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सीधी बात

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14 Jun 2010
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मौत को दावत!

नक्सल प्रभावित जिलों के वाशिदें खौफ में जी रहे हैं तो बगैर संसाधनों के जवान वैसे इलाकों में बेमौत मरने को मजबूर हैं। नक्सली कभी भी कहीं भी कायराना हरकत को अंजाम देते हैं और हमारे खुफिया तंत्र को नेताओं के इशारों पर उनके प्रतिद्वंदियों की बखिया उधेड़ने से
 
राजीव कुमार
May 08 2010 11:50 PM
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वो चली गयी...

वो चली गयी... हमेशा के लिए चली गयी... इस दुनिया को छोड़ कर एक नयी दुनिया में... एक ऐसी दुनिया में जहाँ से कोई वापस नहीं आता... वो चली गयी... अपने पिता को अकेला छोड़ कर चली गयी... रोता बिलखता छोड़ गयी वो अपने पिता को... उसका जाना तय नहीं था, फिर भी वो चली
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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सवाल...

मैं कौन हूँ??? मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सवाल... आखिर मैं कौन हूँ? मेरा क्या अस्तित्व है? इस दुनिया के लिए आखिर मेरी क्या जरूरत है? मैंने इस धरती पर जन्म क्यों लिया है? मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ?ये कुछ ऐसे सवाल है जिनके जवाब ढूंढने की मैं बहुत कोशिश करता
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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लहूलुहान छत्तीसगढ़

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राजीव कुमार
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व्यावहारिक नहीं ये कानून

1 अप्रैल 2010 को शिक्षा का अधिकार कानून पूरे देश में लागू कर दिया गया... इस कानून के तहत कही गई बातें बहुत लुभावनी लगती हैं... लेकिन व्यावहारिक रूप से इसे लागू करना काफ़ी कठिन है... इसमें कई लूप होल्स हैं... जिसकी वजह से कभी भी देश के बच्चे इस कानून का
 
प्रज्ञा
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सीधी बात

आज घर पर ही हूँ... कोई काम नहीं था तो बैठ गया अपने कंप्यूटर के साथ इन्टरनेट पर नयी और ताजा खबर तलाशने... कुछ नए ब्लॉग भी पढ़ रहा था तभी एक ब्लॉग पर एक साथ दो खबरें मुझे मिली... खबर मिलते ही सोंच में पड़ गया कि क्या ऐसा भी हो सकता है... आखिर दुनिया को हो
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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कानून से इतर.......

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विवाहपूर्व सेक्स या लिव इन रिलेशनशिप अपराध नहीं और दो वयस्कों के बीच संबंध को रोकने के लिए किसी कानून की व्यवस्था नहीं... मैं भी ये मानती हूं कि सेक्सुअल रिलेशन कंपलीटली किसी का निजी मामला होता है.. लेकिन इसके व्यावहारिक पक्ष
 
प्रज्ञा
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टीका भी लेता है जान!

मध्यप्रदेश के दमोह में एक ऐसा वाकया सामने आया है जो सरकारी तंत्र की पोल तो खोलता ही है साथ ही इसे सोचकर दिल भी दहल जाता है... आंगनबाड़ी केंद्र में 2 साल तक के बच्चों को यहां खसरे के टीके लगाए गए... जिसकी वजह से अबतक 4 बच्चों की मौत हो चुकी है और 17 बच्चे
 
प्रज्ञा
टैग: बच्चे
Mar 14 2010 10:14 PM
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आखिर क्यों हो रहा है ऐसा मेरे साथ?

आज पहली बार समझ नहीं आ रहा कि कहाँ से लिखना शुरू करूँ... आज पहली बार शब्द नहीं मिल रहे पिरोने के लिए... आज खुद को भावविहीन महसूस कर रहा हूँ.... मैं जो जिंदगी जीने के नजरिये की, सुख की, प्रेम की, दोस्ती की, भावनाओं की बातें करता था... वही मैं, आज खुद को
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 14 2010 07:15 PM
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वक्त हमारा है

चमक उठी सन सत्तावन में, वो तलवार पुरानी थी,बुंदेलों हर बोलो के मुख हमने सुनी कहानी थी,खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी।डलहौजी की राज्य हड़पने की नीति के तहत उस वक्त झांसी को ब्रिटीश राज्य में मिलाने की साजिस रची जा रही थी। अंग्रेजों ने राज्य का
 
राजीव कुमार
Mar 13 2010 09:12 PM
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महिलाओं का फैसला करने वाले ये हैं कौन?

