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17 Jun 2010
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संकल्प

मै अपना जीवन आज समर्पित करता हूँअपने इस मातृभूमि के कोमल चरणों परबदहाली को खुशहाली में अब बदलूँगा.अपने जीवन को इसपर मै न्योछावर करनेताओं पर से जनता का विश्वाश उठासबको अब आज़ादी की पाठ पढ़ाऊंगा जिससे भारत में फिर से खुशियाँ आ जाएँहिंदुत्व संग्राम को वही
 
राहुल पंडित
Jun 16 2010 10:23 AM
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एक और धर्मनिरपेक्षता

कल जम्मू कश्मीर सरकार का निर्णय सुना.अब वैष्णो देवी और अमरनाथ जी की यात्रा पर जाने वालों को प्रवेश शुल्क देना पड़ेगा.मुझको समझ में नहीं आ रहा है की सरकारें ऐसा क्यूँ करती हैं?क्या हिंदुस्तान में एक हिन्दू होना अपराध हो गया है?मेरे प्यारे मैकाले के औलाद
 
राहुल पंडित
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मै हिन्दू क्यूँ हूँ?

मै हिन्दू इसलिए नहीं हूँ की मैंने एक हिन्दू परिवार में जन्म लिया है.जैसा की हमारा राष्ट्र भारत एक लोकतान्त्रिक देश है.यहाँ सभी को अपना धर्म मानने का अधिकार है.कोई भी भी अपना धर्म परिवर्तन कर सकता है.इसके वावजूद मै एक हिन्दू हूँ या हिन्दू धर्म के प्रति
 
राहुल पंडित
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भारत भूमि

यह पुण्यभूमि भारत भूमिसारी दुनिया से न्यारी हैजहाँ पुरुष सब धर्म रूप हैंदेवी हर एक नारी हैयही जनम लेकर गौतम नेप्रेम पंथ सिखलाया थासत्य,अहिंसा,पर सेवा कासबको पथ पढाया थायहीं से जन्मा आदि धर्म जोहिन्दू धर्म है कहलायाजीव मात्र से प्रेम करो तुमजिसने सबको
 
राहुल पंडित
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माफ़ कर दो

मै लिखूं क्या तुझे,क्या कहूं आज अबमेरी आँखों के आंशू नहीं रूक रहे हाथ उठता नहीं,कलम चलती नहींमेरे अरमा मेरी आग में जल रहेआज कैसे कहूं की अब मै ,मै नहींबन्धनों में बधा एक विचारा हूँ मैआज कैसे कहूं तू मुझे भूल जारुढ़िवादी रिवाजों का मारा हूँ मैसाथ जीने
 
राहुल पंडित
Jun 09 2010 10:12 AM
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आये गर्मी के प्यारे दिन

आये गर्मी के प्यारे दिनसब लोगों का तन-मन डोलाआग सरीखा तपता सूरजलगता जैसे आग का गोलामोती के दानो से जल कड़पूरे शारीर पर छ जायेआये पंखे-कूलर के दिनहवा सभी के मन को भाएशाम समय गंगा के तट परफिर से आये सभी नहानेपुरे दिन झेली गर्मी सेएक बार छुटकारा पानेरात
 
राहुल पंडित
Jun 05 2010 01:58 PM
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३ गलतियाँ:जीवन बदल देती हैं.

हम अपनी जिन्दगी में जाने-अनजाने कुछ ऐसी गलतियाँ कर देते हैं जो हमारे पूरे जीवन क्रम को प्रभावित करती हैं.मै भी अपनी जिन्दगी की ३ बड़ी गलतियाँ आज सबके सामने शेयर करने जा रहा हूँ शायद वो गलतियाँ नहीं हुई होती तो मै आज कुछ और ही होता-१-पढने में मुझे रूचि
 
राहुल पंडित
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मै भारतीय हूँ

कल रात को मुझे मेरे एक मित्र का सन्देश मिला.पढने के बाद मै पूरी रात सो नहीं पाया.ऐसा नहीं है की मुझे मोबाइल पर सन्देश नहीं मिलते,लेकिन उनका वह सन्देश मुझे हिला कर रख दिया.सन्देश कुछ इस तरह से था-एक अमेरिकी इंडिया घुमने के लिए आता है और जब वापस अमेरिका
 
