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श्री सत्यनारायण भटनागर जी का पन्ना

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31 Dec 2009
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खतरे का संकेत - हमारी हॅसी कहाँ गुम हो गई?

आज का युग विज्ञान का युग है । विज्ञान ने मानव-जाति के कल्याण के लिए अनेक नए साधन उपलब्ध कराए है । इन साधनों से मनुष्य का जीवन अधिक सुगम हो गया है । अल्प परिश्रम से घन्टों का काम अब मिनटों में होने लगा है । विज्ञान ने अनेक सुविधाएँ भी हमें दी है जिससे
Dec 29 2009 11:54 AM
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चींटी के नाम एक चिन्तन

इस पृथ्वी पर महत्वपूर्ण कौन है? इस प्रश्न पर यदि विचार किया जाए तो अलग अलग स्थान, समय और परिस्थिति के अनुसार अलग अलग उत्तर मिलेगे। हम पृथ्वी पर मनुष्य जाति को ही सर्वश्रेष्ठ मानते है क्योकि हममें विवेक और बुद्धि है और हमारे इस निर्णय को ही हम घोषित क
Dec 29 2009 11:54 AM
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बापू ने मनाया था जेल में स्वतंत्रता दिवस

१५ अँगस्त के लिये विशेष आज तो देश विदेश में भारत का स्वतंत्रता दिवस १५ अँगस्त को धुमधाम से मनाया जाता है पर क्या आपको पता है जब भारत गुलाम था तब स्वतंत्रता दिवस कब मनाया जाता था, आप नहीं जानते ना, तो हम बताते हैं यह दिवस तब २६ जनवरी को मनाया जाता था।
Dec 29 2009 11:54 AM
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हर सैनिक के लिए जीत सुरक्षित है

जीवन क्या है? अलग-अलग विद्वानों ने इसकी अपने-अपने ढंग से व्याख्या की है। कुछ कहते हैं यह एक कभी न खत्म होने वाली यात्रा है। दूसरे इसे बाजार बताते हैं, जहां हमारे गुण-अवगुणों का मूल्यांकन होता है। कुछ लोग जीवन को एक नाटक कहते हैं। उनका मत है कि हम सब
Dec 29 2009 11:54 AM
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वेद की ऋचाओं में सूर्य देव

यजुर्वेद में परमात्मदेवसविता [सूर्य] से प्रार्थना की गई है, हमारी बुराइयां दूर हों और मन के विकार समाप्त हों और इसके स्थान पर हमें अच्छाइयों से भर दीजिए। मंत्र इस प्रकार वर्णित है- ॐविश्वानिदेव सवितर्दुरितानिपरासुव यदभद्रंतन्नआसुव। वेदों में सूर्योपा
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जीत आपकी ही है

हमारा जीवन क्या है? इसकी अलग-अलग विद्वानों ने अपने ढंग से व्याख्या की है। कुछ कहते है यह एक कभी न खत्म होने वाली यात्रा है और दूसरे इसे बाजार बताते है जहाँ हमारे गुण अवगुणों का मूल्यांकन होता है। ऐसे भी विद्वान है जो जीवन को नाटक कहते है। उनका मत है
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व्यर्थ की दौड़ से बचिए, आराम से चलिए

जीवन में कर्म का बहुत महत्व है। हम एक क्षण भी बिना कर्म किए रह ही नहीं सकते। बिना कर्म किए रहना ही एक सजा है। कर्म जीवन का यज्ञ है। कर्म के बिना हम जीवन यापन नहीं कर सकते। इसलिए गीता में कर्म योग को प्रमुख स्थान दिया गया है। कर्म का सिद्धांत बड़ा गहन
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अपनों को धन्यवाद अवश्य दीजिए

श्री छोटेलाल जी मेरे निकट पड़ौसी है और मेरे एकांकी जीवन में हमेशा सहयोगी रहे है। अभी एक दिन मैने उनसे कहा, ’ मुझे सुबह पांच बजे उठ कर यात्रा पर जाना है। क्या आप मुझे उठाने के लिए सुबह टेलीफोन की घण्टी बजा देंगे ? उन्होने हां भरी और ठीक समय पर टेलीफोन
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एक हाथ से ताली कभी नहीं बजती

