Gyanvani's Image
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
13 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
81
पाठक भेजे
3175
पसंद
131
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
39.20
पसंद करें
6
नापसंद करें

अम्माजी का लचीलापन (लघु कथा )

अम्माजी की तीखी आवाज़ घर से सटे छोटे से किचन गार्डेन से पार होती हुई पूजा करती हुए शुभी के कानों तक पहुंची । कल ही गाँव से आई है अम्माजी और आज सुबह सुबह पूरे घर की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए किचन गार्डेन तक पहुँच गयी । करीने से बनी हुई क्यारियों में
 
वाणी गीत
पसंद करें
3
नापसंद करें

पिता का जीत गया विश्वास ....

" ये तो पूरी मिट्टी हो गयी है ...दूसरी बेटी है ना तुम्हारी , ले जाओ घर " उस एक महीने की नन्ही सी बच्ची के लगभग नीले पड़ते से चेहरे को देखते हुए चिकित्सक ने पिता को कहा ।फक्क चेहरा लिए सीढियां उतरते पिता उस बच्ची को कलेजे से लपेटे फफक पड़ा । दूसरी बेटी के
 
वाणी गीत
टैग: पिता
पसंद करें
6
नापसंद करें

शादी निभाने के लिए क्या आवशयक है ... ..." प्रेम " या "समझौता" ...??

भयंकर अलर्जी की शिकायत के कारण आजकल काम कम और आराम ज्यादा हो रहा है । गृहिणियों के लिए ज्यादा आराम का मतलब ज्यादा टीवी शो देखना ...आजकल एक धारावाहिक " ससुराल गेंदा फूल " नियमित देख रही हूँ ।संयुक्त परिवार की महत्ता को कायम करता हुआ यह धारावाहिक परिवार के
 
वाणी गीत
टैग: शादी
पसंद करें
5
नापसंद करें

बेटा बीमार है .....

मेरी दो बेटियां हैं ...बेटा नहीं मगर माँ , मम्मी , मॉम आदि संबोधन दिए बगैर भी सचमुच माँ जैसा ही सम्मान देने वाले बेटे कई हैं ...उनमे से एक बहुत ही प्यारा भोला भाला सा बेटा आजकल बीमार है ...अभी लगभग एक वर्ष पूर्व जब उसे एक डेढ़ महीने के अंतराल पर देखा तो
 
वाणी गीत
पसंद करें
6
नापसंद करें

विश्व की सबसे कडवी और मीठी वस्तु एक ही है .....क्या ...??

लगभग दो हज़ार वर्ष पूर्व की बात है । यूनान का एक सम्राट रोम की यात्रा पर था। अपने मित्र राजा के घर उसका संध्या का भोजन निश्चित चुका था । यूनानी सम्राट ने ने अपने मित्र से दुनिया की सबसे मीठी चीज़ परोसने का अनुरोध किया था ।शाम को जब राजा में महल में भोजन
 
वाणी गीत
टैग: जबान
पसंद करें
4
नापसंद करें

परदेसी थारी ओल्यु घणी आव , पागल मन न कुण समझाव ईस्ट इंडिया कंपनी जी , आओ नी सा ....पधारो म्हारा और म्हारा पड़ोसिया का देस

परदेसी थारी ओल्यु घणी आव , पागल मन न कुण समझावईस्ट इंडिया कंपनी जी , आओ नी सा ....पधारो म्हारा और म्हारा पाड़ोसिया का देस क्यूंकि म्हाका माजना अस्या ही है ...(क्योंकि हम इसी लायक हैं )जो विष बीज थे बार गया अब फल फूलां से लद गा । आर देखो तो सही थांकी
 
वाणी गीत
पसंद करें
6
नापसंद करें

महिला ब्लॉगर्स का सन्देश जलजला जी के नाम ...

