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स्मृति-दीर्घा ...

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19 May 2010
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अंतिम गीत: लिए हाथ में हाथ चलेंगे.... ---संजीव 'सलिल'

अंतिम गीतलिए हाथ में हाथ चलेंगे.... संजीव 'सलिल'(टीप: यह गीत पूज्य मातुश्री स्व. शांति देवी के निधन पश्चात् पिताश्री  अब स्व. राज बहादुर वर्मा की मनःस्थिति का शब्दचित्र है जिन्हें अपनी सर्वंगिनी के बिना जीवन स्वीकार्य न हुआ. वे सदा दिवंगता पत्नी की
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
May 19 2010 09:56 AM
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मातृ दिवस पर स्मृति गीत: माँ की सुधियाँ पुरवाई सी.... संजीव 'सलिल'

मातृ दिवस पर स्मृति गीत: माँ की सुधियाँ  पुरवाई सी....संजीव 'सलिल'*तन पुलकित मन प्रमुदित करतीं माँ की सुधियाँ  पुरवाई सीतुमको खोकर खुद को खोया, संभव कभी न भरपाई सी ...  *दूर रहा जो उसे खलिश है तुमको देख नहीं वह पाया.निकट रहा मैं
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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क्षणिकाएँ... संजीव 'सलिल'

क्षणिकाएँ...संजीव 'सलिल'*कर पाता दिलअगर वंदनातो न टूटतायह तय है.*निंदा करनाबहुत सरल है.समाधान हीमुश्किल है.*असंतोष-कुंठाकब उपजे?बूझे कारण कौन?'सलिल' सियासतस्वार्थ साधतीजनगण रहता मौन.*मैं हूँ अदनाशब्द-सिपाही.अर्थ सहित देंशब्द गवाही..*
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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स्वतंत्रता सत्याग्रही श्रीमती सुशीला देवी दीक्षित के प्रति काव्यांजलि: संजीव 'सलिल'

स्वतंत्रता सत्याग्रही श्रीमती सुशीला देवी दीक्षित के प्रति काव्यांजलि: संजीव 'सलिल'भारत माँ रक्षा के हित, तुमने दी थी कुर्बानी.नेह नर्मदा सदृश तुम्हारी, अमृतमय निर्मल वाणी..स्निग्ध दृष्टि, ममतामय आनन्, तुम जग जननी लगती थीं.मैया की संज्ञा तुम पर ही सत्य
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
Apr 02 2010 07:16 PM
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कविता: चिर पिपासु -आचार्य श्यामलाल उपाध्याय

कविता:चिर पिपासुश्यामलाल उपाध्यायचिरंतन सत्य के बीचश्रांति के अवगुंठन के पीछेचिर प्रतीक्षपन्न निस्तब्धनिरखता उस मुकुलित पुष्प कोऔर परखता उस पत्र कानिष्करुण निपातजिसमें नव किसलय केस्मिति-हास की परिणतितथा रोदन के आवृत्त प्रलाप.निदर्शन-दर्शन के
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
Mar 21 2010 01:51 AM
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नवगीत: आँखें रहते सूर हो गए --संजीव 'सलिल'

नवगीत;संजीव 'सलिल'*आँखें रहते सूर हो गए,जब हम खुद से दूर हो गए.खुद से खुद की भेंट हुई तो-जग-जीवन के नूर हो गए...*सबलों के आगे झुकते सब.रब के आगे झुकता है नब.वहम अहम् का मिटा सकें तो-मोह न पाते दुनिया के ढब.जब यह सत्य समझ में आया-भ्रम-मरीचिका दूर हो
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
Mar 05 2010 09:18 AM
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स्मृति गीत: हर दिन पिता याद आते हैं --संजीव 'सलिल'

संजीव 'सलिल'*जान रहे हम अब न मिलेंगे.यादों में आ, गले लगेंगे.आँख खुलेगी तो उदास हो-हम अपने ही हाथ मलेंगे.पर मिथ्या सपने भाते हैं.हर दिन पिता याद आते हैं...*लाड, डांट, झिडकी, समझाइश.कर न सकूँ इनकी पैमाइश.ले पहचान गैर-अपनों को-कर न दर्द की कभी नुमाइश.अब न
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
Feb 11 2010 10:06 PM
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गीत: हे समय के देवता --हे समय के देवता!

