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मीनू खरे का ब्लॉग

http://meenukhare.blogspot.com/
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18 Apr 2010
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नर्सरी का दर्द

मैं नर्सरी की भूमि हूँ.मेरी कोख मेंअनेक बीज बोए गए अनेक बारकिंतु ज्यों ही पनपे थे वे थोड़ा कि उखाड़ कर बो दिया गयाउन्हे अन्यत्र कहींमेरी गोद सदा सूनी जबकि मैं बाँझ नहीं.
टैग: कोख
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मशीनी ज़िन्दगी

दिन-रातदौड़ती भागतीमेरी मशीनी ज़िन्दगी में,मोबिल ऑयल की तरह हो तुम !बेहद ज़रूरी,नितांत आवश्यक.
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श्री रामचँद्र कृपालु भजु मन

श्री रामचँद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्।नवकंज-लोचन, कंज-मुख, कर कंज, पद कंजारुणम्।।कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरद सुंदरम्।पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक-सुतानरम्।।भजु दीनबंधु दिनेश दानव-दैत्य-वंश-निकंदनम्।रघुनंद आनँदकंद कोशलचंद
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जगदम्बा के नौ रूप

जगत जननी जगदम्बा के नौ रूप:1. शैलपुत्री 2. ब्रह्मचारिणी 3. चन्द्रघण्टा 4. कूष्मांडा 5. स्कन्दमाता 6. कात्यायनी 7. कालरात्रि 8. महागौरी 9. सिद्धिदात्री।माँ दुर्गा के नवरूपों की उपासना के मंत्र 1. शैलपुत्रीवन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्‌
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मेरा घर

(अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष)बचपन से सुना थामाँ के मुँह सेकि यह घर मेरा नहीं हैजब मैं बड़ी हो जाऊँगीतो मुझेशादी होकर जाना है अपने घर.शादी के बादससुराल में सुना करती हूँजब तब अपने घर से क्या लेकर आई हैजो यहाँ राज करेगी?हम जब चाहे निकाल सकते हैं
टैग: शादी
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बजट

देश का बजट बनाते हो हर साल कीमते बढ़ती हैं चीज़ों की हर साल. एक बार तो बनाओऐसा बजट किकुछ कीमतें बढें लड़कियों की भी..मिट्टी के मोल भी नहीं खरीद रहा जिन्हेविवाह के बाज़ार में कोई !विवाह के इस भव्य बाज़ार मेंलड़कों की धुँआधार बिक्री से चकराने लगा है सिर अब...अरे
टैग: सुख
Mar 03 2010 03:38 PM
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देख बहारें होली की

जब फागुन रंग झमकते होंतब देख बहारें होली कीपरियों के रंग दमकते होंखूँ शीशे जाम छलकते होंमहबूब नशे में छकते होंतब देख बहारें होली कीनाच रंगीली परियों काकुछ भीगी तानें होली कीकुछ तबले खड़कें रंग भरेकुछ घुँघरू ताल छनकते होंतब देख बहारें होली कीमुँह लाल
Feb 28 2010 10:22 AM
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सूरज और माचिस

सूरज की लपटों से मैं निकाल लाईअपना घरौंदा सुरक्षित,अब माचिस की इक तीलीमेरा आशियाना जलाने को है.
टैग: लपट
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प्यार का वायरस

(वैलेंटाइन-डे पर विशेष)तुम्हारे प्यार के वायरसके अटैक सेसुनहला ज़ुकाम हो गया हैमेरे मन कोऔरबार-बार आने वालीमेरी छींकों की आवाज़ सेगूँजने लगी है दुनियासच कहते है नप्यार छुपाए नहीं छुपता!!!
Feb 14 2010 02:18 PM
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तिनका-तिनका बिखर कर

यह सच है कि जब भी मेरे अपनों नेबहुत अपनों ने आघात कियातिनका-तिनका बिखर गई मैंअनगिनत दिशाओं मेंऔर अनगिनत दर्द उपजेमेरे मन के अनगिनत कोनों से...पर यह भी सच है कि जहाँ-जहाँ गिरेयह अनगिनत तिनकेहमेशा ही अंकुर फूटेनए-नए पौधों के...सृष्टि रचने की अपनीशक्ति और
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हर धडकन वतन के लिए

चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँचाह नहीं प्रेमी माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँचाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँचाह नहीं देवों के सिर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँमुझे तोड़ लेना बनमाली,उस पथ पर तुम देना फेंकमातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जाएँ
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अवधी दस्तरख्वान के लज़्ज़तदार पकवान

नवाबों का शहर लखनऊ जहाँ एक ओर अपनी तहज़ीब, गंगा-जमुनी संस्कृति और अदब के लिए प्रसिद्ध है वहीं दूसरी ओर यह संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प की बेजोड़ कलाओं के लिए भी जाना जाता है परंतु यहाँ की पाक कला भी ऐसी है कि खाने वाला बस उंगलियाँ चाटता रह जाए. अवध क्षेत्र की
टैग: कबाब
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बुढ़ापे का सन्नाटा कैम्पस

बुढ़ापे के सन्नाटे कैम्पस मेंप्रतिदिन सिकुड़ते माँ-बाप का वज़न इतना कैसे हो जाता हैकि बोझ लगने लगते हैं वे...वो--जिसके पास हो डायटिंग की ऐसी तकनीक जो कम कर सके बोझ लगने वाला यह एकस्ट्रा फ़ैटमुझे तलाश हैएक ऐसे डॉक्टर की.
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नववर्ष मंगलमय हो

एक सुबह तो ऐसी हो जब सूरज सचमुच चमके,धूप सुनहरी रँग दे कण-कण मेरे घर आँगन के...आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.
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स्पेलिंग-मिस्टेक

अहसास के डिक्टेशन में फ़ेल किया गया उसे तृप्ति की स्पेलिंग ग़लत लिखने के कारण. ग़लती उसकी नहीं उसकी टीचर की थी-- ज़िन्दगी की वर्क-बुक में प्रैक्टिस करवाई गई थी उसे भूख लिखने की लगातार.
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क्या पंकज सुबीर जी मदद करेंगे मेरी ?

शायद सभी पढने वालों को इस पोस्ट का शीर्षक अजीब लगे पर सच यही है कि मुश्किल की इस घड़ी में मुझे पंकज सुबीर जी की मदद की दरकार है और मदद मिलने का पूरा भरोसा भी है. बात दरअसल यह है कि आजकल मैं राष्ट्रीय एकता पर आधारित एक रेडियो डॉक्यूमेंटरी के निर्माण का
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इन्सिग्नीफिकेंट

दोस्ती इन्सिग्नीफिकेंट दोस्त इन्सिग्नीफिकेंट मौक़े सिग्नीफिकेंट परिणाम सिग्नीफिकेंट.
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क्रेश

यह जानते हुए भी कि उसे मारपीट कर जबरन सुला दिया जाता है वहाँ मैं छोड़ जाती हूँ अपनी सम्वेदनाओं के अबोध शिशु को तर्कशक्ति के नज़दीकी क्रेश में. क्या करूँ ? यथार्थ के ऑफ़िस में ले जाने पर काम ही नही करने देता यह नन्हा यह नादान.
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कूड़ा बीनने वाले बच्चों का अपना बैंक

बनारस,६ दिसंबर. देश में जब कोई विजय दिवस मन रहा था और कोई शर्म दिवस ऐसे में बनारस के कूड़ा बीनने वाले बच्चों सहित तमाम गरीब बच्चे अपने द्वारा खोले गए चिल्ड्रेन्स बैंक के द्वारा देशवासियों का ध्यान देश की सबसे बड़ी समस्या गरीबी की ओर आकर्षित करने में लग
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एक लेटलतीफ़ की शादी

वो मुझे 'मैम' कहकर सम्बोधित करता है क्यों कि ऑफिस में मैं उसकी बॉस हूँ और इस लिए भी क्यों कि वो मेरा शिष्य है.मैं उसे 'लेटलतीफ़' कहती हूँ, क्यों? अरे भई नाम से ही ज़ाहिर है कि वो हमेशा लेट आता है .किसी एक दिन, किसी एक मौक़े, किसी एक जगह पर नहीं, हर दिन
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लव स्टोरी 2008

