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छोटी गली...

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08 Jun 2010
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रिश्तों को कैसे समझे

जिंदगी का मकसद क्या होना चाहिए? इस विषय पर बहुत कम सोचता हूं। शायद इसलिए कि जीवन के प्रति पैशन नहीं रहा। यह अजीब या बकवास भी लग सकता है। भला इतनी कम उम्र में जब सभी मौज-मस्ती में रहते हैं, मैं निराशावादी बातें कर रहा हूं। दरअसल इंसान कभी अपने हिसाब से
 
चन्दन कुमार
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रास आयी 'राजनीति'

एक वैरागी जिसने खेल के सारे नियम बदल डाले। वाकई राजनीति ऐसी ही रही। फिल्म की कहानी काफी कसी हुई लगी। शुरू से लेकर जब तक सूरज अपनी मां से नहीं मिलता तब तक आपको यह फिल्म इस कदर बांधे रहती है कि आप अंदाजा नहीं लगा सकते, फिल्म का सवा दो घंटा कैसे गुजर गया।
 
चन्दन कुमार
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नेता पर भारी जनता बेचारी

हम भारतीय जनता बेवजह अपनी हालत पर रोते हैं। नेताओं पर लांछन लगाने की आदत हमारी गई नहीं। हमारा यह आरोप भी निराधार ही होता है कि नेताओं के पास बेइंतहा दौलत है। यह इल्जाम भी हमारा बेकार होता है कि नेता जनता के पैसे पर अय्याशी करते हैं। घोटाला वगैरह करके चंद
 
चन्दन कुमार
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नेताओं का मतलबी दौरा

हाथ की पांचों अंगुलियां एक जैसी नहीं होती हैं। यही बात हमारे देश भारत पर भी लागू होती है। कानून की नजर में सभी प्रदेश और नागरिक समान हैं। पर हक़ीक़त ऐसी नहीं है। यह शासक-प्रशासक और जनता अच्छी तरह जानती है। हमारे पूर्वोत्तर राज्यों में क्या हो रहा है किसी
 
चन्दन कुमार
Jun 03 2010 02:48 PM
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मौत का यह सिलसिला

ये मौत है उनकी,जिनका कोई कसूर नहीं,मरने-मरने वालों का आपस में कोई नाता नहीं,बह रहे फिर भी खून,जैसे जीवन का कोई मोल नहींहर मौत के बाद मातम,फिर मौत,जनता के रखवाले कर रहे हैं ठेकेदारी,छोड़ राजीनीति, कूद पड़े हैं धंधे में,सिलसिला ये कब थमेगा,आँखों में चिंगारी
 
चन्दन कुमार
Jun 01 2010 04:55 PM
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यह मौत है शिरिन-शरमिन की, पर उनका क्या कसूर?

वामपंथी विचारधारा से शुरू हुआ नक्सलवाद अब लगता है, तृणमूल कांग्रेसी विचारों का समर्थक हो गया है। वामपंथी तीस से अधिक वर्षों से बंगाल में काबिज हैं। ममता को राज करने का कोई भी मौका नहीं मिला। अब वह किसी भी कीमत पर यह सत्ता हासिल करना चाहती है।
 
चन्दन कुमार
May 31 2010 04:25 PM
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कांग्रेस और आज़ादी के फ़साने

भारतीय इतिहास में मुस्लिम लीग और कांग्रेस दोनों का नाम सिक्के के दो पहलू की तरह है। आजादी की लड़ाई में दोनों कई मोर्चों पर साथ रहे। कई मोर्चों पर बिल्कुल विपरीत। लीग को कांग्रेस से शिकायत थी कि वह उसे अहम ओहदे और सत्ता में भागीदारी देने के लिए तैयार नहीं
 
चन्दन कुमार
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बांग्लादेश बनने की त्रासद कहानी

हामिद मीर के लेख का दूसरा हिस्सा...मेरे एक वरिष्ठ साथी अभी भी जीवित हैं। उनका नाम अफजल खान है। वह 73 बरस के हैं। उन्होंने असोसिएट प्रेस ऑफ पाकिस्तान के लिया काम किया है। वह 1980 से 1985 के दरम्यान पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के महासचिव थे।
 
