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बिज़ूका फ़िल्म क्लब

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14 Jun 2010
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थ्री इडियट्स के बहाने पढ़ाई के लिये लड़ाई

जिस तरह से मुन्ना भाई एम.बी.बी एस. की सफलता ने गाँधी के क्राँतिकारी विचारों को ‘ आँधी ’ दी थी वैसे ही ‘थ्री इडियट्स ’ के प्रदर्शन और सफलता ने पढ़ाई के लिए लड़ाई छेड़ दी है। ऎसा नहीं है कि शिक्षा पद्धति को लेकर प्रबुद्धजनों, शिक्षा पद्धति में बदलाव चाहते
 
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फ़िल्मी साँझ

बिजूका लोक मंच ने अपनी पहली वर्षगाँठ के अवसर पर ‘फ़िल्मी साँझ’ आयोजन रखा है। बिजूका लोक मंच पिछले एक बरस से अपने सदस्यों के बीच प्रत्येक रविवार को सामाजिक सरोकारों से जुड़ी उत्कृष्ट फ़िल्मों का निःशुल्क प्रदर्शन करता रहा है। फ़िल्मी साँझ में तीन
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राजा दासगुप्ता हमारे समय के महत्त्वपूरण बंगाली फ़िल्म निर्देशक है। सुनील दीपक द्वारा लिया उनका साक्षात्कार बिजूका के पाठकों के लिए प्रकाशित कर रहे हैं। साक्षात्कार का अँग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद युवा पत्रकार पंकज जोशी ने किया है। 00 युवा फ़िल्म
 
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राजा दासगुप्ता हमारे समय के महत्त्वपूरण बंगाली फ़िल्म निर्देशक है। सुनील दीपक द्वारा लिया उनका साक्षात्कार बिजूका के पाठकों के लिए प्रकाशित कर रहे हैं। साक्षात्कार का अँग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद युवा पत्रकार पंकज जोशी ने किया है।00सुनील दीपक सुनील:
 
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May 16 2010 08:50 PM
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आशीष झा द्वारा निर्देशित फ़िल्म ‘मातृभूमि ए नेशन विदाउट वुमेन’ का बिजूका लोक मंच में 9 मई रविवार को अपने सदस्यों के बीच प्रदर्शन किया गया। आशीष झा बहुत युवा फ़िल्म निर्देशक है, अभी तक उन्होंने प्रदर्शित फ़िल्म के अलावा अनवर (2007) A VERY VERY SILENT FILM
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आशीष झा द्वारा निर्देशित फ़िल्म ‘मातृभूमि ए नेशन विदाउट वुमेन’ का बिजूका लोक मंच में 9 मई रविवार को अपने सदस्यों के बीच प्रदर्शन किया गया। आशीष झा बहुत युवा फ़िल्म निर्देशक है, अभी तक उन्होंने प्रदर्शित फ़िल्म के अलावा अनवर (2007) A VERY VERY SILENT FILM
 
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हिंदी फिल्मों में मानसिक रोग

सुनील दीपककुछ दिन पहले अपर्णा सेन द्वारा निर्देशित फिल्म "15 पार्क एवेन्यू" देखी, जिसका विषय है स्कित्जोफ्रेनिया, वह मानसिक रोग जिसमे रोगी सच और कल्पना का अंतर खो बैठता है. फिल्म देख कर हिंदी फिल्मों में मानसिक रोग के विषय को किन विभिन्न तरीकों से लिया
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संवेदनाओं के पंख: हरित क्रांति से कैंसरग्रस्त हुए पंजाबी पुत्तर

संवेदनाओं के पंख: हरित क्रांति से कैंसरग्रस्त हुए पंजाबी पुत्तरमहेशजी आपके ब्लॉग पर बहुत ही उम्दा सामग्री प्रकाशित होती है। ब्लॉग का यह बेहतरीन उपयोग है।
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वर वर राव की कविता:वह आदमी

वर वर राव हमारे समय के महत्त्वपूर्ण राजनीतिक और साहसी कवि है। उनकी कविता की प्रत्येक पंक्ति धारदार होती है। वे न सिर्फ़ लालच के दलदल में फँसे लोगों के मन में दलदल से बाहर आने का जोश भरते हैं, बल्कि बाहर आकर ‘ चलना किस राह पर है, यह भी बताते चलते हैं, साथ
 
