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हिन्दी मैं मस्ती

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07 May 2010
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इक लड़की को हो गया है प्यार !!!

पहले देख कर छुपाती थी वोअबके छुप - छुप कर देखती है वोहवोह दौर था बचपन कायह दौर है जवानी कामन ऊसका सुमनतन ऊसका सुकोमलचहेरा माहताबकभी अपने हाथ से अपनीऊंगलियों को छूती हैतो कभी आईने में देख खुद को;खुद से ही शर्माती हैअब तो शाम का रंग बिरंगी आसमान भीउसे
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मेरी प्रेम कहानी

आज वही बस स्टॉप था, जिसके इस पार हम और उस पार वो खड़ी थीहम भी नज़रें झुकाए खड़े थे और वो भी कुछ शरमाई लग रही थीमेरी सोच एक उलझान में पड़ी थी,बोल ही दूंगा दिल की हर बात आजये हिम्मत काफी देर से दिल के साथ झगड़ रही थीइतने में देखा एक आंटी जी ,हमारे सामने आ
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एक मजेदार कहानी

मेरे 4 दोस्त है उनK नाम Bरेन्द्र, G तेन्द्र, Kलाश और राJन्द्र है। एक दिन हम Uरोप गए। वहां G तेन्द्र का घर था उसK पिताG और भाEसाहब Aटा गए थे वहां हमने अ4 से रोT खाE फिर बाज़ार गए। बाजार से Dनर K लिA मैंने Kला, Bरेन्द्र ने Iस्क्रीम, Kलाश ने पPता और Gतेन्द्र
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एक नाज़ुक सी लड़की

एक नाज़ुक सी लड़कीनर्म सा एक दिल थाशर्म उसका सिंगार थाकर्म मैं ही जीवन थाधर्म मैं मिलता सकून थाएक नाज़ुक सी लड़कीआँखों मैं सपने थेआशाओं के गुल्दास्ते थेसब को खुश रखने के अरमान थेआस्मां को चुहने के इज़हार थेएक नाज़ुक सी लड़कीसच का रास्ता ही अपना थाहर इंसान रब का
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चुटकियाँ

********************************पाकिस्तानी क्रिकेट को करारा झटकासात खिलाडिय़ों को बाहर पटकादेकर इनको बड़ी बुरी सजापीसीबी ने शर्मनाक प्रदर्शन गटका********************************सचिन को मिले भारत रत्नहर कोई कर रहा है प्रयत्नसंसद में भी अब उठी है
Mar 20 2010 10:38 AM
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नव संवत्सर के शुभ अवसर पर शत शत बधाइयाँ.

प्रिय साथियों .......... आज का दिन हम सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, आज ही के दिन हमारा नव संवत्सर प्रारम्भ होता है, प्रभु श्री राम का राज्याभिषेक, सम्राट विक्रमादित्य द्वारा शकों का दमन, आज के दिन स्वामी दयानंद स्वामीजी ने आर्य समाज की स्थापना की थी
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मैं और मिसेज खन्ना

मैं और मिसेज खन्नाअक्सर चाय पीते हैरोजाना शाम कोउस वक़्त भूल जाते हैहर किसी काम कोमौसम बदला वक़्त गुजरापर नहीं बदला हमारा चलनयुही चुसकिया लेते रहे हमएक दिन सहसामेरा बेटा पास आयाचाय के वक़्त हीउसने हमें डरायावह बोला डेडीकल चाय के वक़्तमेरी शादी है आ
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आज़ादी का गीत

हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।चाँदी सोने हीरे मोती से सजती गुड़ियाँ।इनसे आतंकित करने की बीत गई घड़ियाँइनसे सज धज बैठा करते जो हैं कठपुतलेहमने तोड़ अभी फेंकी हैं बेड़ी हथकड़ियाँपरंपरा गत पुरखों की हमने जाग्रत की फिर सेउठा शीश पर रक्खा हमने हिम किरीट
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गद्दी के कद्दू होशियार : टी वी दर्शन आपके स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है

जर्नल आफ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार गद्दी पर बैठ प्रतिदिन प्रत्येक घन्टे टी वी देखने वाले को हृदय की रक्त वाहिनियो के रोगो से मृत्यु का खतरा बढता जाता है। आस्ट्रेलियाई अनुसंधानियो ने ८८०० वयस्को के जीवन शैली का अवलोकन किया और पाया कि टी वी के सामने
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तुम गए तो.....

