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17 Jun 2010
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परछाई

आज हमे अपनी परछाई से लगता है डरदिन तो गुजर जाता हैमगर रात नही गुजरती हैपीछा करती है अपनी परछाईनीदों मे भी आती है परछाईहर पल गुजरता है डर मेंआज हमे अपनी परछाई से लगता है डर॥
 
Dhiraj Shah
टैग: परछाई
May 21 2010 02:21 PM
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आ चल सैर करे !

आ चल सैर करे !किनारे की ओरमन मचला आजसैर को ॥दिन ढले चल पडे अकेले किनारे की तरफदिल आज था मौज मेचल पडा मन सैर कोदिल मे था आज बालपन और नयी उमंगे लियेसोचा चलुआ चल सैर करे ! किनारे की ओर ॥
 
Dhiraj Shah
टैग: सैर
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सत्यम शिवम सुन्दरम

सत्यम शिवम सुन्दरमशिव ही सत्य है ।शिव ही अनन्त है ।शिव ही सुन्दर
 
Dhiraj Shah
May 09 2010 08:56 AM
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चकरी

जीवन एक चकरी है जिसमे हर कोई घुमता है ।
 
Dhiraj Shah
टैग: चकरी
May 08 2010 05:30 AM
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राहगीर

झुलसती धुप मे मिली छाँव तो पथिक चल आराम कर ले ……… Technorati Tags: पथिक,यात्रि
 
Dhiraj Shah
Apr 14 2010 06:00 AM
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परछाई

  Technorati Tags: shed,छाया
 
Dhiraj Shah
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धुंधली शाम

Technorati Tags: शाम सु
 
Dhiraj Shah
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street

Technorati Tags: street
 
Dhiraj Shah
Apr 03 2010 12:00 PM
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घंटी(bell)

Technorati Tags: bell
 
Dhiraj Shah
Apr 01 2010 05:42 AM
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उम्र का पडाव

उम्र का पडाव अपने ढलान पर।
 
Dhiraj Shah
टैग: age
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संग चल(Come with)

संग चल कुछ दुर
 
Dhiraj Shah
टैग: come with
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तीन

 
Dhiraj Shah
टैग: three
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नदी का किनारा

बैठी किनारे इन्तजार करती उनकासाँझ ढलने को आयीपर वे न आयेदिल डुब सा रहाक्या वो आयेगेंकरती रही इन्ताजार उनकापर वे न आये
 
धीरज शाह
टैग: मिलन
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तारे जमीं पर

आज तारे जमीं पर उतरे है फलक सेजिनका इन्तजार था बरसो से।जिनकी करता था बाते रोज उनसेवो ऐसा था, वो वैसा था।जिन्हे देखा करता था सपनो मेंजिनका जिक्र था मेरे यादो मे।आज वो जो हकीकत हैजो सामने है मेरे और मै खडा बुत सा।आज तारे जमीं पर उतरे है फलक सेजिनका इन्तजार
 
धीरज शाह
टैग: तारें
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उड़ते धुल

उड़ते धुल जिन्दगी का इक फलसफा हैबीते दिन भी भुल जाते है नयी दिन की तरह।गुम हो जाते कई कहानी जिन्दगी के पन्नेजम जाती है धुल उन यादो के पन्नो पर।ये जिन्दगी का फलसफा भी अजीब हैजब करवट लेती है यादो के पन्ने।
 
धीरज शाह
टैग: धुल
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जय माता दी

माँ विन्ध्य्वासिनीजय जय जय हो।सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणि नमोअस्तुतेजय वैष्णो देवीजय माता दी, जय माता दीश्री दुर्गा मन्त्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल
 
धीरज शाह
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कही दीप जले

कही दीप जले , उजाले के लिये .......
 
धीरज शाह
टैग: दीप
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मैं नहिं माखन खायो

मैं नहिं माखन खायो मैया! मैं नहिं माखन खायो। ख्याल परै ये सखा सबै मिलि मेरैं मुख लपटायो॥ देखि तुही छींके पर भाजन ऊंचे धरि लटकायो। हौं जु कहत नान्हें कर अपने मैं कैसें करि पायो॥ मुख दधि पोंछि बुद्धि इक कीन्हीं दोना पीठि दुरायो। डारि सांटि मुसुकाइ जशोदा
 
धीरज शाह
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नयी उमंग

नया सालनयी उमंग नये लोग फैला है चारो ओर नया उत्साह हर चेहरो पर है खुशी लोग हुये मतवाले आज क्यो की आया नया साल नयी इरादो को ले ।नया साल हो मुबारक.....
 
धीरज शाह
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दो दिल

दो दिल हारे अपनो से एक बिछ्डा दुजे के लिए एक थी आस आने की उनकी न वे आये न आया सन्देश आये तो लेकिन दुजे के साथ दो दिल हारे अपनो से .....
 
