लेकिन पिछले सौ डेढ़ सौ सालों में पृकृति का जो अवैज्ञानिक एवं अंधाधुंध दोहन हुआ है उसके परिणाम स्वरुप पृथ्वी पर जीवन के पाँचों आधारभूत तत्त्व संकट के दौर से गुजर रहे हैं.बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी हाल ही में बनारस गए थे । पेश है बनारस में गंगा की
" आप के पास एक रुपया हें,और मेरे पास भी एक रुपया हें,अगर हम इनको बदल दे ,आपका रुपया मेरे पास वह मेरा रुपया आपके पासतो हम दोनों के पास एक एक रुपया ही होगा ,लेकिन मेरे पास कोई अच्छा विचार हें...........और आप के पास कोई अच्छा विचार हेंहम उनको आपस में बदल दे
Dear All, For many families, a TV in the dining room is not just a source of distraction; it is also a source of destruction –breaking human relationships! In a world that has become so gadget oriented the ‘Essay from a child’ will remind us to realign
एक मूर्तिकार लगातार कई दिनों से जंगल से गुजरने के दौरान एक पेड़ के नीचेपड़े पत्थर पर अपनी थकान मिटाता था. उसे उस पत्थर से जैसे प्यार हो गयाथा सो उसने सोचा की क्यों न इस पत्थर को एक आकार दे दिया जाए जिससे इसका प्रभाव और सम्मान बढ़ जाए, ऐसा विचार करके उसने
-मनोज कुमार- घर की चहारदीवारी और घूंघट में कभी अपना जीवन होम करने वाली ग्रामीण औरतें अब नये जमाने के साथ कदमताल कर रही हैं। वे नये तेवर के साथ मध्यप्रदेश के अलग अलग हिस्सों में यह जता दिया है कि वे एक बेहतर लीडर हैं जो न केवल घर सम्हाल सकती हैं बल्कि
(पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल पर विशेष)महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम के तहत प्रदेश में भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के साथ ही हरियालीमय प्रदेश बनाने के कार्य व्यापक पैमाने पर कराए जा रहे हैं। इससे प्रदेश की 17.14 लाख हेक्टेयर भूमि में सुधार
तेजस्विनी कार्यक्रम में स्वसहायता समूहों की सदस्यों द्वारा तैयार किये जा रहे माल की बिक्री हेतु जिला स्तर परहाट बाजार का आयोजन किया गयावीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करेंसंजीव परसाई
सुधीर तिवारी पंचायती राज संस्थायें भारत में लोकतंत्र की मेरूदंड है। निर्वाचित स्थानीय निकायों के लिए विकेन्द्रीकृत, सहभागिय और समग्र नियोजन प्रक्रिया को बढाव़ा देने और उन्हें सार्थक रूप प्रदान करने के लिए पंचायती राजमंत्रालय ने अनेक कदम उठाए हैं।पिछड़ा
किसी भी काम की शुरुआत आपके प्रभाव से ही होती है, किसी भी काम की सफलता भी बहुत कुछ आपके प्रस्तुतीकरण पर ही निर्भर करती है. अतः जरूरी है की आप अपने व्यक्तित्त्व को संवारें जो की आपके साथ आपके द्वारा किये जाने वाले काम को भी प्रभावशाली बनाये.कुछ लोग कहते
संयुक्त राष्ट्र। उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुजाता मनोहर ने कहा है कि महिलाओं के खिलाफ सभी तरह के भेदभाव खत्म करने का आह्वान करनेवाली संयुक्त राष्ट्र संधि भारत में भी महिलाओं के खिलाफ हर क्षेत्र में व्याप्त भेदभाव की मानसिकता को
महिलाओं और मानवाधिकार पर विशेष समझ के लिए अवश्य पढ़ें. पुस्तक : मानवाधिकार और महिलाएँ लेखिका : डॉ. ममता चंद्रशेखर प्रकाशक : मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, मूल्य : 65 रु
