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चिंतन मेरे मन का

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14 Jun 2010
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फेसबुक महिमा व आरती !

आज पी बी यानि "प्रवचन बाबा" की ओर से आप सभी फेसबुक भक्तो को एक संदेश्! आज फेसबुक एक चाहत बन गया है, लगता है सभी इसकी पूजा करते है। प्रस्तुत है आप सभी के लिये इसका विधि-विधान,साम्ग्री एवम आरती! पूजन सामग्री: कम्पयूटर और मोबाईल फोन, अंग्रेजी का थोडा ज्ञान
 
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देखो क्या है बदला.........

देखो क्या है बदला......... बदला जमाना बदल गई संस्कृति हर रिश्ता चढ गया इसकी आहुति हिन्दी खो गई अब जुंबा पर अंग्रेजी है समाई करे खिलाफत जो उसकी सम्झो शामत आई हमने भी पीछे - आगे खूब नज़र दौडाई देखा क्या बदला, फिर अपनी समझ मे आई मां पिताजी बन गये अब "मोम -
 
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टिकट मुस्कराहट का....

टिकट मुस्कराहट का.... मुस्कराहट कंही खरीदनी नही पडती। येसे कई अवसर आते है जब छोटी छोटी बाते भी इसका कारण बन जाती है। एक छोटी सी घटना आज भी हुई जिसे आप लोगो के साथ बांटना चाहता हूँ। अबु धाबी में आजकल निर्माण इतना चल रहा है कि यातायात हर जगह रुका हुआ
 
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रोशनी की तलाश ...

एक गलियाराकुछ अंधेराअपने मे समाये हुयेमै चला जा रहा थाइस गलियारे केबीचो बीच रोशनी की तलाश मेआंखे बडी हुईमन मे एक डरशरीर पर एक सिरहनचेहरे मे सिकनरुकती सी धडकन सहसा एक रोशनीधीमे से गलियारे मेफैलने लगीसब कुछ साफनज़र् आने लगागलियारे का स्वरुप अलग सा थामेरी
 
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फिर एक अहसास हुआ

आज कुछ गुमसुम सा थामन मे कुछ उतार चढाव सा थामन के भीतर कुछ ज्वार भाटा सा थाअहसास कुछ चावल आटा सा थाकुछ चुन सकता था कुछ सब मिला सा थावक्त भी कुछ हमसे जला भुना था हर रिश्ते पर कुछ प्रश्न खडे थेअपने ना जाने क्यो सडे पडे थेहम भी बस अनजान खडे थेअपनो से हम भी
 
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मै अबला हूँ!!!

मैं अबला हूँसदियो से हारती आई हूँयही हम कहते आये है। मुझे हर पल कोसा गयामेरे अर्थ को निर्थक कियायही हम कहते आये है। वेदना ही मेरा अस्तित्व हैहर पल मुझ पर जुल्म हुयेयही हम कहते आये है। दुर्गा हो या पार्वतीगाते सब मेरी आरतीकहो कौन जीता कौन हारा? सीता हो या
 
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करता धन्धा हूँ

खुदा का बन्दा हूँ आंख होते हुये भी बना अन्धा हूँकरता धन्धा हूँ करता धन्धा हूँकभी खुशियो काखुशियां छीन लेने का हक रखता हूँ करता धन्धा हूँकभी प्यार काप्यार पाकर बेवफाई करना जानता हूँ करता धन्धा हूँकभी दोस्ती कापीठ पर छुरा घौंपने का आदी हो चुका हूँ करता
 
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आज फिर उनको...

आज फिर उनको हमारा ख्याल आयासपने में आकर चुपके से मुझे जगाया कहने लगी भूल जाओ कल की कहानीचलो शुरु करे अब फिर एक नई कहानी अपना सहारा तुम्हें बनाना चाहती हूँतुम को अपना प्यार बनाना चाहती हूँ तुम ही तो हो मेरे श्रृंगार – दर्पणकरती हूँ मैं तुमको सब कुछ
 
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डा. बड़थ्वाल ....अखिर कब मिलेगा सम्मान?