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वो सुबह कभी तो आएगी

- प्रदीप कांत बावजूद इसके कि फिल्मों में बेहतरीन लेखन हुआ है किंतु इसे दोयम दर्ज़े का मान कर इस पर बात करने में भी कोताही बरती जाती है। साहिर लुधियानवी की एक नज़्म है वो सुबह कभी तो आएगी जो गीत बनकर फिल्म फिर सुबह होगी में शामिल हुई थी। यह नज़्म आज़ादी के
 
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वो सुबह कभी तो आएगी

- प्रदीप कांतबावजूद इसके कि फिल्मों में बेहतरीन लेखन हुआ है किंतु इसे दोयम दर्ज़े का मान कर इस पर बात करने में भी कोताही बरती जाती है। साहिर लुधियानवी की एक नज़्म है वो सुबह कभी तो आएगी जो गीत बनकर फिल्म फिर सुबह होगी में शामिल हुई थी। यह नज़्म आज़ादी के
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मित्रों,नर्मदा बाचाओ आंदोलन का धरना 13 अप्रैल से आज तक सतत ज़ारी है। उनका धरना पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है, लेकिन अभी सरकार और सरकारी अधिकारियों के पास उनके सवालों के कोई जवाब नहीं है। आंदोलन कारियों का कहना है कि वे जवाब लेकर ही लौटेंगे और
 
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Apr 17 2010 02:37 PM
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सवाल लेकर आयें हैं.. जवाब लेकर जायेंगे.......

नर्मदा बचाओ आंदोलन के सैकड़ों कार्यकर्ता इन्दौर में एन।सी.ए के कार्यालय के सामने गाँधीवादी तरीक़े से अपना अधिकार माँग रहे हैं। जो सरकार हिंसक तरीक़ों से अपने अधिकार की माँग करने वालों को जड़ से ख़त्म करने के लिए अड़बी पड़ी है, उससे अनुरोध है कि वह
 
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सरदार सरोवर का सबक

शिरीष खरेशिरीष खरेनर्मदा घाटी में एक और तीसरे बड़े बांध का प्रस्तावित नक्शायह सच है कि सरदार सरोवर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है, जो 800 मीटर नदी में बनी अहम परियोजना है। सरकार कहती है कि वह इससे पर्याप्त पानी और बिजली मुहैया कराएगी। मगर सवाल है कि
 
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फ़िल्म निर्देशक माजिद मजीदी का साक्षात्कार

यह साक्षात्कार फ़िल्म- SONG OF SPARROW के संबंध में एक अमेरीकी पत्रकार द्वारा लिया गया था, इसका उनुवाद बिजूका लोक मंच की साथी सुश्री रेहान हुसैन द्वारा किया गया है।प्रश्न- सामान्य अमेरीकी यह फ़िल्म देखकर मानता है कि आधुनिकीकरण के कारण मनुष्य का औचित्य ढँक
Mar 08 2010 11:50 AM
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टरटल्स केन फ्लाई

इस फ़िल्म के निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक इरानी मूल के श्री बाहमन गोबारी है। 97 मिनट की इस फ़िल्म को ‘गोल्डन शैल अवार्ड’ सेनसेबेशियन में एवं ‘सिल्वर बियर अवार्ड शिकागो में मिल चुका है। श्री गोबारी अंतररास्ट्रीय ख्याति के फ़िल्म निर्देशक है। उनकी कुछ और
 
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Mar 03 2010 01:18 PM
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श्याम बेनेगल गंभरी सिनेमा के फ़िल्मकार

भारतीय सिनेमा को अंकुर, निशांत, मंथन और भूमिका जैसी कलात्मक फ़िल्में देने वाले प्रसिद्ध फ़िल्मकार श्याम बेनेगल ने पिछले दिनों दिल्ली के इंटरनेशनल सेंटर सभागार में भारतीय सिनेमा में परंपरा, आधुनिकता और उत्तर आधुनिकता’ विषय पर अपने व्याख्यान के दौरान यह कहते
 
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Feb 15 2010 02:13 PM
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थाली में जहर

MUST READ!!!POISON ON THE PLATTERWe are all heading towards such a disaster, against which all other disasters will stand nowhere। This article is not a part of any horror movie। It is a truth which will display that our health, food and environment are
 
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नई दुनिया अपना विवेक और साख खो रहा है

30 जनवरी 2010 को नई दुनिया अख़बार में श्री आलोक मेहता का लेख ‘ बदलेगा लाल दीवार का रंग’ पढ़ा। लेख के शीर्षक ही से लगता है कि आलोकजी ने यह भविष्यवाणी की है। क्योंकि अभी प. बंगाल में चुनाव होना बाक़ी है। चुनाव के बाद मालूम होगा कि दीवार का रंग लाल ही है या
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आपकी ‘थाली में ज़हर’ यक़ीन नहीं होता… है न… ?