महिला ब्लॉगर्स का सन्देश जलजला जी के नाम कोई मिस्टर जलजला एकाध दिन से स्वयम्भू चुनावाधिकारी बनकर.श्रेष्ठ महिला ब्लोगर के लिए, कुछ महिलाओं के नाम प्रस्तावित कर रहें हैं. (उनके द्वारा दिया गया शब्द, उच्चारित करना भी हमें स्वीकार्य नहीं है) पर ये मिस्टर
 
वाणी गीत
टैग: अपील
पसंद करें
5
नापसंद करें

बड़े काम का भैया ...ये है एक रुपया

अभी सुना कुछ दिन पहले कोई कह रहा था एक रूपये में होता क्या है ...आज कल एक रुपये मे होता क्या है...मन में ये शब्द दुहराते कही कुछ अटकने लगता है ....होता क्यूँ नहीं ..बहुत कुछ होता है .....एक रूपये का जिक्र आते ही आँखों के सामने अपनी प्यारी सी गुल्लक घूम
 
वाणी गीत
पसंद करें
5
नापसंद करें

आह!............................................वाह!

दुनिया में अच्छे और बुरे कहलाने वाले हर प्रकार के इंसान है ...कहलाने वाले इसलिए कि हमेशा हर अच्छा दिखने वाला अच्छा और बुरा दिखने वाला बुरा ही हो , यह जरुरी नहीं ...हर इंसान अपने भीतर राम और रावण को साथ लेकर जीता है ...जो उससे क्रमशः अच्छे और बुरे कर्म
 
वाणी गीत
टैग: इंसान
पसंद करें
6
नापसंद करें

साहस उतना ही दिखाना चाहिए जितना हममे है ....विचारों का बवंडर

निरुपमा की मौत ने इंसानियत और नारी विकास के दिखावटी सत्य को धराशायी कर दिया है ...नर और नारी सभी दुखी है ...होना भी चाहिए ...जाने कितना क्या कुछ लोग लिखते जा रहे हैं ...मगर मैं रुक कर ठहर कर देखना चाहती हूँ ...निरुपमा के दुःख से दुखी होकर अतिउत्साह में
 
वाणी गीत
पसंद करें
3
नापसंद करें

डायरी में दर्ज एक शाम ...कुछ नहीं ...बस ...यूँ ही ....

हाथ में चाय की प्याली लिए सूरज को ढलते हुए देखना...अपनी छत से ही सही ....मुझे बहुत रूमानी -सा लगता है ...शाम के समय जब दूर क्षितिज में सूरज का सिन्दूरी गोला धीरे धीरे लुढ़कता अदृश्य धरती की ओर बढ़ता है आसमानी रूई के फाहों से बादलों के बीच रचती इस
 
वाणी गीत
टैग: शाम
पसंद करें
5
नापसंद करें

.क्या कहलाते हैं ये रिश्ते .....

कैसे होते हैं इंसानी रिश्ते ...कुछ प्रकृति प्रदत्त जन्म से जैसे माता-पिता, भाई बहन आदि ....कुछ वैधानिक जैसे पति , सास -श्वसुर आदि (क्या ईश्वरीय ही मान ले ...ईश्वर की आज्ञा से )...कुछ अनाम जो रिश्ते होते ही नहीं ...या यूँ कहें... मानवीय (इंसानियत के कारण
 
वाणी गीत
पसंद करें
3
नापसंद करें

जात ना पूछो साधू की ......

रेल में यात्रा कर रहे एक तिलकधारी सेठ ने जब अपने भोजन का डिब्बा खोलना चाहा तो पास ही बैठ खद्दरधारी नेता को देखकर उसे कुछ शंका हुई। सेठ ने कहा ...." अजी नेताजी ! आप किस जाति के हैं? क्षमा करना । जरा ख़ास काम है । इसलिए पूछने की हिम्मत हुई ।"इस पर
 
वाणी गीत
पसंद करें
3
नापसंद करें

मैं इसके आगे क्या कहूँ ...