लव-स्टोरी 2008 एक सच्ची प्रेम कथा है.किसी भी सामान्य फ़िल्मी कहानी से मिलती जुलती इस कहानी में भी एक लड़का है,एक लड़की है,फ़िल्में हैं, पार्क है, मोहब्बत की शुरुआत है,प्यार का इज़हार है,भविष्य के सपने हैं, रूठना-मनाना भी है और इस सबके बाद शादी नाम का सुखा
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मुस्लिम महिलाओं ने निकाला वन्देमातरम सम्मान मार्च

आज जहाँ देश में चारो ओर वन्दे मातरम सम्बन्धी विवाद चर्चा में है वहीं बनारस की मुस्लिम महिलाओं के प्रसिद्ध संगठन "मुस्लिम महिला फ़्रंट" ने गत 9 नवम्बर को वन्दे मातरम के विरोधियों को कड़ी चुनौती देते हुए "वन्दे मातरम सम्मान मार्च" निकाल कर उदघोष किया कि
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एक अँग्रेज़ी पोस्टर जिसने आँख में आँसू ला दिए

आज गिरिजेश जी का ब्लॉग देखा.यहाँ क्षमा कीजिएगा नामक पोस्ट पर एक लिंक दिया गया था Roots In Kashmir .अँग्रेजी की इस पोस्ट ने मन विचलित कर दिया. छद्म धर्मनिरपेक्षता के प्रति नफ़रत और गाढ़ी हो गई. लगा कैसे देश में रहते हैं हम जहाँ आतँकवादियों को गले लगाया
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फ़र्क़

वो जहाँ से आया मैं वहीं से आई वो भी यहीं आया मैं भी यहीं आई उसे भी पाला गया मुझे भी पाला गया उसने भी पढ़ा-लिखा मैंने भी पढ़ा-लिखा उसने भी सपने बुने मैंने भी सपने बुने उसने भी मेहनत की मैंने भी मेहनत की वो भी सफल बना मैं भी सफल बनी फिर वो सेलेक्ट करने व
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सब त्रिया-चरित्र है !

जीवन के रंगमंच पर माँ,बहन,बेटी,पत्नी, देवरानी,जिठानी,बहू,सास,नन्द जैसे चरित्रों को संजीदगी से निभाते-निभाते एक दिन आँख भर आई मेरी इन सारे चरित्रों के बीच अपने "स्व" के कहीं खो जाने पर. मन की इस व्यथा पर कुछ बोलना चाहा होठों ने किंतु शब्द मौन हो गए ले
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बेगम अख्तर की गाई चुनिन्दा ग़ज़लें

पिछली सात अक्टूबर को जब बेगम अख्तर की जयँती के अवसर पर उनसे सम्बन्धित मैने पोस्ट लगाई थी तो बहुत लोगों ने यह फ़रमाइश की थी कि उनकी चुनिन्दा ग़ज़ले सुनवाऊँ. उस समय मैने बेगम साहिबा की गाई दो ग़ज़ले सुनवाई थीं. आज उनकी पुण्यतिथि है आज आपके लिए लाई हूँ कुछ ऐ
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लिफ़ाफ़ाबाद का ब्लॉगर सम्मेलन और मच्छर

एक शहर था लिफाफाबाद. उस शहर में कुछ ब्लॉगर और बहुत सारे मच्छर रहते थे. ब्लॉगर बड़ी मेहनत से ब्लॉगिंग करते थे और मच्छर खून चूसने का पुश्तैनी काम किया करते थे.मच्छरों को ब्लॉगर्स के ब्लॉग पढ पढ कर बड़ी ईर्ष्या होती थी क्यों कि खून चूसने का काम कोई सरका
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धर्म

वो मेरा सबसे प्यारा दोस्त जिसकी निगाहें साफ़ एकदम, जिसका दामन पाक एकदम. जिसने हर मौक़े पर मदद की है मेरी और डूब कर सिर तक निकाला है मुझे गहरी नदी के पेट से न जाने कितनी बार ! पर आज मौक़ा मेरा आया है चलो तोड़ डालें उसका सिर चलो जला डालें उसका घर उसका धर्म
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ओबामा और गोवर्धन ब्राउन ने मनाई दीवाली