चन्दन कुमार
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26 मार्च और पाकिस्तान

दोस्तों यह लेख पकिस्तान के जीओ टीवी के कार्यकारी सम्पादक हामिद मीर का है। मैंने बस उसे हिंदी में तर्जुमा किया है। मीर साहब से मैंने इसकी इजाज़त नहीं ली। इसकी वजह मेरे पास उनका कोई कॉन्टैक्ट नंबर या पता नहीं था। फिर भी मै इसे उन्ही के नाम से यहाँ प्रकाशित
 
चन्दन कुमार
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मीर का कबूलनामा और भारत-पाकिस्तान की मीडिया

हामिद मीर पाकिस्तानी हैं। वह एक पत्रकार हैं। उनका मुल्क या मजहब भले ही क्या है हमें उससे कोई मतलब नहीं। पर पत्रकारिता के पेशे में वह दुनिया के कई धुरंधर और कई दिग्गजों से कहीं बेहतर हैं। पूरे दक्षिण एशिया में उनसे बेहतरीन टीवी पत्रकार का मिलना मुश्किल
 
चन्दन कुमार
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लोकतंत्र की शानदार जिन्दगी

आज हम अपनी उस दुनिया से बेगाने होते जा रहे हैं, जिसमें रहकर हम दुनियावालों की दुनिया में अपनापन महसूस करते थे। वह हमारी खास दुनिया या तो नकली उदासीनता या खोखली दिलचस्पी से कमोबेश छिन्न-भिन्न हो चली है। यदि कोई चीज उसे संभाले हुए है तो वह यह जिद की हमारी
 
चन्दन कुमार
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कौन है आम आदमी का पैसाखोर

आजकल हो क्या रहा है तो बस राजनीति के नाम पर तमाशा। दरअसल हकीकत है कि आजकल सरकार का खर्च दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। इसलिए वह खुद पर खर्च के पैसा जुटाने की कवायद के तहत कभी टैक्स बढ़ाती है तो कभी चीजों की कीमत बढ़ाती है। उन्हीं चीजों की कीमत बढ़ाती है,
 
चन्दन कुमार
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अमीरों की आमदनी की तरह बढ़ती मंगाई

महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए एक और मुसीबत आने वाली है। हालात अब भारत में बगावती होने वाले हैं। यदि ऐसा नहीं है तो होना जरूर चाहिए। जिस तरह हररोज अमीर की आमदनी दिन दोगुना और रात चौगुनी बढ़ रही है, उसी तरह दाल-चावल-गेहूं-नमक-तेल की कीमत क्यों बढ़नी
 
चन्दन कुमार
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मुलाकातों का इंतज़ार

जाने कहां बिछड़ गए वो दिन, जब दिल में एक तमन्ना होती था, किसी से मिलने को बेताब रहता था, चंद पलों के दीदार से खुशियों की रौनक होती थी, और होती थी हरएक बात उनकी, बातें अब भी बाकी हैं, मुलाकातों का इंतजार अब भी है, पर ना अब वो हैं, ना ही वह वक्त। उनकी
 
चन्दन कुमार
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विकली ऑफ और अतिथि

तीन घंटे सोने के बाद आपका दिमाग क्या कहता होगा? सभी को जवाब मालूम है। रात के साढ़े तीन बजे सोने के बाद वीकली ऑफ वाले दिन यानी संडे को सुबह साढ़े ग्यारह बजे उठा। एक दिन पहले सिर्फ तीन घंटा ही सोया था। वजह कुछ सामान्य सी बात। कमरा बदलना था। यह काम मुझे
 
चन्दन कुमार
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मेरी छोटी-सी कहानी

जब भी मैं अपनी किसी कमजोरी पर काबू पाने की कोशिश में होता हूं तो अच्छा लगता है। दिन-ब-दिन गुजरने के बाद यह एहसास होता है कि चलो आज एक दिन और अपनी बुराई से दूर रहा। फिर यह सिलसिला लगभग महीने तक चलता है। पिछले 5 से 7 वर्षों से यह सिलसिला कायम है। शुरू के
 