हिंदी ब्लोगिंग में जो मैंने पाया ....कैसे कहूँ कि सब ही गंवाया ...वास्तविक जीवन के समानांतर चल रही हिंदी ब्लोगिंग की आभासी दुनिया ....इधर जो माहौल बना हुआ है मन बहुत दुखी और उदास था ... इसी निराशा(अपने स्वाभाव के विपरीत ) के भंवर में डूबते -उतरते एक मेल
 
वाणी गीत
टैग: मेल
पसंद करें
4
नापसंद करें

लिख ही दूँगी फिर से प्रेम गीत ....

लिख ही दूँगी फिर कोई प्रेम गीतअभी जरा दामन सुलझा लूं ....ख्वाब मचान चढ़े थेकदम मगर जमीन पर ही तो थेआसमान की झिरियों से झांकती थीटिप - टिप बूँदेंभीगा मेरा तन मनभीगा मेरा आँचलपलट कर देखा एक बारकुछ कांटे भीलिपटे पड़े थे दामन सेखींचते चले आते थेइससे पहले
 
वाणी गीत
टैग: कविता
पसंद करें
5
नापसंद करें

बात की शुरुआत ....... दिल या दिमाग की कमजोरी है ..??

अभी कुछ दिनों पहले इस आभासी दुनिया की एक सखी से चैटिंग हो रही थी ...अक्सर हम लोग बतियाते रहते है ब्लॉगजगत में होने वाली हलचलों पर और लिखी गयी पोस्ट और कमेंट्स पर भी ...हम लोग एक रचनाकार की किसी रचना के बारे में बात कर रहे थे ...कुछ उलझन थी उनकी रचना को
 
वाणी गीत
पसंद करें
4
नापसंद करें

लापता हुए गाँवों और कस्बों का पता ...लापतागंज में जरुर देखे ....

गाँधीजी का कहना था कि " भारत का ह्रदय गांवों में बसता है"। आज भी हमारी ८५ प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। गाँव में ही भारत की सच्ची तस्वीर देखी जा सकती है । परन्तु गाँवो में रोजगार की कमी , उच्च शिक्षा के पूरे अवसर ना उपलब्ध ना होने के कारण गाँव से लोग
 
वाणी गीत
पसंद करें
0
नापसंद करें

विपत्ति कसौटी जे कसे सोई सांचे मीत .....

जीवन एक संग्राम ही तो है । जिसमे समय समय पर विभिन्न विपत्तियाँ आती हैं । इन विपत्तियों में ही परम मित्र की सत्यता प्रमाणित होती है ।पंचतंत्र में कहा गया है ...." जो व्यक्ति न्यायलय, शमशान और विपत्ति के समय साथ देता है उसको सच्चा मित्र समझना चाहिए ।"मित्र
 
वाणी गीत
पसंद करें
0
नापसंद करें

दुष्ट महान हैं ...........

नवरात्र के नौ दिन श्रीराम को समर्पित रहे ...ये सच है कि इससे पहले इतना डूब कर श्री रामचरित मानस का पाठ कभी नहीं किया (जय हो ब्लोगिंग देवा ...गंभीरता से पढ़ना सिखा दिया ) ...पढ़ते पढ़ते कई स्थान पर रुक कर मनन भी किया ...बहुत कुछ नया नए प्रकार से सीखने को
 
वाणी गीत
टैग: दुष्ट
पसंद करें
3
नापसंद करें

काँधे मेरे तेरी बन्दूक के लिए नहीं है .....