गीतहे समय के देवता! संजीव 'सलिल' *हे समय के देवता! गर दे सको वरदान दो तुम...*श्वास जब तक जल रही है,आस जब तक पल रही है,अमावस का चीरकर तम-प्राण-बाती जल रही है.तब तलक रवि-शशि सदृश हम रौशनी दें तनिक जग को.ठोकरों से पग न हारें-करें ज्योतित नित्य मग को.दे सको
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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राजेन्द्र अवस्थी जी का काल-चिंतन

राजेन्द्र अवस्थी चले गये । काल-चिंतन  का विराट चिंतन सँजोये । कादम्बिनी में प्रकाशित उनके काल-चिंतन के बहुत-से अंश मेरे हृदय में पैबस्त होते गये हैं क्रमशः । आज काल को सहजतः समझने वाले उपक्रम को रचने वाला चिंतक काल-शून्य में उतर गया । हार्दिक व
 
हिमांशु । Himanshu
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स्मृति दीर्घा: --संजीव 'सलिल'

स्मृति दीर्घा: संजीव 'सलिल' * स्मृतियों के वातायन से, झाँक रहे हैं लोग... * पाला-पोसा खड़ा कर दिया, बिदा हो गए मौन. मुझमें छिपे हुए हुए है, जैसे भोजन में हो नौन.. चाहा रोक न पाया उनको, खोया है दुर्योग... * ठोंक-ठोंक कर खोट निकली, बना दिया इंसान. शत वन
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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स्मृति गीत: और होना चाहिए... --संजीव 'सलिल'

स्मृति गीत संजीव 'सलिल' एक कोना कहीं घर में, और होना चाहिए... * याद जब आये तुम्हारी, सुरभि-गंधित सुमन-क्यारी. बने मुझको हौसला दे, क्षुब्ध मन को घोंसला दे. निराशा में नवाशा की, फसल बोना चाहिए. एक कोना कहीं घर में, और होना चाहिए... * हार का अवसाद हरकर,
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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शोकगीत: नाथ मुझे क्यों / किया अनाथ? संजीव 'सलिल'

पूज्य मातुश्री स्व. शांति देवि जी की प्रथम बरसी पर शोकगीत: नाथ मुझे क्यों / किया अनाथ? संजीव 'सलिल' नाथ ! मुझे क्यों किया अनाथ?... * छीन लिया क्यों माँ को तुमने? कितना तुम्हें मनाया हमने? रोग मिटा कर दो निरोग पर- निर्मम उन्हें उठाया तुमने. करुणासागर!
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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आइए, 2005 के नोबल विजेता विद्रोही साहित्यकार से मिलें (-काजल कुमार)

कथादेश के फरवरी 2009 अंक में, 2005 के साहित्य के लिए  नोबल पुरुस्कार से  सम्मानित हैरोल्ड पिंटर के बारे में पढ़ते हुए मुझे लगा कि क्यों न इसे उन पाठकों से भी बांटा जाए जो शायद इसे पढ़ने से रह गए हों...
 
काजल कुमार Kajal Kumar
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दो उम्दा शेर (-काजल कुमार)

दौर- ए- तरक्की के अंदाज़ निराले हैं, ज़हनों में अँधेरे हैं सड़कों पे उजाले हैं.                             &nb
 
काजल कुमार Kajal Kumar
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स्मृति गीत: संजीव 'सलिल'

स्मृति गीत: संजीव 'सलिल' सृजन विरासत तुमसे पाई... * अलस सवेरे उठते ही तुम, बिन आलस्य काम में जुटतीं. सिगडी, सनसी, चिमटा, चमचा चौके में वाद्यों सी बजतीं. देर हुई तो हमें जगाने टेर-टेर आवाज़ लगाई. सृजन विरासत तुमसे पाई... * जेल निरीक्षण कर आते थे, नित
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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कविता

हश्र              अजब चलन है मेरे शहर का; यहाँ, हवा के लिए सोने के ताले हैं चाँदी की दीवारें पत्थर के हैं शीशे पारे की साँसें.. सब मुमकिन है बस, इक बहने की इजाज़त के सिवा... अजब चलन है मेरे
 
काजल कुमार Kajal Kumar
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।।संस्मरणात्मक श्रद्धांजलि।।

