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मेरी डायरी

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16 Jun 2010
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नव सृजन का रिक्ग्नाईजेशन बनाम एक पर एक फ्री

Hariish B. Sharmaजयपुर के बोधि प्रकाशन से बहुत ही कम कीमत पर साहित्यिक कृतियाँ उपलब्ध करने कि संकल्पना इन दिनों चर्चा में है. पहले पड़ाव में दस कृतियां सौ रुपये में उपलब्ध करने के बाद दूसरा चरण राजस्थानी साहित्य को समर्पित करने का विचार सराहनीय है. ऐसा
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मेरी मम्मी

आज मदर्स डे है। यानी मां का दिन। मां, जिसने हमारे अस्तित्व में आने की प्रक्रिया की पहली अवस्था से लेकर आज के दिन तक हर पल हमारे लिए और सिर्फ हमारे लिए जीवन जिया है। परिवार के लोगों की हर जरूरत का ध्यान रखने में भी उसकी नजर कहीं न कहीं से हमारी ही ओर
May 09 2010 08:55 PM
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सेटरडे सिनेमा में इस बार सात हिंदुस्तानी

पिंकसिटी प्रेस क्लब ऑडिटोरिय में क्लब सदस्यो को 8 मई को दोपहर 2:30 बजे दिखाई जाएगी फिल्मजयपुर. सेटरडे सिनेमा के तहत फिल्म फैंस सोसायटी व पिंकसिटी प्रेस क्लब की ओर से इस बार 8 मई को दोपहर 2:30 बजे प्रेस क्लब ऑडिटोरियम में सात हिंदुस्तानी फिल्म दिखाई
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कुछ बहुएं भी ना!

गंदे कपड़ेजूठे बरतनबूढ़ी सास के आगे पटकसहेली के साथ फिल्म देखने निकलीमिसेज शर्मापरदे परबहू के सास पर अत्याचार देखफूट-फूट कर रोईसहेली के कंधे पर सिर रखकरसिसकते हुए बोली-कुछ बहुएं भी ना!-शिवराज गूजर
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बदलाव

बेटे की शादी के बाद उसमें बड़ा बदलाव आयादहेज के विरोध मेंउसने बड़ा आंदोलन चलायासोई हुई उसकी आत्माअचानक! जाग गई थीबेटी जो उसकी शादी के लायक हो गई थी।बेटे की शादी के बाद उसमें बड़ा बदलाव आयादहेज के विरोध मेंउसने बड़ा आंदोलन चलायासोई हुई उसकी आत्माअचानक!
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गोष्ठी कैमरे की नजर से

उच्छब आयोजन समिति की ओर से "पहचान क्यों नहीं बना पा रही हैं राजस्थानी फिल्में" विषय पर होटल लक्ष्मी विलास में गोष्ठी जयपुर. राजस्थानी फिल्मा रो उच्छब आयोजन समिति की ओर से 29 मार्च को दोपहर 3 बजे होटल लक्ष्मी विलास में "पहचान क्यों नहीं बना पा रही हैं
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वो काटा के शोर में स्मृतियों की पतंग

आज बहुत ठंड थी। धूप खाने छत पर चला आया। दोनों बेटे और बेटी पतंग उड़ाने में मस्त थे। मैं पहुंचा तो हल्की सी मुस्कराहट के साथ देखा और फिर से नजरें टिका दीं आसमान पर। अभी ठीक से बैठा भी नहीं था कि वो काटा के शोर ने बरबस ही ध्यान खींच लिया। किसी की पतंग कट
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यह कैसी मस्ती?

यह कैसी मस्ती है, जिसमें घरवालों की भावनाओं का, अपने शरीर को होने वाली क्षति का कोई स्थान नहीं है। मैं पुलिया के नीचे घुसने के लिए मोड़ पर मुड़ा ही था कि सामने से स्कूटी पर तेज गति से आ रही दो युवतियां मेरी बाइक से भिड़ते-भिड़ते बचीं। मेरा जी धक से र
 
शिवराज गूजर.
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पृथक होने पर क्लेश स्वाभाविक

यह विचार हमें योगेन्द्र पिन्टू ने जयपुर से भेजे हैं
 
शिवराज गूजर.
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पत्रकारिता की चुनोतियों पर चर्चा २१ को

जी न्यूज के संपादक पुण्य प्रसून वाजपेयी और भड़ास ४ मीडिया के संस्थापक यशवंत सिंह लेंगे भाग
 
शिवराज गूजर.
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चुम्बन नहीं रेहड़ी वाले का आइटम हो गया

इन दिनों फिल्म वाले किस पर किस उछाले जा रहे हैं। सबकी फिल्मों की यू एस पी बस चुम्बन बनता जा रहा है. सोहा अली और किसर किंग इमरान हासमी के तुम मिले में दिए किस पर मीडिया बतियाते नहीं थक रहा है. बड़ी मुस्किल से मानी सोहा, इमरान को दिया किस..., जैसे शीर्
 
शिवराज गूजर.