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शुरुआत
आज आखिर वो बात हो ही गई,नज़रों ही नज़रों में मुलाकात हो ही गई|कुछ वो शरमाए,कुछ हम घबराए|"मैं","आप"में दो बात हो ही गई||सपने महके,बादल गरजे|और न जाने कैसे बरसात हो ही गई||बातों-बातों में जाने कब रात हो गई|और यूँ उस नए रिश्तों की शुरुआत हो ही गई||अपने-अपने
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Feb 10 2010 12:08 AM


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