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भगवान भरोसे

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13 Jun 2010
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क्या पीड़ितों को न्याय मिलेगा

भोपाल को लेकर कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। पच्चीस साल बाद एक निर्णय आने के बाद दोषी कौन की तर्ज पर बयानों का ढेर लग गया है। पच्चीस वर्षों से खामोश बैठे कई तथाकथित ईमानदार अधिकारियों में भी सहसा साहस का संचार हो गया। शायद सेवा निवृत्ति के बाद अब उन्हें
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नाटक चालू आहे

उम्मीद जगी थी कि झारखंड में सरकार बन जाएगी, पर अब ऐसा नहीं लगता। नेता जिस तरह एक के बाद गुलाटी मार रहे हैं उन्हें देखकर शायद बंदर भी गुलाटी मारना छोड़ दे। इस तरह के नाटक पहले भी कई राज्यों में खेले जा चुके है, पर झारखंड में खेला जा रहा नाटक अपने आप में
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बस यही इनकी जिंदगी है........

सीताजी को लेकर आजकल काफी बहस चल रही है। सीता और राम के संबंधों का विवेचन किया जा रहा है। राम ने सीता की अग्नि परीक्षा क्यों ली और धोबी के कहने पर राम ने सीता का परित्याग क्यों किया, बहस का मुद्दा है और गंभीर मुद्दा है। इसलिए पक्ष और विपक्ष में बहुत सारी
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वक्त की नज़ाकत समझिए

अभी थोड़ी पहले एक आलेख पढ़ रहे थे कि ऑनर किलिंग में लड़कियों को ही क्यों मारा जाता है लड़कों को क्यों नहीं। मूलतः यह प्रश्न ही गलत है अगर आप खाप पंचायतों के बारें जानते हैं तो आपको पता होगा कि वे ऑनर किलिंग के नाम पर लड़की और लड़के में बिना कोई भेद किए
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जाति और धर्म के नाम बेटियों की बलि

एक मां ने अपनी बेटी की हत्या कर दी। सुनकर मन एक बारगी तो सुन्न पड़ गया। ऐसा कैसे हो सकता है एक उम्र के बाद मां बेटी का रिश्ता दो सहेलियों का सा हो जाता है, जो अपने सुख-दुख एक दूसरे के साथ शेयर करती है। माँ सिर्फ मां न रहकर बेटी की पथ-प्रदर्शक बन जाती है।
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खतरनाक डॉक्टर

अपने देश में डॉक्टर को भगवान का दूसरा अवतार माना जाता है, क्योंकि भगवान इंसान को जन्म देता है और डॉक्टर उसकी सेहत की रक्षा। डॉक्टरी की पढ़ाई के समय उन्हें शपथ दिलाई जाती है कि वह कभी भी किसी भी परिस्थिति में मरीज के इलाज करने से इंकार नहीं करेंगे। इसीलिए
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बिन पेंदी का लोटा

अभी बमुश्किल चार महीने हुए है जब ढोल-तमाशा के साथ शिबू शोरेन ने प्रदेश की सत्ता संभाली थी। बड़े-बड़े आश्वासनों से जनता को लाद दिया था। कागजों पर योजनाओं की हरियाली छाई हुई थी...पर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही थी। मुख्यमंत्री पद को बनाए रखने के लिए
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शर्म क्यों नहीं आती उन्हें

पिछले कुछ समय से मुबंई लगातार चर्चा में बना हुआ है...कभी टैक्सी ड्राइवरों के साथ मार-पीट के कारण, कभी पानी की पहरेदारी के कारण, कभी शाहरुख के कारण, कभी अमिताभ को सरकारी कार्यक्रम में बुलाने के कारण। ऐसा लगता है मानो अपनी अहमियत सिद्ध करने के लिए हर पहला
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माया की माया

माया की माया अपरम्पार है. इनके प्रशंसक इनके गलत कामों में भी अच्छाई ढूढ़ लेते हैं. एसी रूम या न्यूज़ चैनल के दफ्तर में बैठ कर माया का गुणगान करने वाले जमीनी हकीकत से उतने वाकिफ नहीं होते जितनी वे बातें करते हैं.माया की मायागिरी ने कानपुर की मस्तमौला छवि
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जरूरत है शिक्षको को शिक्षित करने की

कपिल सिब्बल जब से मानव संसाधन मंत्री बने हैं तब से शिक्षा में सुधारों को लेकर बहुत सारी बातें हो रही हैं. ये बातें कागजों पर तो अच्छी है पर हकीकत की कसौटी पर ये खरी नहीं उतर पा रही है। बस्ते का बोझा कम करना अच्छी बात है. पर शिक्षको की मानसिकता में
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लिव इन रिलेशनशिप

