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17 Jun 2010
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काले मेघा आओ ना

काले मेघा आओ नागर्मी दूर भगाओ ना।गगरी खाली गांव पियासानदिया से ना कोई आशा।सूख गये सब ताल तलैयाकैसे गायें छम्मक छैयां।धरती को सरसाओ नाकाले मेघा आओ ना॥सुबह सुबह ही सूरज दादागुस्सा जाते इतना ज्यादा।कष्टों की ना कोई गिनतीसुनते नहीं हमारी विनती।कुछ उनको समझाओ
 
हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
Jun 18 2010 07:30 AM
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थाने में हंगामा

शेरू कुत्ता ले कर सोटासीधे पहुंचा थाने मेंपटक के सोटा मेज पे बोलाक्या हंगामा थाने में।थानेदार उठा बिस्तर सेझट से पहुंचा थाने मेंहाथ जोड़ के बोला फ़िर वोसारी सर, कुछ देर हुई बस आने में।कुर्सी पर फ़िर चढ़ कर शेरूलगा भौंकने थाने मेंकहां मर गये सभी सिपाहीरपट
 
हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
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बिल्ली मौसी

बिल्ली मौसी घर से चलीआंख पे चश्मा हाथ में थैलाबिल्ला मौसा को बाय कहाऔर फ़ोन मिलाती आगे चली।हंस के बोले मौसा जी फ़िरचटक मटक कर कहां चलीझटक के अपनी झबरी पूंछेंआंख मटका कर झट से बोली।पहले बालीवुड जाऊंगीशाहरुख संग फ़िल्म बनाऊंगीपैसा खूब कमाऊंगीफ़िर बनारस
 
हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
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कठफ़ोड़वा

घूम घूम कर पेड़ों पर हीठक ठक करता मैं कठफ़ोड़वा।चोंच मेरी है बहुत ही लम्बीबहुत ही लम्बी बहुत ही पैनीमोटी से मोटी लकड़ी कोकाटे जैसे लुहार की छेनी।रंग मेरा है गाढ़ा भूराउस पर काली भूरी धारीपर उससे भी अच्छी लगतीमेरे सिर पर कलगी प्यारी।घूम घूम कर पेड़ों पर
 
हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
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खुली खुली खिड़की सी दीदी

खुली खुली खिड़की तुम हमकोअच्छी बहुत बहुत लगती होहमको तो तुम प्यारी प्यारीबिलकुल दीदी सी लगती हो।जैसे बिजली के जाने परदीदी हमको पंखा झलतीतुम भी खिड़की हवा भेजकरवैसे ही तो पंखा झलती। जब हम होते कुछ उदास तोहमको नींद नहीं है आतीतो कहानियों के मेले
 
हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
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मेरी प्यारी गौरैया

रोज सुबह आती गौरैयागीत नये गाती गौरैयाउठ जाओ तुम नित्या रानीकह के मुझे जगाती गौरैया।चीं चीं चूं चूं मीठी बोलीदाना मांग रही गौरैयाअम्मा जल्दी दे दो चावलभूखी है प्यारी गौरैया।पंख छपक कर पानी में तोरोज नहाती है गौरैयाचोंच रगड़कर पेड़ की डालीचावल चुनती ये
 
हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
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गोरी गोरी कोयल

कोयल ने जब शीशा देखाहो गई वह तो बहुत उदासगोरी मैं कैसे बन जाऊंसोच के पहुंची वैद के पास।भालू वैद ने कूट पीस करदे दी ढेरों क्रीम दवायेंफ़ीस दवा की कीमत उसनेवसूले पूरे दो सौ पचास।क्रीम दवायें लगा लगा करसुन्दर पंख झड़े कोयल केतौबा की उसने शीशे सेफ़िर से
 
हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
Mar 07 2010 09:42 PM
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जाड़ा--2

जाड़ा ताल ठोंक जब बोला,सूरज का सिंहासन डोला,कुहरे ने जब पांव पसारा,रास्ता भूला चांद बिचारा।छिपे सितारे ओढ़ रजाई,आसमान नहिं दिखता भाई,पेड़ और पौधे सिकुड़े सहमे,झील में किसने बरफ़ जमाई।पर्वत धरती सोये ऐसे,किसी ने उनको भंग पिलाई,सुबह हुयी सब जागें कैसे,मुर्गे ने
 
creativekona
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गबरू शेर ने खाया केला

