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उसका सच

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18 Jun 2010
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बड़े दिनों के बाद चिट्ठी आई है..

चिट्ठी आई है..आई है...चिट्ठी आई है...बड़े दिनों के बाद... गाना सुनने के लिए चटकाइए ! button="hori"; lang="hi"; submit_url =""
 
सौरभ के.स्वतंत्र
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786 वाले अमिताभ बच्चन...अब ब्लॉग पर भी 786

16जून,हिंदुस्तान। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ को ब्लॉग की दुनिया में कदम रखे आज 786 दिन हो गए। 786वें ब्लॉग में अमिताभ ने मुस्लिमों के इस पाक और अपने लकी नम्बर को याद किया है लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि वह नहीं जानते कि इस नंबर की महत्ता क्या है। फिल्म
 
सौरभ के.स्वतंत्र
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संवाद

डूबते सूरज कीमद्धिम आभा सेपहरो चुपचाप हीं निहारते हुयेआस-पासकोई संध्या अजनबी सा वजूदडोलता है मेरे आस-पासकहीं ये मैं तो नहींकभी/ उन बेहाया के फूलों के संगगुपचुप मुस्कुराते हुयेकभी/मंदिर के कंगरे पर बैठे हुयेबहुत कुछ हैहमारे इर्द-गिर्दसिव इन्सानों केजिनसे
 
सौरभ के.स्वतंत्र
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एक नया और अलग ब्लॉग एग्रीगेटर : इंडली

चटका जरूर लगायें
 
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पुरानी जींस और गिटार...मोहल्ले की वो छत और मेरे यार!

पुरानी जींस और गिटार...मोहल्ले की वो छत और मेरे यार!
 
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बुधवारी : पिछले सात दिनों में आये कुछ नए ब्लॉग

हर कोई ब्लॉग लेखन में व्यस्त है...पर नए लोगों की सुध लेना भी जरुरी...स्वागत कीजिये पिछले सात दिनों में पदार्पण करने वाले ब्लॉग का...एक प्रयास बुधवारी स्तम्भ के द्वारा- सौरभ के.स्वतंत्र------------- Just Click (http://justclick-rinku.blogspot.com/) साजिद
 
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ब्लॉग नहीं लिख सकते जज : सुप्रीम कोर्ट का फैसला

एक खबर है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जजों की ब्लॉग पर अपनी भड़ास निकालने की बढती प्रवृति के मद्देनजर उनके ब्लॉग लेखन पर पूर्णरूप से रोक लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जज जो भी बोलना चाहते हैं कोर्ट कक्ष में बोलें। यदि भावनाएं ज्यादा जोर मार
 
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हिंदी के कुछ चुनिन्दा ब्लॉग

इन ब्लॉग पर चटका लगाये और ब्लॉग जगत का आनंद पायेंआइए हाथ उठाएं हम भी - लाल्टूआत्मोन्नति - ज्ञानदत्त पांडेयआराधना का ब्लॉगउदय प्रकाश का ब्लॉगउन्मुक्त - उन्मुक्तउड़न तश्तरी - समीर लालएक आलसी का चिठ्ठा - गिरिजेश रावएक ज़िद्दी धुनएक शाम मेरे नाम - मनीष
 
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छूकर मेरे मन को....

छूकर मेरे मन को किया तुनेक्या इशारा..
 
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एक और रात का सफर

शब्द खो गए हैंशेष है/ सिर्फ़ मौनचाहता है मनतमाम अनुभवों को बांटना करना तमाम बातेंमौसम की, फूलों की,हवाओं कीकुछ तुम्हारी मेरी अपनी भी।मगर/उन गिने चुने पलों कोतौलती तुम्हारी बेरुखी मेंमुखर होता हैसिर्फ़ मौन।शायद कल मिलेअनुकूल शब्द और पल भीदे सकूं
 
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सांसों की जरुरत है जैसे

सांसों की जरुरत है जैसे
 
सौरभ के.स्वतंत्र
Jun 13 2010 08:50 PM
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समझौता पत्र

सोचा था नहीं बनने दूँगी कभीसमझौता का पर्याय जिंदगीएक दिनवक्त ने ख़त लिखा जिंदगी के नामकि स्वप्न का आकाशधरती पर उतर नहीं सकताउतार भी दो गरतो जिन्दा रह नहीं सकताऔर जाने कब वक्त थमा गयाजिंदगी के नाममेरे हस्ताक्षरयुक्त एक समझौता पत्र।- सीमा स्वधा
 
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एक शहरी माओवादी से साक्षात्कार!

