Deepak Kumar
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14 Jun 2010
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गजल : सवाल क्या है

इस तरह फासले रखने की, वजह क्या है।हमसे यकीन उनका, अब शायद उठ गया है ॥ये नजरें जो नजरें किसी से, चुरा रहीं हैं आज ।लगता है कोई और, अब तुम को मिल गया है॥तुझे तराश कर, उसकी कल्पना भी सोचती होंगी।तेरे हुस्न को रंग, अब दिल का दिया है ॥झुका तो चले थे वो, आसमां
 
Deepak Kumar
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गजल

मुहब्बत एक जज्बा है, पैगाम आने भी दो ।अगर तुम तलाश चुके, एक मौका हमें भी दो ॥समुद्र में उठ्ती लहरें , छेड़ जाती हैं अकसर ।खामोशी से तलाश कर, कुछ मोती हमें भी दो ।।न होती यह मय की दुनियां, तो तुम क्या होते ।सबक किसी से कर हांसिल, कुछ जवाब हमें भी दो॥टूटे
 
Deepak Kumar
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गजल : खुदा

कब वो खुदा, एक बार इधर देखता होगा ।शब भर कोई, सवाल यह सोचता होगा॥अपनी हालत पर आज, दुआ करें तो किससे ।वो भी आजकल,खुद से दुआ करता होगा ॥हमारे आसुओं की आज, औकात क्या है ।वो भी आजकल, छुप छुप के रोता होगा॥तकदीर में लिखा क्या, यह पूछें किससे ।वो भी तकदीर अपनी,
 
Deepak Kumar
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गजल : वो कौन हैं

वो कौन हैं जो कहते हैं, कि प्यार नहीं देखा है ।झुकी झुकी नजरों से ताकते, हमने भी देखा है॥वो कौन हैं जो कहते हैं, कि दर्द नहीं ।सिसकियों को छुपाते, हमने भी देखा है ॥वो कौन हैं जो कहते हैं, कि खुदा नहीं।छुप-छुप के हाथ उठाते, हमने भी देखा है ॥वो कौन हैं जो
 
Deepak Kumar
Jun 10 2010 09:55 PM
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नज्म : जिंन्दगी का सफ़र

तेरा प्यार मेरे लिये, खुदा हो गया ।क्या था मैं कल, आज क्या हो गया ॥नफ़रत की दुनिया, मतलब के रिश्ते ।मुहब्बत का दामन, फिर जुदा हो गया ॥महफिलें ये अब तो, सजती नहीं हैं ।यारों की दुनिया में, बदनाम हो गया ॥तन्हा जिन्दगी का सफ़र, कटता नहीं होगा ।लुट लुट कर
 
Deepak Kumar
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नज्म : यादें

काम में, तमाम ज़िन्दिगी कट जाती है |तन्हाई में उनकी याद, और उभर आती है ||उन्होने न वफ़ा की, न बेवफ़ाई हमसे |अपने को छुपाकर भी, परछाई नज़र आती है ||दिल में दर्द, चेहरे पर तबस्सुम की लकीर |किसी को पाने या खोने से, ज़िन्दगी बदल जाती है ||बिछड्ती मंजिलों की ओर,
 
Deepak Kumar
Jun 06 2010 08:39 PM
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कविता : ख्वाब

सोचता हूँ वो इंतज़ार करती होगी, अपने आप से बातें दो चार करती होगी ।छुप छुप कर अकेले में अपने रूप को, आईने में निहारती सवाँरती हर शाम होगी ॥दिल की धड़कन उसकी मेरी गुलाम होगी,खवाब से मेरे हर रात वो परेशान होगी ।मिलन का ख्वाब भोर में देखकर, सखियों से शरमाकर
 
Deepak Kumar
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गजल : अंजाम

न कोई खत, न कोई खबर मिलता रहा हूँ उनसे, खुद से बेखबर |किसे दूं आवाज, किसको बुलाऊँ मैं पासचाहत के पैमाने में, शब्द हुए बेअसर |इन वादियों में तुझको, मै ढूंढ़ रहाछुपा के दिल में, किसी को बेनजर |ख्वाबों की इबाद्त तो, की थी हमनेअब खुदा का नाम लूं, या पुकारूं
 
Deepak Kumar
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कविता : तुम कहो … बस एक बार…

चलते-चलते हर राह, हर मोड पर कभी किसी ने कुछ कहा, कुछ पूछा ।हर बात पर, जगह जगह टोका गयाकभी नाम, तो कभी बदनाम हुआ ।जीता रहा, बस एक इस इच्छा सेकाश, कभी तुम भी कुछ कहो ।अधिकार से कभी, कुछ पूछोकभी तो किसी बात पर, टोक दो ।मुझ से कोई तो, सवाल करोकभी तो, मुझसे
 
Deepak Kumar
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व्यंग्य : आओ मिलकर देखें !!!!!!!!!!!

