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ऐ वक़्त ! तू जरा तो ठहर .....
ऐ वक़्त! जरा तो ठहरमुझे मेरे यार से तो मिल आने दे..इतनी भी क्या बैचैनी हैंदो वादें तो निभाने दे..मेरे मन की जो मायूसी हैंइन्हें आँखों से बह जाने दे..ऐ वक़्त!जरा तो ठहरमुझे खुद को उसके बिन जीना तो सिखाने दे..कैसे यह मेरा नाजुक दिल !आँखों को रोना और होठों
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Jun 09 2010 05:43 PM


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