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सरोजिनी साहू की श्रेष्ठ कहानियां

http://sarojinisahoostories.blogspot.com/
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01 May 2010
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असार

( मानवीय संबंधों में बढ़ती दरारों को उजागर करने वाली लेखिका की यह कहानी उनके कहानी-संग्रह 'सृजनी सरोजिनी' में संकलित है.इस कहानी का कथानक एक मरणासन्न माँ पर आधारित है .जीवन की असारता को प्रकट करने वाली इस कहानी में जीवन का यथार्थ जुड़ा हुआ है जो पाठकों
May 01 2010 09:11 PM
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चौखट

लेखिका की यह कहानी उनके 'चौकाठ' शीर्षक कहानी संग्रह में संकलित है. नारी मानसिकता के विभिन्न पहलुओं को उजागर करनेवाली यह कहानी में नारी के मन में छिपी हुई संवेदना-बोध की बखूबी चित्रण किया गया है जो पाठक को एक नए अनुभूति से परिचित करवाती है. लेखिका के
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रेप

नारीवादी चेतना की अंतसः सूक्ष्मताओं को बखूबी को उजागर करने वाली यह कहानी लेखिका की सर्वाधिक चर्चित कहानियों में से एक है. 'हार्पर कॉलिन्स बुक ऑफ़ ओडिया शोर्ट-स्टोरीज' में संकलित इस कहानी का अनुवाद विश्व की महत्त्वपूर्ण भाषाओँ जैसे अंग्रेजी , फ्रेंच,
Mar 08 2010 12:20 PM
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छिः!

( कहानी 'छिः!' कहानीकार की सफलतम नारीवादी कहानीयों में से एक है। इस कहानी में नारी के अंतर्मन के कई गोपनीय पहलुओं पर अति-सूक्ष्मता से प्रकाश डाला गया है । यह कहानी मूल रूप से नब्बे के दशक में लिखी गई थी.। सर्व-प्रथम यह कहानी ओडिया पत्रिका 'झंकार' में
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माया

(भारतीय संस्कृति में अपनी जड़ें फैलाता वैश्विक बाज़ारवाद ,उपभोगवाद की प्रवृति, धनोपार्जन के भ्रष्ट तरीकें एवं झूठी प्रतिष्ठा की ललक हमारी संस्कृति को किस तरह खोखला कर रहीं हैं, इसका ज्वलंत उदाहरण पेश करने वाली यह कहानी २००५ में लिखी गई थी,जो लेखिका के
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बलात्कृता

यह कहानीकार की सद्यतम प्रकाशित कहानियों में से है , जो न तो किसी दूसरी भाषा में अनुदित हुई है , न किसी कहानी संग्रह में संकलित हुई है. यह कहानी ' टाईम्स ऑफ़ इंडिया ग्रुप ' की ओड़िया पत्रिका ' आमो समय ' के जून , २००९ अंक में प्रकाशित हुई है. कहानी का
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अमृत-प्रतीक्षा

प्रस्तुत कहानी लेखिका के ' ओड़िशा साहित्य अकादमी ' द्वारा पुरस्कृत कहानी - संग्रह ' अमृत प्रतीक्षारे ' में से ली गई है. मूल रूप से यह कहानी १९८६ में लिखी गई थी और तत्कालीन ओड़िया भाषा की प्रसिद्ध पत्रिका ' झंकार ' में प्रकाशित हुई थी. बाद में इस कहान
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गैरेज

यह कहानीकार की नवीनतम कहानियों में से एक है जो ओडिया की मशहूर पत्रिका 'कादम्बिनी' में प्रकाशित हुई थी और अब तक कहानीकार के किसी भी कहानी-संग्रह में संकलित नहीं हुई है . इस कहानी में निम्न-मध्यम वर्ग के वातावरण में पनप रही 'लूम्पेन मानसिकता' का बखूबी
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प्रतिबिम्ब

'प्रतिबिम्ब' कहानी कहानीकार का 'दु:ख अपरिमित' कहानी संकलन में संकलित हुई है. यह कहानी पहले नब्बे के दशक में ओडिया की प्रमुख साहित्य पत्रिका 'प्रतिबेशी' में छप कर आयी थी. यूँ तो सरोजिनी जी की सारी कहानियां पाठक को अभिभूत कर लेती हैं, पर इस कहानी में
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छिन्न-मूल

'छिन्न-मूल' शीर्षक की यह संवेदनशील कहानी मौलिक रूप से २००२ में लिखी गयी थी. पहले ओडिया पत्रिका 'नवलिपि' में प्रकाशित हुई और बाद में लेखिका का कहानी-संग्रह 'सृजनी सरोजिनी' में संकलित हुई. अनुवाद का शीर्षक मैंने पहले 'जड़-हीन' रखा था, पर मुझे लगा
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बेडी

कहानीकार की यह कहानी उनके ओडिया कहानी संग्रह 'सृजनी : सरोजिनी' (प्रकाशक: अग्रदूत, कटक) में संकलित है. कहानी का अंग्रजी अनुवाद गोपा नायक द्वारा Shackles शीर्षक से " इंडियन जर्नल ऑफ़ पोस्ट कोलोनिअल लिटरेचर" (ISSN : 0974-7379) के जून २००९ अंक में प्रकाश
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दुःख अपरिमित

यह कहानी मूल रूपसे नब्बे के दशक में लिखी गयी थी. पहले ओडिया पत्रिका 'झंकार' में प्रकाशित हुई और बाद में लेखिका का कहानी संग्रह "दुःख अपरिमित" (ISBN : 81-7411-483-1) में संकलित हुई. इस कहानी का सुश्री इप्सिता षडंगी द्वारा किया गया अंग्रेजी अनुवाद कहान