लिव इन रिलेशनशिप यानी सहजीवन। आपको याद होगा कि अपने देश में इस विषय पर विवाद की शरुआत दक्षिण भारतीय सिने जगत की सुपर स्टार खुशबू के उस बयान से शुरू हुई थी जिसमें उन्होंने विवाह पूर्व सेक्स संबंधों को जायज ठहराया था और इसके फलस्वरूप तमिलनाडु में काफी
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अंधविश्वास की भेट चढ़े दो बच्चे

देश के विकास की गति बेहद असमान है। देश के मेट्रोपोलिटन शहर विकास की दौड़ में काफी आगे हैं। यहां के निवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल सभी कुछ उपलब्ध है, लेकिन गांवों में इन सभी का नितांत अभाव है। ये मूलभूत जरूरते हैं जिस पर देश के हर नागरिक का
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शर्म करो मुलायम सिंह

मुलायमसिंह ने लखनऊ में जो कुछ कहा उसे सुनकर मुझे तो यही लगा कि तथाकथित समाजवादी नेता का दिमाग चल गया है। ये खुद को गरीब और अकलियत का नेता कहते हैं। कहते है ये उनके हित के लिए महिला विल का विरोध कर रहे हैं। लेकिन जो विरोध ये कर रहे हैं और विरोध के लिए जिस
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दिमाग का दिवालियापन दर्शाती कहानी - सारंगी

वनिता के 2010 के अप्रैल अंक में 92 पेज पर एक कहानी छपी है। कहानी का शीर्षक है सारंगी। लेखिका है डॉ. सुषमा श्रीराव। यह कहानी स्त्री के चरित्र का अतिरंजनापूर्ण चित्रण करती है। लेखिका अपनी अपनी महिला पात्र से वह सब कुछ करवाती और कहलवाती है जो एक सामान्य
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शादी और उपनाम

क्या महिलाओं को शादी के बाद अपनी उपनाम बदलना चाहिए? पढ़कर अजीब लग रहा होगा क्योंकि पारम्परिक रूप से दुनिया भर में शादी होने के बाद महिलाओं का कुल गोत्र वही हो जाता है जो उनके पति का है। इस परम्परा को निबाहने के मामले में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी एक
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डॉक्टर आनंदी जोशी-प्रथम भारतीय महिला डॉक्टर

आज हमें इस बात पर गर्व है कि भारत में अमेरिका से भी ज्यादा महिलाएं डॉक्टर, सर्जन्स, वैज्ञानिक और प्रोफेसर्स हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस लंबी डगर का पहला मुसाफिर कौन था?डॉक्टर आनंदी जोशी का जन्म मुंबई के निकट कल्याण जिले में 1865 में एक अमीर
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ढोगी बाबा

देश में बाबाओं की भरमार है... बिना मेहनत किए मुफ्त की रोटी तोड़ने का ये नायाब साधन है....बाबा बनने के लिए कुछ खास करना भी नहीं होता...बातें बनाने की कला आती हो...लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करने का ढंग मालूम हो और हां, आज के हाईटेक जमाने को देखते हुए पीआर
Mar 06 2010 08:08 PM
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सचिन आरती

सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता आनंदाची !अविस्मरणीय खेळी तुझी द्विशतकाची !सर्वांगी सुंदर उधळण चौकारांची !आकाशी झळके माळ उत्तुंग षटकारांची !जय देव जय देव जय तेंडुलकरा !तुझ्या चरणी माझा मानाचा मुजरा !जय देव जय देव ..१४७ चेंडू खेळपट्टी वरी उभा !सर्व गोलंदाजांची
Mar 04 2010 03:35 PM
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पढ़ाई के साथ मौज-मस्ती भी जरूरी है

एक तरफ होली का खुमार है दूसरी तरफ इम्तहान का बुखार है। कुछ बच्चों की परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, कुछ की शुरू होने वाली है। बच्चे असमंजस में हैं, बुरा न मानो होली कहते हुए मुहल्ले की गलियों में हुड़दंग मचाये या कमरा बंद करके किताबों में सिर खपाएं। बच्चों
Feb 28 2010 10:23 AM
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आइए इस बार इको फ्रैंडली होली खेलें

होली देश का एकमात्र ऐसा त्योहार है जिसे देश के सभी नागरिक उन्मुक्त भाव और सौर्हादपूर्ण तरीके से मनाते है। यह एक ऐसा त्योहार है जिसमें भाषा, जाति और धर्म का सभी दीवारे गिर जाती हैं। और बुरा न मानो होली है कह कर हम किसी भी अजनबी को रंगों से सराबोर कर देते
Feb 25 2010 01:16 AM
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मैं खुले आकाश में उड़ना चाहती हूँ