डा. बड़थ्वाल ....अखिर कब मिलेगा सम्मान? (उपर दिये गये दायी तरफ दो वाले चित्र - सौजन्य श्री यू सी जोशी (दिल्ली) डॉ० पीताम्बर दत्त बडथ्वाल ( १३ दिसंबर, १९०१-२४ जुलाई, १९४४) हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले शोध विद्यार्थजैसा कि हिन्दी
 
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प्यार की राह में

प्रेम तपस्या में लीन होकर जाना कुछ हद तक प्यार की भाषा को और उसकी परिभाषा को प्रेम एक सम्बन्ध है मेल है दिल के तारो का परस्पर स्नेह का विचारो का भावनाओ का एक दूजे का सहारा है प्यार समर्पण और आदर का सामंजय है प्यार शायद इस दुनिया मे कई प्रेम पुजारी है फिर
 
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नर और नारी, कौन किस पर भारी

"मेन आर रिस्पोन्सिबल" बहुत दिनो से सोच रहा था कि पुरुष को गलत ठहराना कितना जायज़ है और कितना गलत है। आये दिन(आजकल कुछ ज्यादा) महिलाये स्वयं को न जाने हमेशा क्यो सती सावत्री और पति को बस अय्याश ही या गलत करार देने से नही चूकते। अपवाद महिला हो या पुरुष
 
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कल मुझे जीतना है!!!

आज सोते सोते मै बडबडाने लगाहल्ला फिर मचाने लगादिन भर के ख्यालातएक द्वन्द्द मचाने लगेशायद कोई हार आज बर्दाश्त न हुई लड्ने वाला हर चेहराअंधेरे मे गुम सा थामै जीत के लियेहाथ पैर चला रहा थादिल-दिमाग दोनो हीकंही दूर खडे हंस रहे थेमेरी हताशा पर मुझे ही कोस रहे
 
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लिव-इन एक रिश्ता या जरुरत या फिर......???

लिव-इन रिश्ता  रहने की येसी व्यवस्था है जिसमें अविवाहित जोड़े एक दुसरे के साथ लंबे समय तक रहते बिना शादी के बंधन निभाये हुये।कई कारणों से जोडे साथ रहना पंसद करते है शादी की बनस्पत। वे अपनी संगतता का परीक्षण करना चाहते हैं इससे पहले कि वे एक कानूनी
 
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होली मिलन एवम सांस्कृतिक सैर - सपाटा 2010

हमारे उत्तराखंड के गाँवो में हम सुबह में रंगों के साथ होली खेलते हैं और शाम को हम अपने दोस्तों / रिश्तेदारों को मिलने जाते है या फिर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोज़न करते है होली मिलन के रूप में। उसी संदर्भ में दुबई, शारजाह और अज़मान  से
 
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उनकी नज़र के दीवाने है

उनकी नज़र के दीवाने हैबस दीदार को तरसते हैआँखे बरबस उनको ढूंढती हैवो देखकर भी गुम हो जाती हैतन्हाई उनको पसंद हैमुझे उनका साथ पसंद हैयकीं है हमे कुछ ये भीदिल में है कुछ उनके भीछुप कर हमें खोजती हैखोज कर कुछ सोचती हैजाने क्या वो सोचती होगीढूढने के बहाने
 
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विक्रम संवत 2067

"नवरेह्","उगादि","गुडी पाडवा","चैती चांद" एवम नववर्ष की सभी ब्लागरो व भारतियो को शुभकामनाये!!प्रतिबिम्ब एवम परिवार 
 
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याद आने लगी!!!!

अंगडाई लेती पुरवाई लेकिनयाद तुम्हारी ले आईतन से कोसो दूर लेकिनमन के बहुत करीबआती शरमाती हुई लेकिनकमर बल खाती हुईखामोशी छाने लगी लेकिनदिल शरारत करने लगासंभलने लगे अहसास लेकिनगर्म होने लगी साँसपलके झुकने लगी लेकिनहोंठ थिरकनें लगेमुझ को होश नहीं लेकिनधड़कने
 
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ये हम कैसे उन्हे बताये!!!