महिला आरक्षण बिल के लाइमलाइट में आने के बाद से ही इसपर सियासत गर्म है, साथ ही तरह-तरह के लोगों, संगठनों द्वारा बयानबाज़ी की बयार बह रही है... नया बयान है...शिया धर्म गुरू कल्‍बे जव्‍वाद का... जिन्होंने महिलाओं को अच्‍छे नस्‍ल के बच्‍चे पैदा करने की मशीन
 
प्रज्ञा
Mar 13 2010 08:46 PM
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दुसरे खुद-ब-खुद आपसे प्रेम करने लगेंगे....

खुद से प्रेम करना और दूसरों से प्रेम करना-ये दोनों बातें एक-दूसरे पर निर्भर करती हैं. दूसरों के लिए जीना नहीं सीखते तो खुद से भी प्यार नहीं कर सकते और खुद से प्यार नहीं कर सकते तो दूसरों के लिए भला कैसे जीना सीखेंगे. जब हम स्वयं खुश और संतुष्ट होते हैं
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 12 2010 01:08 PM
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दौड़ में जीना है और पछताते हुए मरना है

मेरे पास गाडी है, बंगला है, बैंक बैलेंस है... तुम्हारे पास क्या है?बहुत ही मशहूर फिल्मी डायलोग है ये, पर आज के युवाओं का बहुत बड़ा सत्य भी है. आज के युवाओं के पास ये सब कुछ है, गाडी भी है... बंगला भी और बैंक बैलेंस भी... पर अगर नहीं है तो आत्म-संतुष्टि.
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 10 2010 03:57 PM
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जब कभी अपनों की आँखों में आंसू देखता हूँ

जब कभी अपनों की आँखों में आंसू देखता हूँ, मेरा दिल भी रोने लगता है. तड़प हो उठता है मेरा मन. जी करता है मैं भी जार-जार रोऊँ...आज भी मैंने एक अपने बहुत अजीज को रोते हुए देखा. हुआ कुछ यों की दिल को उनके बहुत ठेष लगी, आँखों में दो बूँद उतर आये उनकी. मेरे उस
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 06 2010 08:45 PM
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भगदड़ः ज़िम्मेदार कौन?

गुरुवार को यूपी प्रतापगढ़ के राम जानकी मंदिर में मची भगदड़ में करीब 63 लोगों ने अपनी जानें गंवा दीं... मरने वालों में केवल महिलाएं और बच्चे थे... भगदड़ में करीब 200 लोग घायल हो गए... मंदिर में कृपालु महाराज का प्रवचन और इसके बाद भंडारे की व्यवस्था थी...
 
प्रज्ञा
Mar 05 2010 09:52 PM
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मैं जिन्दा रहते हुए भी मुर्दों जैसा जी रहा हूँ

लोग कहते है मैं बहुत भावुक इंसान हूँ. मुझे भी ऐसा ही लगता था पर कुछ दिनों पहले तक ही. लोगों को पीड़ा में देखकर मेरा ह्रदय भी पीड़ित हो जाया करता था. किसी के भी दुःख में मैं भी दुखी हो जाया करता था, लोगों की ख़ुशी में मैं भी हँस लिया करता था. बातें मेरे दिल
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 04 2010 08:21 PM
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आत्मा-परमात्मा, ज्योतिष नाम की चीज होती है....

देखते देखते मेरे ब्लॉग पर पोस्टों की संख्या १०० पार गयी और खुद मुझे पता नहीं चला. पता चलता भी तो कैसे? बीते महीने मैंने अपने ब्लॉग पर समय भी तो बहुत कम दिया था. अवकाश पर था, घर पर छुट्टियों का मजा ले रहा था. माँ के हाथ की बनी रोटी और चाय की चुस्कियों से
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 04 2010 08:21 PM
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दिल में लड़कियों के लिए प्यार नहीं सिर्फ घृणा औ...

आज कल बुद्धू बक्से पर एक शो बहुत चर्चा में है... राहुल दुल्हनिया ले जायेगा... दुल्हनिया ले जाये या नहीं पब्लिसिटी जरूर ले जा रहा है. राहुल महाजन... एक ऐसा नाम जो रातों रात फेमस हो गया. एक सेलेब्रिटी बन गया. पर मैं जानना चाहता हूँ कि आखिर उसका अतीत क्या
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Mar 04 2010 08:21 PM
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ससुराल से भागती लड़कियां

अधिकतर लोगों को कहते सुना होगा कि बेटा पत्नी आने तक ही बेटा रहता है... और बेटी आजीवन बेटी बनी रहती है... औरत आते ही घर तोड़ देती है... या आज की महत्वाकांक्षी लड़कियां शादी के बाद परिवार  बीच रहना ही नहीं चाहतीं...मेरी कई महिलाओं और लड़कियों से इस
 
प्रज्ञा
Feb 22 2010 11:15 PM
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विधायक की आजा नच ले!

