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14 Jun 2010
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शिव भजन

"शंकर जी का भजन "शिव शंकर कहूँ याद करते हैं हम पूजा कैसे करूँ यह नहीं है पता ।तुमको कहते हैं औघर दानी सही,इस अधम को तो यह भी नहीं है पता ।शिव शंकर ............................ ।फूल अक्षत और चन्दन धरा थाल में ,ध्यान कैसे धरूँ यह
 
Kusum Thakur
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श्री शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम

"श्री शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम"नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय ।नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नमः शिवाय ।।मंदाकिनीसलिलचन्दनचर्चितायनंदीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ।मंदारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै म काराय
 
Kusum Thakur
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भगवान का भजन

भगवान का भजन अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम राम नारायणम जानकी बल्लभम कौन कहता है भगवान आते नहीं  तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं अच्युतम केशवम..............कौन कहता है भगवान खाते नहीं तुम शबरी के जैसे खिलते नहीं अच्युतम
 
Kusum Thakur
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भोला बाबा केर आरती

" भोला बाबा केर आरती "आरती करो हर हर की करो नटवर की भोले शंकर की आरती करो शंकर की ....2सर पर शशि का मुकुट संभारे तारों के पायल झनकारे धरती अम्बर डोले तांडव लीला की नटवर की आरती करो शंकर कीआरती करो हर हर की...फन का हार पहनने
 
Kusum Thakur
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बाबा जलेश्वर नाथ !!

बाबा जलेश्वर नाथ मंदिर भोला बाबा केर महिमा अपरम्पार छैन्ह  । कतहु ओ पर्वत पर विराजमान छथि तs कतहु पानी केर तर में। जनकपुर (नेपाल )लग जलेश्वर नामक स्थान छैक ओहि ठाम बाबा जलेश्वर नाथ के मंदिर छैन्ह  । एहि  मंदिर में बाबा
 
Kusum Thakur
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बासंती पूजा

हिन्दू पंचांग के हिसाब से एक मास में दो पक्ष होते हैं। पहला कृष्णपक्ष , इसमें चंद्रमा निरंतर घटता जाता है और अमावस्या के दिन पूर्ण अंधकार हो जाता है। दूसरा शुक्ल पक्ष , जिसमें चंद्रमा बढ़ता है व पूर्णिमा के दिन पूर्ण प्रकाशित हो जाता है। चैत्र शुक्ल पक्ष
 
Kusum Thakur
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महा शिवरात्रि !!

मिथिला में शिव आ शक्ति केर पूजा होइत छैक। कोनो पाबनि हो बियाह हो कि उपनयन, बिना भोला बाबा आ भगवती के गीत के ओ संपन्न नहि भs सकैत छैक। मोन भेल, जे सब net प्रयोग करैत छथि हुनका लोकनि के लेल किछु भगवतीक गीत, महेशवाणी आ नचारीक संग्रह एकहि ठाम रहे तs हुनका
 
Kusum Thakur
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भोला बाबा के गीत

भोला बाबा के गीतकरो शिव चन्द्र का पूजा ये शंकर कष्ट हारी हैंधरो फिर ध्यान तन मन से ये शम्भू झाडी वासी हैं ....२न शिव कैलाश में रहते न जोगी के ह्रदय रहतेवे रहते भक्त के वश में सदा शिव नाम धारीकरो शिव ......................................... ।तुम्हारे
 
Kusum Thakur
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रक्षा बंधन

रक्षा बंधन केर मंत्र येन बन्धो बलि राजा दान वेन्द्रो महाबलः । तेनत्वा प्रतिबधनामि रक्षे माचल माचल: ।।
 
Kusum Thakur
Dec 29 2009 11:56 AM
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दूर्वाक्षत मंत्र

मैथिल विवाह मे दूर्वाक्षतक बड महत्व छैक आ चुमाओन जतेक बेर होयत छैक एहि मंत्रक काज परैत छैक। आय काल्हि दूर्वाक्षतक मंत्र याद रखनाइ एकटा समस्या भs गेल छैक खास कs शहर मे। ओना त पत्रा मे मंत्र रहैत छैक मुदा कतहु कतहु पत्रा नहि रहैत छैक आ नेट अवश्य रहैत छ
 
Kusum Thakur
Dec 29 2009 11:56 AM
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मैथिल विवाह

मैथिल विवाहक विधक सामग्री कहल गेल छैक विवाह स s विध भारी । सच मे मैथिलक विवाह मे विधक ओरिऔन करय मे आ एक एक टा सामग्री जुटाबय मे आय काल्हि लोक के हालत ख़राब भs जायत छैक। एक तs आय काल्हि लोक के बुझलो नहि रहैत छैक, दोसर शहर मे सामग्री भेटय मे से दिक्कत
 
Kusum Thakur
Dec 29 2009 11:56 AM
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Sidhyant

पंजी) are kept with them in their house in Saurath, these records are invaluable for Maithils because it has their ancestors name and the place their ancestors belonged to. Saurath is a village which is five kilometers from Madhubani. After going thr
 
Kusum Thakur
Dec 29 2009 11:56 AM
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Kohbar

कोहबर)। It is decorated before the wedding and is the most important part or place of Maithil's marriage. It has a great significance during the wedding. For four five days maximum time of bride and bride groom is spent in the kohbar, doing rituals.
 