गबरू शेर अब बहुत बूढ़ा हो गया था ।उसके सारे दांत टूट गये थे ।वह अब बहुत दुखी रहता था ।सोचता अब मैं क्या खाऊंगा ?कैसे जिन्दा रहूंगा ?एक दिन उसने जंगल के सारे जानवरों की सभा बुलाई ।सबको अपना पोपला मुंह दिखाया और बोला----‘मुझे खाने की कोई ऐसी चीज लाकर दो
 
creativekona
Dec 29 2009 11:57 AM
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बालगीत-- बरखा रानी

झम झम झम झम बरसा पानी आई प्यारी बरखा रानी दुखी हुई अब धूप सुहानी जब से आई बरखा रानी । झूम झूम कर नाच रहे हैं सभी वृक्ष जंगल में धन्यवाद दे्ते बादल को मोर पपीहे नाच नाच के । खेलो कूदो मौज करो तुम आज के इस मौसम में नाव बना लो इक कागज की तैरा दो उसको पा
 
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बालगीत--नन्हीं चुहिया

नन्हीं चुहिया चली अकड़कर, दाना दांत दबाए, है कोई क्या ऐसा, जो मुझसे रेस लगाये। सुनकर चुहिया की बानी, बोली बिल्ली खिसियानी, इक दिन लाऊंगी रस्ते पर, याद आएगी तुझको नानी। बिल्ली बैठी रस्ते पर, इक दिन घात लगाए, दिख जाए जो चुहिया, उसको धर लूं पांव दबाय। घू
 
creativekona
Dec 29 2009 11:57 AM
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बालगीत -भालू की साइकिल

भालू लेकर आया साइकिल कितनी प्यारी कितनी सुन्दर, कितनी प्यारी कितनी सुन्दर दौड़े देखो कैसी सर सर। भालू उछल सीट पर बैठा और लोमड़ी पीछे, फ़िर पैडल पर जोर लगाकर भालू साइकिल खींचे, पीछे भागे मोती कुत्ता साथ में रामू बंदर, भालू लेकर आया साइकिल कितनी प्यारी कि
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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नंदू की समझदारी -(भाग-४)

नन्दू की समझदारी (भाग -४) (गीतात्मक कहानी) कुछ ही दिनों के बाद तो बच्चों नन्दू एक तोता घर लाया नाम दिया उसको मिट्ठू और सुन्दर पिंजरे में बैठाया। अब मिट्ठू और मोती के संग नन्दू खेला करता था मोती को तो दाल और रोटी मिट्ठू को मिर्च खिलाता था। रस्सी पिंजर
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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नन्दू की समझदारी(भाग -३)

नन्दू की समझदारी( ३) (गीतात्मक कहानी) पर मोती को एक दिन बच्चों बांधा रस्सी में नन्दू ने चल तुझको मैं गांव घुमाऊं समझाया उसको नन्दू ने। आगे आगे तो नन्दू था पीछे ही उसके मोती था नन्दू उसको खींच रहा था मोती पें पें चीख रहा था। गुस्सा होकर फ़िर नन्दू ने म
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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नन्दू की समझदारी

गीतात्मक कहानी) बहुत पुरानी बात है बच्चों एक गांव था छोटा सा उसी गांव के एक कोने में अपना नन्दू रहता था। अपना नन्दू छोटा था छोटा था और भोला था भाई बहन नहीं थे उसके मां बापू का अकेला था। किसके साथ मैं खेलूं कूदूं उछलूं कूदूं धूम मचाऊं किससे खाऊं किसे
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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बालगीत -बन्दर जी

कुछ बन्दर मेरे बाग में आये धमाचौकड़ी खूब मचाये पेड़ से तोड़ के पत्ती खाये पापा जी को गुस्सा आए। नजर पड़ी उनकी गमलों पर लगे नोचने फ़ूलों को सब बन्दरों ने गिराई गमले की माटी पापा ने दे मारी लाठी । दुम दबा कर बन्दर भागे पापा पीछे बन्दर आगे बन्दर बोले पें पें
 
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Dec 29 2009 11:57 AM
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ये दिन