ये हम कैसे उन्हें बतायें ?ख्वाब और हकीकत की ये कहानीयाद और अपने दिल कि जुबानीप्यार और अपने जज़बात की नादानीअहसास और शरारत की दीवानगीकल और आज की रुसवाईभाव और घावों की गहराईवफा और बेवफाई की सच्चाईकसमों - वादो की दुहाईबिछोह और दूरी का गम आंखो और होन्ठो की
 
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Mar 03 2010 10:14 PM
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"छरोली 2010" (होली) यूएई में

"छरोली 2010" (होली) यूएई में संयुक्त अरब अमीरात में देव-भूमि उत्तरांचल/उत्तराखंड से जुडे हुये प्रवर्तीय लोगो ने 26 फ़रवरी 2010  ममज़ार पार्क, दुबई मे एकत्र होकर 'होली' रंगों का त्योहार के रूप में "छरोली 2010" पारंपरिक उत्तरांचली/उत्तराखंडी तरीके से
 
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Mar 03 2010 12:11 AM
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होली के रंग में रंग

रंगीन दुनिया,ढूढे फिर भीकौन सफेद या काला हैअपनो के रंगो में भी खोजेकौन अपना कौन पराया हैअमीरी का रंगबस चढता जाता हैगरीबी का रंग तो बस बिखरता जाता हैखून का रंग अब सस्ता हुआआंतक का रंगचारो ओर फैलता रहाभय  का रंगरोज़ मौत देता रहाछोड हिंसा का
 
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Feb 25 2010 04:31 PM
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परिवर्तन संसार का नियम है

परिवर्तन संसार का नियम हैनियम तोड़ने के लिये ही बनते हैतोड़ना या तोड़ – फ़ोड़ जुर्म हैजुर्म की कोई न कोई सज़ा हैसज़ा जुर्माना हो या फ़िर कैदकैद में जानवर हो या फ़िर इंसानइंसान अच्छा हो या बुराबुराई का छोड़ दो अब दामनदामन किसका पकड़े या छोड़ेछोड़ ना देना
 
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Feb 25 2010 08:35 AM
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वक्त करवट लेता गया

वक्त करवट लेता गयाहर बीते पलो को समेटने लगासंकुचित मन से वक्त को देखापीड़ा का अहसास उसमें पायादुखते और सुलगते घावों कोअसहाय सा इस दौर में पायासमझ न सका वक्त का इशाराअपने को सवालों से मजबूर पायाजीने कि चाह मे उठते गिरते स्वरपल - पल वेदना के चुभते खंजरसुख
 
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Feb 19 2010 09:09 PM
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ज़िंदगी!!!

मस्तिष्क के प्रांगण मेंप्रतिद्वन्दता कराती जिन्दगीउठाती - गिराती ज़िन्दगीजलाती - बुझाती जिन्दगीबनाती - बिगाड़ती जिन्दगीरुठती - मनाती जिन्दगीरुलाती लेकिन हंसाती जिन्दगीइठलाती लेकिन खेलती जिन्दगीचुपचाप लेकिन बोलती जिन्दगीपूछती लेकिन उतर देती जिन्दगीइन्कार
 
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Feb 15 2010 07:11 PM
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शांति शांति शांति

आतंकवाद का चेहराकैसा दिखता हैकोई जान नहीं पाया।बस जान पाया तो केवलदर्द, पीड़ा, भय और दशहतखून, गोली, धमाका और नफरतचारों ओर होते नज़ारे हताहतफ़िर दिखती हैबिलखती दुनिया,बढ़ती नफ़रतप्रदर्शन करती जनताउग्र होती भावनायेंएक आम इंसानमूक दर्शक की भाँतिकेवल सहम
 
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Feb 14 2010 07:05 PM
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उनकी खबर