मैं एक परिवार में मेहमान था । रात्रि के भोजन के बाद मैं बिस्तर पर विश्राम के लिए पहुँचा। थोड़ी देर बाद मुझे पास के कमरे से पति पत्नी के वाकयुद्ध के स्वर सुनाई दिए। ये स्वर बड़ी तीव्र गति से बढ़ रहे थे। थोड़ी देर बाद वे दोनो लड़ते हुए कमरे के बाहर आ ग
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आस्था की शक्ति को पहचाना विज्ञान ने

जीवन में सुख शान्ति और आनन्द के साथ सफलता का मार्ग दुनिया भर में खोजा गया है। हर धर्म में यह प्रयत्न हुआ है और मार्ग खोजने में प्रक्रियागत विविधता चाहे जितनी रही हो किन्तु हम गहराई से विचार करें तो पाते है कि अन्तिम मंजिल एक ही है। श्रीमद्भभगवद् गीता
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रसोईघर है जीवन दर्शन की प्रयोगशाला

पिछले दिनों मैं मुंबई गया तो वहां मुझे अपनी भतीजी मिली। वह इंजीनियरिंग कर रही है। मैंने उसे चाय बनाकर लाने को कहा। वह बोली, चाय बनाना तो मैं नहीं जानती। मैं आश्चर्यचकित रह गया। जो चाय बनाना न जानता हो, उससे भोजन के संबंध में बात करना ही व्यर्थ है। आज
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यदि राम को वनवास नहीं हुआ होता

राम को चौदह वर्ष का वनवास माता कैकई के आदेश से राजा दशरथ ने दिया। कोई भी ऐसा आदेश प्रथम दृष्टि में दंड माना जाता है। राम, राजा दशरथ के सबसे बडे़ बेटे थे। परम्परा के अनुसार उनका राजतिलक होना चाहिए था। राजतिलक की तैयारी भी थी, किन्तु इसी बीच दासी मन्थर
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बच्चों के दोस्त बनिए

आजकल बच्चों के लिए खिलौनों का बाजार खूब सजा-धजा है। विभिन्न प्रकार के रंगों वाले खिलौने दुकानों पर प्रदर्शित किए जा रहे हैं, जो बच्चों को ललचा रहे हैं। इन खिलौनों में इलेक्ट्रॉनिक खिलौने भी हैं, जो पावर सेल से चलते हैं। इन खिलौनों की कीमत आसमान तक छू
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आकाश को देखने का समय निकालिए

हम धरती को माँ की तरह पूजते हैं। उसके प्राकृतिक सौंदर्य को देख गदगद हो जाते हैं, पर हमारी दृष्टि आकाश की ओर कभी-कभी ही जाती है। आकाश भी हमारी प्रकृति का अंग है। यदि आप आकाश की ओर निहारें तो उसमें बनने वाले रंग-बिरंगे चित्रों को देखकर सब कुछ भूल जाएं।
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केदारनाथ मंदिर: वृषभ पिंड की पूजा

कहते हैं, किस्मत वालों को ही श्री केदारनाथ के दर्शन हो पाते हैं। जिस किसी ने भी बैल की पीठ के स्वरूप में विराजमान महादेव का दर्शन कर लिया, वह धन्य हो गया! श्रीकेदारनाथका मंदिर 3593फीट की ऊंचाई पर बना हुआ एक भव्य एवं विशाल मंदिर है। इतनी ऊंचाई पर इस म
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नोनू भटका मेले में (कहानी)

कुछ महीनों पहले एक मेला देखने नोनू अपने माता- पिता के साथ गया। मेले जाने के पहले माँ ने उसे समझाया, 'देखो उँगली पकड़कर चलना। मेले में बहुत भीड़ होती है। यदि उँगली छोड़ी और भटक गए तो फिर परेशानी होगी और देखो यदि साथ छूट ही जाए तो रोना मत। तुम्हारे जेब मे
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हड़कू के मन में क्या है? (कहानी)

उनकी छुटकी-सी बिटिया लगभग बेसुध पड़ी है। हड़कू और मंगलिया को ओझा ने उपाय सुझाया है, पर हड़कू क्यों मना कर रही है? हल्दुआ ग्राम में जब सूरज की किरण पड़ती है तो दूर-दूर फैले झोपड़े दिखाई देने लगते हैं मानो वे खेत में उग आए हों। रात के अंधेरे में यहां क
Oct 14 2009 07:56 PM
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आप अपने आप से क्या कहते है?