ऐसे ही कुछ अटपटे शब्द ....मैंनादाननाजुककमजोरहताशमायूसतुम्हे लगती रहूमगरयाद रखकांधे मेरेतेरी बन्दूक के लिए नहीं है ....छोटे हाथ मेरेनाजुक अंगुलियाँभले होंगी मेरीभार उठाएंगीखुद इनकाजरुरत हुई तो ....जीतना मैं भी चाहूंतू भीबस जुदा हैरास्ता तेरा - मेराजीतना
 
वाणी गीत
पसंद करें
2
नापसंद करें

केवल तुम हो ...तुम

तुमअपरिचित थेबुरे नहींभले लगे थेकिन्तुह्रदय में एक भीबुलबुला नहीं फूटाकिदृष्टि उठा कर तुम्हे देख लूंतबना जाने कौन सीकिरण की इंगिततुम्हे मेरे करीबखींच रही थीमेरी पीर से तुम मेंपीर जगा रही थीअबना जाने कौन सी रासतुम्हे खींचती हुईमेरे इतने करीब ले आई हैकि
 
वाणी गीत
टैग: अदा
पसंद करें
3
नापसंद करें

दोस्त बनकर गले लगाता है वही ......पीठ पर खंजर भी लगाता है वही

दोस्त बनकर गले लगाता है वहीपीठ पर खंजर भी लगाता है वहीवफ़ा की रोज नयी कसमे उठाता है करवट बदलते ही बदल जाता है वही .... बंद पलकों में सजे है ख्वाब जिसके लिएचुपके से ख्वाब चुराता भी है वही .....तोड़कर अनकहे बेनामी रिश्तों की गिरहमेरी मायूसी पर मुस्कुराता भी
 
वाणी गीत
टैग: कविता
पसंद करें
5
नापसंद करें

ना ....अब बचपन ...ना .....!!

ना अब बचपनाअब बचपन नाबहुत हुआ बचपन पर हँसनाअब हँसना नाअब हँस ना ......!!बचपन कब चाहे बड़ा होनामगर जब बड़ा होनातो बड़ा हो ना ......!!बचपन से बड़प्पन का सफ़र...पलक नम सुस्त कदमबुझी निगाह सांस कमयही तो है बड़ा होनातो अब बड़ा ही होनाअब बड़ा हो ना ......!!चाहा
 
वाणी गीत
टैग: कविता
पसंद करें
0
नापसंद करें

पुरुष ब्लोगर ...महिला ब्लोगर ...सिर्फ ब्लोगर क्यों नहीं ...?

आप बहुत अच्छा लिखते/लिखती हैं ....मैं आपकी पोस्ट कई बार पढता/पढ़ती हूँ .....आपकी सारगर्भित टिप्पणी और विवेचना और बेहतर लिखने को प्रोत्साहित करती है ......आपकी पोस्ट के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही विचारों पर आपके साथ विमर्श करना चाहता हूँ/चाहती हूँ
 
वाणी गीत
पसंद करें
0
नापसंद करें

असर तो है .........!!

खेतों में सरसों का रंग और चटक हुआ लहराया मेरा आँचल चुनरी का कसूमलगालों के भंवर मुस्कुराते रहे गुलाबीरंगत चेहरे की हुई और सुर्ख रतनारीकदम नापते रहे दूरियां आसमानीरंग सुनहरा बिखेरती रही चांदनीसिलबट्टे पर चढ़ी रही मेहंदी हरियाईचक्की में पिसता रहा मक्का
 
वाणी गीत
Mar 03 2010 04:50 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ये बेचारे (??) पति

ये बेचारे पति ....इनको समझने के लिए खुशदीप जी के दस commandents की कोई आवश्यकता नहीं ...दरअसल इन्हें समझने की ही जरुरत कहाँ पड़ती है ...फिर भी शिखा वार्ष्णेय ने अपनी पोस्ट में परिभाषित करने की कोशिश की थी ...मगर हरी अनंत... हरी कथा अनंता की तरह पतियों की
 
वाणी गीत
टैग: अदा
Feb 21 2010 06:04 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मत दीजिये मेडल , बधाई तो दे ही दीजिये .......