अरुंधती रॉय अपनी सपाट बयानी और साफगोई के लिए मशहूर हैं। नक्सलवादियों के इलाके दंडकारंय के जंगल में उन्होंने आदिवासियों और माओवादियों के साथ पिछले दिनों काफी वक्त बिताया है। विकास के नाम पर विध्वंस उन्हें कतई बर्दाश्त नही। पेश है शुक्रवार पत्रिका के
 
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वेद प्रताप वैदिक ने आज शुरू किया नया आन्दोलन : मेरी जात है हिन्दुस्तानी

जनगणना को लेकर पूरा भारत दो खेमे में बंट चुका है। एक खेमा का मानना है जनगणना में जात रहे..तो दूसरे खेमे का मानना है कि जनगणना में जात न रहे। जनगणना में जात न रखने की हिमायत वेद प्रताप वैदिक कर रहे हैं...वे निरंतर अपने लेख और ऑनलाइन गतिविधियों से जात शब्द
 
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चलते-चलते मेरे ये गीत याद रखना

चलते-चलते मेरे ये गीत याद रखना
 
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टापू

जानती हूं मैंसागर हो तुमअथाह, विस्तृत, उन्मुक्तऔर मेरी इयत्ताएक नौका भर हैजानते हो तुम!उभचुभ सांसों को संभालेढूंढती हूं मैंकोई टापूप्रेम का, विश्वास काजहां ले सकूं मैंचंद सांसेसुकून की।- सीमा स्वधा
 
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पटना में भगवाधारियों की भीड़...लालू हुए अधीर !

गंगा नदी के घाट पेभई भगवाधारियों की भीड़,चमचा-बेलचा चन्दन घिसेतिलक करें गडकरी व उनके वीर, नरेन्द्र मोदी के आगमन परनीतीश हुए गंभीर,बज गई है चुनावी बिगुलक्षत्रप चला रहे हैं तीर,कौन बनेगा योद्धाकौन बनेगा वीर,सूबे की है अलहदा राजनीतीगजब की है तस्वीर,पल में
 
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सोनिया गाँधी...द रेड साड़ी..और विवादस्पद अंश..

सोनिया गाँधी यानी भारत की एक सशक्त महिला और उनपर लिखा गया एक उपन्यास 'द रेड साड़ी'। विवादस्पद। हंगामा मचने वाला ग्रन्थ। लेखक 'जेवियर मोरो' हर हाल में चाहते हैं कि यह उपन्यास भारतियों के हाथ में भी जाए। पर कांग्रेस इसे झूट का पिटारा बता कर विरोध कर राही
 
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कुर्सीनामा

- गोरख पाण्डेय 1 जब तक वह ज़मीन पर थाकुर्सी बुरी थीजा बैठा जब कुर्सी पर वहज़मीन बुरी हो गई ।2 उसकी नज़र कुर्सी पर लगी थीकुर्सी लग गयी थीउसकी नज़र कोउसको नज़रबन्द करती है कुर्सीजो औरों कोनज़रबन्द करता है ।3 महज ढाँचा नहीं हैलोहे या काठ काकद है
 
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चना जोर गरम...

चना जोर गरम...
 
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सनसनी से घट जाएगी ब्लॉग की विश्वसनीयता! कायम

शेर है,दहाड़ है,हाथी है,चिंघाड़ है,सियार है,चालबाजी है,कुत्ता है,दूम है,बारूद है,बम है,विस्फोट है,खून है,मौत है,मातम है,समाचार है,विचार है,चिटठा है,पोस्ट है,सनसनी है,पाठक हैं,टिप्पणी है,लोकप्रियता है,फोटू है,अखबार है,और इन सबसेऊपर ब्लॉग लेखनकी विश्वसनीयता
 
सौरभ के.स्वतंत्र
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एक मंजिल..राही दो..फिर प्यार न कैसे हो !

एक मंजिल..राही दो...फिर प्यार न कैसे हो
 
सौरभ के.स्वतंत्र
Jun 10 2010 07:45 PM
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समाजवाद

- गोरख पाण्डेय समाजवाद बबुआ, धीरे-धीरे आईसमाजवाद उनके धीरे-धीरे आईहाथी से आईघोड़ा से आईअँगरेजी बाजा बजाई, समाजवाद...नोटवा से आईबोटवा से आईबिड़ला के घर में समाई, समाजवाद...गाँधी से आईआँधी से आईटुटही मड़इयो उड़ाई, समाजवाद...काँगरेस से आईजनता से आईझंडा से
 
सौरभ के.स्वतंत्र
Jun 10 2010 03:39 PM
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दुल्हन को मारुती चाहिए...नहीं तो दूल्हा की पिटाई !

------1--------याद आता है हिंदी फिल्म का वह सीन जब लड़की का बाप मांग न पूरा कर पाने पर अपनी पगड़ी लड़के के बाप के चरणों में रख कर गिडगीडाता है..सिर्फ इसलिए कि अगर बारात वापस द्वार से चली गयी तो नाक कट जाएगी..रिअल लाइफ में भी उस समय ऐसा ही होता था..हाल-हाल
 
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ब्लागवाणी थम सा गया है !

भारतीय ब्लॉग एग्रीगेटर ब्लागवाणी कल रात से थम सा गया है.. उम्मीद है उसे दुरुस्त कर लिया जायेगा..
 
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हम दोनों मिल के..कागज पे दिल पे..चिट्ठी लिखेंगे..

हम दोनों मिल के..कागज पे दिल पे..चिट्ठी लिखेंगे..
 
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चौथी दुनिया देश का पहला हिंदी साप्ताहिक अख़बार कैसे?

