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आवाजें - बेखौफ गूंज़ती हुई

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31 Dec 2009
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हबीब जी से मेरी पहली और आखिरी मुलाक़ात

हिन्दी समय कार्यक्रम चल रहा था, और मशहूर रंगकर्मी और निर्देशक हबीब तनवीर जी के नाटक “चरणदास चोर” देखने के लिए भीड़ लगी हुई थी| मैं हमेशा की तरह कार्यक्रम का फिल्मांकन कर रहा था| ज्यों ही कार्क्रम ख़त्म हुआ सारी भीड़ बस हबीब जी क
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भाषा, संस्कृति और अपनापन……

हमारे देश के विद्वान् लगातार इस बात पर ज़ोर देते रहते हैं कि हम हिन्दुस्तानी होकर शायद अपनी भाषा हिन्दी को ही भूल गए हैं| हम में दूसरी भाषाओं को आपनाने की होड़ सी लग गयी है| जनवरी माह में, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर
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इन्हे शब्दों की ज़रूरत नहीं

आज मित्र नरेश से मेल द्वारा प्राप्त हुए कुछ चित्र आपके समक्ष रख रहा हूँ| इन्हे शब्दों की ज़रूरत नहीं है, बस तस्वीरें ही सब कह जाती हैं| और अगर ज़रूरत है तो बस आपके सहयोग की| Posted in Society
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ये क्या नशा है?

ये क्या नशा है, मोहब्बत का लगता है शायद दिलों में जूनून है, धड़कन का लगता है शायद|| उमंगें खिल रही हैं, बाग़ में जैसे फूल कोई अरमान जग रहे हैं, है रात जैसे सोयी सोयी तनहाई इस दिल की खोई सी लगती है शायद ये क्या नशा है मोहब्बत का लगता है शायद
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आस्था में अंधा होता हमारा समाज

यह बात अक्सर सुनने में आती है कि हमारे देश में अमीर और भी अमीर होता जा रहा है और गरीब और भी गरीब| लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि अब हमारे भगवान् लोगों से भी ज्यादा अमीर होते जा रहे हैं| हाल ही में इंडिया टुडे पत्रिका के हिंदी अंक में प्रकाश
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पहली और आखिरी मुलाक़ात – हिमाचल मित्र

एक लम्बे अरसे बाद आज मैं आवाजें पर लौटा हूँ और इस बिलम्ब के लिए आवाजें के पाठकों से माफ़ी चाहूँगा| हबीब तनवीर जी पर लिखे और हिमाचल मित्र पत्रिका के शरद अंक में छपे अपने एक लेख को आपके समक्ष रख रहा हूँ शायद आपको अच्छा लगे… (लेख को ठीक से पढ़
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और दुल्हे बिकने लगे….

अभी वह एक विश्वविद्यालय में केवल एक छात्र है, यह भी नहीं पता कि पास भी हो पायेगा या नहीं, और हो भी गया तो एक डिग्री सब कुछ नहीं होती| डिग्री मिल जाने से वह कमाने नहीं लग जायेगा| हजारों लोग डिग्रियां लिए खड़े हैं, लम्बी कतारें लगी हैं मानो रा
टैग: Society
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उसकी यादों में……..

आज एक नई कसक दिल में पैदा हुई है ख़ुशी मेरे लबों पर नज़र आई है हाँ जानता हूँ मुझे प्यार है उस से वो ना भी मिले तो क्या रुसवाई है? दो पल ख़ुशी के बिताता हूँ उस संग ख्वाबों में मेरे अब वो ही समायी है नम आँखें भी मेरी अब यही कहती हैं वो ना भी मिले तो क्या
टैग: poetry
Aug 20 2009 12:32 PM
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Song of Youth

Song of Youth Me and My Nation – India As a young citizen of India, armed with technology, knowledge and love for my nation, I realize, small aim is a crime. I will work and sweat for a great vision, the vision of transforming India into a developing
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