राहुल पंडित
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ह से हिन्दू,ह से हिंदी,ह से हिंदुस्तान हैह से हरि हैं,ह से हर हैं,हरी-हर अपने प्राण हैंह से हर-हर महादेव की बोली हमने बोला हैह से हरि का काज कारन कोहर हिन्दू मन डोला हैहम ही हिंदी,हम ही हिन्दू हम ही हिंदुस्तान हैंदुनिया को समता सिखलाता,हिन्दू धर्म महान
 
राहुल पंडित
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तितली रानी

रंग विरंगे पंखो वालीपिली लाल हरी और कालीपरी देश की राजकुमारीतुम कितनी लगती हो प्यारीउडती जब तुम असमान मेंबच्चे होते ख़ुशी लान मेंदौड़-दौड़ कर तेरे पीछेकहते सभी मधुर सब्दों मेंसबकी सुन्दरता है पानीदेखो आ गयी तितली रानीजब तुम फूलों पर बैठतीकलियाँ मचल-मचल
 
राहुल पंडित
Mar 26 2010 11:15 AM
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रामसेतु की कहानी

त्रेता युग में धरती पर जबराक्षस कुल का उत्पात हुआऋषिओं में व्याकुलता छाईधरती को भी संताप हुआले साथ पूज्य देवों को तबवह श्री विष्णू के पास गयीवसुधा पर असुर कुशाशन कारो-रो कर सब वृतांत कही"हे दया सिन्धु अवनी पर अबअसुरों का शाशन चलता हैस्त्री,गोउ, ब्रह्मण
 
राहुल पंडित
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मस्ती के पथ बढ़ते जाते

सब दुनिया की धुआं उड़ातेहसते -हसते,गाते-गातेआशाओं की कश्ती लेकरमस्ती के पथ बढ़ते जातेधूम-धड़ाके,सैर-सपाटेपुष्प बने मग के सब कांटेहम हैं,हम हैं,हम ही हैंदुनिया में बाकी सब गम हैयही सोचकर,यही समझ करइसीलिए इस पथ पर बढ़ करअपनी जय जय करते जातेमस्ती के पथ बढ़ते
 
राहुल पंडित
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आह्वान

अपनी धरती-अपना अम्बरअपनी नदियाँ-अपना सागरअपना प्यारा भारत महानमुह से बोलो अब जय श्री रामकरुनानिधान का महासेतुजिसको श्रीराम ने बनवायाबानर रीछो से शिला मंगानल-नील दे जिसको जुड्वायाहम हिन्दू जिसके पूजक हैंजिसकी महिमा जग न्यारी हैकलयुग के रावन के सह परउसको
 
राहुल पंडित
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गुडिया

हूंक उठी दिल में अजीब सीभीग गया तन बिन बारिश केहाहाकार मच गयी रगों मेंसपने बुनते लावारिश सेसोच रहा क्या-क्या लिख दूं मैबध कर जिसमे कैद रहे वोजब भी करवट बदले पन्नेहर करवट के बाद दिखे वोपर दिल तो अभ भी कच्चा हैजैसे छोटा सा बच्चा हैमहसूस करे हर लम्हो कोपर
 
राहुल पंडित
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एक पत्र आपको

अभी तक मैंने सुना था की ब्लॉग पर लोग अपने विचारो का आदान -प्रदान करते हैं,लेकिन शायद मै पहला व्यक्ति हूँ जो अपने ब्लॉग पर किसी को पत्र लिख रहा हूँ.ये पत्र हमारी फिल्मो,या लैला-मजनू,सीरी-फरहाद या रोमियो -जुलिओट की तरह कोई प्रेमपत्र नहीं है.यह एक ऐसा पत्र
 
राहुल पंडित
Mar 23 2010 01:32 PM
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अतीत

सीसे के मानिंद टूटते हुएअतीत को देखा मैंने अपने सामने हीपहले घर से समुदाय,समुदाय से गावं बनते थेपर अब तो राज्य से राज्यदेश से देश घर से घर बनते हैंकहाँ गया वो अतीत?शायद वह भी अतीत ही बन गयाबिना गुजरे हुए मेरे सामने सेसंयुक्त परिवार कल्पना बन गया रह गईं
 