काले काले बादल आये सूरज के शरमाने के दिन गर्मी टाटा करके बोली मेरे हैं अब जाने के दिन। मोर नाच कर कहता सबसे आये खुशी मनाने के दिन बंधन कोई बांध न पाये नदिया के इठलाने के दिन। पलक झपकते छुट्टी बीती नई क्लास में जाने के दिन होमवर्क फ़िर गले पड़ गया पढ़ने
 
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गुडिया घर

गुड़िया का ये न्यारा घर, उसको सबसे प्यारा घर। झाड़ पोंछ कर इसको रखती, चंदा सा उजियारा घर। नीली पीली पन्नी लेकर, हमने बहुत संवारा घर। धूल न इस पर पड़ने दी है, हमने रोज बुहारा घर। आओ सब मिल खेलें इसमें, ये मेरी गुड़िया का घर। इसमें मेरी गुड़िया रहती, ये है
 
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जाड़े के दिन

देखो आये जाड़े के दिन आलू भरे पराठों के दिन धूप गुनगुनी मन ललचाए गिल्ली डंडा हाकी के दिन। देखो आए----------------। स्वेटर कोट रजाई के दिन भुनती आलू घुंघरी के दिन सुबह शाम सन्नाटा छाए दिन भर सैर सपाटे के दिन। देखो आये------------------। तपनी हुक्का बिर
 
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दाने चुन चुन खाना रे

चिड़िया के दो बच्चे थे।पिंकू और चिंकू। आज वे उड़ने के लिये पहली बार घोसले से बाहर निकले थे। मां उनके पीछे थी।दोनों ने पेड़ से नीचे झांका। “ऊं—हूं मैं नहीं उड़ूंगा।मुझे डर लग रहा है।” पिंकू चूं चूं कर बोला। “ बाप रे---कितनी उंचाई पर रहते हैं हम।” चिंकू ने
 
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सिंहराज को चढ़ा बुखार

सिंहराज को चढ़ा बुखार टेम्प्रेचर था एक सौ चार दर्द हुआ फ़िर पेट में भारी समझ न पाये वे बीमारी। धीरे धीरे सिर चकराया सिर चकराते मन घबराया वैद्य राज हाथी फ़िर आये जड़ी बूटियां ढेरों लाये। रात कौन सी दावत छानी कहां पिया फ़िर तुमने पानी सच सच तुम बतलाना भाई स
 
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फरियाद

काली कोट में लाल गुलाब, चाचा तुमको करते याद, बाल दिवस हम संग मनायें, बस इतनी सुन लो फ़रियाद। बचपन क्यों अब रूठा रहता, हर बच्चा क्यों रोता रहता, आओ चाचा नेहरू आओ, सारे जहां को तुम बतलाओ। खेल खिलौने साथ छीन कर, क्यूं सब हमें रुलाते हैं, भारी बस्तों और क
 
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मेरा देश भारत

इन्साफ़ की डगर पे , बच्चों दिखाओ चल के ये देश है तुम्हारा , नेता तुम्हीं हो कल के॥ जी हाँ , ये शब्द आपने कही न कही सुना या पढ़ा होगा। फ़िर घर के किसी कोने में फ़ेंक दिया होगा। ये दुनिया ही ऐसी है। कोई अच्छी या ढंग की बात पढी , फ़िर थोडी देर उस पर बात
 
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मछली रानी

छम छम बहता देखो पानी उसमें तैरे मछली रानी। कभी भाग कर जाती नीचे कभी झांकती है ये ऊपर मुंह में अपने भरकर पानी खेल दिखाती मछली रानी। चाहे हो नदिया का पानी या हो समन्दर गहरा पानी सभी जगह पर रह लेती है अपनी प्यारी मछली रानी। नीली पीली या सतरंगी जल जीवों
 
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दीवाली

दिया रोशनी खील बताशा फ़सलों से महका परिवेश नहीं पटाखे आतिशबाजी दीवाली का यह संदेश। दीपों के इस नव प्रकाश में नए विश्व की करो कल्पना हरी भरी होवे यह धरती सात रंगों की लगे अल्पना। नई तरंगें नई उमंगें नव आशा नूतन संकल्प खोजेंगे हम नई दिशायें नये सृजन के
 