source - web duniya
विकास प्रक्रिया में महिलाओं का क्या योगदान है, इसका अनुमान दुनिया के 31 देशों में किये गये एक अध्ययन के निष्कर्षो से लगाया जा सकता है। इस निष्कर्ष में यह बात सामने आई थी कि महिलाऐं विभिन्न कार्यों में पुरुषों की अपेक्षा अधिक समय देती हैं। विकासशील दे
इस रसायन का नाम डायलाइल थायोसल्फिनेट है, जो हर प्रकार के फफूंद से होने वाले रोगों को रोकने में सक्षम है। इसका छिड़काव करने से तिलहन की फसल पर लगने वाला फफूंद पूरी तरह से खत्म हो जाता है। सरसों उत्पादक जिलों में किए गये अध्ययन में ये बात साफ हो गई है क
कहानी मुनिया की उम्र यही कोई पाँच सात साल की ही होगी शायद.......। रोज वह भी गांव के बच्चों के साथ खेलने की ललक लिये घर से निकलती थी पर साथ में एक छोटे भाई की भी जिम्मेदारी जो थी.........। मुनिया बात बहुत करती थी, पढ़ने-लिखने से दूर होने पर यही उसका एक
विगत दिनों तेजस्विनी कार्यक्रम के अन्तर्गत स्व-सहायता समूहों की एक ग्राम स्तरीय बैठक का आयोजन निवाड़ी ब्लोक के ग्राम असाटी में किया गया जिसमें ग्राम में गठित सात स्वयं सहायता समूहों की लगभग 80 महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री ग्
तेजस्विनी समूहों के माध्यम से महिलाओं के व्यवहार में परिवर्तन आने के साथ साथ अब वे अपने स्वयं के बल पर परिवर्तन का बीडा भी उठाने लगी हैं, समूह सदस्यों में जहाँ एक और अपने सरोकारों को लेकर जागरूकता आयी है वहीँ वे अब सामाजिक सरोकारों के मामले में भी पह
Keeping your job when others around you are being laid off isn’t easy. A 30-year Gallup survey ("Investing in Strengths”) of more than two million workers revealed that employees who refined their talents stood a better chance of being promoted than
नंदन नील्केड़ी की किताब imagining India से अनुवादित अंश हममें से अधिकतर लोग यह सोचकर जीते हैं, जैसे इस धरती पर हमारा अस्तित्व सदा के लिए बना रहेगा। बेरोजगारी, बीमारी और लगातार बूढ़े होते जाने के बार में हम शायद ही सोचते हैं। चेहरों की झुर्रिया, ढीली
जीवन में सब कुछ एक साथ और जल्दी जल्दी करने की इच्छा होती है सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है और हमें लगने लगता है की दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं, उस समय ये बोध कथा याद दिलाती है की अभी ऐसा नहीं है इस कथा को ध्यान से पढ़िए और इससे अपने जीव
कौमी एकता सप्ताह 19 से 25 नवंबर 09 तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम अंतर्गत लोकेशन रैयपुरा में महिला दिवस मनाया गया। मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी आदेशानुसार कौमी एकता सप्ताह जो कि 19 से 25 नवंबर 2009 तक मनाया जाना है, इसी क्रम में आज ग्राम
(चित्र जिला डिन्डोरी के कार्यक्रम का है जिसमें जिला कार्यक्रम इकाई के साथ स्वसहायता समूह की महिलाओं ने शपथ ली)तेजस्विनी कार्यक्रम के अंतर्गत 8 सितंबर विश्व साक्षरता दिवस को महिला शिक्षा जागरूकता दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर शिक्षा जागरूकता बढ़ाने