राहुल पंडित
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एक सिक्का

रोड पर बैठे हुए,हाथ में खाली कटोराबन दया का पात्र जग में,वह धूप में बैठा हुआ था.रास्ते पर चहल कदमी,कम नहीं तो अधिक भी ना.मई की उस तीक्ष्ण गर्मी में, था मैंने उसको देखा.देख कर पहली नज़र में,आदमी कहना कठिन था.बना ढाचा अस्थिओं का,मार्गिओं को देखता वह.लोग
 
राहुल पंडित
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प्यार बांटते साई

प्राणिमात्र की पीडा हरने वाले साई हरदमकहते, मैं मानवता की सेवा के लिए ही पैदा हुआ हूं। मेरा उद्देश्य शिरडीको ऐसा स्थल बनाना है, जहां न कोई गरीब होगा, न अमीर, न धनी और न ही निर्धन..। कोई खाई, कैसी भी दीवार..बाबा की कृपा पाने में बाधा नहीं बनती। बाबा कहते,
 
राहुल पंडित
Feb 25 2010 08:04 PM
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वीरता व बलिदान के प्रतीक गुरु

धर्म, संस्कृति व राष्ट्र की आन-बान और शान के लिए गुरु गोविन्द सिंह ने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। इतिहास में ऐसी वीरता और बलिदान कम ही देखने को मिलता है। इसके बावजूद इतिहासकारों ने इस महान शख्सियत को वह स्थान नहीं दिया जिसके वे हकदार हैं। इतिहासकार
 
राहुल पंडित
Feb 25 2010 08:02 PM
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रग-रग हिन्दू मेरा परिचय

मै शंकर का वह क्रोधानल,कर सकता जगती क्षार-क्षार.मै डमरू की वह प्रिय ध्वनि हूँ,जिसमे नाचता भिसन संहार.रणचंडी की अतृप्त प्यास,मै दुर्गा का उन्मत्त हास.मै यम की प्रलयंकर पुकार,जलते मरघट का धुआधार.फिर अंतरतम की ज्वाला से,जगती में आग लगा दूं मै.गर धधक उठे
 
राहुल पंडित
Feb 22 2010 08:52 PM
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भूले पन्नो से.

महसूस हो रहे हैं यादे फ़ना के झोके,खुलने लगे हैं मुझपर असरार जिन्दगी के,वारे अलम उठाया रेंज निशात देता,यूँ ही नहीं हैं छाये अंदाज बहसी के.वफ़ा में दिल की सदके जान की नज़रे जफा कर दे,मुहब्बत में ये लाजिम है की जो कुछ हो फ़िदा करदेबहे बहरे फना में जल्द या रब
 
राहुल पंडित
Feb 22 2010 08:15 PM
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शरणागत वत्सल थे महर्षि सौभरि

ऋषियों को वेदों ने प्रजापति के अंग-भूत की संज्ञा दी है; उन्हें जन्म से ही सच्चे धर्म का ज्ञान था एवं आचरण भी उसी के अनुरूप होता था। वे त्रिकालदर्शी होते थे। सतयुग के उन्हीं श्रेष्ठ ऋषियों में थे महर्षि सौभरि।ब्रह्मा जी के पौत्र महर्षि घोर के पौत्र ऋषि
 
राहुल पंडित
Feb 18 2010 02:01 PM
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ललकार गीत

हम डरते नहीं अणु बमों से,बिस्फोटक जलपोतों से.हम डरते हैं तो ताशकंद-शिमला जैसे समझौतों से.सियार भेडिए से डर सकते,सिंग्हो की औलाद नहीं,भारतवंश की इस मिटटी की तुमको है पहचान नहीं.एटमबम बना कर के तुम,किस्मत पर फूल गए.पैसठ,इकहत्तर-निन्यानवे के युद्धों को शायद
 
राहुल पंडित
Feb 17 2010 07:15 PM
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सामाजिक क्रांति के अग्रदूत: महर्षि दयानंद सरस्वती

महर्षि दयानन्द के हृदय में आदर्शवाद की उच्च भावना, यथार्थवादी मार्ग अपनाने की सहज प्रवृत्ति, मातृभूमि की नियति को नई दिशा देने का अदम्य उत्साह, धार्मिक-सामाजिक-आर्थिक तथा राजनैतिक दृष्टि से युगानुकूलचिंतन करने की तीव्र इच्छा, भारतीय जनता में गौरवमय अतीत
 
