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कर्मवीर

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08 Mar 2010
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होली है !!!

 
अर्चना तिवारी
Mar 01 2010 02:56 PM
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'कर्मवीर'

आया महीना माघ और पूसआग भी तापे हरदम फूसकोहरा ओढ़े सूरज निकलेनिकली सलाई और ऊन के गोलेसर्द हवाओं ने ली सब ऊर्जा चूसआया महीना माघ और पूसजब तापमान का पारा गिरताब्लोवर हीटर सब लग जातानहाने में मन करे आना-कानीनल का देख के ठंडा पानीलगे जवानी अब गई रूसआया महीना
 
अर्चना तिवारी
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वसंत आया

शीत विदा कर धरती झूमी लो वसंत आयानव श्रृंगार रूप का प्रकृति सुंदरी ने करवायाउतार फेंकी धुंधली चादर भोर ने कोहरे कीओढ़ लिए सुनहले पर सूरज के किरणों कीउमंग लिए धरती की दुल्हन ने ली अंगड़ाईप्रेम गीत से भ्रमरों ने नव कलियाँ चटकाईदृग भरे बलखाती आमों की बौराई
 
अर्चना तिवारी
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नया सवेरा

नव वर्ष का नया सवेरा आयासंग अपने नयी खुशियाँ लायासूरज की किरने पड़ीं हर कोनेदिशाओं ने रुपहले चूनर ओढ़ेधरती ने ली गहरी अंगड़ाईहवाओं ने मस्त ख़ुशबू बिखराईनव कोपलों से बलखाती शाखों के तनगुंजित हो उठे पंछियों के कलरव से वनचहक रहा मन महक रहा मननए विहान का जब
 
अर्चना तिवारी
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पर्यावरण-

कराह रही है धरती अपनी तड़प रहा है जन - जीवन लुट गई हरियाली जिसकी काट दिए वन - उपवन छीन लिए जिसके सुन्दर आवरण खतरे में पड़ गया उसका पर्यावरण छाती थी घटाओं की परत तब तार - तार हुए ओज़ोन परत अब बनते थे जिसपे हरित गृह बन गई वह स्वयं हरित का गृह पिघल रहे है
 
अर्चना तिवारी
Dec 29 2009 11:56 AM
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तुलना

खिला फूल मदार का एक मंदिर में हुई गुलाब से भेंट बोला मदार गुलाब से नेक होता तुमसे है अभिषेक राजा हो या देवता अनेक माली भी तुमको रखता है सहेज तुमसे करें प्रदर्शन अपना प्रेम प्रेमी युगल हों या दोस्त विशेष महके चमन तुमसे हर एक गुलाब तुम हो अति विशेष नही
 
अर्चना तिवारी
Dec 29 2009 11:56 AM
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छाँव

विशाल पीपल की छाँव देती है सबको ठाँव खड़ा रहता है धूप में सदा अटल रूप में सदा रहती है जीवन की लहर कोमल पत्तियों में ठहर रहती है शाखों पे उमंग हवाओं से पाकर तरंग देती है जीवन की आशा दूर करके सबकी निराशा पाते हैं नीचे इसके ज्ञान ध्यान अंतर्मन
 
अर्चना तिवारी
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अकेलापन....

आकाश ने कहा एक दिन धरती पे उगे नन्हे पौधे से गर होता मैं भी धरती पे तो होता करीब अपनों के यहाँ रहता हूँ अकेले तुम खुश किस्मत हो पौधे ने कहा आकाश से ग़म न करो अपने अकेलेपन पे जो होतें हैं दूर अपनों से देते हैं छाया सबको वो नहीं अकेले इस जहाँ में होता
 
अर्चना तिवारी
Dec 29 2009 11:56 AM
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'कर्मवीर'

