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व्यंग्य

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17 Jun 2010
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लेखन क्षमता का अदृभुत कमाल

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं लेकिन विकट प्रतिभाएँ गिनी-चुनी हैं। एक विकट प्रतिभा का अभी कुछ ही समय पहले आविर्भाव हुआ है। आई.पी.एल,. जिसका फुल-फार्म इंडियन पिसाई लीग, इंडियन पैसा लीग, इंडियन पापी लीग आदि-आदि किया जाकर अब भी
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नुक्कड़ नाटक दास्तान-ए-गैसकांड का एंडरसन प्रसंग

जादूगर - लड़के! सात समुन्दर पार जाएगा ? जमूरा - पासपोर्ट नहीं है! जादूगर - फिकर नहीं! जमूरा - तो ठीक है उस्ताद, मगर काहे के वास्ते! जादूगर - पकड़ लाने को! जमूरा - किसको ? जादूगर - एंडरसन को ! जमूरा - एंडरसन कौन ? जादूगर - बहुराष्ट्रीय कम्पनी का मालि
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मालामाल करने की चिरौरियाँ

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// वैसे तो हमारे खानदान में कभी किसी को कोई ईनाम-इकराम नहीं मिला, किसी की कोई लॉटरी नहीं लगी, किसी ने विरसे में हमारे लिए धनदौलत की कोई पोटली नहीं छोड़ी, मगर जबसे मैंने पत्राचार और ब्लॉगिंग के लिए इन्टरनेट का इस्तेमाल तेज़ किया है,
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ब्लॉगिंग में ठलुआते हुए एक साल

//प्रमोद ताम्बट// ब्लॉगिंग में ठलुआते हुए आज हमें एक साल पूरा हो गया। यू तो इसमें घुसने की जद्दोजहद हम 15 मई 2009 से भी पहले कई महीनों से कर रहे थे लेकिन कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं में इसके चर्चे सुन-सुनकर दिमाग पर एक आतंक सा
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व्यंग्य-संतई का संभावनापूर्ण रास्ता

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// इन दिनों झूर के संत बनने का मन कर रहा है। क्या मजे है संतों के! बड़े-बड़े वातानुकूलित आश्रम, बड़ी-बड़ी लक्झरी गाड़ियाँ, धन-दौलत, सुख-समृद्धि, आनंद-मंगल सभी कुछ! सबसे बड़ी बात दर्जनों भक्तिनों का प्रेम-भक्तिभाव, ऐसा स्वर्णिम अवसर भला
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माया के नोटों की माला की माया

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट // बहन मायावती ने नोटों की माला क्या पहनी भाइयों के पेट में दर्द होने लगा। इस देश में यहीं दिक्कत है, बहनें कुछ करें तो भाइयों को हज़म ही नहीं होता। तैतीस प्रतिशत् आरक्षण के मुद्दे पर हम देश भर में भाइयों का हड़बोंग देख ही चुके हैं।
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1 अप्रैल 2010 को समय 0000 आवर्स से महँगाई खत्म

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// 31 मार्च 2010 समय 2400 आवर्स, कमाल ही हो गया। सरकार ने महँगाई बढ़ाने वाले तमाम बदमाशों को बुलाकर सीधे-सीधे कह दिया कि देखो अगर तुमने फौरन से पेश्तर हमारा हुक्म मानते हुए महँगाई खत्म नहीं की तो हर एक को चुन-चुनकर जेल में डाल दिया
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अपहरण नारी मुक्ति आन्दोलन का

//व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// अन्तर्राष्ट्रीय नारी मुक्ति आन्दोलन का प्रतीक-अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस आठ मार्च फिर आ गया। मेहनतकश, कामकाज़ी महिलाओं के इस ऐतिहासिक नारी मुक्ति आन्दोलन का बहुत पहले ही उन विदूषी नारियों द्वारा अपहरण किया जा चुका है जिनको खुद
Mar 08 2010 06:37 AM
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टुन्न होकर गरियाने का पर्व

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट लो फिर चन्दा खाने का त्यौहार आ गया। जी हाँ, होली को हमने हमेशा सामूहिक रूप से चन्दा खाने के त्यौहार के रूप में ही देखा है। बचपन में मोहल्ले के सारे चन्दा खाऊ इकट्ठा होकर घर-घर जाकर खाने लायक चन्दा इकट्ठा करते और फिर बाकायदा बजट
Mar 02 2010 08:27 PM
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उल्लू के पट्ठों बी.टी. बैगन खाते हो या नहीं ?

