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07 May 2010
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प्रार्थना

हम है बालक नादाँदिल में हमारे वफ़ा हो सच को देखे , सच को समझे सच को ईश माने सुंदर धरा विस्तृत गगन ऐसा हो हमारा मन कोयल की कू कूमोर की पिहू हम सदा गुनगुनायेइस धरा को आओ मिलकर हम स्वर्ग बनाये उड़ते पक्षी बहता पानी सुंदरता की कहता कहानी आओ खो जाये ........
 
USHA GAUR
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दायरों से निकालना चाहती हूँ --

रिश्तों के दायरे में सिमटती मानवता को दायरों से निकालना चाहती हूँ क्योंकि -- मैं जानती हूँ कि एक दिन ऐसी सीमाओं में कदम-दर-कदम की बाधाओं में गुब्बारे की बंद हवाओं की तरह भीतरी परिवेश से कुछ नया करने का आवेश सड़ जाएगा मानवता का भाव कहीं रूंध जाएगा
 
USHA GAUR
Dec 29 2009 12:02 PM
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मनुष्य

ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति मनुष्य कही खो गया है अपने ही दिए नामो में इस कदर उलझा हुआ है खीझ ,बैचेनी ,तमतमाहट और रेत तन जो रह गया है विश्व की सुन्दरता , प्राक्रतिक सुषमा अब मन को लुभाती नही है भावो की मृदुलता मन की कोमलता पागलो की निशानी है ये भाव नैत
 
USHA GAUR
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बालक

हर पल मांगे ध्यान तुम्हारा ध्यान न दो ,रो -रो घर भरे सारा नटखट बचपन को पहचानो बालक की जरुरत को जानो मै छोटा सा बालक हू माँ का आँचल ही पहचानू कदमो की आहात को जानू साँसों की खुशबु को पहचानू माँ की गोद लगे है प्यारी माँ भी देख मुझे बलिहारी क्रेत्च मुझे
 
USHA GAUR
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सोचो सोचो सोचो ......

औलाद ने मुह मोड़ा ये नौबत क्यो आई jhaanko अपने अंदर संस्कार देने में कमी आई पैदा करना है आसान पालन करना मुश्किल ठीक उसी तरह से जैसी मरना है आसान पर जीना है मुश्किल हाय तौबा मचा रहा है आज अजानी इंसान पैदा करने की कीमत मांगे बच्चो से इंसान सोचो सोचो ...
 
USHA GAUR
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देश की धरती

देश की धरतीमुझको बता ऐ देश की धरती तुझे मै क्या कहूँअपने मन की ये व्यथा तुझसे कहूँ या न कहूँमुझको बता........तेरी जीत का गौरव तिरंगाबनके शोभा रह गयाविश्व पटल पर ओज तेरामृद भांड बनकर दह गयामानसूनी देश की इसे बदलती है ऋतूमुझको बता ..........इस धारा के
 
USHA GAUR
Sep 20 2009 05:13 AM
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vishwas

आज इश्वर कही चुप गया है ऐ हवा जाके तुम दुन्दो अगर कही मिल जाए तो पैगाम मेरा तुम ये देना कलयुग में सब कुछ बदल गया साँस लेना मुश्किल हो गया हर अर्थ का अनर्थ हो गयामसलन साधू भोगी हो गया दिल से साफ सच्चे इंसानों को पागल कहते है अब वास्तव में तुम्हारे अवत
 
USHA GAUR
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क्या मुझको जन्म दोगी माँ?

वेद पुराण सभी कहते हैं, तू तो भगवान है तू ही अम्बा, तू जगदम्बा, तू शक्ति महान है इस दुनिया को मैं भी देखूं, ये मेरा अरमान है मेरी हत्या मत कर माता, मैं तेरी संतान हूँ बेटी पूछे माँ से आज, क्यों ना तुझे स्वीकार हूँ जन्म से पहले मारे मुझको मेरा क्या अप
 
USHA GAUR