकत से रूबरू कराती हैं । 'सीपियों में समंदरÓ उनकी हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं की गजलों का संग्रह है जिसमें उन्होंने जहां सियासत और मौ
 
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कौरवी लोक साहित्य का विश्लेषण

अशोक प्रियरंजन हिंदी के सर्वाधिक लोकप्रिय रूप में खड़ी बोली ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है । खड़ी बोली का आधार है मेरठ, सहारनपुर, बुलंदशहर और दिल्ली के आसपास बोली जाने वाली कौरवी । खड़ी बोली का तो तेजी से विकास हुआ लेकिन विविध कारणों से कौरवी
 
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सूक्ष्म संवेदनाओं की अभिव्यक्ति

अशोक प्रियरंजन इस संग्रह की कविताओं में तीन कवियों ने आधुनिक जीवन की सूक्ष्म संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी है। निर्मल गुप्त की कविताएं कथ्य की सरलता, सहज शिल्प, बिम्ब, प्रतीक, नए मुहावरों के कारण ध्यान खींचती हैं । बड़ी कलात्मकता से उन्होंने मनुष्य और स
 
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आम आदमी की पीड़ा

अशोक प्रियरंजन जिंदगी के विविध रंगों से रूबरू कराती इन गजलों में मौजूदा दौर केआम आदमी की पीड़ा मुखर है । बदलते दौर में पनप रही समस्याओं, संवेदनहीनता, विसंगितयों, निराशा, अस्तित्व संकट और इंसानियत के संकट को गजलों में रेखांकित किया गया है । 'अजीब सा म
 
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आईना दिखाती गजलें

अशोक प्रियरंजन कृष्ण कुमार 'बेदिलÓ की गजलें जिंदगी की तल्ख सचाईयों को बड़े बेलौस तरीके से उजागर करती हैं । आधुनिक समाज में व्याप्त विसंगतियों, इंसानियत के पतन, मनुष्य के दोहरे चरित्र और विविध कारणों से जिंदगी में पनप रही पीड़ा को उनके शेर बड़ी गहराई
 
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तन को बेचैन भटकना था, मन में कस्तूरी रहनी थी

डॉ . अशोक कुमार मिश्र मेरठ शहर का घनी आबादी वाला मुहल्ला है ब्रह्मपुरी । दिल्ली रोड के करीब बसे इसी मुहल्ले के मुख्य मार्ग पर है परशुराम हलवाई की दुकान, जिससे सटी गली में है हिंदी काव्य मंच के समर्थ गीतकार भारत भूषण का मकान । गली में घुसने पर जो पहला
 
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आंसू अगर बिकते कहीं,होता बहुत धनवान मैं

-डॉ. अशोक प्रियरंजन'हर झुर्रियों से झांकते सौ-सौ दिवाकर ओज के, अपना सफर पूरा किया, अब पंख किरणों के थके।Ó 'राजस्थान दर्पणÓ में प्रकाशित इन पंक्तियों के रचयिता मेरठ के साहित्यकार और पत्रकार ८० वर्षीय विष्णु खन्ना को गए एक वर्ष बीत गया । उन्होंने १० अगस्त
 
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