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट मास्टर जी बेहद गुस्से में थे। देश भर में घूम-घूमकर सबको डाँटते फिर रहे थे- तुम्हारे बाप ने कभी खाया है बैगन! खाया हो तो जानो कि बी.टी. बैगन का स्वाद क्या होता है। पागल हो तुम सब के सब, दिमाग का इलाज कराओ अपने। मेरी! मेरी नीयत पर शक
Feb 17 2010 08:44 PM
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मुम्बई का डॉन कौन ?

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट च्याइला! अपून एक-एक के कान के नीचे बजाएगा, कोई भंकस नहीं मँगता है। हिन्दी साइडर लोग को वार्निंग करके बोलता है कि इधर हँसने का तो मराठी में, रोने का तो मराठी में, गाना गाने का, खाना खाने का, सब मराठी में। कोई भी महाराष्ट्र के बाहेर
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क्रिकेट की मण्डी में कौन आएगा बिकने !

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट अब जाकर मेरे सामने सब्ज़ियों-भाजियों का दयनीय पहलू उद्घाटित हुआ है। सब्ज़ी मण्डी की खुली नीलामबोली में दलाल आढ़तियों द्वारा जब कभी भटे-टमाटरों की बोली नहीं लगाई जाती तो उनके नाज़ुक दिलों पर क्या गुजरती होगी, मुझे अब समझ में आया है, जब
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चेन खिच गई

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नर,नारायण…नारायण…नारायण…

// व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट // उस सज्जन पुरुष को लंपट और औरतबाज मानने के लिए तैयार नहीं है चाहे कितनी भी “बिना बाप की औलादें” आकर उसे अपना नाज़ायज़ बाप घोषित करें। चाहे कोई हथेली पर अंगार रखकर कहे या पूरा का पूरा अग्नि में खड़ा होकर मुनादी करे कि
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पंखों की नेमत और उड़ने की कला

व्यंग्य- प्रमोद ताम्बट कुछ कीडे़ होते हैं, उड़ने की कला का सही इस्तेमाल ही नहीं जानते। यूँ उड़ते हैं मानों आँख पर पट्टी बाँध रखी हो। उड़ते हैं, यहाँ टकराते हैं, उड़ते हैं, वहाँ टकराते हैं। इस टकराया-टकराई में मुमकिन है अपना सिर या कि हाथ-पैर भी तुड़ा बैठत
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आओ हम भी करें जलवायु परिवर्तन पर चिंता

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट // मालदीव वालों ने समुद्र की गहराई में और नेपाल वालों ने एवरेस्ट की चोटी पर बैठकर जलवायु परिवर्तन के बारे में सोच -विचार कर लिया, तो हम क्यों पीछे रहने वाले थे। देश का साम्प्रदायिक तापमान बढ़ाने में माहिर गुजरात के ‘मुख्यमंत्री’
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कविता : हमारा सोचना चन्द लमहों में फिजूल हो गया

कविता : हमारा सोचना चन्द लमहों में फिजूल हो गया प्रमोद ताम्बट सोचा था, रासायनिक युद्ध का यह परीक्षण उन्हें बहुत महंगा पडे़गा भोपाल, उठ खड़ा होगा और लडे़गा हमारा सोचना चन्द लमहों में फिजूल हो गया जब सारा शहर मुआवजा और अन्तरिम राहत में खो गया। सोचा था,
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कविता - इस शहर का नाम भोपाल है….प्रमोद ताम्बट

इस शहर का नाम भोपाल है प्रमोद ताम्बट भोपाल है भोपाल है इस शहर का नाम भोपाल है। सोई पड़ी थी नींद में गहरी दुनिया सारी क़ातिल गैस ने भोली-भाली जनता मारी, जनता मारी, जनता मारी किसने बिछाया जाल रे, भोपाल है भोपाल है इस शहर का नाम भोपाल है। इस भोपाल शहर की
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डेंगू परिवार जाली के उस पार