बिजूका लोक मंच के बिजूका फ़िल्म क्लब में 10 जनवरी 2010 को अजय कनचन द्वारा लिखित और निर्देशित फ़िल्म-थाली में ज़हर का प्रदर्शन किया गया। इस फ़िल्म में मशहूर फ़िल्म निर्देशक श्री महेश भट्ट ने सूत्रधार की ज़िम्मेदारी निभायी है। यह फ़िल्म ऎसे प्रमाणिक तथ्यों पर
 
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दिसम्बर की सर्दी में तेरा जाना, यार..उपेन… कुछ जँचा नहीं

दिसम्बर की सर्दी में तेरा जाना, यार..उपेन… कुछ जँचाये भिन्न-भिन्न बोलियाँ / ये लाठियाँ, ये गोलियाँयह उपेन्द्र मिश्र की कविता की पंक्तियाँ हैं। उपेन्द्र मिश्र मुझसे तक़रीबन चौदह-पन्द्रह बरस बड़ा था। लेकिन हमारी मित्रता में उम्र कभी आड़े नहीं आयी। हम जब भी
 
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संवेदना और विषय वस्तु को ख़ूबसूरती से परदे पर उतारने वाले फ़िल्मकार

माजिद मजीदी हमारे समय के एक बेहतरीन फ़िल्म निर्देशक है। उनकी फ़िल्मों ने दुनिया में अपनी एक ख़ास पहचान बनायी है। बिजूका लोक मंच के बिजूका फ़िल्म क्लब की 25 वीं प्रस्तुति पर रविवार (04.-01. 2010 ) को फ़िल्म फादर का प्रदर्शन किया गया। इस मौक़े पर दर्शकों
 
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साम्राज्यवादी राजनीति के परीणाम तो भोगना पड़ेंगे

बिजूका फ़िल्म क्लब में फ़िल्म ‘ओसामा’ का प्रदर्शन दिनांक 3 जनवरी 010फ़िल्म- ओसामा के निर्देशक-सिद्दिक बरमक है। भाषा वहाँ जो बोली जाती है, वही है, लेकिन अंग्रेजी सब टाइटल होने की वजह से फ़िल्म ठीक से संप्रेषित होती है। यह फ़िल्म सन 2003 में बनायी गयी है। फ़िल्म
 
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अनंत में विलीन हो गई नंदाजी की वाणी

जीवन के साथ उम्र की हद तयशुदा है;नंदाजी के नाम से पूरे मालवी-निमाड़ी जनपद के लाड़ले कृष्णकांत दुबे भी उससे अछूते नहीं रहे और उस अनंत आकाश में विलीन हो गए जहाँ से अब उनकी वाणी को सुना नहीं जा सकेगा. ज़माना बड़ा बेरहम है साहब और उसकी याददाश्त और ज़्यादा
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लिटिल टेरेरिस्ट यानी नानुसो आतंकी

लिटिल टेरेरिस्ट युवा निर्देशक अश्विन कुमार द्वारा बनायी गयी फ़िल्म है। फ़िल्म में तीन केन्द्रीय पात्र है। पहला और फ़िल्म का मुख्य पात्र जमाल नाम का छोटा बच्चा है। जमाल का गाँव हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की रेतीली सीमा के किनारे पाकिस्तान की तरफ़ बसा है। जम
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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अल-रिसाला इस्लामिक इतिहास की कलात्मक प्रस्तुति

बिज़ूका फ़िल्म क्लब द्वारा 7 जून को दोपहर 12 बजे मसीह विध्या भवन, इन्दौर के दर्शकों से खचाखच भरे हॉल में फ़िल्म अल-रिसाला का सफल प्रदर्शन हुआ । अल-रिसाला के निर्देशक मुस्तफा मक्कद ने फ़िल्म के एक-एक दृष्य को इतनी बारीकी और कलात्मक ढंग से फ़िल्माया है कि द
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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मुँह में पाइप दबाए चला गया सबका हबीब

जून 09 सोमवार की सुबह क़रीब सात-पौने सात बजे ख़बर मिली- हबीब तनवीर नहीं रहे। मेरी नींद हिरनी हो गयी। धड़कन धीमी हो गयी। कुछ देर सम्पट ही नहीं पड़ी क्या करूँ ? फिर मैं बिस्तर पर बैठे-बैठे ही और लोगों तक इस ख़बर को पहुँचाने लगा। सुबह ग्यारह बजे तक यही क
 