चौदह साल की रिंकू अपने खिलंदड़े स्वभाव के लिए घऱ-स्कूल में जानी जाती थी। किसी की कोई भी समस्या हो रिंकू के पास उसका समाधान रहता था। घर में मम्मी-पापा के अलावा एक बड़ा भाई था। घर में कभी उसको इस बात का अहसास नहीं कराया गया कि लड़की होने के कराण वह लड़कों
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अपनी परम्पराओं की ओर लौटना होगा

दहेज एक सामाजिक बुराई है। सिर्फ कानून के माध्यम से इसे नहीं रोका जा सकता है। कुछ राज्यों में इसका बड़ा भयावना चेहरा देखने को मिल रहा है। यहां लड़के का पालन-पोषण, उसकी शिक्षा-दिक्षा को एक इनवेस्टमेंट के रूप में देखा जाता है। विवाह के अवसर पर इसे सूद समेट
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खामोश परिवर्तन

आज वैलेंटैइन डे है। देश में प्रेमोत्सव का माहौल दिखाया जा रहा है। कुछ लोग विरोध करके अपनी दुकान चमका रहे हैं कुछ समर्थन करके। पर भारत में वैलेंटाइन डे की हकीकत क्या है इसका पता लगाना मुश्किल है। दरअसल हम बहती धारा में बहने वाले लोग है इसलिए जो चल रहा है
Feb 14 2010 09:03 PM
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क्या आप भूत-प्रेतों पर विश्वास करते हैं!

कहने को तो हम इक्कसवीं सदी में विचर रहे हैं। सूचना क्रांति के बाद किसी भी विषय पर पलक झपकते ढेरों सूचनाएं मिल जाती हैं, इसके बावज़ूद हमारे अंधविश्वासों में कोई कमी नहीं आयी है। अभी भी डायन के नाम पर महिलाओं की हत्या की जाती है, मानसिक रोगियों को उचित
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दोषी कौन

छोटे परिवार की संस्कृति ने हमारे जीवन को बहुत बदला है। पहले हमारे बच्चों पर मां-बाप के अलावा दादा-दादी का भी साया हुआ करता था जो मां-बाप की अनुपस्थिति में उनका पूरा ध्यान रखते थे। बच्चे क्या कर रहे है? उनके दोस्त कौन हैं? वे कहां उठते बैठते हैं, बच्चों
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कौशल दिखाने जुटे पशु-पक्षी

जंगल के राजा शेर की दहाड़ से पूरा जंगल कांप उठा। दहाड़ सुनकर उनके वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. चिम्पैन उनसे मिलने भागे आए। शेरः डॉ. चिम्पैन, मुझे याद है कि पूर्व में आपने मुझे बताया था कि इंसान आपका ही विकसित स्वरूप है, और आज वह जो कुछ भी है, उसका कारण यह ह
Dec 29 2009 11:54 AM
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भगवान भरोसे

नारियल की आत्मकथा उस दिन समुद्र बहुत अशांत था; आकाश काले बादलों से घिरा हुआ था और तेज हवा के झोंके समुद्र तट से टकरा रहे थे। मैं सीधा खड़ा रहना चाहता था, पर सफल नहीं हो पा रहा था। इस उम्मीद में मैं थोड़ा नीचे भी झुक गया कि शायद इस तरह तेज हवा का झोंक
Dec 29 2009 11:54 AM
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उफ! ये गरमी

जहां देखो लोग गरमी का रोना रो रहे है। हर आदमी परेशान है। जहां देखों वहां बस गरमी की ही चर्चा है। क्या रेडियो, क्या टीवी, क्या अखबार हर जगह यही बात हो रही है की इस बार बहुत गरमी हो रही है। टीवी पत्रकार तो सड़को पर लोगों को रोक रोक कर पूछ रहे है-भाईसाह
Dec 29 2009 11:54 AM
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नारी-जीवनः एक लेखा जोखा

वह सब जगह है फिर भी वह कहीं नहीं है। उसके बिना न सृष्टि बनती है न परिवार, न समाज, पर इन सब को बनाती वह स्वयं क्या बनती है और उसके हाथ क्या आता है यह कोई नहीं पूछता? उसका होना सबके होने की शर्त है, फिर भी उसके नहीं होने की फिक्र किसी को नहीं है। वह स्
Dec 29 2009 11:54 AM
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आभा राठौर के नाम खुला पत्र……..

