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संजय उवाच

http://drsanjaymishra.blogspot.com/
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03 Jun 2010
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जवां होते सपनों का मर जाना!

जातीय आधार पर राजनीति और सरकारी नौकरियों में मिल रहे आरक्षण का परिणाम है कि नाकाबिल लोगों की जमात सरकारी पदों पर काबिज हो रही है और उच्च राजनीतिक पायदानों पर अक्षम नेतृत्व की बढ़ोत्तरी हो रही है। तो अब सवाल यह है कि क्या इन नाकाबिलों और अक्षम लोगों के
 
dr sanjay mishra
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जन माध्यम जन पक्षधर्ता बनें - करमचंदाणी

जयपुर 14 मार्च, बाजारवाद के बढ़ते प्रभाव के चलते जन माध्यम भी बच नहीं पाये हैं बल्कि जिन सरोकारों को लेकर उन्हें संजिदा होना चाहिए उसमें साफ तौर पर गिरावट आ रही है। उक्त विचार दूरदर्’ान केन्दz, जयपुर के कार्यकारी निदे’ाक हरी करमचंदाणी सामाजिक जनजागृति को
 
dr sanjay mishra
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वो फाग का राग...

चुनावी पाळे ने गांव में प्यार-मोहब्बत की लहलहाती खड़ी फसल को तबाह कर दिया। लोगों ने दोनों तरफ से पैसा और अंग्रेजी ली, तो एक जगह तो धोखा निकलना ही था। और वैसे चुनाव का दूसरा नाम धोखा ही तो है। धोखा प्यार में मिले या मिले चुनावों में, उसका गम गहरे तक उतरता
 
dr sanjay mishra
Mar 02 2010 02:58 PM
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महंगाई में मर्ज प्रेम का!

पहले चीजें बहुत सस्ती मिला करती थी, मगर प्रेम तो तब भी अनमोल ही हुआ करता, मगर आजकल सबसे सस्तापन प्यार में ही दिख रहा है और महंगापन चीजों मेंबुजुर्गवार कई बार चर्चा करते हैं बीते हुए जमाने की। उसमें सबसे खास जो विषय होता है, वो होता है सस्ता। सस्ते के
 
dr sanjay mishra
Feb 11 2010 01:19 PM
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असुरक्षा के तंत्र में जीता गण

राजनीतिक सम्प्रभुता, आर्थिक स्वायत्तता और सांस्कृतिक अस्मिता के साथ हर इनसान के लिए सुरक्षित और गरिमामय जीवन सुनिश्चित करने की चुनौती से राष्ट्र रू ब रू है।राजनीतिक दलों के चरित्र और उनकी कार्यशैली को देखते हुए लोग उसे दल-दल तक की संज्ञा दे देते हैं। पर
 
dr sanjay mishra
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भ्रष्टाचार के भंवर में फंसा विकास का चक्का

शासन में शुचिता महज एक नारा नहीं होना चाहिए। वह अमल में आए और दिखे भी। तभी हम प्रदेश में खुशियाली ला सकते हैं।हाल ही नई दिल्ली में आठवें अप्रवासी भारतीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन में भाग ले रहे एक अप्रवासी प्रतिनिधि की टिप्पणी ने खासी सुर्खियां
 
dr sanjay mishra
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सुनो, मां पुकारती है......

एक बार फिर गौवंश को बचाने की मुहिम। देशभर में विश्वमंगल गौ ग्राम यात्रा जारी है। और इसके जरिए करोड़ों जनमानस में गाय को संरक्षण देने और उसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने की पहल नए सिरे से पैदा की जा रही है। आर्ट ऑव लिविंग, गायत्री परिवार, पतंजलि योग पीठ, जैन
 
dr sanjay mishra
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ये सच है या कि कयामत...

ये हैरत की बात है कि टीवी चैनल आपसी गला-काट प्रतिस्पर्धा के चलते अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए जिस तरह के कार्यक्रम गढ रहे हैं, वे हंसते-खेलते लोगों के संसार को उजाड़ रहे हैं। आजकल बुद्दू बक्से ने कोहराम मचा रखा है, क्योंकि लोगों के जेहन में उठा तूफान शांत
 
dr sanjay mishra
Dec 29 2009 12:02 PM
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तालीम नहीं डिगि्रयां बांटते हैं हम

निजी क्षेत्र उच्च शिक्षा में अनगिनत नए पाठ्यक्रम ला रहे हैं, लेकिन सेवा से जुड़ा यह काम अब पूरी तौर पर व्यावसायिकता की गिरफ्त में आने के बाद बाकायदा धंधा बना दिया गया है। जाहिर है कि अब इसमें शराब और कुछ दूसरे किस्म का धंधा करने वाले लोग भी आ चुके हैं
 
dr sanjay mishra
Dec 29 2009 12:02 PM
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ग्लोबल लोगों का लोकल चेहरा

कथित ग्लोबल लोग अपने व्यावसायिक फायदों के इतर सोचते ही नहीं हैं, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परस्पर संबंध कैसे कायम रह सकते हैं? देशों की भौगोलिक रेखाएं लोगों के दिलों पर छाई हुई हैं लगभग सौ साल पहले नस्लवाद के खिलाफ लड़ने वाले गांधी बाबा ने साठ साल
 
dr sanjay mishra
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नमस्कार

नमस्कार ब्लॉग की दुनिया के दोस्तों को
 
dr sanjay mishra
Dec 29 2009 12:02 PM
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कौन बड़ा है! राष्ट्र या महाराष्ट्र?

महाराष्ट्र विधानसभा के भीतर घटी घटना से हर राष्ट्रीय सोच का व्यक्ति आहत है। हो भी क्यों नहीं। आखिर देश की स्वतंत्रता के भार को वहन करने वाली राष्ट्र भाषा हिन्दी के साथ इस तरह का बर्ताव? चिंतनीय और निंदनीय भी। एकबारगी लगा जैसे आजमी को तमाचा मारने वाले
 
dr sanjay mishra
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ये अन्दर की बात है...

पिछले दिनों राजस्थान की विधानसभा में जो कुछ हुआ, वह जनप्रतिनिधिओं के असली चेहरे को उजागर करता है।अच्छा है इसी बहाने एक बार फिर निजी बनाम सार्वजनिक जीवन की बहस फिर छिडी है. कितनी ही उम्मीदों को लेकर जनता अपने वोट का इस्तेमाल कर इन महान प्रतिनिधिओं को
 
dr sanjay mishra
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जरूरी हैं जज्बात

बदलावों के लिए हमें हमेंशा तैयार रहना चाहिए. और बदलाव अक्सर ख़ूबसूरत होते हैं. कई बार नहीं भी होतें मगर यही तो इक चीज़ है जो स्थाई है. अपने बारे में कई बार सोचता हूँ तो लगता है जैसे जिंदगी बदल गई है पूरी तरह. और बदली भी कुछ इस तरह से है की यकीन नहीं ह
 
dr sanjay mishra