वर्षों से हम इधर-उधर की अनेक घट्नाऐं देखते चले आ रहे हैं। कभी आपने सोचा है कि यह देखने दिखाने की प्रक्रिया आखिर है क्या ? साइंस कहती है कि जो भी वस्तु आपकी आँखों के सामने है, उसका प्रतिबिम्ब आँख के अंदर बनता है और हम देख पाते हैं। लेकिन मेरा मत हमेशा
 
Deepak Kumar
Dec 29 2009 12:02 PM
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व्यंग्य : सर्वे भवन्तु सुखिन:

कहने को तो यह संसार एक मिथ्या है। आदमी पैदा होता है, जिंदगी जीता है और वीरगति को प्राप्त हो जाता है। वीरगति इसलिए कि आज यह संसार, यह दुनिया एक युद्ध भूमि (लोग कहते हैं कि पहले यह एक कर्म भूमि हुआ करती थी) दिखायी दे रही है। आप को यहाँ अपनी हर जरूरत के
 
Deepak Kumar
Dec 29 2009 12:02 PM
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व्यंग्य : इस्तीफ़ा दे दीजिये ना, प्लीज !!!!!!!!!!

गीता में कहा गया है कि "क्या लेकर आए थे, क्या लेकर जाओगे, जो कुछ पाया यहीं पाया और यहीं पर छोड़ जाना है". लेकिन लोकतन्त्र इन सब से ऊपर है. यहां सीट यानी कुर्सी अपने साथ ही ले जाने का प्रावधान है. कुर्सी या सदन की सदस्यता कोई म्रगत्रष्णा नहीं है, और इस
 
Deepak Kumar
Dec 29 2009 12:02 PM
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व्यंग्य : आंखों का पानी मरना !!!!!!!!!!!

लो जी अब जाकर आखिर हमारे दिल को चैन आ ही गया। सिद्ध हो गया कि चन्द्रमा पर पानी मौजूद है। सोचो अगर वहां पानी नहीं मिलता तो क्या होता। आईये अब जरा इस बात तो अपने तरीके से समझने की कोशिश करते हैं। एक पुरानी कहावत है “आंखों का पानी मरना या ढलना” जिसका मत
 
Deepak Kumar
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कविता: मेरे घर का पता

पूछे कोई मेरे घर का पता उन सीमाओं में, जिन के दोंनो ओर मेरे अपने ही रहते हैं । वो उन ज़मीनों का नाम लेंगे जहाँ मेरी गरीबी पर परिहास किया गया था । वो उस मिट्टी को पुकारेंगे जो मेरी सच्चाई की कब्रगाह है । वो उन पर्वतों की ओर देखेंगे जो कभी मानवता के आगे
 
Deepak Kumar
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गज़ल : मासूम ना बना कीजिये

आप यूँ मासूम ना बना कीजिये ख़त मिल गया तो जवाब दीजिये । मेरी पहली मोहब्बत है यह सनम कुछ कमी रही तो बता दीजिये । हल्का हल्का सा नशा मेरी आंखों में है नींद मेरी मुझे लौटा तो दीजिये । रूठ जाना कभी और लेकिन सनम आज ज़रा सा मुस्करा तो दीजिये । न हो इंतज़ार
 
Deepak Kumar
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कविता : मानव अभिव्यक्ति

अपने ही जाल में फंसाबिलखता तड़पताकैद पक्षी की तरह आज़ादी खोजता |कल्पना की उड़ाने भरता अथाह सागर में सहारा तलाशता रेत के घर बनाता बिखेरता तोड़ता |वक़्त से जूझता स्वप्न में मुस्कराता अपनी ही लाठी से खुद को हांकता |चलता, रुकता रुक रुक कर चलताझूठ के दर्पण में
 
Deepak Kumar
Sep 04 2009 10:21 AM
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गज़ल : नई दुनिया

जब भी खुद को तन्हा पाईये ।लंबी कतारों में खड़े हो जाईये ॥शौक है अगर ताकत आजमाने का ।जा पत्थरों से आज सर टकराईये ॥आज मौसम की पहली बारिश है ।पाप अपने भी कुछ बहा आईये ॥खुशबू फ़ूलों की आज चुरा ली किसने ।चाँद तारों से नया गुलिस्तां सजाइये ॥बेकार है अभिमन्यु
 
Deepak Kumar
Sep 04 2009 10:10 AM