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अचपन.. पचपन बचपन

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31 Dec 2009
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मैंने एक अज़ीब सपना देखा

जब तक तुम लोग कुछ लिखने का मन पक्का करो, मैं तुम सबसे, खास तौर पर तन्मय से एक सपना शेयर करना चाहता हूँ। कल की रात तन्मय के बारे में सोचते सोचते सोया था, हो सकता है कि यह सपना इसी वजह से आया हो । तुमको जानकर पता नहीं कैसा लगेगा कि मैं  इतने कम..
 
डा. अमर कुमार
Dec 29 2009 11:59 AM
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पर यह तो बताइये कि ....इससे फ़ायदा ही क्या होगा ?

अरे भाई, मैं तो आज डरते डरते आया था कि कहीं कोई नाराज़ न बैठा हो, कि आप तो अच्छे गायब हो गये अचपन जी ? तो, मैं क्या ज़वाब दूँगा ? लेकिन यहाँ सब ठीकठाक ही लग रहा है । और फिर नाराज़ तो मुझे होना चाहिये था, बताओ क्यों ? क्योंकि अबतक केवल, हाँ जी हाँ केवल 6
 
डा. अमर कुमार
Dec 29 2009 11:59 AM
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उनके 98 % और मज़े तुम्हारे, वाह !

सुना है कि कल तो तुम लोगों के मज़े आ गये ! शान्तनु भईया के ICSC रिज़ल्ट में 98 % मार्क्स आये हैं, ईषिता बुआ ने भी 92 % बटोर लिये । ठीक तो है, देखा नहीं था लात लात में पल्हते ही लहेते त्थे । यह कौन बोला ? अच्छा तो छटंकी बिट्टू जी हैं ! लेकिन फँस गये माम
 
डा. अमर कुमार
Dec 29 2009 11:59 AM
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कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

तुम क्या कहते हो ? क्या यह सच नहीं है , तो फिर ? मुझे ऎसे बच्चे भी मिलते है, जो कहते हैं कि अंकल , मैं जैसे तैसे हिन्दी तो बोल लेता हूँ लेकिन लिख तो पाता ही नहीं, बड़ी मुश्किल है, यह हिन्दी । एक बात बताओ, तुम्हारे मम्मी पापा की कोई इन्सल्ट करे तो तुम्
 
डा. अमर कुमार
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आप गायब कहाँ हो गये थे

अरे भाई क्या बतायें ? कल तन्मय जी की मम्मी आयीं थीं, तन्मय को 6 दिन से बुखार आ रहा है, कल सुबह तो उसका फ़ीवर इतना तेज हो गया था कि वह जैसे बेहोश सा हो गया । आँख बन्द किये किये बड़बड़ाये जा रहा था कि, “ अचपन जी को फोन करिये.. अचपन जी अब क्यों नहीं आते..
 
डा. अमर कुमार
Dec 29 2009 11:59 AM
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सचिन के सैकड़े

थोड़ी मस्ती हो जाये ? ठीक, तो सचिन बास कैसे रहेंगे आज के लिये ? एग्रीड ? लेकिन मुझे तो क्लिनिक जाने की देर हो रही है । आज चलो एक छोटा सा मज़ा करते हैं, टूनडून से । थोड़ा कोशिश करोगे तो तुम भी कर पाओगे । देखो, है ना मज़ेदार !      
 
डा. अमर कुमार
Dec 29 2009 11:59 AM
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यह दिल क्यों माँगे मोर ?

हद हो गयी, मैंने बोला नहीं कि सभी जन समझ गये कि बात कोल्ड ड्रिंक की हो रही है ! तुमलोग तो बहुत ही इन्टेलिज़ेंट हो । चलो अच्छा है, मुझको अपनी बात ज़्यादा समझाना नहीं पड़ेगा । तुम सब को तो कल शाम की बिट्टू की हरकत याद है ना । उसने मुझे हराने की कितनी कोशि
 
डा. अमर कुमार
Dec 29 2009 11:59 AM
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तो.. आज लग जाये एक शर्त ?

आज कुछ ज़्यादा लिख कर तुम्हें परेशान नहीं करूँगा । भई, आज  तो  बाल-दिवस  है, बोले  तो  हैप्पी चिल्ड्रेन्स डे !  बोलो है ना, क्योंकि तुम्हारे स्कूलों में आज खूब गाने वाने, डाँस, फ़ैन्सी ड्रेस  वगैरह हुआ होगा ?  तु
 
डा. अमर कुमार
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पिंगपिंग की अनोखी सहेली

हुआ यह कि एक दिन जया की शैतानियों पर मुझे प्यार आ गया, " देखो तो छटँकी कैसी हरकतें कर रही है ? " निखिल को मौज़ आ गयी, " छटँकी क्यों कहा, अँकल ?"  मैं उनको इस विषय पर शह नहीं देना चाहता था, सो टाल गया, " देखो फ़िफ़्थ में पहुँच
 
डा. अमर कुमार
Sep 07 2009 01:33 AM
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चाहे जान भले ही जाये ट्रेंरें रें... रें

चाहे जान भले ही जाये ट्रेंरें रें... रें, रेंट्रेंयाँ ! यह कल की बात है । यानि 22 जुलाई बुधवार " चाहे जान भले ही जाये ट्रेंरें रें रें... " रिशि जी के यह नारा लगाने का सिलसिला लगातार कुछ देर से चल रहा था । इधर मैं मजदूरों को कल का काम समझा रहा
 
डा. अमर कुमार
Jul 24 2009 12:08 PM
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काल-कलौटी..

निखिल भैआ, आ गये अचपन जी ? " कुछ सुनी-सुनी सी आवाज है, मैं सतर्क होता हूँ । दुबारा से " निखिल भैआ, आ गये अचपन जी ? " एक बार फिर दोहराया गया । अरे, ये तो अपना वैभव है, बहुत दिन बाद इनकी आवाज़ सुन रहा हूं । " नहीं बेटा, देखो शायद आज
 
डा. अमर कुमार
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पहली डिज़िटल घड़ी

आज 3 जनवरी है... कोई नई बात... नहीं ?     रुको जरा, मैं बताता हूँ । यह जो तुम अपने ड्राइंग-रूम में टँगी हुई घड़ी देख रहे हो.. और तन्मय जी, अपने हाथ पर बाँधें घूम रहे हैं.... यह डिज़िटल घड़ी आज के ही दिन लांच हुई  थी ! यह जानकारी मुझको रिश
 
डा. अमर कुमार
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亜 … ये लोग बम क्यों फुटाते हैं ?

इन दिनों इधर आना ही नहीं हुआ, कुछ काम भी था… और फिर तुम बच्चों का एक नया ग्रुप बन गया है, तो मैं भी डिस्टर्ब नहीं करता ! तुमलोग भी कभी कभी कुछ ऎसा पूछ लेते हो, कि मुझसे ज़वाब देते नहीं बनता, पर करें क्या.. तन्मय जी भी गुस्सा हो जाते हैं , लड़ने लगते है
 
डा. अमर कुमार