Ladli's Image
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
29 Apr 2010
कुल प्रविष्टियां
17
पाठक भेजे
490
पसंद
50
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
28.82
पसंद करें
3
नापसंद करें

ये खिलौने सी ....

मेरे घर की चौखट आज जगमगाई देखो नन्‍ही परी मेरे घर आई इसके आने से आया इसका पलना भी नाचने वाला बन्‍दर भी साथ आई इक गु‍डि़या भी इसके लिये आये इतने खिलौने, पर हम सबके लिये बन के आई ये खिलौने सी इसकी नासमझ आने वाली बोली भी दिल को छू जाती हम हंस पड़ते जब तब ये
 
sada
पसंद करें
0
नापसंद करें

बचपन की होली ...

होली आई मुझको भी इसके प्‍यारे-प्‍यारे रंग भा गये, पापा मेरे लिये भी पिचकारी लाये भइया तो दोस्‍तों के साथ सुबह ही चला गया अब मैं किसको रंग लगाऊं सब मुझसे बड़े-बड़े हैं मुझे ही पहले रंग लगा देते हैं बहुत हो गया मैं रो पड़ती कि पापा आ गये, मुझसे कोई रंग
 
sada
Feb 24 2010 11:25 AM
पसंद करें
3
नापसंद करें

रोना पड़ता है ...

लगता है कोई जादू है मां की गोद में जो मेरा रोना बंद हो जाता है मां बेचैन होकर कहती क्‍या हुआ मेरी मुनिया को सारा घर सर पे उठा रखा था पर क्‍या करूं मैं मां की गोदी में आकर सब कुछ अच्‍छा लगता है इसलिए कभी-कभी इतना रोना पड़ता है ....।
 
sada
पसंद करें
1
नापसंद करें

कठोरता का आवरण .....

तेरी गोद ने ममता और दुलार के साथ ही मां मुझे सिखलाया है कठिनाईयों से लड़ना, हालात कितने भी बुरे हों उनसे लड़कर उबरना जाने कितने ऐसे पल दिये मुझको जिनसे संवारती हूं मैं अपनों की खुशियां साकार होते देखती हूं मैं तेरी दी हुई शिक्षा ने दिया है एक विशाल हृदय
 
sada
पसंद करें
4
नापसंद करें

खुद रो पड़ती ...

मैं चलती जब भी लड़खड़ा के मां को जाने क्‍यों लगता हैं मैं गिर जाऊंगी सच में अंकल मैं गिर भी जाती जब वो खुद दौड़ पड़ती अपने गिरने की परवाह किये बगैर तब नानी कहती अरे संभल के गिर मत जाना बेटा पर मां को तो लगता कहीं मैं रो ना दूं और मैं मां को दौड़ते दे
 
sada
पसंद करें
4
नापसंद करें

बेटी हैं ...

लड़की हूं मैं, मेरे सपनों का शीश महल, कभी उसका कोई शीशा टूटता तो कभी कोई चकनाचूर हो जाता, पर मैं किसी से शिकायत नहीं कर सकती थी, भाई पढ़ने जाते तो मैं खुशी-खुशी उनका हर काम करती, आते तो उनके लिये खाना लगाती, देर हो जाती तो वह मेरी चोटी खींच लेते, खुद
 
sada
पसंद करें
4
नापसंद करें

नन्‍हीं परी का घोड़ा ...

कभी पैरों में मेरे अपने नन्‍हें पांव रखकर मेरे हांथ पकड़ती फिर झूलने की मुद्रा में लटक जाती उसे अपने पैरों पे खड़े कर झुलाते हुऐ देखता उसका भोला चेहरा उसकी मासूम मुस्‍कान से ज्‍यादा चमकती उसकी आंखे कभी लटक जाती गले में अपनी नन्‍हीं बाहें डालकर जो मुश
 
sada
पसंद करें
5
नापसंद करें

अक्षर हैं मुझको गढ़ने ...

जाने दो मां मुझको भी पढ़ने, जाने कितने अक्षर हैं मुझको गढ़ने, पढ़ना लिखना बहुत जरूरी है नहीं तो करना पड़ता सिर्फ मजूरी है तुम भी पढ़ पाती तो पूरी मजूरी मिलती तुम्‍हे मैं घर का सारा काम करूंगी पढ़कर भी तुम्‍हारा ही नाम करूंगी वक्‍त अपना बिल्‍कुल न बर्
 
sada
पसंद करें
5
नापसंद करें

मां का दुपट्टा ....