कल मिथिलेश से बातचीत में जब उसे अपनी उम्र बताई (हालाँकि मैंने कभी कोशिश नहीं कि है अपनी वास्तविक उम्र छिपाने की ...मेरे ऑरकुट और फेसबुक अकाउंट में बाकायदा जन्मतिथि अंकित है ) तब से ही मस्तिष्क लगातार चिंतन मनन कर रहा है ...वास्तव में उम्र तो काफी हो गयी
 
वाणी गीत
Feb 17 2010 04:33 AM
पसंद करें
4
नापसंद करें

मुझे क्षमा करना हे रघुराई .......!!

राम प्रत्येक हिन्दू व्यक्ति के आराध्य हैं और अपने पारिवारिक संस्कारों के चलते मैं भी अंधभक्ति की तरह उनकी पूजा अर्चना करती हूँ ....मगर हमेशा की तरह दिल (जो घिसा पिटा है ) और दिमाग (जो थोडा बहुत बचा है ) आपस में भिड़ते रहते हैं जिसे मैं डांटकर " राम से
 
वाणी गीत
पसंद करें
3
नापसंद करें

अब जीना है मुझे भयमुक्त जीवन

जीने दो मुझेमत डराओकि अब मैं डरने वाली नहीं हूँअब बसजीना चाहती हूँ भयमुक्त जीवनमरने से पहले ............भर लू बाँहों मेंखुला आसमानफुद्फुदाती तितलियाँरंगबिरंगे फूलसूरज की लालिमातुलसी की पवित्रताचन्द्रमा की शीतलताचिड़ियों का कलरवनदियों की रुनझुनहवाओं सी
 
वाणी गीत
टैग: कविता
पसंद करें
5
नापसंद करें

ग्रीटिंग कार्ड के इस टुकड़े में में ऐसा क्या ख़ास था .........

कल जब यूँ ही पढने के लिए बुक सेल्फ से एक किताब निकाली तो उसके बीच से एक पुराने ग्रीटिंग कार्ड का एक हिस्सा निकाल आया ...याद आया ..ये ग्रीटिंग कार्ड का फटा तुडा मुड़ा सा टुकड़ा तीन चार साल पहले बेटी को उसके कोचिंग सेंटर के बाहर पड़ा मिला था ....अपनी कोमल
 
वाणी गीत
पसंद करें
3
नापसंद करें

चल मेरे मन तुझे तुझसे अलग होकर भी देखूं

मन के आगे हार है मन के आगे जीत ...हमारी हर कामना या गतिविधि का कारण हमारा मन ही है जो कभी दिल ...कभी दिमाग से संचालित होता है ...और कई बार दिल और दिमाग की रस्साकसी में इस बेचारे मन का कचूमर बन जाता है ....कितना अच्छा हो यदि कभी हम अपने आपको अपने मन से
 
वाणी गीत
टैग: कविता
पसंद करें
4
नापसंद करें

शीर्षक बुरा लगा ....खेद है ....

मेरी प्रविष्टि के शीर्षक से जिन शुभेच्छुओं को ठेस पहुंची मुझे खेद है ....मगर सच यह है कि उक्त लघु कथा एक सत्य घटना पर आधारित थी और हममे से बहुतों ने इस तरह की घटनाएँ अपने आस पास घटते देखी ही होंगी ... वास्तविक जीवन में कई बार स्त्रियाँ इस तरह गालियाँ
 
वाणी गीत
टैग: कविता
पसंद करें
3
नापसंद करें

समानांतर रेखा

दो समानंतर रेखाएंहमेशा साथ चलती हैंमगर कभी आपस में मिलती नहींउन्हें पीछे रह जाने का डर नहींमुड कर देखने की जरुरत भी नहींहाँ ...और वे कभी एक दूसरे कोकाटती भी नहींतुम भीमेरी जिंदगी की वही समानांतर रेखा होहम कभी मिले नहींमिलेंगे नहींमगर साथ हमेशा होंगेजीवन
 