राहुल पंडित
Feb 14 2010 06:37 PM
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शोषक

जो पीकर खून पलते हैं,वो हमको प्यार क्या देंगे?ये शोषक देश के उत्थान को अधर क्या देंगे?गरीबों की कमाई प्यालिओं में ढलने वाले,शहीदों के कफ़न को बेच जीवन पलने वाले,न्याय को बेचने वाले,वतन को बेचने वाले,भगत सिंह चंद्रशेखर के चमन को बेचने वाले,जो आदर्शों की
 
राहुल पंडित
Feb 13 2010 07:44 PM
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भगवन्नाम के अमर प्रचारक चैतन्य महाप्रभु

श्रीकृष्ण चैतन्यदेवका पृथ्वी पर अवतरण विक्रम संवत् 1542(सन् 1486ई.) के फाल्गुन मास की पूíणमा को संध्याकाल में चन्द्र-ग्रहण के समय सिंह-लग्न में बंगाल के नवद्वीपनामक ग्राम में भगवन्नाम-संकीर्तनकी महिमा स्थापित करने के लिए हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित
 
राहुल पंडित
Feb 11 2010 07:23 PM
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हम पथिक कंटीली राहों के

हम पथिक कंटीली राहों के,फूलों पर चलना क्या जाने?जिसने अरुणोदय देखे हो,संध्या का ढलना क्या जाने?हम देश प्रेम के मतवाले, भिड़ते हैं तरल तरंगो से,गौरव मद अविरल टपक रहा,जीवन के अंग प्रयत्नों से.जिसने सूरभोग पिलाए हो वह जहर उगलना क्या जाने?हम
 
राहुल पंडित
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सच्चा आध्यात्मिक नायक स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के एक क्रांतिकारी संत हुए हैं। 12जनवरी, 1863को कलकत्ता में जन्मे इस युवा संन्यासी के बचपन का नाम नरेंद्र नाथ था। इन्होंने अपने बचपन में ही परमात्मा को जानने की तीव्र जिज्ञासावशतलाश आरंभ कर दी। इसी क्रम में सन् 1881में प्रथम
 
राहुल पंडित
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सोच:बनारस के बारे में

कभी-कभी ऐसा होता है की एक ही बात को दो लोगों से अलग-अलग तरह से सुनकर हमारे दिल में कुछ अजीब सा लगने लगता है.नौकरी पेशा आदमी हूँ.ऑफिस के रश्ते में एक अंकल महोदय मिले.बातचीत चलने लगी.उन्होंने पुछा कहाँ के रहने वाले हो बेटा?"बनारस से.""अरे बड़ी पवित्र भूमि
 
राहुल पंडित
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काशी के सचल विश्वनाथ श्रीतैलंग स्वामी

श्रीतैलंगस्वामी अध्यात्म जगत की ऐसी अतिविशिष्ट विभूति हैं, जिनकी तुलना किसी अन्य से कर पाना संभव नहीं लगता। ये एक परमसिद्धयोगी और जीवन्मुक्त पुरुष थे। इन महापुरुष का जन्म दक्षिण भारत के एक संपन्न ब्राह्मण परिवार में सन् 1607ई. के जनवरी माह में
 
राहुल पंडित
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गंगा तट पर जुटी आस्था

भारत ही नहीं, बल्कि संसार का सबसे बडा अध्यात्मिक आयोजन है कुंभ। कुंभ की परंपरा बहुत प्राचीन है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें वैदिक सभ्यता की झांकी भी मिलती है।इस महापर्वमें देश के कोने-कोने से असंख्य धर्मपरायण
 
rahul pandit
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साक्षात् रुद्र हैं श्री भैरवनाथ

श्रीभैरवनाथसाक्षात् रुद्र हैं। शास्त्रों के सूक्ष्म अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि वेदों में जिस परमपुरुष का नाम रुद्र है, तंत्रशास्त्रमें उसी का भैरव के नाम से वर्णन हुआ है। तन्त्रालोक की विवेकटीका में भैरव शब्द की यह व्युत्पत्ति दी गई है- बिभíत धार
 
rahul pandit
Dec 29 2009 12:00 PM
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मुक्तिदायिनी है बाबा विश्वनाथ की काशी