लोगों को कहते सुना है कि बिहार की तस्वीर बदल रही है। सीएम नीतीश कुमार और उनके दरबारी बिहार की सूरत बदलने में लगे हुए हैं। लेकिन उसी बिहार की राजधानी में उनके ही विधायक ने जो किया.. उससे उनके सारे किए धरे पर पानी फिरता दिख रहा है। भय और भ्रष्टाचार से
 
राजीव कुमार
टैग: राजीव
Feb 21 2010 10:28 PM
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बच्चों के दुश्मन

बहुत दुःख हुआ ये सुनकर कि बिहार के जमुई में हुए नक्सली हमलों में बच्चों का इस्तेमाल किया गया है... कहा जाता है कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं तो क्या हमारा भविष्य ऐसा है? दोष किसका है... व्यवस्था का, माता-पिता का या खुद हमारा... बहुत बड़ा सवाल है ये...
 
प्रज्ञा
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मेरे ख़त...

मेरे ख़त... नाम से एक नए ब्लॉग की शुरुआत की है मैंने. आशा करता हूँ कि आप लोगों को मेरा ये प्रयास पसंद आएगा और मैं अपनी बात आप लोगों तक पहुचाने में सफल रहूँगा. बस आप लोगों के आशीर्वाद की जरूरत है. तो कृपया मेरे ख़त... पढ़ कर उसका जवाब
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Feb 17 2010 10:09 AM
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महंगाई बढ़ने के फायदे

अब तक जहां भी देखा, पढ़ा और सुना... हर जगह महंगाई के नुकसान ही गिनाए गए... कितनी भाषणबाज़ी, बंद और सियासत भी हो गई इस पर... लेकिन जिस तरह से हर सिक्के के दो पहलू होते हैं... इसके भी हैं... इसलिए आज मैं फोकस करुंगी इससे होने वाले फायदे पर... जिनपर संभवतः
 
प्रज्ञा
Feb 16 2010 07:58 PM
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रण...

कल राम गोपाल वर्मा की अमिताभ बच्चन, रितेश देशमुख अभिनीत फिल्म रण देखी मैंने.एक उम्दा कहानी और सच्चाई को उकेरती बहुत ही लाजवाब फिल्म है रण... मीडिया की हकीकत को बहुत ही खूबसूरती से इस फिल्म में दिखाया गया है. फिल्म के सीन में राजपाल यादव (इस फिल्म में
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Feb 16 2010 09:49 AM
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ग़ैरज़रूरी मुद्दे बनते जा रहे हैं ज़रूरी! ये कैसी राजनीति?

करीब १० दिनों से बस एक ही मुद्दा छाया हुआ है मुंबई में और वो है 'माय नेम इज़ ख़ान' का विरोध... पता नहीं कुछ पार्टियां अपनी कैसी मानसिकता और राजनीति का परिचय दे रही है... देश में इतने ज़रूरी मुद्दे हैं... लेकिन घमासान एक ग़ैर ज़रूरी बयान को लेकर मचा हुआ
 
प्रज्ञा
टैग: फिल्म
Feb 11 2010 06:34 PM
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सीधी बात

वैलेंटाइन डे बस कुछ ही क़दमों की दूरी पर है... फिर से कुछ लोग इस दिन देश की संस्कृति के रखवाले बने घूमते नज़र आएंगे... टीवी पर चैट शो आयोजित होंगे... पश्चिमी सभ्यता और बाज़ारवाद की दुहाई देकर अपनी सभ्यता को बचाने के लिए केवल भाषणबाज़ी होगी... कुछ तत्व
 
प्रज्ञा
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दफ्तर की एक शाम

दफ्तर में सीढ़ियां चढ़कर जैसे ही न्यूज़ रूम में कदम रखा, तो निशांत बिसेन और मनीष शांडिल्य पर नज़र पड़ी। मैं दुआ-सलाम कर पाता इससे पहले ही निशांत बोल पड़ें राजीव चलो नीचे से आते हैं। दौड़ती हुई मेरी नज़र घड़ी पर गई, उस वक्त 3 बजने में 10 मिनट देर थी...
 
राजीव कुमार
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कब रुकेगी ये सोची-समझी साज़िश?

इधर एक ख़बर बहुत अधिक देखने-सुनने को मिल रही हैं... और वो है... नवजात शिशुओं का फेंका जाना... ख़बर बनाते वक्त आए दिन ये देखना पड़ता है... कि कभी किसी नवजात को कुत्ते ने नोच खाया, कभी कचरे पर पड़ा मिला, कभी खेत में फेंका मिला... समझ में नहीं आता कि लोग
 
प्रज्ञा
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जय हिन्द

 
राजीव कुमार
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महंगी तो दुनिया हो ही गयी है....