तुम गए तो गए बस इतना कहकर जातेकब आवोगे तुम हमसे मिलने इतना तो बताते.बोल नहीं सकते तो एक ख़त ही लिख कर छोड़ जातेतुम गए तो गए बस इतना कहकर जाते.कब तक करूँगा तुम्हारा दीदार ये समझ में नहीं आ रहाअब तो बस तुम्हारे आने काही इन्तेजार रहाअगर तुम्हारी कोई मज़बूरी
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अन्धयारी गलियां

काँटों पैर चलने वाली हूँ फूलो की सय्या क्या जानू जब अपनों को ही भूल गई मैं भूल भुलायिया क्या जानू ये धरती मेरा बिस्तर है और अम्बर मेरी चादर है मैं खेल रही तूफानों से मेरा अपना जीवन पतझड़ है टुकड़ों पर पलने वाली हूँ मैं दुध मलाई क्या जानू काँटों पैर चल
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गज़ब हो गया

चाँदनी रात मे चाँद के सामने , चेहरे से पर्दा हटाना गज़ब हो गया. चाँदनी छुप गयी चाँद शर्मा गया , आप का मुस्कुराना गज़ब हो गया . दिल की धडकने अब तेज़ होने लगी, रात आंखो मे कांटे चुभोने लगी . इस पुरी रात मे बातोंही बातों मे, रूठ जाना आप का गज़ब हो गया. अपन
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क्या ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर है?

श्री पुरुशोत्तामानागेश ओके ने कई बार हिन्दू धर्म की दूसरे धर्मों पर श्रेष्ठता प्रमाणित करने का प्रयास किया है। साथ ही, यह तथ्य भी प्रमाणित करने का प्रयास किया है, कि भारतीय इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है, व उसमें से कई महत्वपूर्ण अंश का
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बिना पेंदी का लोटा

किया बहुत विश्वासघात तुमने जनता के साथ, आश्वासन देकर दिखलाया अपना डूंडा हाथ, अपना डूंडा हाथ दिखाया और कहा हम लूले गद्दी पाकर तुमने अपने सारे वादे भूले, सारे वादे भूल गये बन बैठे तुम हिरणाक्ष किये दलाली रिश्वत खोरी मिटा दिये सब साक्ष मिटा दिये सब साक्
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हमारे नेताओ की परिभाषा

आज के नेता साँपनाथ, कल आयेंगे नागनाथ कुर्सी की बाँबीयों में बस साँप ही रहे इन्साँ कहे न इनको, बस नाग ही कहे ''नेता बुझा रहे हैं, खुशहाली का दिया इनके गरल को देश ने ने है कंठ तक पिया कल रात लगा फांसी इक वेश्या मरी किसी मनचले ने उसको नेता था कह दिया''
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ख़ामोशी

ख़ामोशी को सुनकर देखो , इसकी भी जुबान होती है लम्हा लम्हा तनहा - सी , जाने कब कहाँ होती है ख़ामोशी के आँगन में , तन्हैयाँ जवान होती है , तन्हाइयों के साए में , सारी खुशियाँ फंना होती है , ख़ामोशी लगती सपने सी , आती है और जाती है , पीर रहती है जब तक ये ,
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ज़िन्दगी

बहुत अजीब है ये ज़िन्दगी कब किस मोड़ पे आकार रुक जाती है बगैर कोई रुकावट की आगाह किए लड़खड़ाते…सँभालते अपने आप को समझाते कि ये अनुभव भी हमे कुछ न कुछ तो निश्चित रूप से सिखलाएगा ही ह्रदय को निचोडती है कुछ पल जब खालीपन डट कर बैठ जाता है शुन्य को केन्द्र
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दोस्त तुमको मेरी कसम

दोस्ती होती नही भूल जाने के लिए दोस्ती होती नही बिछर जाने के लिए दोस्ती करके खुश रहोगे इतना वक्त नही मिलेगा आशु बहाने के लिए जिन्दगी मैं कई रिश्ते हे जिनको हम निभाते हे मेरी नजर मैं सबसे अच्छा रिश्ता हे दोस्ती का सब भूल जाना ऐ ......... .............
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कंप्यूटर प्रयोक्ताओं के लिए नेत्र देखभाल

सूचना प्रोद्योगिकी के इस युग में कम्प्युटर तथा सूचना तकनीकी से जुड़े अधिकतर लोग लगातार कई घंटों तक कम्युटर पर कार्य करते रहते हैं, बहुत एसे भी हैं जो शौकिया या व्यसनी तौर पर ही सही घंटों कम्प्युटर के सामने बैठे रहते हैं और बड़ी चाव से मॉनिटर को निहारत
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हाय मेरी किस्मत