Kusum Thakur
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डोली ( Bride Going To Her Husban's House )

डोली पर सवार भs कनियाँ अपन सासुर जा रहल छथि मधुबनी शैली में कयल गेल चित्रकारी
 
Kusum Thakur
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कवि कोकिल विद्यापति(तीसरी कड़ी )

कवि कोकिल विद्यापति " कहा जाता है कि महा कवि विद्यापति की भक्ति एवं पद की माधुर्य से प्रसन्न हो " त्रिभुवन धारी शंकर " उनके यहाँ उगना ( नौकर ) के रूप में उनकी सेवा की। विद्यापति को उगना जंगल में मिला था और उस दिन से वह विद्यापति की चाकरी करने लगा। एक
 
Kusum Thakur
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कवि कोकिल विद्यापति (दूसरी कड़ी )

कवि विद्यापति ने सिर्फ़ प्रार्थना या नचारी की ही रचना नहीं की है अपितु उनका प्रकृति वर्णन भी उत्कृष्ठ है। बसंत और पावस ऋतु पर उनकी रचनाओं से मंत्र मुग्ध होना आश्चर्य की बात नहीं। गंगा स्तुति तो किसी को भाव विह्वल कर सकता है। ऐसा महसूस होता है मानों ह
 
Kusum Thakur
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कवि कोकिल विद्यापति

कवि कोकिल विद्यापति " कवि कोकिल विद्यापति " का पूरा नाम " विद्यापति ठाकुर था। धन्य है उनकी माता " हाँसिनी देवी " जिन्होंने ऐसे पुत्र रत्न को जन्म दिया , धन्य है विसपी गाँव जहाँ कवि कोकिल ने जन्म लिया। " श्री गणपति ठाकुर " ने कपिलेश्वर महादेव की अराधन
 
Kusum Thakur
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Madhubani Painting

दुर्गा पूजा में नो दिन भिन्न भिन्न पातक काज परैत छैक । एहि चित्रकला में नौवो दिन उपयोग में आबय वाला पात के देखायल गेल अछि ।
 
Kusum Thakur
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kohbar

कोहवर मिथिलाँचल में कोहवर सब सँ प्रसिद्ध चित्रकला अछि जाहि केर बिना कोनो विवाह संपन्न नहिं होइत छैक । कनिया बरक कोठली के सेहो कोहबर कहल जाइत छैक आ एहि प्रकारक चित्रकला कनिया बरक कोठली में लगायल जाइत छैक जाहि केर अपन विशेष महत्व होइत छैक| कोहबर(चित्र
 
Jyoti Chaudhary
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Durga Devi

अहि में नवदुर्गाक चित्र मधुबनी पेंटिंग के ढंग सs बनाओल गेल अछि । प्रतिप्रदा सs नवमी तक जाहि रूप के पूजा होइत अछि तकर क्रमबद्ध रूप देल गेल अछि । ई सबस पहिने २००८ के दुर्गा पूजा में विदेह वेब साईट में प्रकाशित भs चुकल अछि । प्रत्येक देवी के हाथक संख्या
 
Jyoti Chaudhary
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पुरैन

 
Jyoti Chaudhary
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Sama Chakeba

चुगला), Vrindaban(वृन्दाबन), Batgamani (बटगमनी), are made till Ekadashi, the Eleventh Day and ends on Full Moon of Kartik that is Kartik Poornima . It is said that on Ekadashi the date for Sama's "Bidai" is fixed and on Poornima she goes, that is cal
 
Kusum Thakur
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भगवतीक गीत

भगवतीक गीतजगदम्ब अहिं अवलम्ब हमरहे माय अहाँ बिनु आस ककर । ....२जँ माय हमर दुःख नय सुनबयत जाय कहु ककरा कहबयअछि पुत्र अहिंक बनल टुगरहे माय अहाँ बिनु आस ककरजगदम्ब अहिं .................. ।हम भरि जग सँ ठुकरायल छीमाँ अहिंक शरण में आयल छी ।अछि बीच भ्रमर में
 
Kusum Thakur
Sep 23 2009 09:29 PM
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क्षमा - प्रार्थना

माँ दुर्गाअपराध सहस्राणि क्रियन्तेsहर्निशं मया ।दासोsयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरी ।।आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् ।पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरी ।।मंत्रहींनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरी ।यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे
 