हर मोड पर दौडती नज़रआये कही से उनकी खबरढूढती रहे उन्हे शहर-शहरकही ना मिली उनकी खबरतुम बिन आसान नही डगरढूढे तुम्हे कहा अब हम मगरनाकामी बस बनी हमसफ़रअपने से ही हुई बात अक्सरहालात पूछते रहे प्रश्न इस कदरटूटती रही आस, वो रहे बे खबर-प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल (अबु
 
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मेरी आँखो मे बसते है सपने

मेरी आँखो मे बसते है सपनेकब तक सच होंगे मेरे सपनेसभी कहते है सब मेरे अपनेबताते है वो ये पराये ये अपनेलगते हैं  इस देश में सब परायेजीने मरने का भेद मुझे समझायेये मेरा प्रदेश ये उनका प्रदेशकौन मित्र है किनसे है द्वेष मेरे धर्म का क्या है
 
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आज .....

कर्त्वय अपना भूला नहींभावना मेरी बदली नहीसोच मेरी बदली नहीस्नेह मेरा बदला नहीकर्त्वय के माने अब बदल गयेभावना मेरी कोई समझे नहीसोच को कोई महत्व देता नहीस्नेह मेरा कोई अपनाये नहीपल पल बदलता वक्तपल पल बदलती सोचपल पल बदल्ती भावनापल पल बदलता स्नेहबदल गये
 
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यूएई कौथिग 2010

"यू ए ई कौथिग 2010"7 जनवरी 2010, दुबई, यूएई आज जैसे उत्तराखंड यू ए ई की सर जमी पर उतर आया हो। "यू ए ई कौथिग 2010"  रामदा कोन्टिनेंटल, डेरा दुबई में बडे उत्साह के साथ मनाया गया जिसे उत्तरांचली एशोसियेशन आफ एमीरात ( यू ए ई ग्रुप ) ने आयोजित किया था।
 
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१३ दिसम्बर याद आये डा. पीताम्बर दत्त बडथ्वाल (हिन्दी के प्रथम डी लिट)

डॉ० पीताम्बर दत्त ब डथ्वाल ( १३ दिसंबर , १९०१ - २४ जुलाई , १९४४ ) पाली ग्राम (उत्तराखंड) में हिन्दी का जन्मा लाल कर शोध हिन्दी में पहली बार सबको दिखाई नई राह बने प्रथम भारतीय् जिन्होने डी.लिट हिन्दी में पाई नाम इस साहित्य्कार का था डा.पीताम्बर दत्त ब
 
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उनकी याद्

उनकी याद्………… क्षितिज की ओर निहारती नज़रे शांत समुन्दर की मस्त लहरे बरबस ही उनकी याद दिला जाती है उनको भूलने की नाकाम कोशिश फ़िर मन में एक आस जगा जाती है मन फ़िर मन नहीं रहता प्रेम में वशीभूत हो जाता है आसमान की उँचाईया छूने लगता है प्यार कि खुशबू मह
 
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26/11 - क्या सीख पाये हम कुछ ?

मुं बई हमले की आज बरसी है. तमाम चैनलो और प्रिंट मीडिया में "अपने सच" की खूब बिक्री हो रही है.सभी किसी न किसी रुप में किसी को दोषी ठहरा रहे है या फ़िर प्रशन खडे कर रहे है. आज भी पाकिस्तान को दोषी और शहीदो को याद कर रहे हैं. यही होता आया है पहले भी और
 
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चाँद फिर निकला Written By: Kamlesh Chauhan Copyright@ July 9th, 2008

ये चाँद आज फिर निकला है यु सज धज के मुहबत का जिक्र हो शायद हाथो की लकीरों मे याद दिलाता है मुझे एक अनजान राही की याद दिलाता है उन मुहबत भरी बातो की टूट कर चाहा इक रात दिल ने एक बेगाने को कबूल कर लिया था उसकी रस भरी बातो को वोह पास हो कर भी दूर है मुझ
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स्वयं का पहला कदम

आज की बात... कुछ सोच रहा था तो और उलट पलट कर स्थितियो और परिस्थितियो को देखने लगा. यूएई में २३ सालो से रह रहा हूं, फ़िर सोच क्या खोया क्या पाया के खाते दिमाग पर तांडव करने लगे. ज्यादा इस पर ना सोचू इसलिये आने वाले समय की ओर सोच को मोडा और पाया कि नये
 
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क्या करना तुम शादी के बाद.