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जी करता जोकर बन जाऊं

जोकर मुझे बना दो जी मोटी तोंद लगा दो जी। नाक गाल को खूब सजाकर गोल गोल गेंदें चिपकाकर बन्दर जैसे दांत दिखाकर रोतों को भी खूब हंसाकर। हंसा हंसा कर आंसू लाऊं जी करता जोकर बन जाऊं जोकर मुझे बना दो जी मोटी तोंद लगा दो जी। तरह तरह के खेल दिखाकर उल्टा सीधा
 
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Oct 14 2009 07:59 PM
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अमरूद

गोले गोले मीठे मीठे पीले रंग के ये अमरूद। पीले रंग पे लाल बिन्दियों वाले ये सुन्दर अमरूद । घर के पीछे बाग में मेरे खूब फ़ले देखो अमरूद। तोता मैना चिड़िया आकर रोज सुबह खातीं अमरूद। मेरा मिट्ठू रोज सबेरे मुझसे मांगे है अमरूद। अम्मा बाबू दादा दादी सब खाते
 
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बालगीत - केला

ला ला ला ला ला ला लाला ला ला ला ला ला लाहरे भरे पेड़ों से भैयाबन्दर जी ने तोड़ा केलापीला पीला मीठा केलाबन्दर जी ने खाया केला।ला ला-----------------।अम्मा बाबू भैया दीदीसबको भाता है केलाक्योंकि चीनी से भी मीठाहोता है पीला केला।ला ला-----------------।पीले
 
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Sep 25 2009 07:45 AM
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नन्हें चित्रकार

मेरे पास कुछ बच्चों ने अपने बनाये चित्र भेजे हैं।मैं इन्हें यथावत प्रकाशित कर रहा हूं। आप भी इनचित्रों को देखकर इन बच्चों के भीतर छिपी कलात्मकप्रतिभा,उत्साह तथा इनके द्वारा कागज पर बिखेरे गयेरंगों का आनन्द उठाइये।ऊपर के पहले दो चित्र नित्या शेफाली ने
 
creativekona
Sep 20 2009 09:49 PM
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नन्दू की समझदारी(अन्तिम भाग)

नन्दू की समझदारी(भाग -६)(गीतात्मक कहानी)चाचा की ये बात तो बच्चोंसमझ गया फ़िर अपना नन्दूआजाद करूंगा फ़ौरन इनकोहंस करके फ़िर बोला नन्दू।पर उनके जाने के बादनन्दू फ़िर हो गया उदासखोया खोया बैठा रहतादेखा करता था आकाश।इसी तरह बैठा था नन्दूएक दिन अपने घर के पासमोती
 
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Sep 16 2009 08:53 PM
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नन्दू की समझदारी(भाग-५)

नन्दू की समझदारी(भाग-५)(गीतात्मक कहानी)कुछ ही दिनों के बाद वहां परनन्दू के चाचा जी आयेमोती मिट्ठू की हालत कोदेख के चाचा जी मुस्काये।सोच के कुछ चाचा ने बच्चोंफ़िर नन्दू को पास बुलायामोती मिट्ठू के बारे मेंप्यार से उसको समझाया।जैसे इस धरती पर नन्दूहम मानव
 
creativekona
Sep 11 2009 05:20 PM
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नन्दू की समझदारी(भाग -२)

नन्दू की समझदारी(गीतात्मक कहानी)घर के बाहर दिखा जो पिल्लाप्यारा सुन्दर झबरा पिल्लाभूल गया दुख सारे नन्दूदौड़ के गोद में ले लिया पिल्ला।पिल्ला ले घर पहुंचा नन्दूदौड़ के मां से रोटी लायाफ़िर पिल्ले को गोद में ले केलगा खिलाने रोटी नन्दू।रोटी दाल खिला पिल्ले
 
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आज हमारी छुट्टी है

आज हमारी छुट्टी हैस्कूल से हो गयी कुट्टी है।सब कुछ उल्टा पुल्टा घर मेंझाड़ू पोंछा बर्तन पल मेंअब पापा निपटायेंगेमां की हो गयी छुट्टी है।आज हमारी छुट्टी-------।पार्क में सब मिल जायेंगेमौजें खूब मनायेंगेहरी घास फ़ूलों के नीचेसोंधी सोंधी मिट्टी है।आज हमारी
 
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Aug 02 2009 11:41 PM