प्रमोद ताम्बट दूसरे प्रहर में अचानक मेरी नींद किसी के पुकारने की आवाज से खुली तो देखा कि खिड़की की मच्छर जाली पर एक मच्छर परिवार बदहवास सा मुझे पुकार रहा है-ताम्बट साहब, ओ ताम्बट साहब ! मैंने झल्लाते हुए पूछा - क्या है ! क्यों इतनी रात को नींद खराब कर
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लोकतंत्र की बहती गंगा में लगालो डुबकी

प्रमोद ताम्बट गुज़रा हुआ ज़माना होता तो आज़ादी आंदोलन की नैतिकता के खुमार में डूबी हुई राष्ट्रभक्त नेताओं की राष्ट्रभक्त पत्नियाँ मधु कोड़ा को जी भर कोसतीं, थू-थू करतीं, भर्त्सना-आलोचना और जो कुछ-कुछ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अन्तर्गत किया जा सकता था क
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मीठे-मीठे लोगों की कड़वी दास्तान

प्रमोद ताम्बट इन दिनों लोग बेहिसाब मीठे होने लग पड़े है। पैदाइश से ही गपा-गप मीठा खाना भारतीयों की वह छिछोरी आदत होती है, जिसे छोड़ने के लिए कहे जाने पर वे आगबबूला होकर किसी के भी प्राण ले सकते हैं। बात-बात में मिठाई खाने का बहाना ढूँढ निकालना और किलो-
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आओ पब्लिक को सभ्य बनाने में जुट जाएँ

प्रमोद ताम्बट सुना हैं कि मजदूर-किसानों के साम्यवादी मुल्क चीन ने अपने आप को असभ्य दिखने से बचाने के लिए अपने नागरिकों के पाजामा पहनकर बाहर निकलने पर भृकुटियाँ वक्र कर लीं हैं। वे नहीं चाहते कि वहाँ होने वाले वर्ल्ड एक्सपों 2010 के दौरान चीनी जन सार्
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दुनिया के सबसे बडे़ प्रजातंत्र की पीठ पर साम्राज्यवादी थपथपाहट

प्रमोद ताम्बट अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा ने हमारे प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को अपने परिवार का सदस्य बताया है। उनकी पत्नी ‘मिशेल’ और बच्चे एक ‘सरदारजी’ को अपने बीच में पाकर कैसा महसूस करेंगे यह तो जिज्ञासा का विषय है, मगर भारतीय होने के नाते मेरे लिए
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हैप्पी दिवाली मनाने की फुलप्रूफ प्लानिंग

प्रमोद ताम्बट लो दीपों का त्योहार फिर आ गया, और हम इस शुभ अवसर पर ‘क्या-क्या नहीं करना है’ की सूची बनाने बैठ गए हैं। आजकल यहीं करना पड़ता है। पहले की तरह दिवाली पर ‘क्या-क्या करना है’ की फेहरिस्त बनाकर इन दिनों दिवाली तो हरगिज़ नहीं मनाई जा सकती। इसलिए
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दिवाली की एक रात लक्ष्मी जी की धरती यात्रा

प्रमोद ताम्बट ऐन दिवाली के दिन चौथी बार भी जब लक्ष्मी जी भारत के वायुमण्डल में प्रवेश नहीं कर पाईं तो वैकुंठ वापस लौटकर उन्होंने वाहन एक्ट की परवाह किये बगैर बुरी तरह हॉफते, आँखें रगड़ते अपने पुश्तैनी वाहन उल्लू की पीठ पर बैठे-बैठे ही, धड़धड़ाते हुए सीध
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नामुराद पतियों की पूजा का पर्व करवा चौथ

प्रमोद ताम्बट वे अभी-अभी जीर्ण-शीर्ण, पीली काया लेकर अस्पताल से वापस लौटी हैं, हफ्ते भर एनीमिया का इलाज कराया है, दो-तीन दर्जन ग्लूकोज़ की बोतलें और चार छः पाउच खून गटककर बीस-पच्चीस हज़ार का चढ़ावा अस्पताल पर चढ़ाकर घर आकर बैठी ही हैं कि पंचांग पर नज़र पड़
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हिज़ हाइनेस को शांति का नोबल पुरस्कार

प्रमोद ताम्बट अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को शांति का नोबल पुरस्कार हथ्थे लग गया है। इस अद्भुत, आश्चर्यजनक घटना से जहाँ शांति-प्रेमियों में अशांति फैल गई है वहीं अशांति-प्रेमी भीषण तनाव में आ गए हैं। वे भौचक हैं कि उनकी इतनी उठापटक और असलहे की बर
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कैटल क्लास में वी.आई.पी. सफेद गायों का साथ