कहती हैं लम्बी सूनसान राहें हर पल राहों पे आते - जाते दिखाती हूँ भटकते मुसाफिरों को मंजिल का रास्ता करके खुद की गुमराह राहें कहती हैं लम्बी ..... साथ देती हूँ राही का हर मोड़ पे पर वो भूल जातें हैं खुद की मंजिलों को पा के कहती हैं लम्बी ..... शिकवा न
 
अर्चना तिवारी
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प्रौढ़ बचपन

आते -जाते रास्ते पर मैंने देखा नन्हा सा एक प्रौढ़ बचपन नही था उसके जीवन में माता-पिता का प्यार -दुलार उठा रखा था उसने हाथों में अपने ही जैसा इक बचपन सिखा दिया था जीना उसको साल चार के इस जीवन में जूझ रहा था पर हिम्मत से लिए जिम्मेदारियों का बोझ स्वयं
 
अर्चना तिवारी
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पुकार

रे मानव ! उठ जाग निद्रा से देख कराह रही ये धरा तेरी पुकार रही ये माँ तेरी उठ जा अब तो ओ मेरे लाल-नंदन घायल करते लूटते इसका यौवन चुन रहे पत्थरों में इसके सुंदर, विशाल और कोमल तन उसके हरियाले वसन का करते चीर-हरण कुछ दुःशासन -दुर्योधन जो करते नाश इस धरन
 
अर्चना तिवारी
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लक्ष्य

मैंने देखा सुबह-सुबह अपनी नन्ही सी बगिया में नन्हें से पौधे पर एक नन्हा सा फूल मुस्कुराता समां रखा था अपने अन्दर अनेक रंग, खुशियाँ और मुस्कान नन्हें जीवन-काल में भी गम न था मिट जाने का वह नन्हा सा कोमल सिखा रहा था हमें रखना लक्ष्य जीवन का बिखेरना मुस
 
अर्चना तिवारी
Dec 29 2009 11:56 AM
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हाय रे! हिन्दी.... अपने देश में हमारी राष्ट्र-भाषा का जो हाल देखा तो मेरा अंतर्मन रो पड़ा अपनी उसी भावना को मैं यहाँ व्यक्त कर रही हूँ

हाय रे ! हिंदी तू अपनों में ही पराई हुई ...... तेरे देश में तेरे ही अपने तुझे बोलने पर शर्माते हैं तुझे बोलने पर तेरे अपनों पर जुर्माना लगता है तेरे नौनिहाल तुझे बोलने पर अपराधी बनते हैं तुझे बोलने वाले जीविका के लिए भटकते हैं क्यों किया तुझे पराया अ
 
अर्चना तिवारी
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तू अजब वसुंधरा है

नई नवेली तू अजब वसुंधरा हैतेरे रूप में सौंदर्य बिखरा पड़ा हैमाथे पे सूरज की बिंदिया सजालीगालों पर उषा की लाली लगालीनीला आसमानी आँचल उड़ा हैतेरे रूप में सौंदर्य बिखरा पड़ा हैपंछियों के कलरव सी पायल है बोलीचली कहाँ तू ओ सुन्दर सलोनीघाघरे में धानी रत्नाकर
 
अर्चना तिवारी
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प्रौढ़ बचपन

रास्ते पर मैंने देखा नन्हा सा एक प्रौढ़ बचपन नहीं था उसके जीवन में माता - पिता का प्यार - दुलार उठा रखा था उसने हाथों में अपने ही जैसा इक बचपन साल चार के इस जीवन में सिखा दिया था जीना उसको जूझ रहा था पर हिम्मत से लिए जिम्मेदारियों का बोझ स्वयं नहीं थ
 
अर्चना तिवारी
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तुलना

खिला फूल मदार का एक मंदिर में हुई गुलाब से भेंट बोला मदार गुलाब से नेक होता तुमसे है अभिषेक राजा हो या देवता अनेक माली भी तुमको रखता है सहेज करें प्रदर्शन अपना प्रेम प्रेमी युगल हों या दोस्त विशेष महके चमन तुमसे हर एक गुलाब तुम हो अति विशेष नहीं ठिका
 