टिटहरी टिट टिट करती कभी बादलों से कहती सुनो ..सुनो... चित्रकार नहीं रहा, तो कभी पेड़ के नीचे बिल में पैर पसारे साँप से कहती....मालूम है चित्रकार चला गया..... , तो कभी दरख्त की शाख पर बैठ टिटियाती.... अरे देखो... वह चला गया, लेकिन मुझे मालूम क्यों नहीं
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जनसत्‍ता में प्रख्‍यात कवि श्‍याम विमल की स्‍मृति याद की जगह

चित्र पर चटका लगायें और पढ़ आयें। दैनिक जनसत्‍ता में प्रख्‍यात कवि, उपन्‍यासकार, कहानीकार, व्‍यंग्‍यकार की दिनांक 7 अक्‍तूबर 2009 को संपादकीय पेज पर दुनिया मेरे आगे स्‍तंभ में प्रकाशित स्‍मृति याद की जगह।
 
अविनाश वाचस्पति
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ग़ज़ल

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काजल कुमार Kajal Kumar
Sep 26 2009 07:19 AM
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स्मृति-दीर्घा ...

स्मृति गीत-पितृव्य हमारे नहीं रहे.... आचार्य संजीव 'सलिल'*वे आसमान की छाया थे.वे बरगद सी दृढ़ काया थे.थे-पूर्वजन्म के पुण्य फलित वे,अनुशासन मन भाया थे.नवस्वार्थवृत्ति लख लगता है भवितव्य हमारे नहीं रहे.पितृव्य हमारे नहीं रहे....*वे हर को नर का वन्दन थे.वे
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
टैग: elegy
Sep 23 2009 10:12 AM
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हाईटेक पूजा

एक नवीनतम और अनोखा अनुभव, संस्मरण के रूप में पोस्ट करने की इच्छा को रोक पाना कठिन हो रहा है मेरे लिए। करीब एक महीना पहले की घटना है। मेरा लड़का चंचल, जो कि आजकल बेंगलोर में शिक्षार्थी है और अपने बड़े भाई सदृश वसंत के साथ रहता है, का फोन आया कि वसंत भैया
 
श्यामल सुमन
Sep 20 2009 08:08 AM
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महाशोक: डॉ चित्रा चतुर्वेदी 'कार्तिका' नहीं रहीं -acharya sanjiv 'salil

10 September 2009महाशोक: डॉ चित्रा चतुर्वेदी 'कार्तिका' नहीं रहीं -acharya sanjiv 'salil Acharya Sanjiv Salilhttp://divyanarmada.blogspot.comसंस्कारधानी जबलपुर, ८ सितंबर २००९, बुधवार. सनातन सलिल नर्मदा तीर पर स्थित महर्षि जाबाली, महर्षि महेश योगी और
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
टैग: sanjiv 'salil'
Sep 10 2009 01:01 AM
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मेरे पहले साहित्यिक गुरु : ब्रजेश परसाई

इस शिक्षक दिवस पर मैंने यादों की गुल्लक को खंगाला। याद किया कि मेरी जिंदगी में कौन लोग थे,जो शिक्षक नहीं थे,पर उनसे अनजाने में मैंने बहुत सीखा। मुझे ब्रजेश भाई बहुत याद आए। वे मेरे पहले साहित्यिक गुरु थे मैं यह कह सकता हूं। साहित्यिक की बारीकियों को
 
राजेश उत्‍साही
टैग: rajesh utsahi
Sep 09 2009 11:12 AM
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बन जा मेरी मात यशोदा

काफी दिन पहले मेरी धर्मपत्‍नी द्वारा लिखित एक भजन आज आपको पढा रहा हूं आशा है आप सभी को पसंद आएगी। यह भजन मेरी पत्‍नी ने जन्‍माष्‍टमी पर लिखा था लेकिन कुछ व्‍यस्‍तता के चलते आज इसे आप सभी को पढवा रहा हूंतू बन जा मेरी मात यशोदामैं कान्‍हा बन जाऊंजा यमुना
 
मोहन वशिष्‍ठ 9988097449
Sep 08 2009 02:45 PM
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बेजुबान जानवरों पर अत्‍याचार

एक बार एक किसान अपने पशुओं के लिए भुस यानि सूखा चारा लेने पास के गांव जाने की तैयारी करने लगा। इसकी भनक जैसे ही उसके सबसे छोटे बेटे और घर आये हुए एक नाती जो उम्र में अभी काफी छोंटे थे, को लगी तो वे भी खुश होकर तैयार होने लगे। लेकिन किसान के बड़े बेटे व
 
पवन *चंदन*