Kusum Thakur
Sep 18 2009 09:33 PM
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श्री भगवती स्तोत्रम्

जय भगवती देवी नमो वरदे , जय पापविनाशिनी बहुफलदे ।जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे , प्रणमामि तु देवी नरात्रि हरे ।।जय चन्द्र दिवाकरनेत्रधरे , जय पावक भूषितवक्त्रवरे ।जय भैरव देह निलीनपरे , जय अन्धकदैत्यविशोषकरे ।।जय महिषविमर्दिनी शूलकरे , जय लोकसमस्तकपापहरे ।जय
 
Kusum Thakur
Sep 18 2009 05:47 PM
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भोला बाबा के गीत

भोला बाबा के गीतहे हर मन द करहुँ प्रतिपाल ,सब बिधि बन्धलहुँ माया जाल ।हे हर मन ........................... ।सब दिन रहलहुँ अनके आस ,अब हम जायब केकरा पास ।हे हर मन .......................... ।बीतल बयस तीन पल मोरा ,धयल शरण शिव मापन तोरा ।हे हर मन
 
Kusum Thakur
Sep 16 2009 10:41 AM
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भोला बाबा के गीत

मिथिला में शिव आ शक्ति केर पूजा होइत छैक। कोनो पाबनि हो बियाह हो कि उपनयन, बिना भोला बाबा आ भगवती के गीत के ओ संपन्न नहि भs सकैत छैक। मोन भेल, जे सब net प्रयोग करैत छथि हुनका लोकनि के लेल किछु भगवतीक गीत, महेशवाणी आ नचारीक संग्रह एकहि ठाम रहे तs हुनका
 
Kusum Thakur
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शिव स्त्रोत

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनमउर्वारुक मिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ।कहते हैं शिव जी अर्थात भोला बाबा या भोले दानी बहुत जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। उन्हें यदि प्रतिदिन जल चढाई जाय तो वो उससे भी प्रसन्न रहते है। वैसे तो लोगों का अलग अलग मत
 
Kusum Thakur
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यज्ञोपवीत मंत्र

बाजसनेयी केर यज्ञोपवीत मंत्रॐ यज्ञोपवीतम परमं पवित्रं प्रजा पतेर्यत्सहजं पुरस्तात् । आयुष्यमग्रयं प्रतिमुंञ्च शुभ्रं। यज्ञोपवितम् बलमस्तुतेज:।।छन्दोग केर यज्ञोपवीत मंत्रॐ यज्ञो पवीतमसि यज्ञस्य त्वोपवीतेनोपनह्यामि।
 
Kusum Thakur
Aug 17 2009 10:29 AM
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दूर्वाक्षत मंत्र

मैथिल विवाह मे दूर्वाक्षतक बड महत्व छैक आ चुमाओन जतेक बेर होयत छैक एहि मंत्रक काज परैत छैक। आय काल्हि दूर्वाक्षतक मंत्र याद रखनाइ एकटा समस्या भs गेल छैक खास कs शहर मे। ओना त पञ्चांग मे मंत्र रहैत छैक मुदा कतहु कतहु पञ्चांग नहि रहैत छैक आ नेट अवश्य रहैत
 
Kusum Thakur
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विद्यापति गीत

कवि कोकिल विद्यापतिकनक-भूधर-शिखर-बासिनीचंद्रिका-चय-चारु-हासिनिदशन-कोटि-विकास-बंकिम-तुलित-चंद्रकले ।।क्रुद्ध-सुररिपु-बलनिपातिनिमहिष- शुम्भ-निशुम्भघातिनिभीत-भक्त-भयापनोदन -पाटव -प्रबले।।जे देवि दुर्गे दुरिततारिणिदुर्गामारी - विमर्द -कारिणि भक्ति - नम्र -
 
Kusum Thakur
Aug 13 2009 11:33 AM
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विद्यापति गीत

कवि कोकिल विद्यापतिगौरा तोर अंगना।बर अजगुत देखल तोर अंगना।एक दिस बाघ सिंह करे हुलना ।दोसर बरद छैन्ह सेहो बौना।।हे गौरा तोर ................... ।पैंच उधार माँगे गेलौं अंगना ।सम्पति मध्य देखल भांग घोटना ।।हे गौरा तोर ................ ।खेती न पथारि शिव गुजर
 
Kusum Thakur
टैग: नचारी
Aug 12 2009 05:04 PM
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पंचांग

मैथिली पंचांगसन् १४१७ साल (अंग्रेजी २००९-२०१० ई.)विक्रम सं. - २०६६ - ६७Festivals this year 1417 Saal (8 July 2009 - 26 July 2010) Festival Date Tithi Duration IST Hours Remarks From To Mauna Panchami Madhushravani begins 12 Jly (11/7)2051 (12/7)2148 In
 
Kusum Thakur
Aug 12 2009 02:12 PM