वाणी गीत
टैग: कविता
पसंद करें
0
नापसंद करें

समानांतर रेखा

दो समानंतर रेखाएंहमेशा साथ चलती हैंमगर कभी आपस में मिलती नहींउन्हें पीछे रह जाने का डर नहींमुड कर देखने की जरुरत भी नहींहाँ ...और वे कभी एक दूसरे कोकाटती भी नहींतुम भीमेरी जिंदगी की वही समानांतर रेखा होहम कभी मिले नहींमिलेंगे नहींमगर साथ हमेशा होंगेजीवन
 
वाणी गीत
टैग: कविता
पसंद करें
2
नापसंद करें

हम तो डूब ही मरते ...भला हो नार्मन कजिन्स का .....बचा लिया

रोज सुबह चाय के साथ अखबार पढने की आदत है ...हालाँकि अखबार की हेडलाईन्स अक्सर दिल ही दुखाती है ...इस लिए मैं इनपर ज्यादा गौर नहीं करती ...हत्या , लूट पाट , जैसी ख़बरों पर भी सरसरी निगाह ही जाती है ....सबसे ज्यादा समय सम्पादकीय पृष्ठ पर गुजारती हूँ ....बहुत
 
वाणी गीत
पसंद करें
7
नापसंद करें

पिता के साथ बिताये आखिरी ३ दिन ...पिता की याद

पिताजी को गुजरे आज १२ वर्ष हो गए ...मगर जेहन में उनके साथ बिताये आखिरी तीन दिन हमेशा की तरह ताज़ा ही हैं ...माँ के घर उपरी मंजिल का निर्माण कार्य चल रहा था जिसके कारण माँ यही आई हुई थी ...पापा को अपने किसी काम से दिल्ली आना पड़ा था ...26जनवरी और रविवार की
 
वाणी गीत
टैग: पिता
पसंद करें
3
नापसंद करें

मेरे घर की खुली खिड़की से .....

मेरे घर की खुली खिड़की सेअलसुबहजगाता है मुझेचिड़ियों का कलरव गान.....ठिठोली कर जाती हैरवि की प्रथम किरणअंगडाई लेते कई बार.....पूरनमासी का चाँद भीझेंपता हुआ साझांक लेता है बार -बार....झर-झर झरते पीले फूलदेते हैं दस्तकखिडकियों पर कई बार.....मीठी तान छेड़
 
वाणी गीत
पसंद करें
3
नापसंद करें

दुष्टों की चारित्रिक विशेषताएं ..... ..(बालकाण्ड)

पिछले दिनों नजदीकी सम्बन्धी का ऑपरेशन , पिता की पुण्यतिथि और मकर संक्रांति के कारण कुछ व्यस्तता रही ...कभी कभी व्यस्तता मन मस्तिष्क में सुन्नता , खिन्नता या जड़ता उत्पन्न कर देती हैं ....ना ज्यादा कुछ पढ़ा ...ना टिप्पणी ही की ...संक्रांति की रिपोर्ट धरी
 
वाणी गीत
पसंद करें
8
नापसंद करें

टिपण्णी करना और टिपण्णी पाने की चाह रखना क्या सचमुच इतना बुरा है .....!!

किसी भी पोस्ट को पढने के बाद मन में जो भी विचार उठते हैं , उनका सम्प्रेषण ही टिपण्णी है ....कलम के धनी साहित्यकारों और इस आभासी दुनिया से दूर काफी नाम कमा चुके लेखकों और लेखिकाओं को टिपण्णी मिलने या नहीं मिलने से कोई फर्क नहीं पड़ता ...मगर जिन्होंने
 
वाणी गीत
पसंद करें
1
नापसंद करें

वह एक नदी थी

वह एक नदी थी .... जब तुमसे मिली थी बहती थी अपनी रौ मेंकल- कल करती.... कूदती- फांदती प्यार की फुहारों से भिगोतीइठलाती थी.... इतराती थीचंचल शोख बिजली- सी बल खाती थीपर .... तब तुम्हे कहाँ भाती थी ......!!राह में उसके कंकड़- पत्थर भी थे कुछ सूखे हुए फूलकुछ
 
वाणी गीत
टैग: कविता