बहुत साल पहले कुछ मित्रो को शादी की मुबारकबाद देते हुये कुछ प़क्तिया) ----------00000---------- एक से दो हुये आप, देता हूँ मुबारकबाद बता रहा हूँ क्या करना तुम शादी के बाद रात - दिन का नही, जीवन भर का है साथ इसे निभाना प्रिय मित्रो , तुम शादी के बाद ए
 
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तुम जब भी मेरे पास आये

तुम जब भी मेरे पास आये, प्यार की परिभाषा बदलती रही। जब भी तुमने मुझे छुआ अहसास हमारे हर पल बदलते रहे। तुम्हारी आँखों ने जब भी कुछ कहा सपने मेरी आँखों के बदलते रहे तुम्हारे दिल ने जब भी मुझे पुकारा दिल के जज़बात फ़िर तड़पेंगे लगे रात की खामोशी जब कुछ
 
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दीपावली की बधाई एवम शुभकामनाये!!

ब्लागवाणी तथा चिट्ठाजगत के पाठको को, तमाम हिन्दी ब्लागरो और भारत वासियो को दीपावली की बधाई एवम शुभकामनाये!! II हरि ओम हरि ओम हरी ओम हरि ओम ततसत् हरि ओम शान्ति शान्ति शान्ति II --------------------------------------------------------------------------
 
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दिवाली फ़िर से आई - शुभकामनाये

दिलो - दिमाग पर रहती, हर त्यौहार की छाप है बतलाया गया मुझे चोरी और झूठ तो एक पाप है। सिखलाया करना बड़ो का आदर, रखना प्रेम और भाई चारा, देश प्रेम का पाठ पढाया और बुलंद किया देशभक्ति का नारा। आज दिवाली फ़िर से आई सबके चेहरो पर ख़ुशियाँ लाई, दोस्तों को
 
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तो क्या बात होती

तो क्या बात होती - ख्वाब हकीकत बन जाते तो क्या बात होती हम - तुम एक हो जाते तो क्या बात होती तेरा दर्द मैं सह पाता तो क्या बात होती तेरे आंसू मेरी आंख से आते क्या बात होती तेरा गम मैं समेट पाता तो क्या बात होती तेरी परछाई मैं बन पाता तो क्या बात होती
 
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Oct 14 2009 07:50 PM
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फिर भी ना जाने क्यो-(प्रेम का एक रुप ये भी)

फिर भी ना जाने क्यो- प्रेम अर्थ है, प्रेम समर्थ है, फिर भी ना जाने क्यो व्यर्थ है॥ प्रेम आरजू है, प्रेम तपस्या है, फिर भी ना जाने क्यों निराशा है॥ प्रेम चेष्टा है, प्रेम निष्ठा है, फिर भी ना जाने क्यों रुठा है॥ प्रेम शक्ति है, प्रेम अनुभूति है, फिर भ
 
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Oct 14 2009 07:50 PM
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तुम संग नाचूँ, गीत मिलन के गाऊँ

तुम संग नाचूँ, गीत मिलन के गाऊँ अपनी धुनों से दीवाना तुमको बनाऊँ प्यार के खेल में जीत ले हम बाजी तुम संग नाचूँ, गीत, मिलन के गाऊँ तुम कहो तो दुनिया से मैं लड़ जाऊँ धरती क्या अम्बर में तूफान मचाऊँ सागर की मौजो को गले लगाऊँ तुम संग नाचूँ, गीत मिलन के ग
 
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Oct 14 2009 07:50 PM