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पहेलियाँ-8
1. कहलाता तो हूँ मैं चूल्हा,पर अजब है मेरा रूप।तेल, गैस न लकड़ी माँगूँ,मुझे तो चाहिए धूप।2. अंत कटे तो चाव बनूं,मध्य कटे तो चाल।तीन अक्षर का अन्न हूँ,खाओ मुझे उबाल।3. चलती खूब है कच्चे राह पर,लकड़ी की वह गाड़ी।चार पाँव का इंजन उसका,चलता सदा अगाड़ी।4.
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Jun 13 2010 05:31 AM


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