स्वर्ग और नरक के बीच में लटक गया क्या करू अब मै जमी पर अटक गया निकला था मैं स्वर्ग जाने को मगर जाने कैसे रास्ता मैं भटक गया किए थे कई पुण्य पिछले जन्म मे मैंने उनके फल से स्वर्ग का टिकट कट गया जाने कौनसा पाप बीच मे आ गया रस्ते मे ही मेरा भेजा सटक गया
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बाल दिवस पर

शिशुओं की दीजे संस्कार। भर दो इनमें सुन्दर विचार।। इनके मन सत्पथ पर मोड़ो, सद्भावों को इनसे जोड़ो। इनमें न भेद को आने दो, मन में न ईष्र्या लाने दो। भर दो स्नेह इनमें अपार। शिशुओं को दीजे संस्कार।। नित इन्हें सुभाषित पढ़वाओ, वीरों की गाथा सुनवाओ। हो म
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कलयुग में ईश्वर की वन्दना

हे प्रभु आनन्दमय हमको यही उपहार दो, सिर्फ मैं जीवित रहूँ, तुम और सबको मार दो। भक्त हूँ मैं अपका अर्जी प्रभु सुन लीजिए, और जितनी अर्जियाँॅ हो फाड उनको दीजिए। सी डी लगाकर मैं प्रभु भजन आपके कर रहा, ब्रत भी हूँ आजकल केवल फलों से पेट भर रहा। पुष्प, चन्दन
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हुआ है करम मुझ पे जब से किसी का.....

अजब हाल है मेरे दिल की खुशी का, हुआ है करम मुझ पे जब से किसी का..... मोहब्बत मेरी यह दुआ मांगती है, तेरे साथ तये हो सफर जिंदगी का.... न दो मुझ को पैगामे तर्क-ऐ-ताल्लुक, कुछ एहसास करलो मेरी बेबसी का... मेरा दिल न तोडो ज़रा इतना सोचो, मुनासीब नही तोड़न
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जीवन का आधार

जब एक प्रेम का धागा जुड़ता है, दिल का कमल तब ही खिलता है देखता है खुदा भी आसमान से जमीन पर जब एक दिल दूसरे से बेपनाहा मोहब्बत करता है सुलगने लगता है तब धरती का सीना भी जब कोई आसमान बन के बाहो में पिघलता है लिखी जाती है तब एक दस्तान-ए -मोहब्बत तब कही
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गजल

आप लोगों की दी हुई, मोहब्बत पर इठलाता हूँ। मैं इतने दिलों में रहता हूँ, कि घर का पता भूल जाता हूँ।। नहीं हुनर किसी में मेरे जैसा, मैं लोगों को ऊंगलियों पर नचाता हूँ।। कुछ लोग मुझे फरिश्ता कहते हैं, मैं नफरत के स्कूलों में मोहब्बत पढ़ाता हूँ।। खुशियों
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गीत

ह्रदय योग कर दे , हमें मीत कर दे चलो कोई ऐसा , लिखें गीत , गायें। सूखी पडी है , नहर नेह रस की पतित पावनी गीत गंगा बहायें ॥ दृग्वृत पे मन के दिवाकर जी डूबे उचटते हुए प्रीत बंधन हैं ऊबे । कुसुम चाव के , घाव खाए पड़े हैं गीत संजीवनी कोई इनको सुनाएँ ॥ ह्र
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तेरे बिन

तनहा तनहा रात गुजारी, तनहा तनहा दिन खयालो में ही खोया रहता हूँ, सारा सारा दिन नहीं सह सकता विरह की पीडा हर पल छिन अब तो आजा ओ हरजाई, नहीं लगता दिल तेरे बिन http://feeds.feedburner.com/masthindi
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हिंदू संस्कृतिका प्रतीक `नमस्कार'

ईश्वरके दर्शन करते समय अथवा ज्येष्ठ या सम्माननीय व्यक्तिसे मिलनेपर हमारे हाथ अनायास ही जुड जाते हैं । हिंदू मनपर अंकित एक सात्त्विक संस्कार है `नमस्कार' । भक्तिभाव, प्रेम, आदर, लीनता जैसे दैवीगुणोंको व्यक्त करनेवाली व ईश्वरीय शक्ति प्रदान करनेवाली यह
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देवालयमें दर्शनकी योग्‍य पद्धति

१ . देवालयमें दर्शन कैसे करें ? `देवालय' अर्थात् जहां भगवानका साक्षात् वास है । दर्शनार्थी देवालयमें इस श्रद्धासे जाते हैं कि, वहां उनकी प्रार्थना भगवानके चरणोंमें अर्पित होती है और उन्हें मन:शांति अनुभव होती है २ . देवालयमें दर्शनकी योग्य पद्धति २।१
Oct 23 2009 06:37 PM
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मेरे टूटे हुए दिल को.....