" एक ओर जहां आये दिन यह समाचार पडने और सुनने को मिलते है कि बैंक में खाता खोलने आये लोंगों को बैंक वालों ने बिना खाता खोले दुत्कार कर भगा दिया वहीं मघ्यभारत ग्रामीण बमीठा प्रबंधक श्री बी.एस. वाजपेयी ने गांव जाकर तेजस्विनी समूहों के बचत खाता खोलने की
चेतना समाज सेवा शिक्षा एवं विकास समिति नौगांव द्बारा में तेजस्विनी ग्रामीण महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम पन्ना में लोकेशन - पवई एवं सिमरिया क्षेत्र के 64 ग्रामो में कार्य कर रही है। यह ग्राम क्षेत्र जिला मुख्यालय से 70 से 80 किलोमीटर की दूरी पर है जहाँ त
विपिन दिवासर एक कहावत है कि ‘सौ मील का सफर पहले कदम से शुरू होता है।’ इस कहावत को श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ ने चरितार्थ करके दिखाया है जो शून्य से शुरू होकर आज शिखर तक पहुंच गया है। मात्र 80 रूपए के कर्ज की राशि से की गई शुरुआत वर्तमान समय मे
टिनडिनी गॅाव की एक और कहानी यह बताती है कि जाति प्रथा से कैसे लोग आपस में एक दूसरे को सह नहीं पाते है। समूह ने लोगों के मन से यह भावना दूर करने का प्रयास किया है। यह समझाया है कि अगर सब लोग मिल जुल कर काम करें तो हर काम आसान हो जाता है। छतरपुर के पास
तेजस्विनी कार्यक्रम के अंतर्गत बनने वाले समूह अपने सदस्यों को कितना लाभ दे रहे हैं इसकी मिसाल बना परसाटोला क्लस्टर के ग्राम हिरापुर में बना भागरती स्वसहायता समूह। गोंड बाहुल्य ग्राम में भागरती समूह को बनाया है बैहर नारी उत्थान नामक संस्था ने। गरीबी,
स्कूल की व्यवस्थाओं को बदलने का संकल्प लिया समूह सदस्यों ने पन्ना जिले के गुनौर विकासखण्ड में छोटा सा ग्राम है ‘‘बम्हौरी’’ । लगभग डेढ़ सौ परिवारों वाले इस ग्राम के ग्रामीण मुख्यतः खेतिहर मजदूरी एवं मजदूरी पर ही निर्भर हैं। घर गृहस्थी एवं चूल्हा चौका स
ग्राम पोहा विकास खण्ड निवाड़ी का एक ग्राम है जो विभिन्न मुहल्लों में बंटा है ग्राम पोहा में यादव, कुषवाहा, पण्डित, पाल, बंषकार, बढ़ई एवं रैकवार आदि जाति के लोग रहते हैं जहां का आय का साधन कृषि मजदूरी है। इसी ग्राम में एक मुहल्ला है ताराग्राम जो ग्राम क
कार्यकर्ता के समझाने पर भी उसके पति ने यह कहकर मना कर दिया कि बहनजी आप अपनी नौकरी करो, हमारे परिवार के बीच में न पड़ो।'' ग्राम गिद्खिनी विकास खण्ड निवाड़ी के बड़ी माता तेजस्विनी महिला स्व-सहायता समूह की बैठक में क्षेत्रीय कार्यकर्ता कु. ज्योति तिवारी ने
बालाघाट के ग्राम महकेपार में गठित लक्ष्मी तेजस्विनी स्वसहायता समूह में 15 सदस्य हैं इन्हीं में एक सदस्य हैं श्रीमति सावित्री बाई । ये इस समूह से प्रांरंभ से ही जुड़ी हुई हैं लेकिन पति के उग्र स्वभाव के कारण अपने पति को यह जानकारी नहीं दी और अपने भविष्
स्वसहायता समूहों की बैठक में अब सामाजिक समस्यायें व अधिकारों की खुलकर चर्चा होने लगी है। साथ ही सदस्य इन समस्याओं के समाधान तक सीधी पहुँच बनाने में भी अपनी भूमिका का निर्वाह करने लगे हैं। यह साबित किया पन्ना जिले के ग्राम मुराछ के तीन स्वसहायता समूह
लोगों की जीवन शैली बदलने के साथ खानपान की शैली भी बदल रही है। दूध और मीट के रूप में लोगों की प्रोटीन की मांग तेजी से बढ़ रही है। जबकि सूखी घास पलने वाले पशुओं से भारत में दूध और मीट कम मिल पाता है। यहाँ ऐसे पौष्टिक पशुचारे की जरूरत पैदा होती है जिससे