प्रमोद ताम्बट अभी हाल ही में जानकारी मिली है कि हवाई जहाजों में भी आदमी को भेड़-बकरियों की तरह ठुसने की सुविधा उपलब्ध होने लगी है। हम तो आज तक इस भ्रम में थे कि यह व्यवस्था मात्र रेल-गाड़ियों के तीसरे दर्जे, खड़खड़िया यात्री बसों, भोपाली भटसुअरों, मैजिक
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बुराई का शतशिख रावण उर्फ ‘शतानन’

व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट// आज दशहरा है। राजतंत्रीय सत्ता व्यवस्था के दौरान अयोध्या के राजकुमार की लंका के राजा पर जीत का ऐतिहासिक दिन। उस युग के इतिहास को लेकर परम्परावादियों और वैज्ञानिक इतिहासकारों में हालाँकि भारी सिर फुटव्वल है, परन्तु ऐतिहासिक सत्य
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एक पखवाड़ा मुकर्रर है हिन्दी की मातमपुर्सी के लिए

प्रमोद ताम्बट हिन्दी भाषी होने के नाते आज के दिन हमें अपनी भाषा पर गर्व करना सिखाया गया है, मगर सच्चाई यह है कि स्वातंत्रोत्तर काल में जैसे-जैसे हिन्दी आन्दोलन फलता-फूलता पल्लवित होता गया है, वैसे-वैसे देश में हिन्दी की खटिया-खड़ी होती देखी गई है। कुछ तो
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Sep 14 2009 11:40 AM
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दाल में काला या पूरी दाल काली

प्रमोद ताम्बट प्रकांड बुद्धिजीवियों की तरह हम भी कभी आटा-दालजीवी नहीं रहे, न ही हमने इस तुच्छ कमोडिटी के भावों से कभी कोई वास्ता रखा। आराम से मिलती रही, बैठकर खाते रहे। परन्तु जिस दिन से दाल नब्बे रूपए किलो के चमत्कारिक आँकड़े पर पहुँची है, तब से औरों की
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हेलमेट लगाकर आएँ ठीकरा सत्र चालू है

//प्रमोद ताम्बट// सब लोग जेबों में ताज़ा ठीकरे भरे बैठे थे ताकि ‘पिरसीडेंट’ के सिर पर फोड़े जा सकें। यह जंगी तैयारी चुनाव में पार्टी की करारी हार का ईनाम देने के लिए थी। भारी तनाव के बीच अचानक ‘पिरसीडेंट’ के डरे सहमे नवरत्नों में हर्ष की लहर दौड़ गई। आसन्न
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पुस्तक लिख घूरे पर डाल

प्रमोद ताम्बट कट्टर दुश्मनों की तारीफ करने के लिए आपका मन चाहे कितना भी फड़फड़ा रहा हो और हाथ की उँगलियाँ पुस्तक लिखने के लिए चाहे जितनी कसमसा रहीं हों, तब भी अव्वल तो आप ऐसी ‘अपशकुनी’ किताब लिखने की हिमाकत बिल्कुल ना करें जिसे पढ़े बगैर ही आप पर कहीं से
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पन्द्रह अगस्त का पोरोग्राम और नेताजी का भासड़

प्रमोद ताम्बट जैसे ही नवोदित नेताजी को खबर मिली कि अबकी बार तहसील प्रांगण में उन्हें झंडावंदन करना है, तत्क्षण उन्होंने मन ही मन राष्ट्रीय गान रटना शुरू कर दिया। खास चमचे ने जब देखा कि नेताजी अपने ललाट की सलवटों का भार उठा नहीं पा रहें हैं, चिन्तामग्न से
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वैभव लक्ष्मी की कहानियाँ

वैभव लक्ष्मी की कहानियाँ प्रमोद ताम्बट भागा हुआ पति वापस आया सत्यवती का पति एक दिन घर से भाग गया जिस कारण वह काफी परेशान थी। एक बार किसी दयालु महिला ने उसे वैभव लक्ष्मी के इक्यावन व्रत करने की सलाह दी। सत्यवती ने नियमानुसार विधि-विधान का पालन कर इक्य
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