वो अपने छोटे-छोटे हांथों से मां का दुपट्टा सर पे डाल कर कभी दुल्‍हन बन बन जाती झांक कर कभी शर्माती उसके इस खेल में शामिल होता हर कोई चेहरे पर मुस्‍कान सजाये वह दौड़ कर गोद में छुप जाती .... वो अपने ....। लाडली इस इन्‍तजार में है कि आप भी उसके लिये दो
 
sada
पसंद करें
0
नापसंद करें

मां की उलझन ....

मां को कुछ उलझन है, मेरे आने से पर वह कहती नहीं जमाने से कभी-कभी भर लाती आंखों में आंसू कहती मुझसे मन ही मन यह सच है तू मेरा अंश है पर बेटी यह सब कहते तुझसे चलेगा नहीं मेरा वंश तेरा अंत करना चाहते हैं जन्‍म के पहले मिटा कर तुझे नहीं खत्‍म करना चाहते हैं
 
sada
पसंद करें
0
नापसंद करें

बेटी मन का गहना हो ...

ऐसे मन को तुम संबल देना पूरे मन से, जिसके आंगन में बेटी मन का गहना हो । रीत निभाते जीवन की करके कन्‍यादान कैसे, पूछो उस बाबुल से जिसके मन को सहना हो । आंखों में आंसू होते चेहरे पर संतोष की छाया, जब विदाई के पल में इन अश्‍कों का बहना हो । नाजों पली वो
 
sada
Sep 07 2009 10:50 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

गिर जाती कभी . . . .

बाहों के झूले में चुप हो जाती सपनों की दुनिया में खो जाती कभी मुस्‍काती सोते-सोते जब, मां तो बस तुझमें खो जाती । खिलौने हांथ में लेकर वह मुझे, नन्‍हें कदमों से कभी देने आती । पैर धरती पर रखती तो लगता, उड़ रही हो देख मुझे भाग आती । गिर जाती कभी घुटनों के
 
sada
टैग: लाडली
पसंद करें
0
नापसंद करें

कविता .......कोई लोरी ममता भरी

पाकर तुझको खुश है आज मां इतनी गुनगुना रही कोई लोरी ममता भरी चांदनी भी चांद तारों के संग जगमगा के बिखेरती रौशनी मद्धम सी आ जाए निंदिया नींद से बोझिल नयनों में झूला तेरा झुलाती पवन आती जाती तेरे चेहरे पे आती जब मुस्‍कान उसको सारी दुनिया की खुशियां मिल जाती
 
sada
पसंद करें
0
नापसंद करें

बच गई मेरी लाडो बुरी नजर से ...

तेरी नन्‍हीं आंखों के सपने, मेरी आंखों में बसते हैं, है मेरी हर दुआ तेरे लिए मुस्‍कान तेरी, आंसू मेरे रोज जाने कितने जतन करती हर जगह तेरी खुशियां ढूंढती हूं सजाती हूं ख्‍वाब आंखों ही आंखो हर आने वाले पल में तू जब खुश होकर हंसने लगती नजर तुझको लग न जाये
 
sada
टैग: कविता
पसंद करें
0
नापसंद करें

नन्ही मुस्कुराहट

तारो की पोटली,खुलकर गिरी कही.. जब मिली तो एक तारा कम था,मद्धम रोशनी में, ज़मीन पर देखा तो एक नन्ही मुस्कुराहट उंगली थाम के चली आई आँगन में.. खिलखिलाती रहती है अब गालो पे हमारे.. और मुड़ कर देखती है पीछे... जब भी प्यार सेकोई कहता है... लवी... हमारी बिटिया
 
sada
पसंद करें
0
नापसंद करें

यह है बेटियों का ब्‍लाग लाडली -

यह है बेटियों का ब्‍लाग लाडली -मन को छू लेते हैं अक्‍सर वो पल, जब कोई नन्‍हीं कली आपके जीवन, में लाती है खुशियां अनगिनत आप साझा करें उन पलों को अपनी रचना के किसी भी रूप में चाहे वह कविता, हो या कहानी, गजल हो या छंद बस आप उसे यूनिकोड में एक ई-मेल करें इस
 
sada
Aug 07 2009 11:43 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

Ladli

मन को छू लेते हैं अक्‍सर वो पलजब लाडली बेटी आपके आंगन काहर कोना महका देती है, अपनी मुस्‍कान से, आइये साझा करें उन खुशियों को .... ।
 
sada
Aug 03 2009 01:27 PM