पिछले एक हफ्ते से रुचिका molestation केस पर आया निर्णय पूरे देश में चर्चा का विषय है। देश के हर कोने से इस निर्णय के विरोध में आवाजें उठ रही है। हर शख़्स को कोर्ट से बाहर निकलते वक्त राठौर के चेहरे पर खिली मुस्कराहट विचलित कर रही है। हर शख़्स इस मुस्
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कांग्रेस की हकीकत

अभी कल की ही बात है सरकार बड़े जोर शोर से सरकारी खर्च में कमी की बात कर रही थी। और इसका कारण देश में पड़े सूखे और मंदी को बताया जा रहा था। मंत्रियों को खर्च करने के तरीके समझाए जा रहे थे, अखबारों और टीवी पर इस बात को लेकर बहस हो रही थी कि मंत्रियों क
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छोटे राज्य और राजनीति

कांग्रेस के जल्दबाजी में लिए गए एक निर्णय के कारण आज पूरा आंध्र प्रदेश जल रहा है। पूरा प्रदेश दो भागों में विभाजित हो गया है एक तेलंगाना के समर्थन में हिंसक हो रहा है, दूसरा विरोध में। दोनों ही पक्ष प्रदेश की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे है
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बेटी ही क्यों.....

आज पेपर में एक खबर छपी है कि पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर सीमान्त प्रांत के बुनेर जिले के रहने वाले अरशद मलंग के शरीर पर कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के चलते बाल नहीं थे, इससे उसे अपने पौरुष में कमी महसूस होती थी। उसने अल्लाह से दुआ मांगी कि अगर उसके शरीर पर ब
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एनआरआई दूल्हे

आजादी के इतने सालों के बाद विदेशी चीजों के प्रति हमारा मोह घटने के बजाय बढ़ा है। हमें हर वो चीज प्रिय है जिसका संबंध विदेश से हो। यहां तक हमारी नज़रों में उन लोगों का दर्जा बढ़ जाता है जो भारतीय होते हुए भी विदेश में बस जाते हैं। वे विदेश में क्या कर
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अब अपर्णा क्या करे...

अपर्णा ने सुमित के साथ घर से भाग कर शादी की थी। उस समय उसकी उम्र महज अठारह साल थी। घर वालों को जब इसका पता चला तो उन्होंने इस शादी का विरोध किया पर अपर्णा अपने निर्णय पर दृढ़ थी। शादी के समय सुमित कुछ नहीं करता था, वह पूरी तरह अपने मां-बाप पर निर्भर
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झारखंडीय राजनीति

झारखंड में आजकल दो ही विषय चर्चा में हैं, एक मधु कोड़ा और दूसरे चुनाव। दोनों का आपस में गहरा संबंध है। एक के बिना दूसरी की चर्चा अधूरी लगती है। बहुत गलत समय मधु कोड़ा का कुबेर का खजाना लोगों के सामने आया है। यह समय सिर्फ उनके लिए ही नहीं, उनके तथाकथि
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बंद की राजनीति

बंद के रूप में गाधी जी ने भारतीय राजनीति को ऐसा हथियार दिया है जिसका आज सबसे ज्यादा दुरुपयोग हो रहा है। बंद आज अपनी बात सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने का माध्यम न हो कर शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बन गया है। किसके द्वारा बुलाया गया बंद कितना सफल है यह उस
Oct 14 2009 07:55 PM
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आज गांधी जयंती है.......

जिस समय भारत अपने स्वतंत्रता आंदोलन में संघर्षरत था। उस समय विश्व में बहुत आशांति थी। चारो तरफ हिंसा का बाजार गर्म था। परंतु गांधीजी ने अहिंसा का मार्ग अपनाया और दुनिया को दिखा दिया कि बिना हिंसा के भी देश की स्वतंत्रता प्राप्ति जैसे महान कार्य किए ज
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सादगी की नौटंकी

देश में आजकल सादगी की बयार बह रही है। टीवी, रेडियो, समाचारपत्र हर जगह कांग्रेस पार्टी द्वारा चलाए जा रहे सादगी अभियान की चर्चा है। प्रत्येक समाचार चैनल ने अपने संवाददाता और कैमरामैन को खुफियातौर पर यह जानकारी एकत्र करने के लिए नियुक्त कर दिया है कि कौन
Sep 18 2009 07:17 PM
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अमित

आज क्लब में मिसेज सुचारी से मुलाकात हुई। वे परमाणु ऊर्जा केंद्रीय विद्यालय में हिंदी की शिक्षिका हैं। बहुत खुश नजर आ रही थी। मैंने उन्हें शिक्षक दिवस की बधाई दी। उन्होंने बधाई स्वीकार करते हुए कहा, ‘आपको पता है, अमित सिंगापुर जा रहा है। भारत सरकार ने बीस
Sep 07 2009 02:06 PM