चन्दन कुमार
May 19 2010 04:48 PM
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शादी भी नेशनल फेस्टिवल से कम नहीं

अगले महीने बहन की शादी है। घर में बहुत ही उल्लास और हंसी-खुशी का माहौल होगा। मैं थोड़ी देर से घर पहुंचने वाला हूं। वजह नौकरी। पर इन बातों को छोड़िए। शादी के गीतों को सुनकर एक अजीब सा रोमांच मन में पैदा हो रहा है। आज शारदा सिन्हा की आवाज में भोजपुरी विवाह
 
चन्दन कुमार
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पाकिस्तानी मीडिया में हिन्दू

भारत में बमुश्किल ही नामचीन उर्दू अख़बारों के बारे में किसी को जानकारी होगी। मुझे भी बहुत कम उर्दू अखबारों के नाम मालूम हैं। आज के समय में यह सौ फीसदी सच है, यदि किसी को अपनी आवाज़ उठानी हो तो उसे अपना माध्यम चाहिए। शायद यही वजह है कि वक़्त-वक़्त पर मुसलमान
 
चन्दन कुमार
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पकिस्तान के ज़ख्मों की कहानी

मामला आतंकवाद से जुड़ा है. आतंकवाद का नाम आते ही पता नहीं क्यों सभी की जुबां पर पाकिस्तान का नाम चढ़ जाता है. नया नाम पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक फैसल शहजाद का है. कहा जाता है कि उसके माता-पिता पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्नाह के आधुनिक
 
चन्दन कुमार
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दिल उदास और लब खामोश

दिल उदास है, लब खामोशजिंदगी में कहीं उम्मीद अभी बाकी है,अब अपनी गुस्ताखियों पर भी ऐतराज़ होता है, छोड़कर सभी मुझे बेगाना समझने लगे,ज़रा कोई बताये तो हमारी खता,कि बरसों चाहने का सिला क्या होता है,क्या होता है जब उनकी याद आती हैऔर मन मसोसकर रह जाता हैछोड़कर
 
चन्दन कुमार
May 12 2010 12:50 AM
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बॉलीवुड की जुलिया रॉबर्ट्स

प्रीति जिंटा की तारीफों में आजकल उलझा हुआ हूँ। इसलिए बातें उनकी खूबसूरती की ही करूँगा। उनकी आँखें, जुल्फों और डिंपल वाली मुल्कान की तारीफ की जा सकती है। पर वह पारंपरिक तारीफ की श्रेणी में आएगा। कुछ इस तरह जैसे, हिंदी साहित्य के रीति काल में मंझन और जायसी
 
चन्दन कुमार
टैग: फिल्म
May 10 2010 04:01 PM
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प्रीति जिंटा : बॉलीवुड की जुलिया रॉबर्ट्स

अद्भुत, अदम्य और साहस। प्रीति जिंटा। जी हां, कई महीनों से सोच रहा था कि प्रीति जिंटा के बारे में लिखूं। पर बहुत असमंजस में था। आखिर शुरुआत कहां से करूं। क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि सिर्फ लिखने के लिए लिखूं। किसी से तुलना भी नहीं करना चाहता था। हालांकि
 
चन्दन कुमार
टैग: फिल्म
May 09 2010 05:17 PM
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भारत भ्रष्ट महान

आजादी के पहले तक या उससे 4-5 साल बाद तक भ्रष्टाचार की बात पिछड़ी नहीं लगती थी। वह चौंकाती थी। उस पर गुस्सा आता था। पर आज तो इसकी बात करने पर लोग कहेंगे यह तो अभी भी एक मुद्दे पर अटका हुआ है। पिछड़ा हुआ है। कभी तरक्की नहीं करेगा। हमारे देश में एक नई बात
 
चन्दन कुमार
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भारत भ्रष्ट महान- भ्रष्टाचार भी एक कला है।

अपनी इच्छा से किसी चीज को चुनना वरदान से कम नहीं होता। सुख का मतलब है कि हम अपना चुनाव खुद कर सकें। लेकिन चुनना एक बात है, आदी हो सकना बिल्कुल दूसरी बात। हम एक जिंदगी से दूसरी जिंदगी में हमेशा गोता लगाना चाहते हैं। कभी इधर, कभी उधर, कहीं का भी नहीं, न
 
