आज हमे अपनी परछाई से लगता है डरदिन तो गुजर जाता हैमगर रात नही गुजरती हैपीछा करती है अपनी परछाईनीदों मे भी आती है परछाईहर पल गुजरता है डर मेंआज हमे अपनी परछाई से लगता है डर॥
आ चल सैर करे !किनारे की ओरमन मचला आजसैर को ॥दिन ढले चल पडे अकेले किनारे की तरफदिल आज था मौज मेचल पडा मन सैर कोदिल मे था आज बालपन और नयी उमंगे लियेसोचा चलुआ चल सैर करे ! किनारे की ओर ॥
आज तारे जमीं पर उतरे है फलक सेजिनका इन्तजार था बरसो से।जिनकी करता था बाते रोज उनसेवो ऐसा था, वो वैसा था।जिन्हे देखा करता था सपनो मेंजिनका जिक्र था मेरे यादो मे।आज वो जो हकीकत हैजो सामने है मेरे और मै खडा बुत सा।आज तारे जमीं पर उतरे है फलक सेजिनका इन्तजार
उड़ते धुल जिन्दगी का इक फलसफा हैबीते दिन भी भुल जाते है नयी दिन की तरह।गुम हो जाते कई कहानी जिन्दगी के पन्नेजम जाती है धुल उन यादो के पन्नो पर।ये जिन्दगी का फलसफा भी अजीब हैजब करवट लेती है यादो के पन्ने।
आज मुलाकात हुयी लहरों से उसने हमसे पुछा हमारी पहचान क्या है आप से हमारा रिश्ता क्या है आप से तो मन मे उठी हलचल सच मे हमारा क्या रिश्ता है हम तो रोज आते है किनारों पर हमने तो ना सोचा था क्या रिश्ता है आप से आज मन की डोर हो गई कमजोर हम रिश्तो का नाम न
तोता राम भाई तोता राम पंख हरे चोंच है लाल गले मे पहने गहरी कंठी माला सुबह शाम रटता राम राम बच्चो का मनभावन तोता राम सबको बुलाता कह राम राम सबका प्यारा भाई तोता राम
इस किनारे पर हम थे उस किनारे पर वो मिलने की आस थी , पर दुर था किनारा एक टक देख , लिये थी मिलने की आस आज लहरें भी थी शांत मिलन को देखने के लिये जमाने की थी नजर हमारे ओर मिलन की आस मे चल पडे किनारे से लहरों की ओर .....
चल पडे कदम अपनी मन्जिल की ओर कल उलझे थे कदम अपनी परेशानियो मे आज फिर चल पडे कदम अपनी मन्जिल की ओर असमन्जस मे थे अपने कदम बढने से पहले फिर सोचा चलो बढाये कदम मन्जिल की ओर
अंधाधुंध हो रहे है साफ कास-कूस, झाड-फूस हो रहा महसूस, प्रधान जी है खुश जनता हो रही है नाखुश जहाँ हो रहा है शोषण जहाँ केवल मिलता है दोष फिर भी वहाँ है जाते लोग मिलता है काम केवल अपनो को वह है नाम नरेगा...
धुधंली शाम मे बैठे चार जन तन से थे निराश , मन से भी निराश उम्र ने भी छोड दिया था साथ कभी उनकी भी थी आन-बान कभी समय दौड्ता था साथ आज समय ने भी छोड दिया साथ कभी आगे-पीछे थी लोगो की फौज आज के केवल चार जन बैठे ....
दिल जला मानों आत्मा जली हलचल हुयी दिलो दिमाग में कुछ खोया-खोया सा लगा मन न तो यहाँ है न वहाँ नही अपने तो छोड चले बेगानो को क्या कहे हम तो न चाहते थे छोडना वे साथ छोड चले वे कहते है कि हम दिलजले है......
अंजान है रास्ता , अंजना है सफर , अनजाने लोग , अंजान है हमसफर ,फिर भी निकल पड़ा हु | आगे पहचाना रास्ता मिला , मंजिल मिला , पहचाने लोग मिले , हमसफर मिला , पर मेरी पहचान न मिली ...........
आज जिन्दगी मे भागमभाग लगी है, हर कोई भाग रहा है , भागमभाग से जीवन के मायने बदल गये है , रिश्तो के मतलब बदल गये है , लोग एक दुसरो को पीछे करने के लिये भाग रहे है , कब तक भागेगे , कभी तो थकेगे , उस समय तो समय ठहर जायेगा ।
आँगन छुटा, गलियां छुटी छुटे सब संग - साथ हम से हुयी थी क्या खता हम हुए बेगाने अपने शहर मे और शहर ने हमें काफिर बना डाला ग़मों से दूर तक रिश्ता न था हम बसा रहे थे अपनी दुनिया अमन वालों ने ही जला डाली दुनिया लुट डाली हया और आँखे हमारी शहर ने हमें काफिर