मेरे टूटे हुए दिल को , सहारा कोन देगा मेरी तूफ़ान में कश्ती , किनारा कोन देगा यह केसे मोड़ पे लाइ हें , मुजको जिन्दिगानी अधूरी सी लिखी गयी हँ , क्यूँ मेरी कहानी हँ अब किस राह पे चलना , इशारा कोन देगा मेरे टूटे हुए दिल को . सहारा कौन देगा मैं हूँ और सा
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पांच पर्वों का प्रतीक है दिवाली

त्योहार या उत्सव हमारे सुख और हर्षोल्लास के प्रतीक है जो परिस्थिति के अनुसार अपने रंग-रुप और आकार में भिन्न होते हैं। त्योहार मनाने के विधि-विधान भी भिन्न हो सकते है किंतु इनका अभिप्राय आनंद प्राप्ति या किसी विशिष्ट आस्था का संरक्षण होता है। सभी त्यो
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दीवाली (दीपावली) का सार और त्यौहार

चौदह वर्षका वनवास समाप्त कर जब श्रीरामप्रभु अयोध्या लौटे , तब प्रजाने दीपोत्सव मनाया । तबसे दीपावली उत्सव मनाया जाता है । दीपावली शब्द दीप आवली ( पंक्ति , कतार ) इस प्रकार बना है । इसका अर्थ है , दीपोंकी पंक्ति अथवा कतार । दीपावलीके दिन सर्वत्र दीप ल
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पाँच दिनों का त्यौहार

चम चम करती आ ई दिवाली घर घर दीपक जलते हैं द्वार द्वार सजी रंगोली रंग अनेक मन हरते हैं उठती रसोई से सुगंध मनमोहक लड्डू बर्फी बालूसाही कितने पकवान कितनी मिठाई फुलझडी की तड तड संग किलकारियां फुवारों के संग चकरियां प्यारियां वो देखो बदमाश हरा बम्ब लाया क
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धनतेरस से जुड़ी रोचक कथा

आधुनिक युग की तेजी से बदलती जीवन शैली में भी धनतेरस की परम्परा कायम है। समाज के सभी वर्गों के लोग कई महत्वपूर्ण चीजों की खरीदारी के लिए पूरे साल इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं। पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक कृष्ण की त्रयोदशी के दिन धन्वतरि त
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बेटियाँ...............

बोए जाते है बेटे , उग जाती है बेटियाँ . खाद पानी बेटो को , और लहलहाती है बेटियाँ . एवरेस्ट की उचाईयों तक , धकेले जाते है बेटे . और चढ़ जाती है बेटियाँ . रुलाते है बेटे ., और रोती है बेटियाँ . कई तरह गिरते है बेटे , और संभल लेती है बेटियाँ . सुख के स्
Oct 14 2009 07:40 PM
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करवा-चौथ व्रत कथा

एक समय की बात है। पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर चले गए। किंही कारणों से वे वहीं रूक गये। उधर पांडवों पर गहन संकट आ पड़ा। शोकाकुल, चिंतित द्रौपदी ने श्रीकृष्ण का ध्यान किया। भगवान के दर्शन होने पर अपने कष्टों के निवारण हेतु उपाय पूछा
Oct 14 2009 07:40 PM
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दीवाली में दीवाला

देखो देखो दिवाली आयी रंग बिरंगी रोशनी लाई ये त्यौहार है खुशियो वाला महा लक्ष्मी के पूजन वाला आओ सब मिली खुशी मनाये आओ जलाये दीपों की माला लक्ष्मी जी की पूजा करे हो जाए सब जगह उजाला लेकिन महंगाई के आलम में तो सबका हुआ है हाल बेहाला हम तेल के दीप को तर
Oct 14 2009 07:40 PM
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" गांधीजी को किया कैद कागज़ पर "---- हमसे जुडा एक सच |

गांधीजी "को मारनेवाले हम लोग जब उनकी तारीफ करते है ...तो बड़ा अजीब लगता है , गाँधी की तस्वीर को चाहते है हम, मगर उनके सिद्धांतो को भूल गए है ....और इसी लिए कहेता हु मै की , " गाँधी को मारनेवाले हम लोग ही है "..अगर गाँधी के सिद्धांतो को भूल जाते है हम
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मंज़र यादो का

किसीको गम ने मारा , किसीको तक़दीर ने मारा , हमको तेरी तस्वीर ने मारा | क्या हमने पाया , क्या तुमने पाया ये खेल है ...... मिलके बिछड़ ने का ........ आओ इस वीराने में बैठकर चंद बूंद गिराकर अश्को के बुनले मंज़र यादों का | किए थे कुछ हमने वादे , किए थे क
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