चन्दन कुमार
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निरुपमा का ट्रायल ना हो

कहते हैं, बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी। पर कुछ बातें जहाँ से शुरू होती हैं, वहीँ ख़त्म हो जाती हैं। आगे बढती है तो गलत दिशा अख्तियार कर लेती है। यही बात निरुपमा की मौत के मामले में कही जा सकती है। कहाँ तो सभी मीडिया ट्रायल की कोशिशों तक पहुँच चुके थे,
 
चन्दन कुमार
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मुबारक हो तुम्हें तुम्हारा समाज- निरुपमा की मौत

निरुपमा की मौत हमारे सभ्य समाज के चहरे पर कालिख पोत गया है। वह एक पत्रकार थी। जिसका मकसद होता है, दुनिया और समाज की बुराइयों को मिटाना। खुद फैसले लेकर निष्पक्ष रहना। पर उसने एक फैसला किया और वही उसकी मौत की वजह बन गयी। हर रोज हमारे देश में ऐसी कई निरुपमा
 
चन्दन कुमार
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जीने से पहले मरना

आज जीवन जीने वाला,कितनी बार मरता है,हर पल जीने से पहले, वह कई मर्तबा मरता हैमरने की सोचना आज नियति है, जीना बस एक झूठा सपना है,हर सपना रात के अँधेरे में,एक नयी उम्मीद जगाता है,सुबह सपना भी टूट जाता है,टूटना सपने की नियति है, ठीक उसी तरह जैसे, जीने के बीच
 
चन्दन कुमार
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नक्सली और राजनेता

कांग्रेस ने अकालियों की हवा निकालने के लिए जरनैल सिंह भिन्दरेवाला को खड़ा किया. भिन्दरेवाला वाला ने आतंकवाद को पैदा किया. इंदिरा गाँधी ने आतंकवाद के खिलाफ मोर्चा खोला. आतंकवाद ने इंदिरा गाँधी की जान ले ली. इंदिरा गाँधी की हत्या से हुई हिंसा हजारों सिखों
 
चन्दन कुमार
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शशि मोदी बनाम ललित थरूर

शशि थरूर ने जिस तरह सफलता का ग्राफ छूआ है, वह सभी को आकर्षित करता है। वह एक नौजवान और हैंडसम राजनेता हैं। कई बूढ़े नेता उनकी इस हैंडसमनेस यानी खूबसूरती पर जल-भून जाते होंगे। लेकिन अंग्रेजीदां के सत्ता वाले फॉर्मूले वह सटीक बैठते थे, इसलिए उन्हें मनमोहन
 
चन्दन कुमार
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आईपीएल से डगमगाया सरकार का इंद्रासन

शिक्षा व्यवस्था को लेकर तमाम तरह के सवाल उठते रहते हैं। पर इसकी जड़ में अहम सवाल को अक्सर अनसुना कर दिया जाता है। अभी तो आईपीएल देश की सभी समस्याओं पर इस कदर हावी है कि बाकी किसी भी मसले पर बात करना बेमानी ही है। चूंकि शिक्षा में गिरावट के लिए सरकार का
 
चन्दन कुमार
Apr 25 2010 04:54 PM
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दलित कबतक जलाएंगे अपना दिल

भारत में जब भी दलितों की चर्चा होती है, तो उनसे जुड़ी घटनाएं-दुर्घनाएं ही हमारे सामने आती है। दलित उत्थान का जिक्र जब हम करते हैं तो उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती का ही चेहरा हमारे सामने आता है। खुद को दलित प्रतिमान के तौर पर पेश करने से वह भी बाज
 
चन्दन कुमार
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बंदूक से विकास को चुनौती

प्रधानमंत्री ने आखिरकार मान ही लिया कि नक्सलवाद की वजह क्या है। उन्हें इस बात का एहसास हो ही गया कि 90 के दशक में जो उन्होंने आर्थिक उदारीकरण की नींव रखी थी, उससे अमीर पहले की अपेक्षा और अमीर और गरीब पहले से बहुत गरीब होते गए। इससे समाज का बहुसंख्यक वर्ग
 