अर्चना तिवारी
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चर्चा टिप्पणियों की

आज - कल ब्लॉग में टिप्पणियों को लेकर काफी चर्चा है । लोग किसी के ब्लॉग में टिप्पणी करने से हिचक रहे हैं ऐसा मैंने कई लोगों को कहते हुए अर्थात् लिखते हुए देखा है । अधिकतर लोगों ने अपनी टिप्पणी वाले खाने को ब्लोक कर रखा है । मैंने कई लोगों को टिप्पणी ल
 
अर्चना तिवारी
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सावन के सुर मधुर सुन ..

अभी सावन आनें में चार दिन बाकी हैं , परन्तु जब वर्षा ऋतु आती है तो सावन के झूलों की याद बरबस हो आती है , सारा आलम मस्ती में गुनगुनानें लगता है ..................................... आया मस्त मतवाला सावन फुहारों की रिमझिम बूंदों की गुन गुन बरखा के सुर
 
अर्चना तिवारी
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कहै घाघ सुन घाघनी....

जून का महीना आते ही सभी की नजरें आसमान को ताकने लगती हैं । जेठ की चिलमिलाती धूप , लू और गर्मी से त्रस्त हो गए लोगों को रिमझिम की फुहार लेकर आती बरखा रानी का इंतज़ार रहता है कि वह कब आएगी और हमें अपनें आर्द्र सुख से सराबोर करेगी । समाचार - पत्रों , टीव
 
अर्चना तिवारी
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पहली बारिश.....

बरखा के मौसम में जब बादल घिर - घिर आता है ठंडी हवाओं के झोंकों से आँचल उड़ - उड़ जाता है नन्हीं चंचल बूंदों का जब धरती पर रेला आता है तन निर्मल धारों को पकड़ आसमान चढ़ जाता है आसमान में रंगों का जब सतरंगी मेला आता है इन्द्रधनुष के झूलों में चढ़ मन ऊँचे
 
अर्चना तिवारी
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बाल गीत....बीते दिन छुट्टी के अब.....

बीते दिन छुट्टी के अब खुल गए स्कूल बीते दिन मस्ती के अब सुस्ती जाओ भूल देर से उठना खूब खेलना दोस्तों के संग पार्क में जाना तितली के संग दौड़ लगाना अब तो जाओ भूल बीते दिन छुट्टी के अब खुल गए स्कूल दिन भर घर में उधम मचाना भइया के संग टीवी देखना पापा के
 
अर्चना तिवारी
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युवाओं में बढ़ती तनावग्रस्तता....एक और आई.आई.टी. के छात्र ने अपनी इहलीला समाप्त की

जी हाँ अभी हाल ही आई . आई . टी . खड़गपुर के बी . टेक . प्रथम वर्ष के छात्र ने अपनी इहलीला समाप्त कर ली। पिछले कुछ वर्षों से इस तरह की घटनाएँ आए दिन हो रही हैं। क्यूँ हो रहा है ऐसा ? क्या हमने कभी सोंचा है की आज का युवा वर्ग इतना कुंठाग्रस्त क्यूँ हो
 
अर्चना तिवारी
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हे मेघों के देव प्रसन्न हो...अहमदाबाद में वर्षा लाने के लिए 'पांचजन्य यज्ञ'

गत रविवार १४ जून को अहमदाबाद में लोगों ने वर्षा लाने के लिए मेघों के देव 'इन्द्र देव' को प्रसन्न करने के लिए 'पांचजन्य यज्ञ' किया| बड़ा आश्चर्य होता है कि आज भारत के उन्नत एवं विज्ञान से प्रभावित समाज में जहाँ हम अपने को आधुनिक कहते हैं, जहाँ आज चाँद
 
अर्चना तिवारी