Dhiraj Shah
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रिश्ता

आज मुलाकात हुयी लहरों से उसने हमसे पुछा हमारी पहचान क्या है आप से हमारा रिश्ता क्या है आप से तो मन मे उठी हलचल सच मे हमारा क्या रिश्ता है हम तो रोज आते है किनारों पर हमने तो ना सोचा था क्या रिश्ता है आप से आज मन की डोर हो गई कमजोर हम रिश्तो का नाम न
 
Dhiraj Shah
टैग: डोर
Dec 29 2009 11:46 AM
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तोता राम

तोता राम भाई तोता राम पंख हरे चोंच है लाल गले मे पहने गहरी कंठी माला सुबह शाम रटता राम राम बच्चो का मनभावन तोता राम सबको बुलाता कह राम राम सबका प्यारा भाई तोता राम
 
Dhiraj Shah
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किनारे

इस किनारे पर हम थे उस किनारे पर वो मिलने की आस थी , पर दुर था किनारा एक टक देख , लिये थी मिलने की आस आज लहरें भी थी शांत मिलन को देखने के लिये जमाने की थी नजर हमारे ओर मिलन की आस मे चल पडे किनारे से लहरों की ओर .....
 
Dhiraj Shah
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बढते कदम

चल पडे कदम अपनी मन्जिल की ओर कल उलझे थे कदम अपनी परेशानियो मे आज फिर चल पडे कदम अपनी मन्जिल की ओर असमन्जस मे थे अपने कदम बढने से पहले फिर सोचा चलो बढाये कदम मन्जिल की ओर
 
Dhiraj Shah
टैग: कदम
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अंधाधुंध

अंधाधुंध हो रहे है साफ कास-कूस, झाड-फूस हो रहा महसूस, प्रधान जी है खुश जनता हो रही है नाखुश जहाँ हो रहा है शोषण जहाँ केवल मिलता है दोष फिर भी वहाँ है जाते लोग मिलता है काम केवल अपनो को वह है नाम नरेगा...
 
Dhiraj Shah
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धुधंली शाम

धुधंली शाम मे बैठे चार जन तन से थे निराश , मन से भी निराश उम्र ने भी छोड दिया था साथ कभी उनकी भी थी आन-बान कभी समय दौड्ता था साथ आज समय ने भी छोड दिया साथ कभी आगे-पीछे थी लोगो की फौज आज के केवल चार जन बैठे ....
 
Dhiraj Shah
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LIFE

Life - A beautiful Thinghs of Nature.
 
धीरज शाह
टैग: nature
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दिलजला

दिल जला मानों आत्मा जली हलचल हुयी दिलो दिमाग में कुछ खोया-खोया सा लगा मन न तो यहाँ है न वहाँ नही अपने तो छोड चले बेगानो को क्या कहे हम तो न चाहते थे छोडना वे साथ छोड चले वे कहते है कि हम दिलजले है......
 
Dhiraj Shah
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देव दिवाली - देव आराधना

देव दिवाली - देव आराधना देवो की आराधना आज हमारे कसबे के घाट पर हुयी , वहाँ के कुछ चित्र
 
Dhiraj Shah
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हरियाली

हरियाली और रास्ता
 
Dhiraj Shah
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अंजान

अंजान है रास्ता , अंजना है सफर , अनजाने लोग , अंजान है हमसफर ,फिर भी निकल पड़ा हु | आगे पहचाना रास्ता मिला , मंजिल मिला , पहचाने लोग मिले , हमसफर मिला , पर मेरी पहचान न मिली ...........
 
Dhiraj Shah
टैग: पहचान
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मूसाफिर हु यारो

मुसाफिर हु यारो, बस चलना है काम , न घर है ना ठिकाना, जहाँ रात हुयी वही ठिकाना, जो बोले मीठे बोल वही है याराना, मुसाफिर हु यारो, बस चलना है काम
 
Dhiraj Shah
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अकेला

आज अकेला हुँ , कल के साथ के लिए ,आज मै एक कदम चला, दो कदम साथ के लिये, मंजिल दुर है , साथ तो चलो दो कदम।
 
Dhiraj Shah
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भागमभाग

आज जिन्दगी मे भागमभाग लगी है, हर कोई भाग रहा है , भागमभाग से जीवन के मायने बदल गये है , रिश्तो के मतलब बदल गये है , लोग एक दुसरो को पीछे करने के लिये भाग रहे है , कब तक भागेगे , कभी तो थकेगे , उस समय तो समय ठहर जायेगा ।
 
Dhiraj Shah
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उगा हो सूरज बाबा अरगीय के बेरा

मेरे कसबे के डाला छठ का चित्र
 
Dhiraj Shah
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शहर

आँगन छुटा, गलियां छुटी छुटे सब संग - साथ हम से हुयी थी क्या खता हम हुए बेगाने अपने शहर मे और शहर ने हमें काफिर बना डाला ग़मों से दूर तक रिश्ता न था हम बसा रहे थे अपनी दुनिया अमन वालों ने ही जला डाली दुनिया लुट डाली हया और आँखे हमारी शहर ने हमें काफिर
 
Dhiraj Shah
टैग: शहर