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10 May 2010
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" माँ "

माँ ,एक शब्द ,छिपा है जिसमे ,एक अनोखा संसार !माँ ,एक शब्द ,आँचल में जिसकी ,सुकून है सारे जहाँ का !माँ ,एक शब्द ,गहराई है जिसकी ,अथाह सागर के समान !माँ ,एक शब्द ,सबसे है न्यारा ,सबसे प्यारा ये शब्द ! – सोनल पंवार
 
sonal
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" पापा कब आओगे ?"

अगस्त 2009 मेरी ज़िंदगी का सबसे बुरा दिन था क्योंकि उस दिन मैंने अपने पापा को हमेशा के लिए खो दिया ! पापा अब कभी नहीं आयेंगे लेकिन फिर भी मुझे हमेशा पापा का इंतज़ार रहेगा ! शायद ये इंतज़ार कभी ख़त्म नहीं होगा ! ) “ पापा कब आओगे ? “ पापा कब आओगे ? जान
 
sonal
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पापा का प्यार

सूर्य की किरणों-सा प्रकीर्णित , पावन धरती-सा सशक्त , बहते पानी-सा निर्मल , माँ की ममता-सा कोमल , मंदिर में बसे ईश्वर-सा दानी , खुशियों से भरे मन-सा धानी , सीपी में मोती-सा अनमोल , गागर में सागर-सा अपार , कभी है सख्त, कभी है संदल , हमारे लिए हमारे ' प
 
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' पिता '

फूलों का खिलना , खिलकर महकना , हवाओं का चलना , फिज़ाओं का रंग बदलना , चिड़ियों का चहकना , भंवरों का गुनगुनाना , सागर की लहरों का हवाओं के साथ हिलोरें खाना , जैसे ये सब देन है इस सृष्टि के परमपिता की , वैसे ही हमारी ज़िन्दगी , ज़िन्दगी का हर एक पल , हमा
 
sonal
Dec 29 2009 12:01 PM
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FOR MY FATHER

बहती नदिया की धारा को जैसे अपने भीतर समाया है सागर ने , अपनों के प्यार और सम्मान को वैसे अपने भीतर संजोया है आपने ! आपके आदर्शों की परछाई तले पले-बढे है हम सभी , इन आदर्शों को साथ लिए जीवन जीना सिखाया है आपने ! आसमान की तरह ऊंची है आपके व्यक्तित्व की
 
sonal
Dec 29 2009 12:01 PM
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Maa

माँ , एक शब्द , छिपा है जिसमे , एक अनोखा संसार ! माँ , एक शब्द , आँचल में जिसकी , सुकून है सारे जहाँ का ! माँ , एक शब्द , गहराई है जिसकी , अथाह सागर के समान ! माँ , एक शब्द , सबसे है न्यारा , सबसे प्यारा ये शब्द ! - सोनल पंवार
 
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Dec 29 2009 12:01 PM
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मेरे सपनों का भारत

मेरे सपनों का भारत ‘ मेरे सपनों का भारत है ऐसा , सारे जहाँ से न्यारा न है कोई इस जैसा ! गीता, कुरान, गुरुग्रंथ या बाइबिल हो , सभी ग्रंथों का यहाँ आदर समान हो ! राम, रहीम, गुरुनानक या ईसा हो , सभी धर्मों का एक ही धर्मगुरु हो ! ऊंच-नीच का भेद न हो कोई
 
sonal
Dec 29 2009 12:01 PM
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विदाई

विदाई " क्या सुनाऊ मैं तुम्हें ये दास्ताँ अपनी , यह है मेरी जुबानी एक कहानी अपनी ! मैं एक कली थी , जो एक बाग़ में खिली थी ! मेरे चेहरे पर एक अधखिली मुस्कान थी , जिसकी गवाह ये धरती और ये फिजां थी ! बाग़ के माली ने बड़े प्यार से संवारा था मुझे , आंधी औ
 
sonal
Dec 29 2009 12:01 PM
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" माँ एक अनमोल सौगात "

माँ एक अनमोल सौगात ” मेरे जीवन के बिखरे मोती की माला है माँ , मेरी आंखों के दर्पण की निर्मल ज्योति है माँ , तपती धूप में ममता की शीतल छाँव है माँ , दुःख के कटु क्षणों में एक मधुर मुस्कान है माँ , मेरे जीवन के इस गागर में प्यार का सागर है माँ , पिता ह
 
sonal
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".......आतंकवाद क्यूँ .......?"

आतंकवाद क्यूँ ……? “ है आतंक-ही-आतंक फैला इस जहान में , है दर्द-ही-दर्द फैला इस जहान में ! आतंक जो फैला रहा वो भी एक इंसान है , आतंक के साए में जो पल रहा वो भी एक इंसान है , तो एक इंसान दूसरे इंसान का दुश्मन क्यूँ है ? इस प्यारे-से जहान में ये आतंकवाद
 
sonal
Dec 29 2009 12:01 PM
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" बेटियां "

बेटियां “ कोमल-सी टहनी होती है किसी वृक्ष की , मगर इरादा तने-सा सख्त रखती है बेटियां ! मुस्कुराहट से अपनी महकाती है घर को , ऐसी प्यार भरी पाती होती है बेटियां ! ख़ुशी और गम का हर रिश्ता निभाती है वो , रिश्तों को एक माला में पिरोती है बेटियां ! आज भी
 
sonal
Dec 29 2009 12:01 PM
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' सूनी कलाई '