यूँ तो दीपपर्व पूरी दुनिया में श्रद्धा भक्ति और उल्लास से मनाया जाता है पर इस बार की दीवाली कुछ और विशेष हुई जब वाइट हाउस में अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा और 10,डाउनिंग स्ट्रीट,लन्दन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दी
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मकानों के इस जंगल में दीपावली

इस बार पारिवारिक कारणों से दीपावली नही मना रही हूँ. पता नही क्यों आज याद आ रहा है वर्ष 1993..उस साल भी दीपावली नही मनाई थी.हुआ यह कि उस समय नई-नई नौकरी लगी थी.बनारस में पहली पोस्टिंग..और किसी अति-मह्त्वपूर्ण आयोजन की ज़िम्मेदारी मेरी थी. दीपावली पास ह
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"ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया"

बेगम अख्तर जयँती पर विशेष) एक कमसिन सी लड्की को उसकी माँ किसी पीर के पास दुआ के वास्ते ले गई .पीर ने ग़ज़ल का एक दीवान लड्की के हाथ में देकर कोई एक पन्ना खोलने को कहा साथ ही यह भविष्यवाणी भी किया कि जो भी पन्ना खुलेगा उस पर लिखी ग़ज़ल गाकर लड्की बहुत नाम
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वे

कुर्सी के सापेक्ष आला अफ़सर हैं वे, मानवीय सम्वेदनाओं के सापेक्ष चपरासी भी नही.
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सोशल- एडजस्टमेंट

प्लास्टिक के टुकड़े की तरह चिटक-चिटक जाती हैं मन की कोमल भावनाएँ और बार-बार विवशता का फ़ेवीकोल लगा कर जोड़ा जाता है मन... सोशल एडजस्टमेंट इसी को तो कहते हैं !
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अभिनन्दन ब्लॉगवाणी

घर घर कलश सजाओ री, मंगल गाओ री, दीप जलाओ री , चौक पुराओ री , कोयल कूके मधुर वाणी झूमे गाएँ सकल नर नारी मनाओ दीवाली कि घर आई ब्लॉगवाणी... अभिनन्दन ब्लॉगवाणी
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जहाँ राम का धर्म इस्लाम है...

भारत में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 15 किमी दूर बक्शी के तालाब की रामलीला साम्प्रदायिक सौहार्द्र की एक बड़ी मिसाल है.यहाँ पर न केवल रामलीला के प्रबन्धन में मुस्लिम समुदाय के लोग भाग लेते है बल्कि राम, लक्षमण, दशरथ और रामायण के सभी महत्वपूर्ण
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गिफ़्ट पैक

औरतों में प्रतिभा नही होतीपर होती हैं उनके पास बिन्दी, चूड़ियाँ, काजल..औरतों मेहनत भी नही कर पातींपर उन्हे आता है चहकना, खिलखिलाना, मुस्कुराना...औरतों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल नही होता बड़ी आसानी सेवे बढ़ जाती हैं आगेअगले को अपनी मुस्कान का
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विभाजन के समय मारे गए हज़ारों हिन्दुओं का पिंडदान और तर्पण : तेभ्य: स्वधा

चीड़ वन के आहत मौन को समर्पित, प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.नीरजा माधव का उपन्यास "तेभ्य:स्वधा" कश्मीर की राजौरी घाटी के शरणार्थी शिविरों में बसे उन हज़ारों अनाम हिन्दुओं को श्रद्धांजलि है जो भारत-विभाजन के समय पाकिस्तान से विस्थापित हुए और बर्बरतापूर्वक मारे
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नारायणि नमोऽस्तु ते॥

“सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥”हे नारायणी!आप सब प्रकार का मङ्गल प्रदान करनेवाली मङ्गलमयी हैं। कल्याणदायिनी शिवा हैं। सब पुरुषार्थो को सिद्ध करनेवाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रोंवाली एवं गौरी हैं। आपको