रोज अखबारों में, न्यूज़ चैनलों में, हर मुंह से, हर ओर से एक ही आवाज सुनाई दे रही है महंगाई, महंगाई और महंगाई.... सच भी है... महंगी तो दुनिया हो ही गयी है.... दुनिया महंगी हो गयी हैचीजें पहुँच से दूर हो गयी हैअपना घर अब ख्यालों में बनता है सिर्फभोजन अब
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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ये पति......

आज बात पतियों की... पति-पत्नी का रिश्ता ऐसा रिश्ता है... जिसपर सबसे ज़्यादा व्यंग्य लिखे और पढ़े गए हैं... आज मेरा भी मन हुआ कि मैं भी इस विषय पर हाथ साफ़ ही कर लूं... एक कहावत है- अपना बच्चा और दूसरे की बीवी सबको अच्छी लगती है... अक्सर पति अपनी पत्नी से
 
प्रज्ञा
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आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति

आजकल चैनलों पर एक मुद्दा प्रमुखता से छाया हुआ है... और वो है किशोरों और युवाओं द्वारा की जा रही आत्महत्या का... एक समाचार चैनल ने इस पर स्पेशल प्रोग्राम दिखाया... और मनोवैज्ञानिक को भी बुलाया.... बार-बार बस एक ही बात निकल कर आ रही थी या सबलोग बस एक ही
 
प्रज्ञा
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एक सलाम दीदी और जीजाजी को...

कल माँ के लिए एक कविता लिखी थी... आज एक कविता अपनी दीदी "श्रीमती प्रज्ञा प्रसाद" और अपने जीजाजी "श्री राजीव कुमार" (दोनों सीधी बात के लेखक भी है) के लिए लिखने की इक्छा हो गयी है... (दीदी की शादी जीजाजी के साथ १ फरवरी २००८ को हुई थी)... दीदी अपने आप में
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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माँ....

जीवन में पहली बार मैंने अपनी माँ के लिए कविता लिखी है... माँ एक ऐसा शब्द जिस में पूरा संसार छिपा हुआ है... माँ एक ऐसा शब्द जिसने पूरी श्रृष्टि की रचना की है... मेरी ये कविता मेरी माँ को समर्पित...माँ....मैं एक बार फिर बच्चा होना चाहता हूँतेरी गोद में
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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अंधविश्वास या विश्वास कहां तक मानना सही?

शुक्रवार १५ जनवरी एक अद्भुत खगोलीय घटना का गवाह बना ये संसार... सदी के सबसे लंबे सूर्यग्रहण को लोगों ने उत्साह और उत्सुकता से देखा... वहीं कुछ ऐसे लोग भी थे... जो अपने अंधविश्वास में इतना जकड़े हुए थे... कि छोटे-छोटे बच्चों की चीख भी उनका दिल नहीं पिघला
 
प्रज्ञा
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एक शिकायत...

मैंने इस ब्लॉग पर एक बात गौर की है... जब कोई सही मुद्दा उठाया जाये तो comments सिर्फ 2-3 मिलते है पर जहाँ बात "कानून में संसोधन (५ प्रतिक्रियाएं)" या "समलैंगिकता : मानसिकता वही (५ प्रतिक्रियाएं)" या "प्रेम विवाह (५ प्रतिक्रियाएं)", कल २२ किलो मीटर (५
 
राजीव कुमार
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एक शिकायत...

मैंने इस ब्लॉग पर एक बात गौर की है... जब कोई सही मुद्दा उठाया जाये तो comments सिर्फ 2-3 मिलते है पर जहाँ बात "कानून में संसोधन (५ प्रतिक्रियाएं)" या "समलैंगिकता : मानसिकता वही (५ प्रतिक्रियाएं)" या "प्रेम विवाह (५ प्रतिक्रियाएं)", कल २२ किलो मीटर (५
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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मेरा भारत महान....

बहुत ज्यादा तो नहीं लिखना चाहता क्योंकि कोई फायदा होने वाला भी नहीं, लोग शायद ही पढ़े और अगर पढ़े भी तो शायद ही कोई इस बारे में कोई कदम उठाये. सीधे सीधे अपने भड़ास पर आता हूँ. कल से न्यूज़ चैनल पर एक न्यूज़ देख रहा हूँ. एक पुलिस की समय पर सहायता न होने से
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
Jan 09 2010 05:39 PM
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नया साल मुबारक

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राजीव कुमार
Jan 01 2010 09:30 AM
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Happy New Year

नया साल आ रहा है... २००९ अलविदा कहने को तैयार हो चूका है... बहुत कुछ है जो हमने इस साल पाया और बहुत कुछ खोया भी होगा... कई खुशियों के दिन साथ होंगे तो कई दिनों ने रुलाया भी होगा... हर साल की तरह इस साल ने भी बहुत कुछ सिखाया होगा.... बस आने वाले साल २०१०
 
राजीव कुमार
Jan 01 2010 09:30 AM