काशी संसार की सबसे पुरानी नगरी है। विश्व के सर्वाधिक प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में काशी का उल्लेख मिलता है-काशिरित्ते.. आप इवकाशिनासंगृभीता:।पुराणों के अनुसार यह आद्य वैष्णव स्थान है। पहले यह भगवान विष्णु (माधव) की पुरी थी। जहां श्रीहरिके आनंदाश्रु गिरे थ
 
rahul pandit
Dec 29 2009 12:00 PM
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a scrap of amrish sharma

क्यूं कहते हो मेरे साथ कुछ भी बेहतर नही होता सच ये है के जैसा चाहो वैसा नही होता कोई सह लेता है कोई कह लेता है क्यूँकी ग़म कभी ज़िंदगी से बढ़ कर नही होता आज अपनो ने ही सीखा दिया हमे यहाँ ठोकर देने वाला हैर पत्थर नही होता क्यूं ज़िंदगी की मुश्क़िलो से
 
rahul pandit
Dec 29 2009 12:00 PM
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महापर्व रक्षाबंधन

सभी त्यौहारों में रक्षाबंधन एक अनूठा उत्सव है, जो न तो किसी जयंती से संबंधित है और न ही किसी विजय-राजतिलक से। इस त्यौहार के तीन नाम हैं-रक्षाबंधन, विष तोड़क और पुण्य प्रदायक पर्व। यद्यपि प्रथम नाम अधिक प्रचलित है। दूसरी विलक्षणता है इसकेमनाने की विधि।
 
rahul pandit
Dec 29 2009 12:00 PM
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विश्व में हिन्दुत्व के पहले ध्वजवाहक थे स्वामी विवेकानंद

अपनी ओजपूर्ण आवाज से लोगों के दिल को छू लेने वाले स्वामी विवेकानन्द नि:संदेह विश्व गुरु थे जिनके सुलझे हुए विचारों के उजाले ने धर्म की डगर से भटक रही दुनिया को सही राह दिखाई। निर्विवाद रूप से विश्व में हिन्दुत्व के पहले ध्वजवाहक रहे विवेकानन्द का बौद
 
rahul pandit
Dec 29 2009 12:00 PM
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हिंदुत्व:वसुधैव कुटुम्बकम

भारतीय संसद के केंद्रीय कक्ष के प्रवेशद्वार पर एक श्लोक लिखा है- अयंनिज: परोवेतिगणना लघुचेतसाम, उदार चरितानामतुवसुधैव कुटुम्बकम्। यदि हम और आप संकुचित दायरे से ऊपर उठकर सारी सृष्टि के कल्याण के बारे में सोचें, तो हमारा जीवन सफल हो सकता है। यही हमारे
 
rahul pandit
Dec 29 2009 12:00 PM
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चलो रे कांवडि़या भोले बाबा की नगरिया

सावन के महीने में होती है कांवडियोंकी यात्रा। भक्तगण कांवडके दोनों तरफ गंगाजल भरे पात्र लटकाकर चल देते हैं भोले शंकर पर श्रद्धापूर्वकउडेलने। देवघरजाने वाले कांवडिएविश्व प्रसिद्ध हैं। इनमें से अधिकांश गेरुआ वस्त्र धारण किए रहते हैं। भक्त सुल्तानगंजमें
 
rahul pandit
Dec 29 2009 12:00 PM
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होरी को हीरो बनाने वाले रचनाकार प्रेमचंद

वाराणसी शहर से लगभग पंद्रह किलोमीटर दूर लमही गांव में अंग्रेजों के राज में 1880 में पैदा हुए मुंशी प्रेमचंद न सिर्फ हिंदी साहित्य के सबसे महान कहानीकार माने जाते हैं, बल्कि देश की आजादी की लड़ाई में भी उन्होंने अपने लेखन से नई जान फूंक दी थी। प्रेमचंद
 
rahul pandit
Dec 29 2009 12:00 PM
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आज भी प्रासंगिक हैं श्रीराम

श्रीराम का पूरा जीवन झंझावातोंसे घिरा रहा है फिर भी वे सन्मार्ग से विचलित नहीं हुए। शायद इसीलिए उन्हें परमेश्वर के बजाय पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनके सद्गुण और निर्णय आज के परिप्रेक्ष्य में अत्यंत प्रासंगिक हो उठते हैं, जिनसे हमें शिक्षा लेने की आवश्य
 
rahul pandit
Sep 28 2009 12:24 PM