मजा आ गया। कमाल का ले-आउट। जानदार पृष्ठ सज्जा। विविध मुद्दों से लबरेज। कुछ ऐसा ही आज मुझे चौथी दुनिया पढ़ने पर आभास हुआ । साथ में अपने राज्य के लिए विशेष सप्लीमेंट। वाकई संतोष भारतीय और उनकी टीम की ये पहल उल्लेखनीय है। भारतीय जी को साधुवाद..ऐसे बेहतरीन
 
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एक सच्चे-ईमानदार पत्रकार के कुछ अनसुलझे प्रश्नों का सीधा जवाब

रंजन ने कहा…अजीबो गरीब बहस है की है इस ब्लॉग वाले ने - मालूम नहीं ए कौन है ?? - गीता जी ने जो कुछ भी कहा - वो सच है - संजय गाँधी ने जब नसबंदी करवाना शुरू किया तो - पुरुष अपनी 'पत्नी' के पल्लू में छिपने लगे ! खैर , यह ब्लॉग मोहल्ला पर प्रकाशित हुआ है और
 
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नीतीश कुमार का ब्लॉग लेखन ठन्डे बस्ते में...

आज घूम रहा था ऐसे ही। फिर मूड हुआ आज घूमने चलते हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ब्लॉग पर। नीतीश कुमार के लेख पर सैकड़ो प्रतिक्रियाएं , राय, सुझाव, बधाई। इसे नीतीश कुमार ने खुद महसूस भी किया है..उन्ही के शब्द:------------ सप्ताह भर में सैकड़ो
 
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ए जी..ओ जी..लो जी...सुनो जी

रमपम-पमपम, रमपम-पमपम
 
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एक कतरा प्यार...

तुम नित निहारती हो,धुप और छाव के बीच पलके बिछाती हो,साईकिल की घंटी बजाता पास वाला हलवाईतुम्हे देखता है कि तुम्हारी नजरे किधर गडी हैं,पर तुम लीन होअपने उस बेइंतहा प्यार को जताने के लिए,मसलन एकटक निहारना,माँ की चौका घर से आवाज़ पर भीतुम निहारती ही रहती
 
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चली आना तू पान की दुकान पे....साढ़े तीन बजे

चली आना तू पान की दुकान पे..साढ़े तीन बजे
 
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अख़बार की कीमत : फिरंगी का कटा हुआ सर

कुछ बाते जिन्हें याद रखनी चाहिए - सौरभ के.स्वतंत्र ----------------- 1903 में भारतमित्र (दुर्गा प्रसाद मिश्र) अखबार में शिवशंभू के चिट्ठे की पहली किस्त प्रकाशित हुई। लार्ड कार्जन को ललकारते हुए संपादक ने लिखाः"आप बारंबार अपने दो कर्मो का वर्णन करते हैं,
 
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डायरी

उसने साफ कियासारा घरखिड़की तक लटक आये जालेकोनों में जमी धूलसीलन भरे बक्से कोधूप तक दिखा आयीमगर खोला नहींबहुत दिनों सेकोने वाली बंद आलमारीदरअसलवो जुटाती रही हौसलासामना करने का/अतीत काजिंदगी के सफे से गायबउन पन्नों में लिखी इबारत काउस बन्द आलमारी मेंकैद
 
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सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं

सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं
 
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ब्लॉग पर विज्ञापन चाहिए

adsene और adbrite पर मैंने प्रयास कर लिया सफलता हाथ नही लगी..सुझाइए मुझे भी कोई विज्ञापनदाता साईट...जहाँ से कुछ revenue आ सके..
 
सौरभ के.स्वतंत्र
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भारत में कई रंगे सियार हैं !

भारत में कई धर्म हैं ,भारत में कई प्रथाएं हैं , भारत में कई भाषाएँ हैं ,भारत में कई तरह के जीव-जंतु हैं ,भारत में कई नस्ल के कुत्ते हैं,भारत में कई रंगे सियार भी हैं,भारत में विविधता है,इनके बावजूद यहाँ एकता है,जनगणना में जाति है फिर क्यों आपत्ति है?
 
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कंडोम और पिल पर बहस से महिला सशक्तिकरण करने का प्रयास

पुराश्री, अनुश्री, तनुश्री,गीताश्री, इतिश्री.......में मैंने गीताश्री को ही क्यों चुना? क्योंकि वो बतियाती हैं महिला सशक्तिकरण की बात.कंडोम और पिल पर जिरह करके सुश्री गीताश्री करना चाहती हैं महिलाओं का उद्धार... उनका मानना है "पिल को स्त्री की आजादी से
 
सौरभ के.स्वतंत्र
Jun 04 2010 04:57 PM
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कविता संकलन निकालने की प्रक्रिया क्या है?

प्रिय ब्लॉग लेखको, मुझे कविता संकलन निकलवाने के बारे में जानकारी चाहिए..अगर आपके पास कोई जानकारी है या आपके नज़र में कोई प्रकाशक हैं तो उसे साझा कीजिये..पाण्डुलिपि तैयार है..इसके लिए मै आप सभी का आभारी रहूँगा..
 
सौरभ के.स्वतंत्र