सामान्यतया हम यह समझते हैं कि हम बातचीत में एक दूसरे से कुछ न कुछ कहते है। अपने आप से कुछ कहने का प्रश्न ही नहीं है। लेकिन सच मानिए दूसरे जो कुछ कहते है और हम उसको सुनते है, उसका कोई महत्व नहीं है। वास्तव में जो हम अपने आप से कहते है, सुनते, पढ़ते, बोलते
Sep 28 2009 08:29 AM
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मृत्यु का सन्देश क्या है हमारे लिए

मृत्यु का एक डरावना, भयानक चित्र हमारे मन मन्दिर में पता नहीं कब से बैठा है । हम सब चर्चा कर लेते है किन्तु मृत्यु की चर्चा से डरते है । मृत्यु का नाम सुनते ही हमें लगता है कि अपशकुन हो रहा है । हम राम राम कर उठते है । मृत्यु हमें इसलिए डराती है कि हम
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बहुत खतरे है आधूनिक जीवन शैली में

प्रकरण क्रमांक 1- मैं अपने मित्र के निवास पर रूका था। मित्र ने बेटे से कहा, ‘टेबल से प्लेटे हटा दो’ बेटे ने कहा, ‘यह मेरा काम नहीं है, आप बिहारी को आवाज दो’। बिहारी उनके घर काम करने वाला कर्मचारी है जब मैने कहा ‘बेटा, यह घर का काम है हमें करना ही चाहिए’
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सफलता आपका इंतजार कर रही है

श्री ’क’ एक युवा छात्र था। वह पी.एम.टी. की तैयारी कर रहा था। उसके पिताजी वरिष्ठ अधिकारी थे। वे एक ज्योतिषीजी के सम्पर्क में थे। उन्होने सहज भाव से ज्योतिषी से पूछ लिया, ’पुत्र की डाक्टर बनने की क्या सम्भावना है? ज्योतिषी ने जन्म पत्री देख गणित लगाया और
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विज्ञापन का आनन्द लीजिये

आज के युग में विज्ञापनों का महत्व स्वयंसिद्ध है। जूते - चप्पल से लेकर टाई - रूमाल तक हर चीज विज्ञापित हो रही है। लिपस्टीक, पावडर, नेलपालिश, माथे की बिन्दिया विज्ञापनों का विषय है। नमक जैसी आम इस्तेमाल की वस्तुएँ भी विज्ञापनो से अछूती नहीं रह पायी है।
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माँ के गौरवशाली रूप को मत भूलिए

भारतीय संस्कृति में माँ का बड़ा उँचा और प्यारा स्थान है। यह एक ऐसा सम्बन्ध है जिसके आस पास बाकी सारे रिश्ते रहते है। पिता का रिश्ता भी माँ के बाद आता है, कहते है माता-पिता। माँ का बड़ा विराट रूप है हमारे शास्त्रों में, इसलिए वह सर्वाधिक पूजनीय है। माँ हरेक
Sep 28 2009 08:20 AM
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स्मृति के झरोखे से – वह पीड़ा में भी हंसता रहा

सामान्य विचार यह है कि मृत्यु के बाद सब कुछ समाप्त हो जाता है। देहावसान के बाद व्यक्ति के सुख दुःख, कर्म, अकर्म, विकर्म सब कुछ समाप्त हो जाते है और वह इस दुनिया से मुक्त हो जाता है। हमारे एक मित्र का कहना है ’आप डुबे जग डुबा’। मृत्यु के बाद कौन क्या
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दुःख आते कहाँ से है? जाते कहाँ है?

एक छोटी सी घटना है। एक बच्चा दीपक लेकर मन्दिर जा रहा था, रास्ते में उसे रोक कर किसी ने पूछा, ’दीपक की यह ज्योति आई कहाँ से है? बच्चा क्या जवाब देता। पूछने वाला भी शायद ही बता पाता, पर बच्चे ने एक फूंक मारी। दीपक बुझ गया। बच्चे ने प्रतिप्रश्न किया, पहले
Aug 13 2009 03:19 PM