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Jeevan ke Rang Mere Tulika ke Sang

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06 Jun 2010
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A special story

( I am unable to do proper translation in Hindi that's why I have to write this article in English.) (मैं हिंदी में उचित अनुवाद करने में असमर्थ हूँ.अतः मुझे ये लेख अंग्रेजी में लिखना पड़ रहा है )Hello FolksToday I'm going to share with you a different
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मोहब्बत-ए-गुलज़ार/ त्रिवेणी-ए-आबाद

कहाँ से शुरू करूँ और कहाँ से ख़त्म....कौन सा किस्सा सुना दूं औ किसे छोड़ दूं ...इसी उधेड़बुन में ये पोस्ट लिखी जायेगी। आज मोहब्बत की बात करते हैं। ना जाने कैसे लोग कहते हैं क़ि एक बार होती हैं हमें तो बहुत बार हुई ....उम्मीद हैं बदस्तूर ये सिलसिला जारी
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वक़्त गुज़र ही जाता हैं

क्या लिखूं ? सुनते आये हैं कि सच को जीना जितना मुश्किल है उस से भी मुश्किल उसको ईमानदारी से बयां करना ..... लेकिन सच बोलने से हमें गुरेज़ नहीं ....हरिश्चंद्र टाइप इंसान तो नहीं लेकिन हाँ! यूँ ही रोज़मर्रा की छोटी - छोटी बातों पर दिन में पंद्रह बार बेवजह
टैग: जीवन
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मुस्कुराने की शर्त पक्की है

परिवर्तन स्रष्टि का नियम है और इन्हें टाला भी नहीं जा सकता । बिना बताये आ जाते हैं बादलों की तरह। किलकारियां कब ठहाके में बदलती है .....और ठहाके कब चिंता में पता ही नहीं चलता....बस यूँ ही उम्र गुज़र जाती है ....और एक दिन जिंदगी ख़त्म ......इंसान के जाने
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"देश प्रेम का कर्त्तव्य निभा दिया मैंने "

देश ने आज़ादी के ६२ वर्ष पूरे कर लिये । हर जगह और हर कोई आजादी का जश्न अपने - अपने तरीका से मना रहा हैं , टेलीविज़न पर इन बीते ६२ वर्षो के विकास, आदमी के नैतिक और चारित्रिक पतन पर सवाल उठाए जा रहे हैं । कुछ गणमान्य व्यक्तियों को बुलाकर चर्चा भी की जाय
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एक मुलाकात डॉ. कुमार विश्वास के साथ

कहते हैं कवि बनने की पहली शर्त इंसान होना हैं। कविता कवि के उन क्षणों के उपलब्धि होती हैं, जब वो अपने आप में नही होता। इसीलिए कवि के चेतनास्तर तक उठे बिना समझी भी नही जा सकती। आज जिनके बारे में बात करने जा रही हूँ, उन्होंने देश में ही नही वरन विदेश म
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चलो कुछ लिख ही देते हैं

मन परेशान है क्यो ? नही पता...हो जाता है कभी-कभी ...... लिखने से थोडा सुकून मिलता है इसलिए लिख लेते हैं। जब खुश होते है तो लिखते है .....जब दुखी होते और जब कन्फ्यूज़ होते है तब भी लिखते है।अच्छा साधन है मन के अंतर्द्वंद को वेब पेज पर छाप दो ....दुनिय
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स्त्री पूजा अब और नहीं

आजकल माहौल बहुत खुशनुमा है बाज़ारों में रौनक है त्योहारों का स्वागत करने को सभी बेताब है, घरों में कीर्तन, मंदिरों में लगातार बजते घंटे , हवन, यज्ञ, जगराते माँ शेरावाली का गुणगान, पंडालों में माँ की भव्य मूर्तिया और उनमें उमड़ी भीड़, इंसान को उसकी
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एक रूहानी रिश्ता - अमृता / इमरोज़

अमृता प्रीतम" एक नाम संवेदना का, जज्बातों का, हालातों का , प्रेम का, तजुर्बे का, गाथाओ का, शायरियों का, कविताओ का, उपन्यासों का, चर्चाओ का, आलोचनाओ का, प्रशंसको का और भी न जाने कितनी .....कही- अनकही, बूझी - अनबूझी, कुछ खामोशी- कभी शोर, कभी शब्द तो कभ