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AMNESTY INTERNATIONAL

AI index: ASA 20/023/200923 December 2009India: Chhattisgarh authorities must stop torture and arbitraryarrests of peace activists and human rights defendersAmnesty International urges authorities in the central Indian state of Chhattisgarh toimmediately
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मुक्तिबोध स्मृति फ़िल्म और कला उत्सव का समापन

मुक्तिबोध के जन्मदिवस पर शुरु हुआ भिलाई में जन संस्कृति मंच का 'मुक्तिबोध स्मृति फ़िल्म और कला उत्सव'( १३-१५, नवम्बर, २००९). प्रथम मुक्तिबोध स्मृति व्याख्यानमाला की शुरुआत की जसम के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. मैनेजर पांडेय ने. उन्होंने मुक्तिबोध की प्रति
 
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अधूरी तमन्नाओं का सफर है बाज़ार

इस बार पढ़िये बाजार फिल्म पर संदीप कुमार पांडेय का आलेख। साथियों बिजूका फिल्म क्लब इंदौर रविवार 22 नवंबर को स्थानीय शहीद भवन पर मशहूर फिल्मकार विटोरिया डिसिक्का की फिल्म बाइसिकिल थीव्स दिखाने जा रहा है.अगर आप भी देखना चाहते हैं तो जरूर आयें -सत्यनाराय
 
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कश्मीर में ईमान भी बहादुरी से कम नहीं : संजय काक

अक्‍टूबर को जश्‍न-ए-आज़ादी का बिज़ूका फिल्‍म क्‍लब में प्रदर्शन किया गया था। जश्‍न-ए-आज़ादी संजय काक की मशहूर डॉक्‍युमेंट्री है, जिसमें कश्‍मीर मुद्दे को बहुत ही संवेदनशील तरीके से चित्रित किया गया है। अभी अभी रविवार डॉट कॉम पर संजय काक का इंटरव्‍यू
 
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मणि यानी कमांडोज की गोली का टारगेट

मणि यानी रत्न होता है। मणिपुर का मतलब रत्नो का नगर है। पर लगता है इन शब्दों का यह अर्थ डिक्सनरी में ही होता है। मणिपुर के बासिंदों के लिए मणि का अर्थ बहुत अलग है। या कह सकते हैं कई शब्द ! जैसे हत्या, बलात्कार, जेल, भूख और किसी भी तरह के दमन को सहने वाला,
 
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गैर बराबरी की खाई से पैदा होते हैं फूलन जैसे चरित्र

मैं फूलन देवी हूँ भेनचोद.. मैं हूँ।बेंडिट क्वीन फ़िल्म का यह पहला संवाद है, जो दर्शक के कपाल पर भाटे की नुकीली कत्तल की माफिक टकराता है। अगर दर्शक किसी भी तरह के आलस्य के साथ फ़िल्म देखने बैठा है, या बैठा तो स्क्रीन के सामने है और मग़ज़ में और ही कुछ
 
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मजीद मजीदीः रिश्तों की ख़ूबसूरती

हॉलीवुड और वालीवुड के बाहर भी फ़िल्में बनती हैं और अच्छी बनती हैं यह हमारे ज़ेहन में तब नहीं आती जब तक कि हम किसी समारोह में दूसरे देशों की फ़िल्में नहीं देखते हैं. आम दर्शक को दूसरे देश की फ़िल्में देखने का मौक़ा यदा कदा ही मिल पाता हैं। इस बीच चेक रिपब्लिक,
 
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घुपती ह्रदय में बल्लम–सी जिसकी बात, उसे गपला ले गयी कलमुँही रात

वह खोड़ली कलमुँही (6 अगस्त 09) रात थी, जब प्रमोद उपाध्यायजी ज़िन्दगी की फटी जेब से चवन्नी की तरह खो गये। प्रमोद जी इतने निश्छल मन थे कि कोई दुश्मन भी कह दे उनसे कि चल प्रमोद… एक-एक पैग लगा लें, तो चल पड़े उसके साथ। उनकी ज़बान की साफ़गोई के आगे आइना भी पानी
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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सिटिजन केन

सिनेमा के इतिहास के षीर्श व्यक्तित्वों में से एक आर्सन वेल्स जो अमेरिका के केनोसो, विस्कांन्सिन में 1915 में पैदा हुए थे और 1985 में जिनका निधन हुआ, के कृतित्व का अंतिम रूप से कोई मूल्यांकन अभी मुमकिन नहीं है । षायद निकट भविश्य में भी नहीं । इसलिये कि
 
अशोक कुमार पाण्डेय