" सूनी कलाई "एक हसरत थीकि मेरा एक भाई होता ,जिसकी सूनी कलाई मेंमेरा प्यार होता !लेकिन हसरतदिल की दिल में रह गई ,उसकी सूनी कलाई भीसूनी रह गई !- सोनल पंवार
 
sonal
Aug 04 2009 01:11 AM
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' सोनपरी और मुस्कान ' (A Fairytale)

” सोनपरी और मुस्कान ” (बाल कविता )दूर कहीं एक गाँव मेंरहती थी ‘ मुस्कान ‘ ,माँ की थी वो राजदुलारी ,और पिता की थी वो जान !चिडियां-सी चहकती ,फूलों-सी महकती ,चेहरे पे उसकेसदा रहती थी मुस्कान !दादी से अपनी वोसुनती थी परियों की कहानियां !नेकी और ईमानदारी का
 
sonal
Aug 04 2009 01:03 AM
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' गीत '

“ गीत ”ज़िंदगी एक गीत है ,इसे प्यार से गुनगुना लो !ग़मों के बादल भी छाए ,तो ज़रा-सा मुस्कुरा लो !साँसों की सरगम पे ,एक नया गीत तुम बना लो !अगर तुम्हें मिले न प्रीत कोई ,तो इसे तुम मन का मीत बना लो !ज़िंदगी के कोरे पन्नों पर ,एक मधुर संगीत सजा लो !आशा की
 
sonal
Jul 25 2009 11:46 PM
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' माता-पिता'

[ “माता-पिता” कविता मेरी वो पहली कविता है , जिसे मैंने अपने पापा-मम्मी को उनकी marriage anniversary पर तोहफे के रूप में दी थी !आशा करती हूँ कि आप सभी को मेरी यह कविता अच्छी लगेगी ! ] ” माता-पिता ”माता-पिता ,ईश्वर की वो सौगात है ,जो हमारे जीवन की अमृतधार
 
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' सावन '

सावन ' बारिश कि बूंदों से , भीगा हुआ सावन है आया ! कलियों के चेहरों पर , खिलता हुआ यौवन है छाया ! नदियों और तालाबों में , उमंगों से भरा जीवन है आया ! घनघोर घटाएँ ऐसी है बरसी , इठलाता हुआ सावन है आया ! धरती की प्यास बुझाकर , ऐसा निर्मल जल है आया ! मेघ
 
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' FATHER '

‘FATHER‘F means that the First person who gives us million things.A means Anxious for us.T means that he Teaches us a lesson of truth & honesty.H means that he Has good ideals.E means that he Exhort us to make our good life.R means Right & right
 
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माँ का दिल

माँ का दिल “ माँ का दिल क्या कहूं मैं इसे ? कोमल-सी ममता या प्यार का एक दरिया , ममता की छाँव या प्यारी-सी एक दुनिया , स्नेह का भंडार या एक मृदुल संसार , भोली-सी सूरत या प्यार की एक मूरत , क्षमा का दर्पण या फिर भगवान का एक वरदान ! माँ का दिल क्या कहूं
 
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ज्ञानोदय

ईश्वर ने जब सृष्टि की रचना की तब जाति, धर्म, ऊंच-नीच इन सबसे परे उस ईश्वर ने एक मनुष्य को उसका अस्तित्त्व दिया ! ये जाति, धर्म सब कुछ हमने बनाये है ! इसलिए मेरा ये मानना है कि केवल जप, चिंतन, ध्यान या साधना से ज्ञानोदय सम्भव नहीं है ! सही मायने में ह
 
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' स्वर्ग '

स्वर्ग ' गर आसमां मुझे मिल जाए , तो इस जहाँ को मैं तारों से रोशन कर दूँ ! गर धरा मुझे मिल जाए , तो इस बंजर धरा को मैं गुलज़ार कर दूँ ! गर सागर की गहराई मुझे मिल जाए , तो मानव का मानव के प्रति प्यार गहरा कर दूँ ! गर पंछी की उड़ान मुझे मिल जाए , तो इस स
 
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' प्रिंछी ' एक परी की कहानी

प्रिंछी ‘ एक परी की कहानी परियों की थी एक शहज़ादी , नाम था उसका ‘ प्रिंछी ‘ ! खुशियों का था आशियाना उसका , ग़मों से थी वो अनजानी ! खिलते फूलों-सी मुस्कान थी उसकी , महकती थी जिससे बगिया सुहानी ! हँसते-खेलते बीत रही थी उसकी , खुशियों से भरी ज़िंदगानी ! ए
 
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' बचपन की वो मीठी यादें '

बचपन की वो मीठी यादें“ बचपन की वो मीठी यादें , वो नन्हीं-सी अठखेलियां , याद आती है बहुत , वो भोली-सी नादानियां ! वो माँ का आँचल और पापा की अंगुली थामें , चलना, गिरना और फिर संभलना ! वो नन्हीं हथेलियों से अपने चेहरे को छुपाना , फिर उन्हीं हथेलियों से
 
sonal
Jul 07 2009 06:21 AM