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पुरानी डायरी

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31 Dec 2009
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गरीब बच्चें

गरीब बच्चें जनवरी की सुबह हर तरफ घना कुहरा ... और धुंध.... खाली सड़क... लेकिन इन सब की परवाह किये बिना..... नंगे पैर ... गंदे बदन पर आधे अधूरे चीथड़ों के साथ ... कंधे पर बडा झोला लिए... रोज की तरह ... आज भी निकल पड़े हैं..... कूड़े की ढेर से प्लास्टिक बट
Dec 29 2009 11:59 AM
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तीज का उपवास

तीज का उपवास '' रात के ८ बजे... आज फिर आ रही थी... चीखने- चिल्लाने की आवाज.... हमारे होस्टल के पीछे वाली बस्ती से... वही रोज की कहानी... पति का दारू पीकर आना... और पत्नी की हिंसक पिटाई... गाली गलौज... भाग - दौड़... बच्चों की चीख पुकार... सिसकियाँ ..
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''एक पागल''

सड़क पर घूम रहा है... एक इंसान..... मस्त है अपनी धुन में.... किसी से कोई शिकवा - शिकायत नही है उसे.... शायद, किसी से प्यार भी नही.... बेखबर है.......... कि दुनिया में लूट, डकैती और मार काट मची है...... अनजान है ........ कि चारों ओर, भ्रष्टाचार और अरा
Dec 29 2009 11:59 AM
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बेरोजगार

बेरोजगार" ट्रेन से कटी.... एक युवक की लाश .... वहीँ पास में पड़ा एक छोटा बैग....... घेरा बनाए हुए भीड़.... अपना अपना विचार दे रहे लोग... ऐसा रहा होगा, वैसा रहा होगा... तभी पुलिस आयी..... बैग खोला गया... तमाम डिग्रियां और प्रमाणपत्र... पता चला युवक डब
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प्यासा पथिक

प्यासा पथिक जेठ की चिलचिलाती धूप... गर्म हवाएं, तपती सड़क... उस पर चल रहा... एक पथिक..... बेचैन है अपनी मंजिल तक पहुचने के लिए... रास्ते से कुछ दूर... एक अकेला वृक्ष... रुकता है पथिक थोडी देर.... सता रही है उसे प्यास... लेकिन पानी कहाँ है?... पास का क
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बेचारा किसान

बेचारा किसान भारत कृषि प्रधान देश है..... तमाम जनता कृषि पर निर्भर करती है..... देश का बजट भी किसानो के लिए ही बनता है..... चुनाव के समय भी किसानो की ही बात होती है.... नेतागण खुद को किसानो का मसीहा कहते हैं.... कहते हैं..... किसानो की स्थिति सुधरी ह
Dec 29 2009 11:59 AM
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जान की कीमत

जान की कीमत आज फिर हो गई एक ट्रेन दुर्घटना ....... सैकडों मरे ...... इतने ही घायल ... कई कलाइयाँ सूनी हो गई कितने ही बेसहारा हो गए ..... कटी फटी लाशें .... विकृत चेहरे .... जमा लोग .... अपनों को खोजती निगाहें .... राहत कार्य के नाम पर ... हाथ की घडिय
Dec 29 2009 11:59 AM
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'प्राइमरी स्कूल'

'प्राइमरी स्कूल'वो बस्ता.... वो पटरी...दुधिया... और स्याही... वो मुंशी जी की चपत... औ पंडी जी की डांट... वो मास्साब का टोकना... कि... कैसे नहाते हो? यहां मैल बैठा है... वहां मैल बैठा है... वो पन्द्रहअगस्त और छबिच्जन्वरी... वो लड्डू का लालच... और प्रभात
टैग: कविता
Aug 22 2009 09:57 PM
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समग्र विकास

सुदूर का गाँव...पीपल पाकड़ की छाँव ....पगडण्डी वाला रास्ता... बिना तार के बिजली के खम्भे ...टपकती छत वालाबिना मास्टर का प्राईमरी स्कूल...कभी न खुलने वाला... जच्चा बच्चा केन्द्र...कभी कभी खुलने वाली... राशन की दूकान....पुश्तैनी बाहुबली.... प्रधान
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"आज का अखबार"

"आज का अखबार" रोज की तरह आज भी अखबार आया..... लेकिन मेरे जागने से पहले.... ये क्या... कल भी तो यही सब था... लूट, हत्या, डकैती.... ट्रेन दुर्घटना, चोरी, छिनैती.... बलात्कार और लठैती.... समाचारों में कुछ नया नहीं.... भ्रम हुआ.... कहीं ये पुराना अखबार तो
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खाली स्थान

खाली स्थान खालिस्तानी झंडा..... सामूहिक हत्या.... अपहरण.... बम विस्फोट.. लूटपाट.... बैंक डकैती... बोलो.. मान ! क्या यही है.... तुम्हारे लोकतंत्र की परिभाषा? अब भी सुधरो.... वरना हरा भरा पंजाब... बन जाएगा "खाली स्थान" वल्लभ... (२ फरवरी ....१९९२)
टैग: पंजाब
Aug 04 2009 04:07 PM
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भूख

भूख कल रात ... गरीब बस्ती से उठी... बच्चे की आवाज भूख.....भूख.... मन में सवाल उठा .. क्या है भूख? एक आंतरिक आग? जिसे बुझाने के लिए... किसान खेत में हल चलाता है... मछुआरा जल में जाल डालता है... मजदूर धूप में सड़क बनाता है... पसीना बहाते हैं लोग... और तब
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भारतीय स्टोव

"भारतीय स्टोव" तुम भी बड़े अजीब हो... जाने कौन सा बैर है तुम्हारा नवब्याहताओं से ? जान के दुश्मन बन जाते हो ... ससुराल में... कभी नहीं सुना गया तुम्हारा फूटना .... मायके में, या किसी.. कुवांरी लड़की के पास.. फिर क्या हो जाता है तुम्हे... ससुराल में ? आखिर
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