चन्दन कुमार
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मोदी मे मिलेगी थरूर को मात

खेलों को मनोरंजन के लिए खेला जाता है। पर इस खेल पर भी राजनीतिक खेल शुरू हो चुका है। आईपीएल अपनी शुरुआत से ही दौलत का खेल बन चुका है। लेकिन अब नेताओं और फिल्मी सितारों ने इसे पैसा कमाने का पेशा बना लिया है। हम अन्य खेलों को वैसे ही भूल चुके हैं, जैसे हम
 
चन्दन कुमार
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थरूर की तीसरी शादी ! और कुंआरे का दर्द

भारतीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर को लेकर विवादों का दौर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। विपक्षी दलों ने उनको बर्खास्त करने की मांग की है। अब सुना है सरकार इस बरे में सोच भी रही है। पर वह थरूर को हटाने की नहीं, बल्कि उनके लिए एक अलग मंत्रालय बनाने की
 
चन्दन कुमार
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भारत की सबसे बड़ी समस्या

इंडियन प्रीमियर लीग का सही मैच अब शुरू हुआ है। क्रिकेट के मैदान से राजनीतिक गलियारे में अब खूब चौक-छक्के लगने लगे हैं। कल तक जो विपक्षी दल नक्सलवाद, महंगाई, गुदरात दंगों में नरेंद्र मोदी से जवाब-तलब, लिब्रहान आयोग, रंगनाथ कमीशन आदि मुद्दों को लेकर संसद
 
चन्दन कुमार
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प्राणघातक प्रण मेरा

तोड़ तो बंधनों को, अब जरा उनमुक्त रहो,छोड़कर दुनिया को अब जरा आजाद रहो,हरबार सोचकर, एकबार ये फैसला आज करो,बहुत हुआ संगी-साथी,सब साथ छुट जाते हैं, एकबार भावनाओं को शब्दों के समंदर से,जरा निकाल कर उतार फेंको,बहुत हुआ स्नेह-निमंत्रण,अब तो हो कुछ ऐसा भी,हर
 
चन्दन कुमार
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इस मातम का कोई नाम नहीं

एक गरीब ने दूसरे गरीब की हत्या कर डाली। पहला हिंसक होकर अपने शोषण का बदला लेना चाहता है। पर अब वह अपने पाक मकसद से भटक चुका है। दूसरा उसे मारना नहीं चाहता। पर हुक्म की तामील करना उसका काम है। उसी से उसकी रोजी-रोटी चलती है। नक्सलियों ने जो दंतेवाड़ा में
 
चन्दन कुमार
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जेल में सेक्स का अधिकार

यूँ तो मनवाधिकार के दायरे में सभी आते हैं। चाहे वह भले ही सजायाफ्ता मुजरिम हो या जेल में ही क़ैद कोई अपराधी। ऐसे में सवाल उठता है कि मानवाधिकार के नाम पर किसी कैदी को किस हद तक आज़ादी दी जा सकती है। जेल में बंद एक कैदी ने अपनी पत्नी के साथ शारीरिक सम्बन्ध
 
चन्दन कुमार
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गर्मी में पानी का दर्द

भवरां तोरा पानी ग़जब कर जाए। गगरी न फूटे भले खसम (पति) मर जाए।।ये पंक्तियां मेरी नहीं हैं। पर इसकी समस्या मेरी जरूर है। बहुत पहले की बात है, चित्रकूट-बुंदेलखंड और पानी की समस्या पर एक रिपोर्ट देख रहा था या शायद अखबार में खबर पढ़ी थी। तभी से मुझे याद है
 
चन्दन कुमार
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नक्सलियों का तांडव और सरकारी मुआवजा

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों की कारस्तानी सभी ने देखी। देश के 76 सपूत शहीद हो गए। ऐसी वारदात के बाद इनके परिजनों के लिए सरकार मुआवजे की घोषणा जरूर करती है। एक तरह से मरे हुए लोगों की कीमत तय करती है। यानी मुर्दे की कीमत भी हमारे यहां ही तय होती
 
चन्दन कुमार